Class 9 Hindi Chapter 8 Zindagi Ki Badi Zarurat Hai Haar Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Hindi Lokvani Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..! Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 9 Hindi Chapter 8 Zindagi Ki Badi Zarurat Hai Haar Question Answer Maharashtra Board

Hindi Lokvani 9th Digest Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..! Questions And Answers

1. आकृति पूर्ण कीजिए।

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..! 1

2. सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखिए।

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखिए।
i. कवि ने इसे पार करने के लिए कहा है – (नदी, पर्वत, सागर)
ii. कवि ने इसे अपनाने के लिए कहा है – (अंधेरे, उजाला, सबेरा)
उत्तर:
i. कवि ने पर्वत को पार करने के लिए कहा है।
ii. कवि ने अंधेरे को अपनाने के लिए कहा है।

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3. ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द

प्रश्न 1.
ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द

  1. जीत का आनंद मिलेगा
  2. बहार
  3. गुरु

उत्तर:

  1. हार की पौड़ा सहने पर क्या मिलेगा?
  2. पतझड़ के बाद कौन मजा देती है?
  3. कवि के अनुसार हार मनुष्य के लिए क्या है?

4. अंतिम पाँच पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। 

प्रश्न 1.
अंतिम पाँच पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
उत्तर:
कवि करते हैं कि उस प्रत्येक हार का आभार प्रकट करो, जिसने आपके जीवन को सजा दिया। आपके जीवन में जब-जब हर आई, हर बार वह कुछ न कुछ सिखाकर गई। हार आपकी सबसे बड़ी गुरु है। इसलिए हार जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत है।

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5. संभाषणीय :

प्रश्न 1.
पाठ्येतर किसी कविता की उचित आरोह-अवरोह के साथ भावपूर्ण प्रस्तुति कीजिए।
उत्तर :
मेरा माझी मुझसे कहता रहता था
बिना बात तुम नहीं किसी से टकराना।

पर जो बार-बार बाधा बन कर आएँ
उनके सिर को वहीं कुचल कर बढ़ जाना।

जान-बूझ कर मेरे पथ में आती हैं
भवसागर की चलती-फिरती चट्टानें।

मैं इनसे जितना ही बचकर चलता हूँ
उतना ही मिलती हैं ये ग्रीवा ताने।

रख अपनी पतवार, कुदाली लेकर मैं
तब मैं इनका उन्नत भाल झुकाता हूँ।
राह बनाकर नाव बढ़ाए जाता हूँ।

जीवन की नैया का चतुर खिवैया मैं
भवसागर में नाव बढ़ाए जाता हूँ।

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6. भाषा बिंदु :

प्रश्न 1.
“निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए।
उत्तर:

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
1. वृक्षों का छाया से रहे परे। 1. वृक्षों की छाया से रहो परे।
2. पतक्षड़ के बाद मजा देता है 2. पतझड़ के बाद मजा देती है बार।
3. फूल के रास्ते को मत अपनाओ। 3. फूलों के रास्तों को मत अपनाओ।
4. किनारों से पहले मिला मझधार। 4. किनारों से पहले मिले मझधार।
5. बरसाओं मेहनत का बूंदों की फुहार। 5. बरसाओ मेहनत की बूंदों का फुहार।
6. जिसने जीवन का दिया संवार। 6. जिसने जीवन को दिया सँवार।

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7. रचनात्मकता की ओर कल्पना पल्लवन

प्रश्न 1.
करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’ इस विषय पर भाषाई सौंदर्यवाले वाक्यों, सुवचन, दोहे आदि का उपयोग करके निबंध/ कहानी लिखिए।
उत्तर:
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात तें, सिल पर परत निसान।।
हिंदी के रीतिकालीन प्रसिद्ध कवि वृंद की यह प्रसिद्ध पंक्ति हमें कर्म के प्रति प्रेरित करती है। कवि ने पूर्ण आत्मविश्वास के साथ अपना मत प्रकट करते हुए कहा है कि कोमल रस्सी के बार-बार आने-जाने से सिल अर्थात पत्थर भी घिस जाता है। उसी प्रकार निरंतर अभ्यास करते रहने के कारण जड़-बुद्धि व्यक्ति भी बुद्धिमान बन जाता है, वह अपने मंजिल को प्राप्त कर लेता है। निरंतर परिश्रम एवं अभ्यास से असंभव कार्य भी संभव हो जाया करते हैं। असफलता भी सफलता बन जाती है।

एक साधक और योगी निरंतर योग का अभ्यास करके परम तत्त्व का दर्शन कर लेता है। अतः एव लगनपूर्वक निरंतर अभ्यास करने वाला सामान्य व्यक्ति भी सफलता के दर्शन कर लेता है। इतिहास इस बात का गवाह है कि निरंतर अभ्यास करने वाले ही सफलता के उन शिखरों पर पहुंच सके हैं, जो अत्यंत विषम एवं कठिन थे। इसी कारण उनके सम्मुख आज भी दुनिया नतमस्तक हो रही है।

अभ्यास करना एक साधना है और सच्चे मन से की गई साधना कभी व्यर्थ नहीं होती है। निराशा को कभी भी मन में नहीं आने देना चाहिए। अभ्यास ही सौढ़ी-दर-सीढ़ी उस शिखर तक ले जाता है जिसकी सुंदर चौटियाँ बार-बार मन को आकर्षित करके वहाँ तक चले आने के लिए आमंत्रित करती हैं। निश्चित मंजिल तक पक्के निश्चय के साथ बढ़ते ही जाना है। रुकने का अर्थ है अंत, जो कि मृत्यु का प्रतीक है और जीवन का अर्थ है ‘चरैवेतिचरैवेति’ अर्थात निरंतर चलते रहना, गतिशील रहना। इसके लिए आवश्यक है सतत अभ्यास तथा आलस्य और प्रमाद का त्याग।

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8. पाठ के आँगन में

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
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प्रश्न 2.
‘हर बार कुछ सिखा कर ही गई, सबसे बड़ी गुरु है हार इस पंक्ति द्वारा आपने जाना……………
उत्तर :
इस पंक्ति द्वारा हमने यह जाना कि जब-जब हार हुई उस हार ने अपने पीछे कुछ-न-कुछ सीख जरूर छोड़ी। वह हार क्यों और किन कारणों से हुई, इसे जानने और समझने का मौका मिला। उस झर से प्रेरित होकर ही आगे की सफलता का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसलिए हार सबसे बड़ी गुरु है।

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प्रश्न 3.
कविता के दूसरे चरण का भावार्थ लिखिए।
उत्तर :
कवि संघर्षशील जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जीवन में फूलभरे (सरल) रास्ते को मत अपनाओ और वृक्षों की छाया से दूर रहो अर्थात हर प्रकार की मुश्किलों का डटकर सामना करो। काँटों से भरे हुए रास्ते पर चलोगे तो ये रास्ते तुम्हें निडर बनाएँगे और तपती हुई धूप तुम्हें और निखार देगी। यदि कंटक भरे रास्ते और धूप से तुम हर भी गए तो कोई बात नहीं जीतने के लिए जिंदगी में हारना भी बहुत जरूरी है।

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..! Additional Important Questions and Answers

(क) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति क (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..! 3

प्रश्न 2.
ऐसे प्रश्न नैवार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द
i. फूलों के रास्ते
ii. वृक्षों को छाया
उत्तर :
i. कवि किस रास्ते को अपनाने के लिए मना कर रहे है?
ii. कवि किससे परे रहने का संदेश दे रहे हैं?

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प्रश्न 3.
चौखट पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
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कृति क (2) : सरल अर्थ

प्रश्न 1.
नीचे दी हुई पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
फूलों के रास्तों को मत अपनाओ,
और वृक्षों की छाया से रहो परे।
रास्ते काँटों के बनाएंगे निडर
और तपती धूपी लाएगी निखार।।
जिंदगी की बड़ी जरूरत है हर….!
उत्तर:
कवि संघर्षशील जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहते है कि जीवन में फूलभरे (सरल) रास्ते को मत अपनाओ और वृक्षों की अया से दूर रहो अर्थात हर प्रकार की मुश्किलों का डटकर सामना करो। काँटों से भरे हुए रास्ते पर चलोगे तो ये रास्ते तुम्हें निडर बनाएँगे और तपती हुई धूप तुम्हें और निखार देगी। यदि कंटक भरे रास्ते और धूप से तुम हार भी गए तो कोई बात नहीं। जीतने के लिए जिंदगी में हारना भी बहुत जरूरी है।

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(ख) पद्यांश घड़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ख (2) : सरल अर्थ

प्रश्न 1.
प्रथम पाँच पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
उत्तर:
कवि कहते हैं सीधे और सरल रास्ते पर तो कोई भी चल सकता है लेकिन तुम पर्वत को पार करके तो देखो। तुम्हरे उत्साह में ऐसी शक्ति आएगी कि तुम किस्मत (भाग्य) का हर प्रहार सह लोगे। यदि तुम पर्वत को पार करने में असफल भी रहे तो कोई बात नहीं क्योंकि जिंदगी में हार की भी बहुत जरूरत है। हारने के बाद तुम फिर नई सौख और नई ऊर्जा के साथ पर्वत को पार कर लोगे।

(ग) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ग (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
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जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..! Summary in Hindi

कवि-परिचय :

जीवन परिचय : श्री महकी जी का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ। ये इंजीनियरिंग कॉलेज में सहप्राध्यापक हैं। हिंदी और मराठी भाषा के प्रति इनका गहरा लगाव है।
प्रमुख कृतियाँ : गीत और कविताएँ, शोध निबंध आदि।

पद्य-परिचय :

संवादात्मक कहानीः ‘नवनीत’ हिंदी काव्य-धारा की यह एक नवीन विधा है। ‘नवगीत’ एक यौगिक शब्द है जिसमें नव (नई कविता) और गीत (गीत विधा) का समावेश होता है।
प्रस्तावना : प्रस्तुत कविता ‘जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार के माध्यम से कवि महकी जी ने यह बताने का प्रयत्न किया है कि जीवन में कभी भी हार एवं असफलता से घबराना नहीं चाहिए बल्कि हर से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..!

सारांश :

कवि कहते हैं कि हमें हार से कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। ये हार हमें और उन्नत बना देती है। हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सतत संघर्ष करते रहना चाहिए। जिंदगी में मुसीबतों से गुजरना पड़ता है, काँटो भरी राह पर चलना पड़ता है, ऊँचेऊँचे पर्वतों को पार करना पड़ता है। इनका सामना करते समय कभी-कभी हम हार भी जाते हैं तो कोई बात नहीं। हमें दुबारा फिर प्रयास करना चाहिए और अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहिए। हर हमारी सबसे बड़ी गुरु है। उसका आभार प्रकट करना चाहिए क्योंकि ये हर हमारे जीवन का संवार देती है।

सरल अर्थ :

रुला तो …………………………… जरूरत है हार…!
कवि कहते हैं कि जीवन में किसी भी घर से घबराना नहीं चाहिए बल्कि हटकर उसका सामना करना चाहिए। हर हमें हमेशा रुलाती तो है परंतु अंदर से उन्नत बना देती है अर्थात अमली जीत के लिए और अधिक सतर्क और तैयार कर देती है। किनारा मिलने से पहले हमें मझधार की तेज लहरों का सामना करना चाहिए यानी जीवन की कठिनाइयों एवं मुश्किलों से संघर्ष कर मंजिल हसिल करनी चाहिए। यदि मंजिल प्राप्त करते समय हर हो जाए तो कोई बात नहीं क्योंकि जिंदगी के लिए बार भी बहुत जरूरी है।

फूलों के …………………………. जरूरत है हार …!
कवि संघर्षशील जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जीवन में फूलभरे (सरल) रास्ते को मत अपनाओ और वृक्षों की छाया से दूर रहे अर्थात हर प्रकार की मुश्किलों का डटकर सामना करो। काँटों से भरे हुए रास्ते पर चलोगे तो ये रास्ते तुम्हें निडर बनाएंगे और तपती हुई धूप तुममें और निखार देगी। यदि कंटक भरे रास्ते और धूप से तुम हार भी गए तो कोई बात नहीं । जीतने के लिए जिंदगी में झरना भी बहुत जरूरी है।

सरल राह…………………………… जरूरत है हार …!
कवि कहते हैं सीधे और सरल रास्ते पर तो कोई भी चल सकता है लेकिन तुम पर्वत को पार करके तो देखो। तुम्हारे उत्साह में ऐसी शक्ति आएगी कि तुम किस्मत (भाग्य) का हर प्रहार सह लोगे। यदि तुम पर्वत को पार करने में असफल भी रहे तो कोई बात नहीं क्योंकि जिंदगी में हार की भी बहुत जरूरत है। हारने के बाद तुम फिर नई सीख और नई ऊर्जा के साथ पर्वत को पार कर लोगे।

उजालों की ………………………… जरूरत है हार …!
कवि कहते हैं कि हर व्यक्ति अपने जीवन में उजाला चाहता है। जीवन में उजाले की उम्मीद करना भी उचित ही है परंतु एक बार अंधेरे को भी तो अपनाओ। उपजाऊ जमीन हो और पानी की उचित व्यवस्था हो तो फसल आसानी से उगाई जा सकती है। परंतु एक बार बिना पानी के बंजर जमीन पर परिश्रम करके अपने पसीने की फुहारें (द) बरसा कर तो देखो। यदि फसल नहीं उगी तो कोई बात नहीं। जिंदगी में हारना भी जरूरी है। इस हार के बाद नए तजुर्बे और उमंग के बल पर तुम पुन: नई फसल उगा लोगे।

जीत का…………………………….. जरूरत है हार …!
कवि कहते हैं कि हर जीत का आनंद भी तभी मिलेगा जब तुम हार के अपार दुखों को सहे रहोगे क्योंकि हर आँसू और दुख के बाद आने वाली मुस्कान चारों तरफ फैल जाती है और पतझड़ के बाद आने वाली वसंत आनंद दाई होती है। इसलिए जिंदगी में हार बहुत जरूरी है क्योंकि हार के बाद मिलने वाली जीत बहुत ही आनंद देने वाली होती है।

आभार प्रकट …………………………… जरूरत है हार …!
कवि कहते हैं कि उस प्रत्येक हार का आभार प्रकट करो, जिसने आपके जीवन को सजा दिया। आपके जीवन में जब-जब हार आई, हर बार वह कुछ न कुछ सिखाकर गई। घर आपकी सबसे बड़ी गुरु है। इसलिए सर जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत है।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 8 जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार..!

शब्दार्थ :

  1. बुलंद – ऊँचा, उन्नत
  2. मझधार – धारा के बीच में
  3. परे – दूर
  4. निडर – निर्भय
  5. निखार – चमक
  6. हौसला – उत्कंठा, उत्साह
  7. तकदीर – भाग्य
  8. जायज – उचित
  9. बंजर – ऊसर, अनुपजाऊ
  10. फुहार – हल्की बौछार, वर्षा
  11. अपार – असीमित
  12. मज़ा – आनंद
  13. बहार – बसंत
  14. आभार – एहसान
  15. संवारना – सजाना

Hindi Lokvani 9th Std Digest पहली इकाई

Class 9 Hindi Chapter 5 Juliya Question Answer Maharashtra Board

Std 9 Hindi Chapter 5 Juliya Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Lokbharti Chapter 5 जूलिया Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 5 जूलिया Questions And Answers

Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 5 जूलिया Textbook Questions and Answers

लेखनीय :

प्रश्न 1.
छोटे व्यवसायियों के साथ दिए गए मुद्दों के आधार पर वार्तालाप कीजिए और संवाद के रूप में लिखिए।
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 1
उत्तरः

  • रमेश – नमस्कार ! मोहनलाल जी कैसे हैं? बड़े दिनों बाद मुलाकात हुईं। अभी आप कौन-सा व्यवसाय कर रहे हैं?
  • मोहनलाल – नमस्कार रमेश! मैं अच्छा हूँ। अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने अगरबत्ती-उद्योग की शुरुआत की है।
  • रमेश – मोहनलाल जी! इतने सारे व्यवसाय के होते आपने इस व्यवसाय का चुनाव क्यों किया?
  • मोहनलाल – रमेश, इस व्यवसाय को चुनने का मुख्य कारण है इसमें लागत कम लगती है और लाभ ज्यादा होता है। इसके लिए ज्यादा जगह की भी आवश्यकता नहीं होती है तथा सरकार की तरफ से आसान शर्तों में कर्ज मिलने की भी सुविधा है। अगर आप छोटे स्तर पर शुरूआत करना चाहते हैं तो आप अपने घर से भी इस व्यापार की शुरूआत कर सकते है। सिर्फ व्यापार की शुरूआत करने से पहले आपको व्यापार का रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है।
  • रमेश – इसके लिए आपको दिन में कितना समय देना पड़ता है?
  • मोहनलाल – रमेश इसके लिए मुझे ज्यादा समय की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि मैंने अपने घर से इसकी शुरूआत की है। इससे मुझे दो फायदे हुए कि मैं अपने परिवार के साथ भी समय बिता सकता हूँ और साथ-ही-साथ मेरा व्यापार भी चलता रहता है।
  • रमेश – मोहनलाल जी, क्या आपको इस व्यापार से आनंद मिल रहा है?
  • मोहनलाल – बिल्कुल रमेश, मुझे बहुत खुशी है कि मैंने इस उद्योग को अपनाया। कमाई के साथ-ही-साथ मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है कि मेरे कारण कुछ लोगों को रोजगार मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अगरबत्ती की भारी माँग है। इसलिए मुझे इस कार्य से बहुत ही आनंद का अनुभव हो रहा है।
  • रमेश – मोहनलाल जी, इतनी सारी महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! अच्छा चलता हूँ नमस्कार।
  • मोहनलाल – नमस्कार रमेश।

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श्रवणीय :

प्रश्न 1.
दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले ‘हास्य कवि सम्मेलन’ की कविताएँ सुनिए और किसी एक कविता का आशय अपने मित्रों को सुनाइए।

आसपास :

प्रश्न 1.
घरेलू काम करने वाले लोगों की समस्याओं की सूची बनाइए।

पठनीय :

प्रश्न 1.
किसी अन्य पाठ्यपुस्तक से एकांकी पढ़िए ।

मौलिक सृजन :

प्रश्न 1.
जूलिया की जगह आप होते तो …….. विषय पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः
प्रस्तुत पाठ में लेखक ने जूलिया की पात्रता को जिस प्रकार दर्शाया है, उससे यह ज्ञात होता है कि वह एक सीधी-साधी और डरपोक महिला है; जो अन्याय को भी सहन कर लेती है। अगर उसकी जगह मैं होता, तो यह अन्याय कभी-भी सहन नहीं करता। क्योंकि अन्याय को सहन करना भी एक प्रकार का अपराध है। अगर मैंने परिश्रम किया है, तो उसका उचित पारिश्रमिक मुझे मिलना ही चाहिए।

कार्य को शुरू करने से पहले ही मैं अपने कार्य और वेतन संबंधी सारी चर्चा कर लेता। कार्य की समाप्ति पर अगर मालिक पक्ष वेतन देने में आनाकानी करता या झूठे कारण दिखाकर वेतन कम करने का प्रयास करता, तो उसके खिलाफ आवाज उठाता। इसके बाद भी मालिक मेरा पूरा पारिश्रमिक नहीं देता, तो मैं प्रशासन की मदद लेने में भी हिचकता नहीं और अपना पूरा मेहनताना लेकर ही रहता। मैं कायर और डरपोक बनकर अत्याचार नहीं सहता।

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पठित गद्यांश पर आधारित कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 2
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 3

प्रश्न 2.
कारण लिखिए :
(क) गृहस्वामी द्वारा जूलिया से माफी माँगना
(ख) गृहस्वामी से जूलिया को संसार के साथ लड़ने के लिए कहना
उत्तरः
(क) गृहस्वामी ने जूलिया के साथ एक छोटा-सा कूर मजाक किया।
(ख) इस संसार में दब्बू और रीढ़रहित लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है।

प्रश्न 3(क).
परिच्छेद में प्रयुक्त कोई एक मुहावरा ढूँढ़कर उसका सार्थक वाक्य में प्रयोग कीजिए :
उत्तरः
ठग लेना – धोखा देना
वाक्यः गृहस्वामी ने जूलिया के पूरे पैसे न देकर उसे ठग लिया।

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प्रश्न ख.
‘पर’ शब्द के दो अर्थ लिखिए।
उत्तरः
i. किंतु
ii. पंख

प्रश्न 4.
संसार में दब्बू और रीढ़रहित लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है’, इसपर लगभग आठ से दस वाक्यों में अपने विचार लिखिए ।
उत्तरः
इस संसार में दब्बू और रीढ़रहित लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है क्योंकि हमारी सामाजिक परिस्थिति ऐसी बन चुकी है कि खामोश रहनेवाले या भयभीत रहनेवाले लोगों के साथ और अधिक अन्याय होता है। डरने के कारण उनका सही हक भी मार लिया जाता है। हमारा किसान सालभर मेहनत करता है लेकिन कुछ लोग उनका अधिकार मार लेते हैं और किसान खामोशी के साथ यह अन्याय सहन करता रहता है।

गरीब मजदूर पूरा दिन मेहनत करता है। लेकिन कुछ बोल नहीं पाने के कारण लोग उसके अधिकारों का हनन करते हैं और उसे उचित मेहनताना नहीं मिल पाता है। इसलिए यह समाज ऐसे लोगों के लिए नहीं है जो खामोशी से सारे ज्यादतियों को बर्दाश्त करते हैं। लोग ईमानदारी के साथ अपना कार्य संपन्न करने के बावजूद भी अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं सिर्फ दब्बू और रीढ़रहित होने के कारण। अतः इस समाज में डरपोक लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है।

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पाठ के आँगन में :

1. सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए :

प्रश्न क.
संजाल :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 4
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 5

प्रश्न ख.
ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हो :
1. वान्या
2. रुबल
उत्तरः
1. कोल्या के बीमार होने पर जूलिया ने किसे पढ़ाया था?
2. रूस की मुद्रा को क्या कहते हैं?

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2. पाठ में प्रयुक्त अंकों का उपयोग करके मुहावरे लिखिए।

प्रश्न 1.
पाठ में प्रयुक्त अंकों का उपयोग करके मुहावरे लिखिए।
उत्तरः

  1. दो – नौ दो ग्यारह होना।
  2. एक – एक और एक ग्यारह होना।
  3. उन्नीस – उन्नीस-बीस का फर्क होना।
  4. चार – चार चाँद लगाना।
  5. पाँचों – पाँचों उँगलियाँ घी में होना।

3. ‘कई बार अज्ञान के कारण गरीबों को ठगा जाता है यह देखकर मेरे मन में विचार आए ……………… 

प्रश्न 1.
‘कई बार अज्ञान के कारण गरीबों को ठगा जाता है यह देखकर मेरे मन में विचार आए ………………
उत्तर:
कई बार जीवन में ऐसी घटनाएँ देखने को मिलती है जिसका प्रभाव बड़े लंबे समय तक रहता है। मैं एक बार एक दवाखाने में बैठा था। मेरे अगल-बगल कई मरीज बैठे थे । उनमें से एक मरीज था जो लगातार खाँस रहा था। उसकी स्थिति देखकर ही मालूम हो रहा था कि वह एक बहुत ही गरीब इंसान है। काफी देर बाद उसका नंबर आया और मेरा नंबर ठीक उसके बाद था इसलिए मैं भी उसके साथ डॉक्टर के चेम्बर के अंदर गया।

डॉक्टर ने परीक्षण करने के बाद उसको बहुत सारे टेस्ट लिख दिए और कहा पहले टेस्ट कराकर ले आओ फिर दवाई दूंगा। अज्ञानता के कारण वह डॉक्टर से यह भी नहीं पूछ पाया कि यह टेस्ट उसे क्यों दिए गए हैं? वह गरीब बेचारा चुपचाप अपना सिर झुकाए कमरे से बाहर निकल गया।

जो टेस्ट उस डॉक्टर ने दिए थे वो काफी महंगे थे और एक गरीब व्यक्ति के लिए वो सारे टेस्ट एक साथ करवाना मुश्किल का काम था। उस समय मेरे मन में यह विचार आया कि बड़ा होकर मैं भी डॉक्टर बनूंगा और गरीबों को नि:शुल्क सेवा करूंगा। गाँव के लोग सीधेसाधे होते हैं और ज्यादा पढ़े-लिखे भी नहीं होते हैं। इसी का फायदा उठाकर लोग मनचाहे ढंग से उन्हें ठगते हैं।

विशेषकर डॉक्टर जिन्हें भगवान के बाद सबसे ज्यादा सम्मान की नजरों से देखा जाता है। कुछ लोग इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं। मैं आगे चलकर एक डाक्टर के रूप में सिर्फ मरीजों की सेवा करूँगा। यही मेरी इच्छा है।

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पाठ से आगे :

प्रश्न 1.
परिचारिका पाठ्यक्रम नर्सिंग कोर्स संबंधी जानकारी अंतरजाल से प्राप्त कीजिए और आवश्यक अर्हता संबंधी चर्चा करें।

भाषा बिंदु :

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चिहनों के सामने उनके नाम लिखिए तथा वाक्यों में उचित विरामचिहून लगाइए।
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 6.1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 7Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 5 जूलिया Additional Important Questions and Answers

(क) सूचना के अनुसार निम्नलिखित कृतियाँ परिच्छेद के आधार पर पूर्ण कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया 8

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1.
कारण लिखिए।
i. गृहस्वामी द्वारा खुद ही जूलिया को पैसे देना –
ii. गृहस्वामी की पत्नी द्वारा जूलिया को तीन दिन की छुट्टी देना –
उत्तर :
i. क्योंकि जूलिया अपने आप गृहस्वामी से पैसे नहीं माँगती।
ii. क्योंकि तीन दिन से जूलिया के दाँतों में दर्द हो रहा था।

प्रश्न 2.
समझकर लिखिए।
i. इतवार को जूलिया ने यह काम किया
ii. चार दिन यह बीमार रहा
उत्तर:
i. सिर्फ कोल्या को घूमाने ले गई थी।
ii. कोल्या

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प्रश्न 3.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।

  1. गृहस्वामी कोल्या के स्कूल का हिसाब करना चाहता था।
  2. गृहस्वामी के अनुसार जूलिया की तनख्वाह तीस रूबल वार्षिक तय हुई थी।
  3. गृहस्वामी ने जूलिया का हिसाब डायरी में नोट कर रखा था।
  4. जूलिया से पहले की गवर्नेस को गृहस्वामी तीस रूबल महीना ही देता था।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य

प्रश्न 4.
सही विधान चुनकर पूर्ण वाक्य फिर से लिखिए।
i. मेरे ख्याल से तुम्हें …………
(क) घर की जरूरत होगी।
(ख) पैसों की जरूरत होगी।
(ग) कपड़ों की जरूरत होगी।
उत्तर:
(ख) पैसों की जरूरत होगी।

ii. तुम्हें हमारे यहाँ काम करते हुए ………..
(क) तीन महीने हुए हैं।
(ख) दो वर्ष हुए हैं।
(ग) दो महीने हुए हैं।
उत्तर:
(ग) दो महीने हुए हैं।

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कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1.
वचन परिवर्तन कीजिए।
i. छुट्टी
ii. दाँत
उत्तर:
i. छुट्टियाँ
ii. दाँत

प्रश्न 2.
समानार्थी शब्द लिखिए।

  1. स्वर
  2. तनख्वाह
  3. महीना
  4. छुट्टी

उत्तर:

  1. आवाज
  2. वेतन
  3. माह
  4. अवकाश

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया

प्रश्न 3.
विरुद्धार्थी शब्द परिच्छेद से ढूंढकर लिखिए।

  1. नौकर × ………
  2. गैरजरूरत × ………
  3. बाद में × ……..
  4. सही × ……..

उत्तर:

  1. मालिक
  2. जरूरत
  3. पहले
  4. गलत

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया

कृति (4) स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘मजदूरों के साथ होता अन्याय’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तरः
मजदूर हमारे समाज का वह तबका है जिस पर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी होती है। वह मानवीय श्रम का सबसे आदर्श उदाहरण है किंतु उनकी स्थिति दयनीय है। उन्हें हर दिन काम नहीं मिल पाता है। उनसे श्रम अधिक लिया जाता है तथा पारिश्रमिक कम दिया जाता है। अत: मजदूरों के कल्याण की दिशा में सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। मजदूरों के श्रम का सम्मान करना चाहिए तथा उनकी जीवन-दशा में सुधार की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए।

(ख) परिच्छेद पड़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1.
उत्तर लिखिए।
i. यह बहुत कीमती थी
ii. इनके भाग्य में हमेशा नुकसान उठाना बदा है
उत्तर:
i. प्याली
ii. गृहस्वामी के

प्रश्न 2.
उपर्युक्त गद्यांश से दो ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हो।
i. टहनी
ii. डायरी
उत्तर:
i. किसकी खरोंच लगने से बच्चे की जैकेट फट गई?
ii. गृहस्वामी हर एक चीज किसमें नोट करता है?

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प्रश्न 3.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।

  1. गृहस्वामी के भाग्य में हमेशा फायदा उठाना बदा है।
  2. गृहस्वामी प्याली का दो रूबल ही काटेगा।
  3. जूलिया अपने काम में ढील देगी तो उनके पैसे नहीं करेंगे।
  4. दस जनवरी को गृहस्वामी ने जूलिया को दस रूबल दिए थे।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य

प्रश्न 4.
सही विधान चुनकर पूर्ण वाक्य फिर से लिखिए।

i. इतनी बड़ी बात तुम्हारी मालकिन ने …………..
(क) मुझे बताई तक नहीं।
(ख) किसी से छुपाया नहीं।
(ग) तुम्हें क्यों बताया।
उत्तर:
(क) मुझे बताई तक नहीं।

ii. चौदह में से तीन और घटा तो बचते हैं ………….
(क) दस रूबल
(ख) पाँच रूबल
(ग) ग्यारह रूबल
उत्तर:
(ग) ग्यारह रूबल

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कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1.
लिंग परिवर्तन कीजिए।
i. नौकरानी – नौकर
ii. मालकिन – मालिक
उत्तर:
i. प्याली
ii. गृहस्वामी के

प्रश्न 2.
समानार्थी शब्द परिच्छेद से ढूंढकर लिखिए।

  1. किस्मत
  2. मूल्यवान
  3. हानि
  4. कारण

उत्तर:

  1. भाग्य
  2. कीमती
  3. नुकसान
  4. वजह

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प्रश्न 3.
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।
i. झूठ × ………
ii. ज्यादा × ………..
उत्तर:
i. सच
ii. कम

(ग) परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
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कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1.
समझकर लिखिए।
i. जूलिया इसके बावजूद भी गृहस्वामी को धन्यवाद देती है।
ii. गृहस्वामी को यह बात जानकर जरा भी आश्चर्य नहीं होता।
उत्तर:
i. जबकि गृहस्वामी ने उसे ठगा, धोखा दिया और उसके पैसे हड़प लिए।
ii. जूलिया ने जहाँ-जहाँ काम किया उन लोगों ने उसे एक पैसा तक नहीं दिया।

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कृति (3) शब्द संपदा

प्रश्न 1.
वचन परिवर्तन कीजिए।

  1. पंजों
  2. बात
  3. रुबल
  4. पैसा

उत्तर:

  1. पंजा
  2. बातें
  3. रूबल
  4. पैसे

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प्रश्न 2.
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।

  1. ऊँच × …
  2. धीमा × …..
  3. भला × ……
  4. अन्याय × ……..

उत्तर:

  1. नीच
  2. तेज
  3. बुरा
  4. न्याय

प्रश्न 3.
समानार्थी शब्द लिखिए।

  1. भौरु
  2. बोदा
  3. आश्चर्य
  4. निर्मम

उत्तर:

  1. डरपोक
  2. मूर्ख
  3. अचरज
  4. निर्दयी

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भाषाई कौशल पर आधारित पाठगत कृतियाँ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों में से अव्यय शब्द पहचानकर लिखिए।
i. मुझे लगता है कि तुम अपने आप पैसे भी नहीं माँगोगी।
ii. कोल्या को घुमाने के लिए ले गई हो।
उत्तर:
i. कि – समुच्चबोधक अव्यय
ii. के लिए – संबंधसूचक अव्यय

प्रश्न 2.
कोष्ठक में दी गई सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए।

  1. मैं तुम्हारी तनख्वाह का हिसाब करता हूँ। (पूर्ण भूतकाल)
  2. मैं खुद ही तुम्हें पैसे दूंगा। (सामान्य वर्तमानकाल)
  3. आप सही कह रहे हैं। (सामान्य भविष्यकाल)
  4. मैं तीस रूबल ही देता था। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
  5. तुमने चाय की प्लेट तोड़ी थी। (पूर्ण वर्तमानकाल)
  6. मैं प्याली के दो रूबल काढूँगा।(अपूर्ण भूतकाल)
  7. मारिया वान्या के जूते चुराई। (सामान्य भविष्यकाल)
  8. मैं झूठ बोल रहा हूँ। (सामान्य भूतकाल)
  9. तुम मुझे धन्यवाद दे रही हो। (सामान्य भविष्यकाल)
  10. मैंने तुम्हे ठगा है। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
  11. मैंने तुम्हारे साथ मजाक किया। (पूर्ण भूतकाल)
  12. तुम इस संसार से लड़ोगी। (सामान्य भूतकाल)

उत्तर:

  1. मैंने तुम्हारी तनख्वाह का हिसाब किया था।
  2. मैं खुद ही तुम्हें पैसे देता हूँ।
  3. आप सही कहेंगे।
  4. मैं तीस रूबल ही दे रहा हूँ।
  5. तुमने चाय की प्लेट तोड़ी है।
  6. मैं प्याली के दो रूबल काट रहा था।
  7. मारिया वान्या के जूते चुराएगी।
  8. मैंने झूठ बोला।
  9. तुम मुझे धन्यवाद दोगी।
  10. मैं तुम्हे ठग रहा हूँ।
  11. मैंने तुम्हारे साथ मजाक किया था।
  12. तुम इस संसार से लड़ी।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य शुद्ध करके लिखिए।

  1. मैंने इसमें नोट कर रखे हूँ।
  2. मेरे ख्याल पर तुम्हें पैसों में जरूरत होगी।
  3. तुमने चाय का प्लेट और प्याली तोड़ी थी।
  4. इसे भी डायरी पर नोट कर लेता हैं।

उत्तर:

  1. मैंने इसमें नोट कर रखा है।
  2. मेरे ख्याल से तुम्हें पैसों की जरूरत होगी।
  3. तुमने चाय की प्लेट और प्याली तोड़ी थी।
  4. इसे भी डायरी में नोट कर लेता हूँ।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित अव्यय शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
i. और
ii. कि
उत्तर:
i. इस संसार में दब्बू और रीढ़रहित लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है।
ii. तुम जानती हो कि मैंने तुम्हें ठग लिया है।

जूलिया Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन-परिचय : अंतोन पाव्लाविच चेखव का जन्म दक्षिण रूस के तगानरोग नामक स्थान में हुआ था। ये रूसी कथाकार और नाटककार थे। उन्होंने रूसी भाषा में चार कालजयी नाटक दिए। उनकी साहित्यिक रचनाएँ सारे विश्व में सराही जाती हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक कुरीतियों का व्यंग्यात्मक चित्रण किया गया है। ये कुशल साहित्यक होने के साथ-साथ एक सफल चिकित्सक भी रहे।
प्रमुख कृतियाँ : नाटक – ‘तीन बहने’, ‘द चैरी आर्चर्ड’, ‘इवानोव’ आदि।
कहानी संग्रह – ‘अन्ना ऑन नेक’, ‘अबैड बिजनेस’, ‘द वर्ड मार्केट’, ‘ओल्ड एज’, ‘ग्रीषा’ आदि। लघु
उपन्यास – ‘ए ड्रीरी स्टोरी’, ‘द वाइफ’ आदि।

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गद्य-परिचय :

एकांकी : एकांकी का आकार छोटा होने के कारण इसमें एक अंक की ही कथा होती है। इसकी कथा व संवाद आदि से अंत तक रोचक और आकर्षक होते हैं।
प्रस्तावना : प्रस्तुत एकांकी ‘जूलिया’ के माध्यम से लेखक अंतोन चेखव ने समाज के ऐसे लोगों पर कुठाराघात किया है जो डरपोक और दब्बू हैं तथा स्वयं पर होनेवाले अन्याय का भी प्रतिरोध नहीं करते हैं।

सारांश :

जूलिया वासिल्देवना बच्चों की देखभाल करने वाली एक गवर्नेस है। एक बार उसके मालिक उसे घर पर बुलाते हैं और अन्यायपूर्वक उसका वेतन काट लेते हैं, लेकिन डरपोक और दब्बू स्वभाव की होने के कारण जूलिया उनका विरोध नहीं कर पाती है। तब उसके मालिक उसे समझाते हुए कहते हैं कि उन्होंने तो वेतन काटने का सिर्फ नाटक किया था। उसे यह समझाने के लिए कि यह समाज अत्यंत निर्दयी है।

यहाँ पर अपना हक छीनकर लेना पड़ता है। अगर व्यक्ति संघर्ष नहीं करेगा तथा अपने अधिकार के लिए आवाज नहीं उठाएगा तो यह समाज उसे जीने नहीं देगा। उस पर अन्याय करता ही रहेगा। इसलिए समाज में रहना है, तो अपने अधिकारों के लिए पूरी शक्ति के साथ लड़ना होगा। क्योंकि डरपोक लोगों के लिए इस समाज में कोई स्थान नहीं है। .

शब्दार्थ :

  1. गवर्नेस – छोटे बच्चों की देखभाल करनेवाली
  2. तनख्वाह – वेतन
  3. रूबल – रूस की मुद्रा
  4. नागा – वह जिस दिन काम न किया हो
  5. रुआँसी – रोने जैसी
  6. कसर – कमी
  7. टहनी – डाली
  8. खरोंच – रगड़
  9. यकीन – विश्वास
  10. अनर्थ – सर्वनाश, बुरा, अनिष्ठ
  11. कूर – कठोर, निर्दय
  12. दब्बू – भोंदू, कमजोर
  13. भीरु – डरपोक
  14. बोदा – मूर्ख, सुस्त
  15. ज्यादतियाँ – अन्याय
  16. खामोश – शांत, चुप
  17. निर्मम – निर्दयी
  18. हृदयहीन – दूसरों की भावनाओं की परवाह न करने वाला
  19. रीढ़रहित – अति दुर्बल, कमजोर
  20. पंजा – नाखून
  21. सहना – बर्दाश करना
  22. अन्याय – अत्याचार

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 5 जूलिया

मुहावरे :

  1. हड़प लेना – बेईमानी से अधिकार कर लेना/दूसरे की वस्तु हजम कर जाना।
  2. सबक सिखाना – दंड देना।
  3. आसमान से गिरना – आश्चर्यचकित होना।
  4. ठग लेना – धोखा देना।
  5. तंग आना – परेशान होना।

Hindi Lokbharti 9th Digest Answers Pdf पहली इकाई

Class 9 Hindi Chapter 7 Laghu Katha Lekhan Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Hindi Lokvani Chapter 7 लघुकथाएँ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 9 Hindi Chapter 7 Laghu Katha Lekhan Question Answer Maharashtra Board

Hindi Lokvani 9th Digest Chapter 7 लघुकथाएँ Questions And Answers

भाषाई कौशल पर आधारित पाठगत कृतियाँ

संभाषणीय:

प्रश्न 1.
‘पर्यावरण संवर्धन’ संबंधी कोई पथ नाट्य प्रस्तुत कीजिए।
उत्तरः

  • सीमा: अरे देवेश, तुम कैसे हो? आज तुम इतने चिंतित क्यों दिख रहे हो?
  • देवेश: हाँ, मैं पर्यावरण-प्रदूषण को लेकर में थोड़ा चिंतित हूँ।
  • सीमा: मुझे पता है, पृथ्वी प्रदूषण से पीड़ित है और यह प्रदूषण भी दिनोंदिन खतरनाक होता जा रहा है।
  • देवेश: पर्यावरण-प्रदूषण न केवल प्रकृति के लिए खतरनाक है, बल्कि पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों एवं पेड़-पौधों के लिए भी खतरनाक है।
  • सीमा: तुम्हें क्या लगता है कि आगे क्या होने जा रहा है?
  • देवेश: पर्यावरण-प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। यह विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों में असंतुलन का कारण बनता है।
  • सीमा: हाँ, हमें हर किसी को इसके हानिकारक प्रभावों से अवगत कराना चाहिए तथा इसके संवर्धन के लिए सबको जागरूक करना चाहिए।
  • देवेश: हमें ‘पर्यावरण-संवर्धन’ के बारे में लोगों को बताना चाहिए।
  • सीमा: लेकिन ये पर्यावरण-संवर्धन कैसे होगा?
  • देवेश: सीमा, प्रदूषण
  • मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं। वायु प्रदूषण, मृदा-प्रदूषण और जल प्रदूषण। जल प्रदूषण को रोकने के लिए हमें नदियों के पानी को गंदा नहीं
  • करना चाहिए। साफ पानी में कचरा नहीं फेकना चाहिए।
  • सीमा: वायु प्रदूषण और मृदा प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?
  • देवेश: कल कारखानों से उठने वाली जहरीली गैसों से वायु में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती है इस समस्या को दूर करने के लिए कलकारखानों को शहरों से दूर बनाना चाहिए, तथा मृदा प्रदूषण अत्यधिक मात्रा में कीटनाशक तथा औद्योगिक कचरा फेंकने के कारण होता है। इसे हमें रोकना चाहिए।
  • सीमा: यह तो बड़ी खतरनाक स्थिति है!
  • देवेश: हाँ बहुत खतरनाक! अगर हम इन प्रदूषणों को शीघ्र दूर नहीं करेगें तो यह पर्यावरण की समस्या और बढ़ती ही जाएगी।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ

लेखनीय:

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की जानकारी प्राप्त करके लिखिए।
उत्तर:
हमारे देश की ‘राष्ट्रीय रक्षा अकादमी’ भारतीय सशस्त्र सेना की एक संयुक्त अकादमी है। जहाँ तीनों सेनाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना को एक साथ प्रशिक्षित किया जाता है। यह महाराष्ट्र के पुणे के करीब खड़कवासला में स्थित है। यहाँ के छात्रों ने अपनी वीरता से पूरे देश के सम्मान में चार चाँद लगाया है। इस अकादमी की शुरूआत 1 जनवरी 1949 को देहरादून में ‘आर्मड फोर्सेस अकादमी’ के नाम से किया गया। 6 अक्टूबर 1949 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा रक्षा अकादमी की नींव रखी गई। औपचारिक रूप से 7 दिसम्बर 1954 को इसे प्रारंभ किया गया। 16 जनवरी 1955 को वायु सेना अकादमी को भी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल किया गया। इस अकादमी में लिखित परीक्षा द्वारा आवेदकों का चयन किया जाता है तथा चिकित्सा परीक्षण के साथ-साथ विस्तृत साक्षात्कार का सामना करना पड़ता है।

वे कैडेट जिन्हें स्वीकार किया जाता है और जो सफलतापूर्वक इस कार्यक्रम को पूरा करते हैं उन्हें उनके संबंधित सेवा में अधिकारियों के रूप में कमीशन किया जाता है। कैडेट अपने तीन वर्ष के अध्ययन के बाद डिग्री प्राप्त करता है। कैडेटों के पास अध्ययन की दो-धाराओं का विकल्प होता है -विज्ञान संकाय और कला संकाय। इसके अलावा कैडेटों को एक विदेशी भाषा लेनी होती है। यह विशेष बात है कि कैडेटों को विदेशी भाषा के अलावा इन सभी विषयों में बुनियादी शिक्षा लेनी पड़ती हैं। सभी कैडेट जो सफलतापूर्वक इस कार्यक्रम को पूरा करते हैं उन्हें सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में कमीशन किया जाता है।

इसलिए सैन्य नेतृत्व और प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसके अलावा कैडेटों को बाहरी गतिविधियों का चुनाव करना होता है। जिसमें पैरा-ग्लाइडिंग, नौकायन, तलवारबाजी, घुड़सवारी आदि। इस अकादमी के कई छात्रों ने महत्वपूर्ण संघर्षों में देश का नेतृत्व किया है। इसलिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी हमारे देश की सुरक्षा प्रणाली का आधार स्तंभ है।

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ Additional Important Questions and Answers

(क) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति क (1): आकलन कृति

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ

कृति क (2): शब्द-संपदा

प्रश्न 1.
लिंग परिवर्तन कीजिए।
1. शिक्षक
2. बेटी
उत्तर:
1. शिक्षिका
2. बेटा

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ

प्रश्न 2.
वचन परिवर्तन कीजिए।
1. शिक्षक
2. मैं
उत्तर:
1. शिक्षकगण
2. हम

कृति क (3): स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘सैनिक हमारे देश की रीढ़’ विषय पर अपने विचार 6 से 8 वाक्यों में लिखिए।
उत्तर:
“मातृभूमि का मान बढ़ाए जो, होता सैनिक वह सच्चा है, जिसको स्वदेश से प्यार नहीं, उस नर से पशु ही अच्छा है।” सैनिक एक सच्चा देशभक्त होता है। वह पूरे तन-मन से देश के प्रति समर्पित रहता है। हमें भारतीय सैनिकों का सम्मान करना चाहिए। उनकी भावनाओं का आदर करना चाहिए। सैनिक ही वह शक्ति है, जिसके बल पर हम चैन की नींद सोते हैं। देश की सुरक्षा के लिए हमारे भारतीय सैनिक अपनी जान की बाजी लगा देते हैं और हम उनका सम्मान करना ही भूल जाते हैं। आजकल तो भारतीय सैनिक पर भी राजनेता राजनीति करते हैं, यह शर्म का विषय है। हमें अपने सैनिकों का आदर हृदय से करना चाहिए।

(ख) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1): आकलन कृति

प्रश्न 1.
समझकर लिखिए।
1. राजेश काका साब को यह समझा रहा था –
2. सबको घर में यह खटक रहा था –
उत्तर:
1. कार रखने में दिक्कत आएगी, पेड़ तो कटवाना ही पडेगा न!
2. बाउंड्रीवाल में बाधक बन रहा नीम का पेड़।

सही विधान चुनकर पूर्ण वाक्य फिर से लिखिए।

प्रश्न 1.
काका साब की चुप्पी राजेश को……
(क) अच्छी लग रही थी।
(ख) बुरी लग रही थी।
(ग) खल रही थी।
उत्तर:
काका साब की चुप्पी राजेश को खल रही थी।

प्रश्न 2.
राजेश ने कनखियों से…….
(क) प्रतीक को देखा।
(ख) काका को देखा।
(ग) नीम के पेड़ को देखा।
उत्तर:
राजेश ने कनखियों से काका को देखा।

कृति (2): शब्द-संपदा

प्रश्न 1.
गद्यांश से शब्द युग्मों की जोड़ियाँ लिखिए।
उत्तर:
1. देखते-देखते
2. कहते-कहते

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ

प्रश्न 2.
गद्यांश से विरुद्धार्थी शब्द ढूँढकर लिखिए।
1. कभी-कभी x …….
2. अव्यवस्था x …….
उत्तर:
1. हमेशा
2. व्यवस्था

कृति (3): स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘वृक्षों को काटकर हम अपनी जीवनडोर काटते हैं।’ इस पर आधारित अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
वृक्ष हमारी प्राकृतिक संपदा है। लेकिन मानव इतना स्वार्थी बन गया है कि उसने खुद के फायदे के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई करनी शुरू कर दी है। उन्हें काटकर हम अपनी जीवनडोर काट रहे हैं। यदि हम वृक्षों को काटेंगे तो नुकसान हमारा ही होने वाला है। वृक्षों की कटाई करने से प्रदूषण बढ़ रहा है। वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है, जिसके कारण वर्षा अनियमित रूप से हो रही है। प्राणियों का जीवन खतरे में पड़ गया है। आज कई जीव नष्ट हो गए हैं और कई नष्ट होने की कगार पर हैं। इससे पर्यावरण-संतुलन भी खतरे में पड़ गया है।

लघुकथाएँ Summary in Hindi

लेखिका-परिचय:

जीवन-परिचय: लेखिका ज्योति जैन का जन्म मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर में हुआ था। इन्होंने विशेषतः कथा साहित्य एवं समीक्षा के क्षेत्र में लेखन किया है। इनकी रचनाएँ प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुई हैं।

प्रमुख कृतियाँ: लघुकथा संग्रह – ‘जल तरंग’, ‘कहानी संग्रह’, ‘भोरवेला’

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ

गद्य-परिचय:

लघुकथा: हिंदी साहित्य में लघुकथा एक नवीनतम विधा है। यह किसी बहुत बड़े परिदृश्य में से एक विशेष क्षण/प्रसंग को प्रस्तुत करने का चातुर्य है। इसका विषय पूरी तरह से विकसित होता है; किंतु किसी उपन्यास से कम विस्तृत होता है।

प्रस्तावना: प्रस्तुत लघुकथा ‘दावा’ में लेखिका ने अप्रत्यक्ष रूप से सैनिकों के योगदान को देश के लिए सर्वोपरि बताया है। नीम का
पेड़’ लघुकथा में लेखिका ने यह सीख दी है कि पर्यावरण के साथ-साथ हमें बड़ों की भावनाओं का आदर करना चाहिए।

सारांश:

दावा: देशभक्ति के दावे की बहस में समाज का हर वर्ग (शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर, बिजनेसमैन, किसान, नेता इत्यादि स्वयं को बड़े त्यागी होने का दावा पेश कर रहा था। जब रिटायर्ड फौजी से पूछा गया तो उसने सिर्फ यही कहा कि ‘किस बिना पर कुछ कहूँ। मेरे पास तो कुछ नहीं, तीनों बेटे पहले ही फौज में शहीद हो गए हैं।’

नीम का पेड़: राजेश के घर में गैरेज बनाने के लिए उसके काका के मना करने के बाद भी नीम का पेड़ काटे जाने की बात की जाती है। उसी समय उसका बेटा प्रतीक अपने पिता को एक पौधा भेंट करते हुए कहता है कि पापा आज मैं ‘फादर्स डे’ के दिन आपके लिए ये गिफ्ट लाया हूँ। इसे ऐसी जगह लगाएँ जहाँ भविष्य में इसे कोई काटे नहीं। राजेश को अपनी गलती का अहसास होता है और वह नीम के पेड़ को कटवाने का विचार छोड़ देता है।

शब्दार्थ:

  1. नौनिहाल – होनहार बच्चे
  2. चिकित्सक – चिकित्सा करने वाला वैद्य
  3. खादीधारी – खादी पहनने वाले
  4. योगदान – किसी काम में साथ देना
  5. शहीद – शहादत देने वाला
  6. बाउंड्रीवाल – चहारदीवारी
  7. खटकना – मन में किसी अनहोनी का डर होना
  8. दिक्कत – तकलीफ, परेशानी
  9. खलना – चुभना, बुरा लगना

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 लघुकथाएँ

मुहावरे:

  1. धीरे-धीरे खिसकना – चुपके से दूसरे की नजर बचाकर निकल जाना।
  2. पेश करना – प्रस्तुत करना।
  3. दावा जताना – अधिकार जताना।

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions दूसरी इकाई

Class 9 Hindi Chapter 9 Vardan Mangunga Nahi Question Answer Maharashtra Board

Std 9 Hindi Chapter 9 Vardan Mangunga Nahi Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Lokbharti Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही Questions And Answers

Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही Textbook Questions and Answers

संभाषणीय

प्रश्न 1.
गणतंत्र-दिवस’ के अवसर पर जनतांत्रिक शासन प्रणाली पर अपना मंतव्य प्रकट कीजिए।
उत्तर:
मान्यवर अतिथिगण, प्रधानाचार्य, अध्यापक, अध्यापिकाएँ, और मेरे सभी सहपाठियों को मेरा नमस्कार। गणतंत्र दिवस पर अपने विचार व्यक्त करने का एक महान अवसर देने के लिए मैं सर्वप्रथम आपको धन्यवाद देता हूँ।

आज गणतंत्र दिवस को मनाने के लिए हम यहाँ एकत्रित हए हैं। हम सभी के लिए यह एक महान और शुभ अवसर है। हमें एक-दूसरे को बधाई देनी चाहिए और अपने राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए भगवान से दुआ करनी चाहिए। हम लोग 1950 से ही हर वर्ष 25 जनवरी को भारत का गणतंत्र दिवस मनाते आ रहे हैं। इसी दिन २६ जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था।

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अत: यहाँ पर शासन करने के लिए कोई राजा या रानी नहीं है। यहाँ की जनता ही यहाँ की शासक है। इस देश में रहने वाले हर एक नागरिक के पास बराबर का अधिकार है । बिना हमारे वोट के कोई भी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है। देश को सही दिशा में नेतृत्व प्रदान करने के लिए हमें अपना सबसे अच्छा प्रधानमंत्री या कोई भी दूसरा नेता चुनने का हक है।

लोकतंत्र अर्थात् जन-प्रतिनिधि एक ऐसा तंत्र है, जिसमें जनकल्याण की भावना से सभी कार्य संपन्न किए जाते हैं। जनकल्याण की भावना एक-एक करके इस शासन तंत्र के द्वारा हमारे सामने कार्य रूप में दिखाई पड़ने लगती है। लोकतंत्र का महत्त्व इस दृष्टि से भी होता है कि लोकतंत्र में सबकी भावनाओं का सम्मान होता है और सबको अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से प्रकट करने का पूरा अवसर मिलता है। इसी प्रकार किसी भी तानाशाही का लोकतंत्र करारा जवाब देता है।

हमारे देश ने बहुत विकास किया है और विश्व के शक्तिशाली देशों में गिना जाने लगा है। विकास के साथ कुछ कमियाँ भी खड़ी हुई हैं; जैसे-असमानता, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा आदि। अपने देश को विश्व का एक बेहतरीन देश बनाने के लिए समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए हमें आज प्रतिज्ञा लेने की जरूरत है। धन्यवाद, जय हिन्द!

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

आसपास

प्रश्न 1.
‘जीत के लिए संघर्ष जरूरी है।’ विषय पर प्रतियोगिता में सहभागी टीम के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तरः
किसी ने क्या खूब कहा है:

किश्ती तूफ़ान से निकल सकती है,
बुझता हुआ चिराग़ फिर से जल सकता है।
उम्मीद न हार, न अपने इरादे बदल,
ये तक़दीर है, तक़दीर किसी भी वक्त बदल सकती है।

मनुष्य के जीवन में पल-पल परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। जीवन में सफलता-असफलता, हानि-लाभ, जय-पराजय के अवसर मौसम के समान हैं, कभी कुछ स्थिर नहीं रहता। हमारे जीवन में सुख भी है, दुख भी है, अच्छाई भी है, बुराई भी है। जहाँ अच्छा वक्त हमें खुशी देता है, वहीं बुरा वक्त हमें मजबूत बनाता है। हम अपनी जिंदगी की सभी घटनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकते, पर उनसे निपटने के लिए सकारात्मक सोच के साथ सही तरीका तो अपना ही सकते हैं।

कई लोग अपनी पहली असफलता से इतना परेशान हो जाते हैं कि अपने लक्ष्य को ही छोड़ देते हैं। कभी-कभी तो अवसाद में चले जाते हैं। अब्राहम लिंकन भी अपने जीवन में कई बार असफल हुए और अवसाद में भी गए किन्तु उनके साहस और सहनशीलता के गुण ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सफलता दिलाई। अनेकों चुनाव हारने के बाद 52 वर्ष की उम्र में अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए।

संघर्ष ही जीवन है। जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है। इस सष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं। जिसने संघर्ष करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया। जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ। जो तरह-तरह के संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता। जब हम संघर्ष करते हैं, तभी हमें अपने बल व सामर्थ्य का पता चलता है। संघर्ष करने से ही आगे बढ़ने का हौसला मिलता है और अंतत: हम अपनी मंजिल को हासिल कर लेते हैं।

लेखनीय

प्रश्न 1.
‘जीवन में परिश्रम का महत्त्व पर’, अपने विचार व्यक्त
उत्तरः
जीवन में सफलता कौन नहीं चाहता। हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता की ऊँचाई प्राप्त करना चाहता है। ये संसार भी ऐसे लोगों को ही याद रखता है जो इस दुनिया में सफल हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में विजय पताका फहराई है। एक बात तो पूरी तरह स्पष्ट है, संसार में हर व्यक्ति की जीतने की इच्छा होती है, लेकिन जीतना इतना आसान नहीं है। जीतने के लिए कीमत होती है। अपने जीवन का एक लम्बा समय और उस लम्बे समय में किया हुआ अथाह परिश्रम।

परिश्रम वह मूलमंत्र है जो खजानों को खोल देता है. पर्वतों को चीर देता है, सारी दुनिया को मुट्ठी में कर लेता है और असफलता को फूंक मार कर उड़ा देता है। जरूरत है लगन, आस्था और अथक प्रयास की। जिस प्रकार कुएँ के पत्थर पर रस्सी के बार-बार आने-जाने से निशान पड़ जाते हैं उसी तरह परिश्रम द्वारा कठिन से कठिन कार्यों को भी सरल बनाया जा सकता है। कहा भी गया है

‘करत-करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान।’

एक चीज़ को लक्ष्य बनाकर उस दिशा में प्रयत्न करना होता है। नियमित रूप से लगातार परिश्रम करना पड़ता है। हमारा मन भटकाने के लिए बहुत सारी चीजें सामने आएँगी पर उन पर ध्यान न देते हुए पूरी एकाग्रता से किया हुआ परिश्रम ही मनुष्य को सफलता दिला सकता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि मनुष्य ने कठोर परिश्रम द्वारा असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है। परिश्रम मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। शारीरिक और मानसिक परिश्रम के उचित तालमेल से व्यक्ति का तन और मन दोनों स्वस्थ रह सकता है। इसलिए परिश्रम से भागना बिल्कुल मूर्खता है।

विद्यार्थी को विद्यार्जन में, खिलाड़ी को अपने खेल में, कलाकार को अपनी कला में, गायक को अपने गीत में, एक सामान्य व्यक्ति को अपने पेशे में निरंतरता लानी है, तो परिश्रम ही एकमात्र रास्ता है। परिश्रम से बचकर कोई और रास्ता ढूँढ़ना समय की बरबादी है। जीवन में सफलता और परिश्रम एक-दूसरे से सिक्के के दो पहलू की तरह जुड़े हुए हैं। इसलिए जीत की इच्छा रखने वाले को कठोर परिश्रम के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

श्रवणीय:

प्रश्न 1.
किसी अवकाश प्राप्त सैनिक से उनके अनुभव सुनिए और उनसे प्रेरणा लीजिए ।

पाठ से आगे:

प्रश्न 1.
कविवर्य रवींद्रनाथ टैगोर की कविता पढ़िए।

पाठ के आँगन में…

1. सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

प्रश्न (क)
कवि इन परिस्थितियों में वरदान नहीं माँगना चाहते –
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 1

प्रश्न (ख)
आकृति पूर्ण कीजिए।
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 2
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 3

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए।
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 4
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 5

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2. पदूय में पुनरावर्तन हुईं पक्ति लिखिरा

प्रश्न 1.
पदूय में पुनरावर्तन हुईं पक्ति लिखिरा

3. रेखांकित वाक्यांशों के स्थान पर उचित मुहावरा लिखिए।

प्रश्न 1.
रुग्ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज धीरे-धीरे समाप्त हो रहा था। (तिल-तिल मिटना, जिस्म टूटना)
उत्तरः
रुग्ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज तिल-तिल मिट रहा था।

भाषा बिंदु

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए।

  1. लता कितनी मधुर गाती है।
  2. तितली के पास सुंदर पंख होते हैं।
  3. यह भोजन दस आदमी के लिए है।
  4. कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल देखने योग्य है।
  5. उसने प्राण की बाजी लगा दी।
  6. तुमने मीट्टी से कीया प्यार।
  7. यह है न पसीने का धारा।
  8. आओ सिंहासन में बैठो।
  9. तुम हँसो कि फूले-फले देश।
  10. यह गंगा का है नवल धार।

उत्तरः

  1. शुदध वाक्य
  2. लता कितना मधुर गाती है।
  3. तितली के पंख सुंदर होते हैं।
  4. यह भोजन दस आदमियों के लिए है।
  5. कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल हैं।
  6. उसने प्राणों की बाजी लगा दी।
  7. तुमने मिट्टी से किया प्यार।
  8. यह है न पसीने की धारा।
  9. आओ, सिंहासन पर बैठो।
  10. तुम हँसो ताकि फूले-फले देश।
  11. गंगा की यह नवल धार है।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही Additional Important Questions and Answers

(क) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1.
समझकर लिखिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 6

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 7

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 8

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

प्रश्न 2.
समझकर लिखिए।
‘जीवन-महा-संग्राम है।’ इस का अर्थ है-
उत्तरः
जीवनपथ पर चारों ओर दुख एवं संकट-ही-संकट है। अत: जीवन रूपी पथ पर चलते समय उनके साथ संघर्ष करना पड़ता है। यही जीवन का महासंग्राम है।

कृति (3) भावार्थ

निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।

प्रश्न 1.
यह हार एक ……………….. वरदान माँगूंगा नहीं।
भावार्थ:
कवि स्वाभिमानी हैं अत: वह ईश्वर से दया की भीख नहीं माँगना चाहते। वे कहते हैं यह जीवन एक बड़ा युद्ध है। इस युद्ध में हार भी हो सकती है और जीत भी हो सकती है । यदि जीवन में हार का सामना करना पड़ेगा तो भी वह घबराएँगे नहीं। वे कहते हैं कि जीवन में मिली हार बहुत दिन नहीं ठहरती । अत: जीवनरूपी महासंग्राम में आने वाले दुख एवं संघर्षों से वह भयभीत नहीं होंगे, वह तिल-तिल मिटेंगे यानी जब तक शरीर में प्राण है तब तक वह सघर्षों का सामना करेंगे परंतु संघर्षों से बाहर निकलने के लिए वह ईश्वर से दया की भीख कदापि नहीं माँगेंगे। वे कहते हैं कि मैं ईश्वर से कभी वरदान नहीं माँगूंगा।

(ख) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1.
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 9

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1.
समझकर लिखिए।
उत्तर:
1.
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 10
2.
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 11
3.
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 12

कृति (3) भावार्थ

निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।

प्रश्न 1.
लघुता न ………………….. वरदान माँगूंगा नहीं।
भावार्थः
कवि अपने आप को बहुत ही लघु यानी छोटा मानते हैं। आखिर ईश्वर के सामने सभी लघु ही होते हैं। ईश्वर महान होता है। इस तथ्य को स्वीकार कर कवि कहते हैं, “मेरी लघुता को छूने का प्रयास मत करो यानी मेरे दुख-दर्द दूर करने का विचार तू त्याग दे; इस संसार में तुम सबसे श्रेष्ठ हो। अत: तुम महान बने रहो। मैं अपने हृदय में निर्मित वेदना को व्यर्थ त्यागूंगा नहीं और उसे मेरे हृदय से निकालने के लिए मैं तुमसे वरदान नहीं माँगूंगा।’

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मौलिक सजन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के आधार पर कहानी लिखिए तथा उसे शीर्षक दीजिए।
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही 13
स्मृतियों के साथ अंतरिक्ष की ओर
खुशी के मारे उसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। नासा से बाहर आते ही उसने घर का नंबर मिलाया।

“पापा!” उससे बोला नहीं गया।
“हमारी बेटी ने किला फतह कर लिया! है न?”
‘हाँ, पापा!” वह चहकी, ‘मैंने नासा में प्रवेश पानेवाली परीक्षा
पास कर ली है। मेरिट में पहले नंबर पर हैं।”
‘शाबाश! मुझे पता था हमारी बेटी लाखों में एक है!”
“पापा, पंद्रह मिनट के ब्रेक के बाद एक औपचारिक इंटरव्यू और होना है। उसके फौरन बाद मुझे ‘नासा अंतरिक्ष प्रवेश कार्ड’ दिया जाएगा। मम्मी को फोन देना”

“तुम्हारी मम्मी सब्जी लेने गई है। आते ही बात कराता हूँ। आल द बेस्ट, बेटा!” उसकी आँखें भर आई। पापा की छोटी-सी नौकरी थी, लेकिन उन्होंने बैंक से कर्जा लेकर अपनी दोनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाई थी। मम्मी-पापा की आँखों में तैरते सपनों को हकीकत में बदलने का अवसर आ गया था। उसे याद आए अपने वह बचपन के दिन, वह बरगद का वृक्ष, जिसके नीचे बैठकर वह लगातार अंतरिक्ष की ओर देखा करती थी।

उसी वृक्ष के नीचे बैठकर वह अंतरिक्ष संबंधी पुस्तकें पढ़ा करती थी। उसे याद आया, वह कैमरा, जो उसके पापा ले आए थे। उसी कैमरे को आँखों के सामने पकड़कर वह अंतरिक्ष की ओर देखती थी। बचपन की वह यादें, वह वृक्ष, पुस्तक और कैमरा मानो उसे पुकार-पुकार कर कहे रहे थे – दिव्या तुम सचमुच दिव्य हो, अब तुम अंतरिक्ष का भ्रमण करने निकलोगी। क्या हमें साथ लेकर नहीं चलोगी?

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

पद्य-विश्लेषण

  • कविता का नाम – वरदान माँगूंगा नहीं
  • कविता की विधा – गीत
  • पसंदीदा पंक्ति – चाहे हृदय को ताप दो। चाहे मुझे अभिशाप दो। कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूंगा नहीं। वरदान माँगूंगा नहीं।
  • पसंदीदा होने का कारण – प्रस्तुत पंक्ति मुझे बेहद पसंद है क्योंकि उसमें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की बात की गई है।
  • कविता से प्राप्त संदेश या प्रेरणा – प्रस्तुत कविता से प्रेरणा मिलती है कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य पथ पर अटल रहना चाहिए।

आने वाले संकटों का हँसते हए सामना करने की भावना रखनी चाहिए। व्यक्ति के हौसलें बुलंद होने चाहिए। व्यक्ति में आत्मविश्वास होना चाहिए कि वह आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों का अकेले सामना कर सके और अपने कर्तव्य पथ से कदापि पीछे नहीं हटे। व्यक्ति को तूफानों का सामना करने का साहस स्वयं रखना चाहिए।

वरदान माँगूँगा नही Summary in Hindi

कवि-परिचय:

जीवन-परिचय: जनकवि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी, प्रगतिवादी कविता के स्तंभ कवि थे। उनकी कविताओं में जनकल्याण, प्रेम, रचनात्मक विद्रोह के स्वर मुख्य रूप से मुखरित हुए हैं। वे अपने समय के सामूहिक चेतना के संरक्षक के रूप में कार्यरत रहे।

प्रमुख कृतियाँ: काव्य संग्रह – हिल्लोल, जीवन के गान, युग का मेल, मिट्टी की बारात, विश्वास बढ़ता ही गया, वाणी की व्यथा आदि।
गद्य रचनाएँ – महादेवी की काव्य साधना, गीतिकाव्य उद्भव और विकास’ ।

पद्य-परिचय:

गीत: स्वर, पद और ताल से युक्त गीत हिंदी साहित्य की महत्त्वपूर्ण विधाओं में से एक है। इसमें गेयता होती है। गीत मनुष्य मात्र की भाषा है। गीतों के माध्यम से मानव जीवन में ऊर्जा एवं ताजगी का संचार होता है।
प्रस्तावना: प्रस्तुत गीत के माध्यम से कवि ने स्वाभिमान के बल पर सुख-दुख में समभाव रखकर कर्तव्य पथ पर सतत बढते रहने की प्रेरणा प्रदान की है।

सारांश:

‘वरदान माँगूंगा नहीं’ इस कविता में कवि कहते हैं कि जीवन एक महासंग्राम है। हमें इस जीवनरूपी महासंग्राम का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। कवि विपरीत परिस्थितियों में भी कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की सलाह देते हैं। कवि जीवन में आनेवाले संघर्षों को अपने आत्मविश्वास, प्रयास व परिश्रम द्वारा दूर करने की सलाह देते हैं।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 9 वरदान माँगूँगा नही

शब्दार्थ:

  1. विराम – ठहराव
  2. महा-संग्राम – बड़ा युद्ध |
  3. स्मृति – यादें
  4. खंडहर – (यहाँ) खंडित आकांक्षा
  5. लघुता – छोटापन
  6. वेदना – व्यथा, पीड़ा
  7. ताप – गर्मी
  8. अभिशाप – श्राप

मुहावरे:

तिल-तिल मिटना – धीरे धीरे समाप्त होना।

भावार्थ:

यह हार एक ………….. वरदान माँगूंगा नहीं।

कवि स्वाभिमानी हैं अत: वह ईश्वर से दया की भीख नहीं माँगना चाहते। वे कहते हैं यह जीवन एक बड़ा युद्ध है। इस युद्ध में हार भी हो सकती है और जीत भी हो सकती है । यदि जीवन में हार का सामना करना पड़ेगा तो भी वह घबराएँगे नहीं । वे कहते हैं कि जीवन में मिली हार बहुत दिन नहीं ठहरती । अत: जीवनरूपी महासंग्राम में आने वाले दुख एवं संघर्षों से वह भयभीत नहीं होंगे, वह तिल-तिल मिटेंगे यानी जब तक शरीर में प्राण है तब तक वह सघर्षों का सामना करेंगे परंतु संघर्षों से बाहर निकलने के लिए वह ईश्वर से दया की भीख कदापि नहीं माँगेंगे। वे कहते हैं कि मैं ईश्वर से कभी वरदान नहीं माँगूंगा ।

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Class 9 Hindi Chapter 7 Chota Jadugar Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Hindi Lokvani Chapter 7 छोटा जादूगर Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 9 Hindi Chapter 7 Chota Jadugar Question Answer Maharashtra Board

Hindi Lokvani 9th Digest Chapter 7 छोटा जादूगर Questions And Answers

1. संजाल पूर्ण लिखिए 

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण लिखिए
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर 1

2. छोटा जादूगर कहानी में आए पात्रः

प्रश्न 1.
छोटा जादूगर कहानी में आए पात्रः
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर 2.

3. ‘पात्र’ शब्द के दो अर्थ लिखिए।

प्रश्न 1.
‘पात्र’ शब्द के दो अर्थ लिखिए।
उत्तर :
i. अभिनेता
ii. बरतन

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

4. विधान को सही करके लिखिए। 

प्रश्न 1.
विधान को सही करके लिखिए।
i. ताश के सब पत्ते पीले हो गए।
ii. खेल हो जाने पर चीजें बटोरकर उसने भीड़ में मुझे देखा।
उत्तर :
i. ताश के सब पत्ते लाल हो गए।
ii. खेल हो जाने पर पैसा बटोरकर उसने भीड़ में मुझे देखा।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

5. भाषाई कौशल पर आधारित पाठगत कृतियाँ।

भाषा बिंदु :

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति अव्यय शब्दों से कीजिए और नया वाक्य बनाइए।
उत्तर:
i. जहाँ एक लड़का चुपचाप देख रहा था।
वाक्य:
मोहन नदी की लहरों को चुपचाप देख रहा था।

ii. मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ।
वाक्य:
हिंसक शेर मेरी ओर चला आ रहा था।

iii. हाँ! मैं सच कहता हूँ बाबू जी।
वाक्य :
हाँ! मैं छोटा जादूगर हूँ।

iv. अकस्मात किसी ने ऊपर के हिंडोले से पुकारा।
वाक्य :
अकस्मात रमेश छत के ऊपर से कूद गया।

v. मैं बिना बुलाए भी कहीं जा पहुँचता हूँ।
वाक्य:
मैं बिना पढ़े परीक्षा नहीं देता हूँ।

vi. लेखकों और वक्ताओं की न जाने क्या दुर्दशा होती।
वाक्य :
मोहन और गणेश एक अच्छे मित्र हैं।

vii. वाह ! क्या बात।
वाक्य:
वाह ! आप मैच जीत गए।

viii. वह बाजार गया क्योंकि उसे किताब खरीदनी थी।
वाक्य :
मै प्रतिदिन पड़ता हूँ क्योंकि मुझे परीक्षा में अच्छे अंक लाने हैं।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

6. रचनात्मकता की ओर संभाषणीय

प्रश्न 1.
माँ के लिए छोटे जादूगर के किए हुए प्रयास समावण बताइए।
उत्तर:
छोटा जादूगर अपनी माँ की दवा के लिए कार्निवाल के मैदान में जाता है, जहाँ पर उसकी मुलाकात लेखक से होती है। वह उन्हें अपनी माँ और पिता जी के बारे में बताता है। लेखक द्वारा शरबत पिलाने के बाद वह उनसे कहता है कि यदि आप मुझे शरबत न पिलाकर मेरा खेल देखकर कुछ पैसे दे देते तो माँ के लिए मैं पथ्य ले लेता। लेखक जब उसे निशानेबाजी के लिए ले गए तो उसने सभी बारह खिलौने जीत लिए।

लेखक फिर उससे कोलकाता के बोटेनिकल उद्यान में मिले जहाँ पर वह खिलौनों को लेकर तमाशा दिखाकर अपनी माँ के लिए एक सूती कंबल खरीदने की इच्छा लिए था। एक दिन लेखक जब मोटर से हावड़ा की ओर जा रहे थे तो वह छोटा जादूगर उन्हें एक झोंपड़ी के पास खड़ा मिला। उसने लेखक को बताया कि अस्पतालवालों ने उसकी माँ को निकाल दिया है। जब लेखक झोपड़ी के अंदर गए तो उन्होंने देखा कि छोटा जादूगर अपनी माँ के शरीर पर कंबल डाले उससे लिपट कर निरीह भाव से उसे निहार रहा है।

एक दिन छोटा जादूगर निर्मल धूप में सड़क के किनारे अपना तमाशा दिखा रहा था किंतु उसकी वाणी में प्रसन्नता न थी। लेखक द्वारा पूछने पर उसने बताया कि उसकी माँ का समय समीप है और उसने मुझे जल्दी घर बुलाया है। फिर वह पैसा बटोरकर लेखक के साथ अपने घर को चल दिया किंतु घर पहुँचकर पता चला कि उसकी माँ अब नहीं रही।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

7. मौलिक सृजन :

प्रश्न 1.
‘माँ’ विषय पर स्वरचित कविता प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
है साथ मेरे हरदम, बनकर एक साया,
उसने ही मेरा जीवन महकाया।

तकलीफ में भी मुस्काती है,
हर गम खुशी से सह जाती है।

मेरी राहों पर फूल बिछाती वो,
खुद काँटों पर सो जाती है।

ममता की सूरत है माँ,
भगवान की छवि कहलाती माँ ।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

8. आसपास :

प्रश्न 1.
अपने विद्यालय के किसी समारोह का सूत्र संचालन कीजिए।
उत्तर:
सूत्र-संचालन (गणतंत्र दिवस)
आज के इस आज़ादी के जश्न में, मैं रामकुमार विद्यालय में पधारे हमारे अपने सभी खासो-ओ-आम का बहुत-बहुत स्वागत करता हूँ-जय हिंद कहता हूँ। मैं अपने सभी विशिष्ट अतिथियों, समाजसेवियों, हमारे गुरुजनों, सभी पधारे हुए आज़ादी के दीवानों और हमारे साथियों को हमारे विद्यालय की तरफ से गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ देता हूँबधाइयाँ देता हूँ। शुभकामनाएँ इसलिए कि हमने लगभग 200 साल की परतंत्रता सहन करने के बाद यह अनमोल आज़ादी की फ़िज़ा पाई है।

और यह आज़ादी, यह अपनी पसंद से जीने का अधिकार हमें सदा प्राप्त हो ऐसी शुभकामनाओं के साथ मैं रामकुमार हमारे विद्यालय की तरफ से आप सब देशभक्तों का इस आज़ादी के जश्न में स्वागत करता हूँ-वंदे मातरम कहता हूँ। वतन पर मर-मिटने के ज़माने गुज़र गए, मज़ा तो अब इसके लिए जीने में है। अपनी आज़ादी अपनी संप्रभुता के लिए एक बार जोरदार तालियाँ बजा दीजिए।

धन्यवाद! जी हाँ साथियों, ये जो हमारे अमर शहीदों ने बलिदानों के बीज इस मातृभूमि पर रोपे थे, आज उनकी टहनियों पर महकते फूल खिल आए हैं। इन फूलों की महक इस देश में ही नहीं, सारे संसार में फैले, इस कामना के साथ आइए आज के इस महोत्सव का शुभारंभ करते हैं।

इक चमक ताब इक मदहोशी, हर आलम चंगा होता है, इक हूक चमकती आँखों में, हर कतरा गंगा होता है। दिल में मतवाली मौज पले, मन सात आसमाँ छूता है, जब-जब अपने इन हाथों में, लहराता तिरंगा होता है। तो आइए, मित्रों ! सर्वप्रथम हम अपनी आन-बान-शान के प्रतीक हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का ध्वज वंदन करें।

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9. पाठ के आँगन में :

प्रश्न 1.
सियारामशरण गुप्त जी द्वारा लिखित ‘काकी’ पाठ के भावपूर्ण प्रसंग को शब्दांकित कीजिए।
उत्तर :
‘काकी’ शीर्षक कहानी में एक बच्चे के मन के भावों का वर्णन किया गया है। एक दिन श्यामू ने देखा कि उसकी माँ सिर से लेकर पैर तक कपड़ा ओढ़े हुए भूमि पर लेटी हुई है । घर के लोग उसे घेरे हुए रो रहे हैं, पर श्यामू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है? लोग जब उसकी माँ के मृत शरीर को उठाकर ले जाने लगे, तब उसने रो-रोकर तमाशा कर दिया। उसे बहुत समझाया गया फिर भी वह रोता रहा। कुछ दिन पश्चात् उसके मित्रों द्वारा पता चला कि उसकी माँ ऊपर राम के घर चली गई।

एक दिन श्यामू ने आकाश में पतंग उड़ते देखा। उसने सोचा,क्यों न वह एक पतंग आकाश में उड़ा दे और उसकी माँ पतंग के सहारे राम के घर से नीचे उतर आएगी। उसने पिता (काका) से पतंग दिलाने के लिए कहा, पर पिता ने पतंग नहीं दिलाई। एक दिन श्यामू ने अपने पिता की जेब से एक चवन्नी चुराई और अपने मित्र भोला से पतंग मँगवा ली। श्यामू ने सोचा पतंग पर ‘काकी’ लिखकर उड़ा देंगे और काकी इसे पकड़कर नीचे आ जाएगी।

भोला, श्यामू से अधिक समझदार था। उसने श्यामू को समझाया कि पतंग की डोर पतली है, काकी का भार सम्भाल नहीं पाएगी और टूट जाएगी। दूसरे दिन श्यामू ने अपने पिता की कोट से एक रूपया चुराया और मोटी रस्सी मँगवाई। जब श्यामू और भोला पतंग में रस्सी बाँध रहे थे, तभी श्यामू के पिता आ धमके और जब उन्हें पता चला कि श्याम ने उनकी जेब से पैसा निकाला है, तो उनको बहुत गुस्सा आया।

उन्होंने श्यामू को मारा और पतंग फाड़ दी। उनके डाँटने पर डर के कारण भोला ने बताया कि वह पतंग के सहारे अपनी काकी (माँ) को नीचे उतारना चाहता था। विश्वेश्वर ने जब भोला की बात सुनी तो उन्हें बहुत दुख हुआ। पतंग पर चिपके कागज पर ‘काकी’ लिखा देखकर वे हैरान रह गए। इस पाठ में बाल मन के निश्छल, निष्कपट प्रेम की मार्मिक अभिव्यक्ति की गई है।

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर Additional Important Questions and Answers

(क) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति क (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कश्चन सत्य है या असत्य लिखिए।

  1. लड़के की जेब में पेड़ के कुछ पत्ते थे।
  2. दोनों शरबत पीकर निशाना लगाने चले।
  3. लड़के के स्वभाव में संपूर्णता थी।

उत्तर :

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य

कृति क (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 2.
गद्यांश से समानार्थी शब्द ढूँढकर लिखिए।
i. दुख
ii. कारागार
उत्तर :
i. विषाद
ii. जेल

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए।
i. गरम × ……….
ii. बीमार × ………..
उत्तर :
i. ठंडा
ii. स्वस्थ

कृति क (3) : स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
अपने नगर में आयोजित किसी जादू के तमाशे का आँखों देखा वर्णन कीजिए।
उत्तर :
‘जीवन में जिस प्रकार खेलकूद और मनोरंजन के लिए अनेक प्रकार के साधन उपलब्ध हैं, उन्हीं में से एक है जादू का तमाशा। एक दिन हमारे शहर में भी जादू के तमाशे का समाचार अखबार में छपा। अगले ही दिन पिता जी हमें जादू का खेल दिखाने ले गए। हमने टिकटें खरीदी और अंदर गए। थोड़ी देर बाद जादूगर स्टेज पर आया। उसने जैसे ही सबको अभिवादन किया ऊपर से फूल बरसने लगे।

फिर उसने अपनी टोपी उतारकर दिखाई जो एकदम खाली थी लेकिन उसने उसमें हाथ डाला तो खरगोश बाहर निकला और भाग गया। उसने दोबारा हाथ डाला तो तितलियाँ निकलकर उड़ने लगीं। हम सब यह देखकर हैरान हो गए। इसके बाद अगले खेल में उसने अलग-अलग रंगों के कपड़ों की तीन-चार छोटी-छोटी पट्टियाँ मुँह में रख ली और हवा में हाथ घुमाया। फिर मुंह से पट्टियाँ बाहर निकाली तो रंग-बिरंगे रूमाल निकलते चले गए। ऐसा जादू हमने कभी नहीं देखा था और अंत में, हम सब आपस में चर्चा करते हुए खुशी-खुशी घर लौटे।

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(ख) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ख (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
चौखट पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर 3

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
i. छोटा जादूगर को तब अधिक प्रसन्नता होती जब –
ii. देखने वाले इसलिए दंग रह गए क्योंकि –
उत्तर :
i. लेखक उसे शरबत न पिलाकर उसका खेल देखकर कुछ पैसे दे दिया होता।
ii. छोटा जादूगर पक्का निशानेबाज निकला। उसकी कोई गेंद खाली नहीं गई।

कृति ख (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
उचित प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए।
i. बीमार
ii. तमाशा
उत्तर :
i. बीमार + ई = बीमारी
ii. तमाशा + ई = तमाशाई

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प्रश्न 2.
गद्यांश से विलोम शब्द ढूँढकर लिखिए।
i. झूठ × ……………
ii. नीचे × …………..
उत्तर :
i. सच
ii. ऊपर

कृति ख (3) : स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
जो व्यक्ति जीवन में अपना लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, वे बचपन से ही सपने देखा करते हैं। अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
लक्ष्य को पाने के लिए व्यक्ति को बचपन से ही प्रयास करना पड़ता है। जो व्यक्ति दृढ़ निश्चयी होते हैं, वे बचपन से ही सपने देखते हैं। कल्पना चावला, न्यूटन, डॉ. अब्दुल कलाम आदि महापुरुषों ने बचपन से ही अपने लक्ष्य तक पहुंचने का सपना देखा था और उस दिशा में कोशिश एवं अथक परिश्रम करना शुरू कर दिया था। इसी कारण वे अपने लक्ष्य तक पहुँच सके थे।

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(ग) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ग (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर 4

प्रश्न 2.
कृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर 5

कृति ग (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
लिंग परिवर्तन कीजिए।
i. गुड़िया – ………….
ii. जादूगर – …………
उत्तर :
i. गुड्डा
ii. जादूगरनी

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कृति ग (3) : स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘जीवन में माँ का महत्त्व’ पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
हमारे जीवन में माँ का बहुत महत्त्व होता है। एक बालक का संपूर्ण संसार माँ ही होती है। माँ जीवन की प्रथम गुरु होती है। वह हमें चलना, बोलना और पढ़ना सिखाती है। उसके दिए संस्कारों से ही मनुष्य अपने चरित्र का निर्माण करता है। वह हमारे लिए पढ़ाई-लिखाई, भोजन, कपड़े आदि का इंतजाम करती है। सचमुच, माँ सेह, ममता, सद्भावना और कर्तव्य-पालन की जीवंत मूर्ति होती है।

(घ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति घ (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर 6

प्रश्न 2.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।
i. गले की सूत की डोरी टुकड़े-टुकड़े होकर जुट गई।
ii. लेखक इडेन गार्डेन देखने के लिए चले।
उत्तर :
i. सत्य
ii. असत्य

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प्रश्न 3.
समझकर लिखिए।
i. लेखक ने झोपड़ी में यह देखा –
उत्तर:
एक स्त्री चिथड़ो में लदी हुई काँप रही थी।

कृति घ (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
लिंग परिवर्तन कीजिए।
i. श्रीमती
ii. स्त्री
उत्तर :
i. श्रीमान
ii. पुरुष

प्रश्न 2.
गद्यांश से शब्द-युग्म ढूँडकर लिखिए।
उत्तर :
i. टुकड़े-टुकड़े
ii. धीरे-धीरे

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कृति ग (3) : स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘अपने बचपन में नन्हें कलाकारों को अपना तमाशा दिखाते हुए देखा होगा…’ इस पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
मैंने अपने बचपन में अनेक नन्हें कलाकारों को तमाशा दिखाते हुए देखा है। वे बाल कलाकार तमाशा दिखाते और उनके बदले कुछ पैसे या अनाज लेकर अपना पेट पालते हैं। यद्यपि उनके अंदर अनेक गुण होते हैं किंतु विषम परिस्थिति होने के कारण उनका वह गुण संपूर्ण दुनिया के सामने नहीं आ पाता है और वह जीवन पर्यंत सिर्फ अपना पेट ही पालते रह जाते हैं। सरकार और समाज को चाहिए कि वह इस प्रकार के बच्चों के लिए अलग से शिक्षा व्यवस्था करें तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन और अवसर प्रदान करें; जिससे ये बच्चे भी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकें।

(ङ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ङ (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
उत्तर लिखिए।
i. लेखक का मन यहाँ से ऊब गया था –
ii. लेखक ने सड़क के किनारे यह देखा –
उत्तर :
i. कोलकाता से
ii. छोटे जादूगर का रंगमंच सजा हुआ।

प्रश्न 2.
विधानों को सही करके लिखिए।
i. तब भी तुम जादू दिखाने चले आए।
उत्तर :
i. तब भी तुम खेल दिखाने चले आए।

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कृति ङ (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए।
i. समय
ii. परिचित
उत्तर:
i. अ + समय = असमय
ii. अ+ परिचित – अपरिचित

प्रश्न 2.
गद्यांश से समानार्थी शब्द ढूँढकर लिखिए।
i. छुट्टी
ii. चेष्टा
उत्तर :
i. अवकाश
ii. प्रयत्न

प्रश्न 3.
गद्यांश से शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
i. चलते-चलते
ii. सुख-दुख

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कृति छ (3) : स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘माँ की ममता’ पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
हमारे जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण इंसान ‘माँ’ होती है। वह हमेशा हमारे साथ रहती है और हर पल हमारा ध्यान रखती है। ढेर सारे दुख और पीड़ा सहकर वह हमें अपनी कोख में रखती है। वह अपने वास्तविक जीवन में हमेशा हमारे बारे में सोचकर खुश हो जाती है। एक माँ अपने बच्चों की खुशी के आगे अपनी खुशी को कुछ नहीं समझती। वह हमेशा हमारी हर क्रिया और हँसी में अपनी रुचि दिखाती है। उसके पास एक नि:स्वार्थ आत्मा है और प्यार तथा जिम्मेदारी से भरा दयालु दिल है।

छोटा जादूगर Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन-परिचय :

जयशंकर प्रसाद का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सरायगोवर्धन में हुआ था। प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा काशी में क्वींस कालेज में हुई, किंतु बाद में घर पर इनकी शिक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया, जहाँ संस्कृत, हिंदी, उर्दू तथा फारसी का अध्ययन इन्होंने किया। प्रसाद जी हिंदी साहित्य के छायावादी कवियों के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। प्रसाद जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। ये हिंदी साहित्य में कवि, नाटककार, कथाकार, उपन्यासकार तथा निबंधकार के रूप में प्रसिद्ध हैं।

प्रमुख कृतियाँ :

  • काव्य – ‘झरना’ , ‘आँसू’, ‘लहर’, आदि।
  • महाकाव्य – ‘कामायनी’
  • ऐतिहासिक नाटक – ‘स्कंदगुप्त’,’चंद्रगुप्त’, ‘धुवस्वामिनी।
  • कहानी संग्रह – ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाशदीप’, ‘इंद्रजाल’ आदि।
  • उपन्यास – ‘कंकाल’, ‘तितली,’ ‘इरावती’।

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गद्य-परिचय :

संवादात्मक कहानी: किसी विशेष घटना की रोचक एवं आकर्षक ढंग से संवाद के रूप में प्रस्तुति ‘संवादात्मक कहानी’ कहलाती है।
प्रस्तावना : प्रस्तुत कहानी में लेखक ने एक लड़के के जीवन संघर्ष, बीमार माँ की देखभाल और उसके चातुर्यपूर्ण साहस को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। मानवीय संवेदना की मार्मिक अभिव्यंजना ‘छोटे जादूगर’ के माध्यम से की गई है।

सारांश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने एक लड़के के जीवन संघर्ष को उजागर किया है। इस कहानी में जयशंकर प्रसाद खुद एक पात्र हैं; जो एक लड़के के मन को पढ़ने का प्रयत्ल कर रहे हैं। उस समय के वातावरण का वर्णन करते हुऐ प्रसाद जी लिखते हैं कि कार्निवाल के मैदान में बिजली के जगमगाहट, हँसी और विनोद के कलनाद के बीच वे उस लड़के की तरफ आकर्षित हुए जिसके गले में फटे कुरते के ऊपर से एक मोटी सूत की रस्सी पड़ी थी और उसके जेब में कुछ ताश के पत्ते थे।

लेखक उसे खेल दिखाने ले गए। रास्ते में बातचीत के दौरान लेखक को पता चला कि लड़के के घर में उसके माँ और पिताजी भी हैं। उसके पिता जी देश के लिए जेल में बंद हैं और माँ बीमार है। लड़के ने लेखक को बताया कि उसकी माँ बीमार है और उसके दवा के लिए वह तमाशा दिखाकर कुछ पैसे इकट्ठा करना चाहता है। माँ के प्रति ममता देखकर लेखक उसे निशाना लगाने की जगह ले गए। जहाँ लड़के ने बारह खिलौने जीते और वहाँ से नौ-दो ग्यारह हो गया।

एक बार फिर लेखक को वह छोटा जादूगर कोलकाता के सुरम्य बोटेनिकल उद्यान में दिखाई दिया जहाँ लेखक अपनी मित्र मंडली के साथ जलपान कर रहे थे। लेखक के मना करने के बावजूद उनकी श्रीमती ने उस लड़के को तमाशा दिखाने के लिए कहा। लड़के ने अपना तमाशा दिखाया जिसे देखकर सब लोग प्रसन्न हुए और लेखक सोचता रहा कि ‘बालक को आवश्यकता ने कितना शीघ्र चतुर बना दिया है। यही तो संसार है।

एक दिन शाम के समय लेखक अपनी गाड़ी से हावड़ा की ओर जा रहे थे तो वह छोटा जादूगर उन्हें झोपड़ी के पास मिला और उनको बताया कि अस्पतालवालों ने उसकी माँ को निकाल दिया है। लेखक ने अंदर जाकर देखा तो उसकी माँ झोंपड़ी में चिथड़ों से लिपटी हुई पड़ी थी।

लेखक की जेहन में वह छोटा जादूगर घर कर गया। वह सोचता है कि छोटा जादूगर कितना निश्छल, कितना परिश्रमी, बाल-सुलभ चेष्टाएँ और बीमार माँ की जिम्मेदारी किस तरह वहन करता है।

एक दिन लेखक जब जा रहे थे तो उन्होंने छोटे जादूगर को तमाशा दिखाते हुए देखा किंतु उस जादूगर की वाणी में वह प्रसन्नता न देखकर उन्होंने कारण पूछा तो लड़के ने बताया कि उसकी माँ बहुत बीमार है और घर जल्दी आने को बोली है। लेखक उसे लेकर उसके घर पहुँचे तो उसकी बीमार माँ के मुख से सिर्फ ‘बे …’ शब्द निकलकर ही रह गया। जादूगर अपनी माँ से लिपटकर रोने लगा।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

शब्दार्थ :

  1. विषाद – दुख
  2. हिंडोले – झूला
  3. जलपान – नाश्ता
  4. घुड़कना – डॉटना
  5. वाचालता – अधिक बोलना
  6. जीविका – रोजी-रोटी
  7. ईर्ष्या – जलना, दवेष
  8. चिथड़ा – फटा पुराना कपड़ा
  9. बेष्टा – प्रयत्न
  10. समीप – पास, निकट, नजदीक
  11. अनुपात – प्रमाण, तुलनात्मक
  12. समग्न – संपूर्ण
  13. जगमगाना – चमकना
  14. कलनाद – मधुर ध्वनि
  15. गंभीर – गहरा, भारी
  16. सहमत – एकमत, राजी
  17. पथ्य – रोगी को दिया जाने वाला भोजन
  18. सुरम्य – बहुत सुंदर, रमणीय
  19. कमलिनी – छोटा कमल
  20. सयाना – बुद्धिमान
  21. बटोरना – समेटना, इकट्ठा करना
  22. अस्ताचलगामी सूर्य – पश्चिम दिशा में भागता हुआ सूरज
  23. स्मरण – स्मृति, याद
  24. स्फूर्तिमान – सक्रिय
  25. अविचल – स्थिर
  26. स्तब्ध – संज्ञाहीन, स्थिर
  27. विनोद – प्रसन्नता, खेल-कूद
  28. फुहारा – फव्वारा
  29. धैर्य – शांति
  30. निकम्मा – जो कोई काम न करता हो
  31. तिरस्कार – अपमान
  32. व्यग्र – व्याकुल
  33. उद्यान – बगीचा, फुलवारी
  34. अभिनय – भावाभिव्यक्ति

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 7 छोटा जादूगर

मुहावरे :

  • दंग रहना – चकित होना
  • मन ऊब जाना – उकता जाना

Hindi Lokvani 9th Std Digest पहली इकाई

Class 9 Hindi Chapter 6 Sagar Aur Megh Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Hindi Lokvani Chapter 6 सागर और मेघ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 9 Hindi Chapter 6 Sagar Aur Megh Question Answer Maharashtra Board

Hindi Lokvani 9th Digest Chapter 6 सागर और मेघ Questions And Answers

1. स्वमत अभिव्यक्ति:

प्रश्न 1.
‘अगर न नभ में बादल होते’ इस पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
अगर नभ में बादल न होते तो बारिश नहीं होती और यदि वर्षा नहीं होती तो हमारा जीवन संकट में पड़ जाता। क्योंकि जल ही जीवन है। वर्षा के माध्यम से हमें जल की प्राप्ति होती है। हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जहाँ ७०% आबादी कृषि पर निर्भर है अगर वर्षा न होती तो धरती बंजर रह जाती और हमें भोजन के लिए अन्न उपलब्ध नहीं होता। नदी, तालाब, जलाशय सब सूख जाते और प्राणियों का जीवन संकट में पड़ जाता क्योंकि बिना भोजन के हम कुछ दिन जीवित रह सकते हैं, लेकिन बिना पानी के हमारा एक-दो दिन जीना भी मुश्किल हो जाएगा।

अगर मेघ न होंगे, तो धरती का तापमान अत्यधिक बढ़ जाएगा और मनुष्य बेहाल हो जाएगा। बारिश के कारण धरती का तापमान नियंत्रित रहता है। बादल संसार को जल रूपी जीवन का दान करता है और अनुपजाऊ धरती को उपजाऊ बनाता है। किसान बड़ी आतुरता के साथ वर्षा का इंतजार करता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अगर न नभ में बादल होते, तो शायद यह जीवन ही संभव न हो पाता।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

प्रश्न 2.
‘सागर और मेघ एक-दूसरे के पूरक हैं’ इस पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
‘सागर और मेघ एक-दूसरे के पूरक हैं’ क्योंकि इन दोनों के बिना जलचक्र संभव नहीं हो सकता है। जब मेघ से पानी बरसता है तो वह वायुमंडल से भूमि तक पहुँचता है। फिर नदियों में जाकर मिलता है और वह नदियाँ अंत में जाकर सागर में मिल जाती हैं। सागर में वाष्पीकरण की क्रिया होती है और वह पानी वाष्प बनकर फिर बादल बन जाते हैं और पृथ्वी पर वर्षा होती है जिससे अनेक जीव-जंतु और वनस्पतियाँ उत्पन्न होती हैं। अत: हम कह सकते हैं कि सागर और मेघ के बिना प्राणी का जीवन संभव नहीं हो सकता। इसलिए वे दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

2. उचित जोड़ियाँ मिलाइए।

प्रश्न 1.
उचित जोड़ियाँ मिलाइए।

‘अ’ ‘ब’
1.  झूठी स्पर्धा करने वाला (क) सागर
2. अपने हृदय में कंकड़ पत्थर, शंख-घोंघे (ख) मेघ भरने वाला।
(ग) मनुष्य

उत्तर:

‘अ’ ‘ब’
1.  झूठी स्पर्धा करने वाला (ग) मनुष्य
2. अपने हृदय में कंकड़ पत्थर, शंख-घोंघे (क) सागर

3. समानार्थी शब्द बताइए।

प्रश्न 1.
समानार्थी शब्द बताइए।
1. संसार
2. विवेकहीन
उत्तर:
1. विश्व
2. बुद्धिहीन

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

भाषा बिंदु:

प्रश्न 1.
निम्न वाक्यों में से सर्वनाम एवं क्रिया छाँटकर भेदों सहित लिखिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ 1

मौलिक सृजन:

प्रश्न 1.
‘परिवर्तन सृष्टि का नियम है’ इस संदर्भ में अपना मत व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
परिवर्तन सृष्टि का नियम है। इस विषय पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता है कि यह नियम क्या है। जैसे हमारे देश में ६ ऋतुएँ है इसी प्रकार संपूर्ण विश्व में भी कई प्रकार के मौसम हैं। जिस प्रकार गर्मी के बाद वसंत ऋतु आती है। यही प्रकृति का नियम हैं। उसी प्रकार हमारे मानव जीवन में भी कई परिवर्तन आते हैं जैसे जन्म से शिशु अवस्था, शैशव से किशोर अवस्था, युवा अवस्था और अंत में वृद्धावस्था और इसके बाद एक दिन सृष्टि के नियमानुसार हमें इस धराधाम को छोड़कर जाना पड़ता है। मानव जीवन में सुख और दुख भी होते हैं मगर हम मनुष्य हर परिवर्तन को सहन नहीं कर पाते; क्योंकि हर परिवर्तन हमारा मन चाहा नहीं होता है।

हम चाहते कुछ है और होता कुछ और है। ज्यादातर देखा गया है कि मनुष्य अगर इन परिवर्तनों को स्वीकार नहीं पाता है तो अधिक दुखी हो जाता है और इस दुख में इंसान अपने मन का संतुलन खो देता है और गलत कदम उठा लेता है। हमारे पूर्वजों के द्वारा हमें पता चलता है कि परमात्मा के दिए हुए हर परिवर्तन में कोई न कोई अच्छी दिशा, अच्छा और नया संदेश निहित होता है। अत: अगर हम परिवर्तन को ईश्वर का दिया हुआ वरदान मान लें; तो इसमें कोई नई आशा, नई दिशा तथा नया मार्ग मिले जो पहले से बेहतर हो इसलिए हमें यह समझने की जरूरत है कि परिवर्तन सृष्टि का नियम है।

पाठ के आँगन में:

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ 2

पाठ से आगे:

प्रश्न 1.
‘मोती कैसे तैयार होता है?’ इस पर चर्चा कीजिए और दैनिक जीवन में मोती का उपयोग कहाँ -कहाँ होता हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन काल से ही मोती का उपयोग काफी प्रचलित था। रामायण तथा अन्य धार्मिक ग्रन्थों में भी मोती की चर्चा पाई गई है। अमेरिका के मूल निवासी रेड इंडियन मोती को काफी महत्त्व देते थे। प्राकृतिक मोती की उत्पत्ति प्राकृतिक ढंग से होती है। वराह मिहिर की वृहत्संहिता में बताया गया है कि प्राकृतिक मोती की उत्पत्ति सीप, सर्प के मस्तक, मछली, सुअर तथा हाथी से होती है। परंतु अधिकांश प्राचीन भारतीय विद्वानों ने मोती की उत्पत्ति सीप से बताई हैं। प्राचीन विद्वानों का मत है कि जब स्वाति नक्षत्र के दौरान वर्षा की बूंदे सीप में पड़ती हैं तो मोती का निर्माण होता है।

आधुनिक वैज्ञानिकों का मत है कि मोती निर्माण के लिए शरद ऋतु सबसे अनुकूल है क्योंकि इसी ऋतु में स्वाति नक्षत्र का आगमन होता है। इस समय जब वर्षा की बूंदें या वालू का कण किसी सीप के अंदर जाता है तो सीप एक तरल पदार्थ का स्राव करती है, यह तरल पदार्थ परत दर परत चढ़ता जाता है और मोती का रूप ले लेता है। 13 वीं शताब्दी से चीन में कृत्रिम मोती का उत्पादन भी होने लगा है। इसे मोती की खेती भी कहते हैं। 1961 से भारत में भी मोती की खेती की शुरूआत की गई। इसमें सबसे पहले सीपी का चुनाव किया जाता है फिर प्रत्येक सीपी में शल्य क्रिया करनी पड़ती है। इस शल्य क्रिया के बाद सीपी के भीतर एक छोटा-सा नाभिक तथा ऊतक रखा जाता है।

इसके बाद सीपी इस प्रकार बंद कर दिया जाता है कि उसकी सभी जैविक क्रियाएँ पहले की तरह चलती रहें। ऊतक से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है और अंत में मोती का रूप ले लेता है। आजकल नकली मोती भी बनाए जाते हैं। नकली मोती सीप से नहीं बनाए जाते बल्कि शीशे या आलाबास्टर के मनको पर मछली के शल्क के चूरे की परतें चढ़ाकर बनाए जाते हैं। इनकी आज बाजारों में बड़ी माँग है। ये कीमत में सस्ते भी होते हैं। मोती का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है। इसके अलावा मोती औषधि बनाने के काम में भी आती है। जैसे मोती भस्म का उपयोग कब्ज नाशक के रूप में किया जाता है। इसके अलावा इन मोतियों से एक प्रकार की गोली बनती है, जो पेट की गैस तथा एलर्जी के लिए उपयोगी है।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

आसपास:

प्रश्न 1.
दूरदर्शन पर प्रतिदिन दिखाए जानेवाली तापमान संबंधी जानकारी देखिए। संपूर्ण सप्ताह में तापमान में किस तरह का बदलाव पाया गया, इसकी तुलना करके टिप्पणी तैयार कीजिए।
उत्तर:
पिछले कई दिनों से मैं प्रतिदिन दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले तापमान संबंधी जानकारी को देख रहा हूँ। संपूर्ण सप्ताह का तापमान देखने के बाद मुझे ज्ञात हुआ कि महानगरों का तापमान कभी बहुत बढ़ जाता है तो कभी कम हो जाता है। पिछले कई सप्ताहों से मुंबई, दिल्ली,मद्रास, कोलकाता आदि महानगरों के तापमान में काफी बदलाव आ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सारे बदलाव का कारण ग्लोबल वार्मिंग है। जिसे साधारण भाषा में भूमंडलीय तापमान में वृद्धि कहते हैं।

आज तापमानों में बदलाव का मुख्य कारण प्रदूषण है। जिससे कार्बन डाई आक्साईड की मात्रा बढ़ रही है। आधुनिकीकरण के कारण पेड़ों की कटाई और गाँवों का शहरीकरण बहुत तेजी से हो रहा है, जिसके कारण खुली और ताजी हवा या आक्सीजन का अभाव होता जा रहा है। पेड़ों तथा जंगलो की अंधाधुंध कटाई के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। जिससे कही ठंड बहुत ज्यादा हो रही है, तो कही गर्मी का प्रकोप बहुत ज्यादा हो रहा है।

वैज्ञानिकों का मत है कि आनेवाले समय में यह तापमान बदलाव बहुत भयानक रूप ले सकता है। यह फसलों के साथ-साथ जनजीवन के लिए भी नुकसानदायक है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण अधिकतम तथा न्यूनतम पारे का अंतर बढ़ गया है। इसलिए हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि जितनी जल्दी हो इस समस्या का समाधान प्राप्त कर लें।

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 6 सागर और मेघ Additional Important Questions and Answers

(क) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति क (1): आकलन कृति

प्रश्न 1.
समझकर लिखिए।
1. नदियों के कर देने की निरंतरता इससे बनी रहती है –
2. सागर ने मेघ को इस पर ध्यान देने के लिए कहा –
उत्तर:
1. मेघ द्वारा दिया गया बहुत-सा दान जिसे नदियाँ पृथ्वी के पास धरोहर के रूप में रखे रहती हैं।
2. वाइव जो नित्य मुझे (सागर) जलाया करता है, फिर भी मैं उसे छाती से लगाए रहता हूँ।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

प्रश्न 2.
उचित जोड़ियाँ मिलाइए।

‘अ’ ‘ब’
1.  दूसरे की करतूत पर गर्व करनेवाला (क) वाड़व
2. सागर को नित्य जलाने वाला (ख) मेघ
(ग) मनुष्य

उत्तर:

‘अ’ ‘ब’
1.  झूठी स्पर्धा करने वाला (ख) मेघ
2. अपने हृदय में कंकड़ पत्थर, शंख-घोंघे (ग) मनुष्य

कृति (2): शब्द-संपदा

प्रश्न 1.
प्रत्यय अलग करके लिखिए।
1. निरंतरता
2. गरजकर
उत्तर:
1. निरंतर + ता (ता – प्रत्यय)
2. गरज + कर (कर – प्रत्यय)

प्रश्न 2.
वचन परिवर्तन कीजिए।
1. नदियाँ
2. पृथ्वी
उत्तर:
1. नदी
2. पृथ्वी

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के समानार्थी शब्द लिखिए।
1. पृथ्वी
2. विश्राम
उत्तर:
1. धरती
2. आराम

(ख) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1): आकलन कृति

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ 3

कृति (2): शब्द-संपदा

प्रश्न 1.
उपसर्ग अलग करके लिखिए।
1. अस्थिरता
2. अचल
उत्तर:
1. अ + स्थिरता = अस्थिरता (अ – उपसर्ग)
2. अ+ चल = अचल (अ – उपसर्ग)

प्रश्न 2.
गद्यांश से विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए।
1. अहिंसा × ……….
2. धरती × ………..
उत्तर:
1. हिंसा
2. आकाश

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के समानार्थी शब्द लिखिए।
1. स्पर्धा
2. मेघ
उत्तर:
1. प्रतियोगिता
2. बादल

कृति (3): स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘अगर सागर न होता तो ……..’ अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
अगर सागर न होता, तो हमें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता । धरती के ७० प्रतिशत भू-भाग में सागर फैला हुआ है। अगर महासागरों में जैव विविधता का विशाल भंडार न होता, तो पृथ्वी पर जीवन ही संभव न होती। यदि समुद्र का पानी खारा न होता तो गर्म प्रदेश और गर्म हो जाते तथा ठंडे प्रदेश और ज्यादा ठंडे। यह सागर की विशाल जलराशि ही है जो सूर्य से आनेवाली उष्मा का एक बड़ा हिस्सा अपने भीतर समा लेती है। यह प्रक्रिया ही मौसम को संतुलित करती है।

सागर में मौजूद विविध जैविकी में कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता होती है। इस क्षमता के कारण ही इन्हें पर्यावरण को संतुलित रखने का सबसे सशक्त माध्यम माना गया है। सागर का खारा पानी भले ही पीने लायक न हो लेकिन यह गर्म हवाओं को ठंडा करती है तथा इस खारेपन के कारण ही बारिश होती है, मौसमों में रंगों की विविधता है तथा जीवन है। जिस प्रकार समुद्र मंथन के दौरान भगवान शंकर विष को पीकर नीलकंठ कहलाए; उसी प्रकार कार्बन और नमक के जहर को पीकर सागर हमें सुरक्षित रखता है और पर्यावरण को संतुलित करता है। इसलिए अगर सागर न होता, तो शायद पृथ्वी में जीवन का अस्तित्व ही न होता।

(ग) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ग (1): आकलन कृति

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ 4

प्रश्न 2.
सत्य असत्य पहचानकर लिखिए।
1. क्रोध हमें विवेकहीन बना देता है।
2. मनुष्य सागर और मेघ पर निर्भर नहीं है।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

कृति ग (2): शब्द-संपदा

प्रश्न 1.
विलोम शब्द लिखिए।
1. स्वादिष्ट × ……………..
2. उन्नति × ……………..
उत्तर:
1. स्वादहीन
2. अवनति

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय अलग करके लिखिए।
1. अपमानित
2. आतुरता
उत्तर:
1. ‘इत’ प्रत्यय
2. ‘ता’ प्रत्यय

भाषाई कौशल पर आधारित पाठगत कृतियाँ

भाषा बिंदु:

प्रश्न 1.
निम्न में से संज्ञा तथा विशेषण पहचानकर भेदों सहित लिखिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ 5

सागर और मेघ Summary in Hindi

लेखक-परिचय:

जीवन-परिचय: राय कृष्णदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था। ये हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और बांग्लाभाषा के अच्छे जानकार थे। इन्होंने कविता, निबंध गद्यगीत, कहानी, कला, इतिहास आदि विषयों पर रचनाएँ की हैं। इनको ‘साहित्य वाचस्पति पुरस्कार’ तथा भारत सरकार दवारा ‘पद्म विभूषण’ की उपाधि मिली थी।

प्रमुख कृतियाँ: मौलिक ग्रंथ – ‘भारत की चित्रकला’, ‘भारत की मूर्तिकला’, कहानी संग्रह – ‘साधना आनाख्या’, ‘सुधांशु’, गद्यगीत – ‘प्रवाल’।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

गद्य-परिचय:

संवाद: दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच हुआ वार्तालाप, बातचीत या संभाषण ‘संवाद’ कहलाता है।

प्रस्तावना: प्रस्तुत संवाद ‘सागर और मेघ’ के द्वारा लेखक ने सागर एवं मेघ के गुणों को दर्शाया है और हमें विनम्र होने की सीख
देते हुए कहा है कि अपने गुणों पर इतराना और अहंकार करना एक बुराई है। अहंकार नाश का मूल है। अतः लेखक इससे बचने की सलाह देते हैं।

सारांश:

सागर और मेघ अपने गुणों का बखान करते हुए आपस में संवाद कर रहे हैं। सागर कहता है कि उसके हृदय में मोती भरे हैं। जवाब में मेघ कहता है कि तुमने मुझसे जल का हरण किया है। सागर कहता है कि मैं सदा अपना कर्म करता हूँ। अगर सागर न होते तो मेघ न बनते अर्थात तुम्हें जन्म देने वाला मैं हूँ। मेघ मुस्कुराकर कहता है कि अगर बरसात न होती, तो नदियाँ कहाँ से उमड़ती और तुम्हें भरती। सागर मेघ पर व्यंग्य करते हुए कहता है कि आकाश में इधर-उधर मारे-मारे फिरते हो। मेघ सागर को हँसकर जवाब देता है कि मैं घूम-फिर कर संसार का निरीक्षण करता हूँ और जहाँ आवश्यक होता है; वहाँ जीवन-दान करता हूँ। अगर मैं न रहूँ, तो यह धरती बंजर हो जाएगी।

फिर मेघ सागर को उलाहना देते हुए कहता है कि तुम्हारा हृदय कठोर है क्योंकि तुम्हारे दिल में कंकड़-पत्थर भरे हुए हैं। जवाब में सागर कहता है कि जिन्हें तुम कंकड़-पत्थर समझ रहे हो वो असल में रत्न हैं। सागर आगे कहता है कि तुम सिर्फ शोर मचाना जानते हो। मेघ तुरंत जवाब देता है कि वह गरजने के साथ बरसना भी जानता है। लेकिन वह सागर की तरह नहीं है कि केवल उत्पातियों और अपराधियों को जगह देता है। सागर मेघ की बातों से क्रोधित हो उठता है और कहता है कि हाँ, मैं शरण अवश्य देता हूँ लेकिन दंड उतना ही होना चाहिए कि दंडित सावधान हो जाए; उसे अपाहिज नहीं होना चाहिए।

सागर की बातों से मेघ भी गुस्से में आ जाता है और कहता है यह भी कोई नीति हुई कि राजा अपने राज्य की रक्षा के लिए हमेशा शस्त्र लिए खड़ा रहे अपनी राज्य की उन्नति न कर पाए। अब सागर को असली बात समझ में आती है और वह मेघ से कहता है कि अपना क्रोध शांत करो और आओ हम दोनों मिलकर जनकल्याण का कार्य करें।

मेघ का भी क्रोध शांत होता है और वह कहता है कि प्रति वर्ष किसान मेरी प्रतीक्षा करता है। इसलिए हे सागर भाई, हमें आपस में उलझना नहीं चाहिए। दोनों प्रतिज्ञा करते हैं कि अब हम घमंड में एक-दूसरे का अपमान नहीं करेंगे। बल्कि लोक कल्याण के लिए कार्य करेंगे। मेघ कहता है कि मैं नदियों को भर-भर कर तुम तक भेजूंगा और सागर कहता है कि मैं सहर्ष उन्हें उपकार सहित ग्रहण करूँगा।।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 6 सागर और मेघ

शब्दार्थ:

  1. बुलंद – ऊँचा, उन्नत
  2. वारि – जल
  3. धरोहर – विरासत
  4. निरंतरता – अविरामता
  5. कायम रहना – बने रहना
  6. विकार – गंदगी
  7. तृप्त – संतुष्ट
  8. करतूत – कार्य
  9. हठात – हठपूर्वक
  10. वाड़व – समुद्र जल के अंदर वाली अग्नि
  11. मर्यादा. – सीमा
  12. आयास – विस्तार (आयाम)
  13. उच्छंखल – उदंड, उत्पाती
  14. रसा – पृथ्वी
  15. वंध्या – बंजर
  16. निपात – गिरना
  17. आततायियों – अत्याचारियों
  18. चेत जाना – सावधान होना
  19. शास्ता – राजा, शासक
  20. आतुरता – उत्सुकता

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions दूसरी इकाई

Class 9 Hindi Chapter 1 Chandni Raat Question Answer Maharashtra Board

Std 9 Hindi Chapter 1 Chandni Raat Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions Lokbharti Chapter 1 चाँदनी रात Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 1 चाँदनी रात Questions And Answers

Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 1 चाँदनी रात Textbook Questions and Answers

1. सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए :

(क) संजाल:

प्रश्न 1.
संजाल:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 2

(ख) चाँदनी रात की विशेषताएँ:

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 3

प्रश्न 1.
चाँदनी रात की विशेषताएँ:
उत्तर:

  1. सुंदर चंद्रमा की झिलमिलाती किरणें जल और थल में फैली हुई हैं।
  2. पृथ्वी और आकाश में स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है।
  3. हरी-हरी घास की नोकों के माध्यम से पृथ्वी अपनी खुशी प्रकट कर रही है।
  4. सभी वृक्ष मंद-मंद वायु के झोंकों से झूमते प्रतीत होते हैं।
  5. दूर-दूर तक फैली चाँदनी बहुत ही साफ दिखाई दे रही है।
  6. रात सन्नाटे से भरी है, कोई शोर नहीं हो रहा है।
  7. वायु स्वच्छंद होकर मंद-मंद गति से बह रही है।
  8. इस समय पूर्व, पश्चिम आदि सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात

2. निम्नलिखित पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए :

प्रश्न च.
चारु चंद्र ……….. झोंकों से ।
उत्तर:
भावार्थ: गुप्त जी चाँदनी रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सुंदर चंद्रमा की किरणें जल और थल में फैली हुई हैं। संपूर्ण पृथ्वी तथा आकाश में स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है। पृथ्वी हरी-हरी घास की नोकों के माध्यम से अपनी खुशी प्रकट कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है, मानो वृक्ष भी मंद-मंद वायु के झोंकों से झूम रहे हैं।

प्रश्न छ.
क्या ही स्वच्छ ………. शांत और चुपचाप ।
उत्तर:
भावार्थ: पंचवटी में दूर-दूर तक चाँदनी फैली हुई है, वह बहुत ही साफ दिखाई दे रही है। रात सन्नाटे से भरी है। कोई शब्द नहीं हो रहा है। वायु स्वच्छंद होकर अपनी स्वतंत्र चाल से मंद-मंद बह रही है। इस समय कौन-सी दिशा है जो आनंद नहीं ले रही है? अर्थात सभी दिशाएँ इस सौंदर्य से आनंदित हो रही हैं। उत्तरपश्चिम आदि सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है। कोई भी दिशा आनंद-शून्य नहीं है। ऐसे समय में भी नियति नामक शक्ति-विशेष के समस्त कार्य संपन्न हो रहे हैं। कोई रुकावट नहीं। वह एक भाव से अर्थात् अकेले-अकेले और चुपचाप अपने कर्तव्यों का निर्वाह किए जा रही है।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 4
उत्तर:
आकाश केवल बिजली नहीं चमकाता
पर्वत केवल चोटियाँ नहीं दिखलाता
पृथ्वी केवल भूकंप नहीं लाती
तारे केवल टिमटिमाते नहीं
वैसे ही, हाँ वैसे ही
मन में सिर्फ विचार नहीं आते
बल्कि विश्वास,
आस्था, प्रकाश, उदासी की
एक पावन श्रृंखला भी आती है।
जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़कर
मानवता के एकसूत्र में बाँधती है।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात

संभाषणीय :

शरद पूर्णिमा त्योहार के बारे में चर्चा कीजिए।

प्रश्न 1.
शरद पूर्णिमा त्योहार के बारे में चर्चा कीजिए।
उत्तरः

  • गौरी – अरे राधिका, आज बहुत फूल-माला खरीद रही हो, क्या बात है?
  • राधिका – गौरी तुम्हें मालूम नहीं कि आज शरद पूर्णिमा की रात होगी।
  • गौरी – अरे! मैं तो भूल ही गई थी।
  • राधिका – क्या तुम्हें मालूम है, यह त्योहार कब मनाया जाता है?
  • गौरी – हाँ, मालूम है, शरदीय नवरात्र के बाद पड़ने वाली पूर्णिमा को यह त्योहार मनाते हैं। परंतु इस त्योहार की क्या मान्यता है?
  • राधिका – ‘शरद पूर्णिमा’ हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है। ज्योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। ऐसी मान्यता भी है कि आश्विन शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है।
  • गौरी – राधिका, इस त्योहार के दिन किसकी व्रत-पूजा होती है?
  • राधिका – गौरी, इस दिन माँ लक्ष्मी का व्रत रखते हैं । पूरे वर्ष हम स्वस्थ और सुख-शांति से रहें, इसके लिए हम उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
  • गौरी – इसकी पूजा की विधि क्या है , राधिका?
  • राधिका – इस दिन मूर्ति बनाने वाले कारीगर के पास से एक लक्ष्मी की मूर्ति लाते हैं। पाँच तरह के फल व सब्जियों के साथ नारियल अर्पित कर उनकी पूजा करते हैं तथा उस मूर्ति को पूरे साल सँभाल कर रखते हैं। अगले वर्ष फिर शरद पूर्णिमा के दिन उस मूर्ति को विसर्जित कर नई प्रतिमा रखते हैं। इस दिन मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना होती है।
  • गौरी – तुमसे मिलकर बहुत प्रसन्नता हुई। इतनी अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद!

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भाषा बिंदु :

निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए।

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 5
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 6

Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 1 चाँदनी रात Additional Important Questions and Answers

पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति (1) आकलन कृति

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखिए।
i. ये अपनी खुशी प्रकट कर रही है
ii. ये वायु के झोंकों से झूम रहे हैं
उत्तर:
i. पृथ्वी
ii. वृक्ष

प्रश्न 2.
चौखट पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 9

प्रश्न 3.
चौखट पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 12

प्रश्न 4.
समझकर लिखिए।
i. पंचवटी की छाया में बना है
ii. धनुर्धर इस पर बैठा हुआ है
उत्तर:
i. पर्णकुटीर
ii. स्वच्छ शिला पर

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कृति (2) आकलन कृति

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 7

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 8

प्रश्न 2.
सही शब्द चुनकर वाक्य फिर से लिखिए।
i. क्या ही स्वच्छ/सुगंध चाँदनी है यह।
ii. नियति नदी/नटी के कार्य-कलाप।
उत्तरः
i. क्या ही स्वच्छ चाँदनी है यह।
ii. नियति नटी के कार्य-कलाप ।

प्रश्न 3.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 10

प्रश्न 4.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।
i. पंचवटी में अंधेरी रात है।
ii. सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है।
उत्तर:
i. असत्य
ii. सत्य कृति

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प्रश्न 5.
चौखट पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात 11

प्रश्न 6.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।
i. पृथ्वी मोतियों को समेट लेती है।
ii. सूर्य सबेरा होने पर मोतियों को बिखेर देता है।
उत्तर:
i. असत्य
ii. असत्य

प्रश्न 7.
एक-एक शब्द में उत्तर लिखिए।
i. सबके सो जाने पर मोती ये बिखेरती है
ii. सुबह होने पर मोतियों को ये बटोर लेता है
उत्तर:
i. वसुंधरा
ii. रवि

प्रश्न 8.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।
i. कुटीर पत्थरों का बना है।
ii. कुटीर में धौर-वीर निर्भीक मनवाला युवक बैठा है।
उत्तर:
i. असत्य
ii. असत्य

Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokbharti Solutions Chapter 1 चाँदनी रात

कृति (3) भावार्थ

निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए ।

प्रश्न 1.
है बिखेर देती ……………………… छलकता है।।
भावार्थ:
चाँदनी रात में पृथ्वी सबके सो जाने पर ओस रूपी मोतियों को बिखेर देती है। सूर्य हमेशा सुबह होने पर उन मोतियों को अपनी किरणों से बटोर लेता है और अस्त होने से पहले ही वह आराम प्रदान करने वाली संध्या देकर चला जाता है। मानो आकाश को साँवला शरीर देकर वह अपना नया-सा रूप छलका जाता है।

प्रश्न 2.
पंचवटी की ………………………… होता है।।
भावार्थः
कवि कहता है कि पंचवटी की घनी छाया में पत्तों की एक सुंदर कुटिया बनी हुई है। इस कुटिया के सामने एक स्वच्छ तथा विशाल पत्थर पड़ा हुआ है और उस पत्थर के ऊपर धैर्यशाली, निर्भय मनवाला पुरुष बैठा हुआ है। सारा संसार सो रहा है परंतु यह धनुषधारी इस समय भी जाग रहा है। यह वीर ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे भोग करनेवाला कामदेव यहाँ योगी बनकर आ बैठा हो।

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लेखनीय :

प्रश्न 1.
प्रकृति मनुष्य की मित्र है’, स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः
संदर्भ के लिए परिच्छेद (4) का स्वमत देखिए।

कल्पना पल्टन :

प्रश्न 1.
पुलक प्रगट करती है धरती हरित तणों की ‘नोकों से’ इस पंक्ति का कल्पना विस्तार कीजिए।
उत्तरः
चाँदनी रात में धरती से लेकर आकाश तक पूरी प्रकृति सुंदर और स्वच्छ किरणों में सराबोर है। धरती का कण-कण इन किरणों से दिप्त हो रहा है। धरती पर फैली हुई हरी-हरी घास की नोकों पर ओस की बूंदें पड़ी हैं, जिस पर चाँद की उज्ज्वल किरणें पड़ने से वे मोतियों की तरह चमक रही हैं। इनको देखकर ऐसा लगता है मानों धरती इन घास की नोकों पर चमकने वाली मोतियों के माध्यम से अपनी खुशी प्रकट कर रही हैं।

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पद्य-विश्लेषण :

कविता का नाम – चाँदनी रात
कविता की विधा – खंडकाव्य
पसंदीदा पंक्ति – चारू चंद्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल-थल में। स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अंबर तल में।

पसंदीदा होने का कारण –
उपर्युक्त पंक्ति मेरी पसंदीदा पंक्ति है क्योंकि उसमें ‘च’ वर्ष की बार-बार पुनरावृत्ति होने से अनुमास अलंकार की छटा दिखलाई दे रही है। इस कारण कविता के सौंदर्य में वृद्धि हो गई है।

कविता से प्राप्त संदेश या प्रेरणा –
प्रस्तुत कविता से प्रेरणा यह मिलती है कि व्यक्ति को चाँदनी रात की तरह अपना जीवन सुंदर बनाना चाहिए। मनुष्य को प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। प्रकृति मनुष्य के जीवन को शक्ति एवं आनंद प्रदान करती है। अत: उसे प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए व्यक्ति को पेड़ लगाने चाहिए।

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चाँदनी रात Summary in Hindi

कवि-परिचय:

जीवन-परिचय: मैथिलीशरण गुप्त जी खड़ी बोली के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश में झाँसी जिले के चिरगाँव में हुआ। 12 वर्ष की अवस्था में उन्होंने ब्रजभाषा में कविता की रचना आरंभ की। उनकी रचनाएँ पवित्रता, नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं और विशेषकर नारी के प्रति करुणा की भावना से ओतप्रोत हैं। उनकी रचनाओं से प्रसन्न होकर गाँधी जी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी। 12 दिसंबर 1964 ई. को दिल का दौरा पड़ने के कारण इनका निधन हो गया।
प्रमुख कृतियाँ: महाकाव्य – ‘साकेत’, खंडकाव्य – ‘यशोधरा’, ‘जयद्रथ वध’, ‘पंचवटी’, ‘भारत-भारती’, नाटक – ‘रंग में भंग’, ‘राजा-प्रजा’ आदि।

पद्य-परिचय:

खंडकाव्य: खंडकाव्य में मानव जीवन की किसी एक ही घटना की प्रधानता होती है। प्रासंगिक कथाओं को इसमें स्थान नहीं मिलता।
प्रस्तावना: प्रस्तुत कविता ‘चाँदनी रात’ पंचवटी खंडकाव्य से ली गई है। कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने इस कविता में प्रकृति की छटा का सुंदर रूप बड़े ही माधुर्य के साथ अभिव्यंजित किया है तथा चाँदनी रात का मनोहारी वर्णन सुंदर शब्दों में चित्रित किया है।

सारांश:

कवि चाँदनी रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि चंद्रमा की किरणें जल और थल में फैली हुई हैं। पृथ्वी से लेकर आकाश तक सर्वत्र चाँदनी बिछी हुई है। पूरी प्रकृति चाँदनी में सराबोर है। रात सन्नाटे में डूबी हुई है। वायु स्वच्छंद होकर मंद-मंद बह रही है। सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है। नियति चुपचाप अपने कर्तव्यों का पालन कर रही है। ऐसे में पंचवटी की छटा बहुत ही निराली प्रतीत होती है। उसकी घनी छाया में पत्तों की एक सुंदर कुटिया बनी हुई है। इसके सामने स्वच्छ शिला के ऊपर धैर्यशाली, निडर मनवाला एक पुरुष बैठा हुआ है। यह वीर ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे कामदेव योगी बनकर बैठा है।

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भावार्थ:

चारु चंद्र की …………………………. झोंकों से।।
गुप्त जी चाँदनी रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सुंदर चंद्रमा की किरणें जल और थल में फैली हुई हैं। संपूर्ण पृथ्वी तथा आकाश में स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है। पृथ्वी हरी-हरी घास की नोकों के माध्यम से अपनी खुशी प्रकट कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है, मानो वृक्ष भी
मंद-मंद वायु के झोंकों से झूम रहे हैं।

क्या ही स्वच्छ ………………………….. और चुपचाप।।
पंचवटी में दूर-दूर तक चाँदनी फैली हुई है, वह बहुत ही साफ दिखाई दे रही है। रात सन्नाटे से भरी है। कोई शब्द नहीं हो रहा है। वायु स्वच्छंद होकर अपनी स्वतंत्र चाल से मंद-मंद बह रही है । इस समय कौन-सी दिशा है जो आनंद नहीं ले रही है ? अर्थात सभी दिशाएँ इस सौंदर्य से आनंदित हो रही हैं। उत्तर-पश्चिम आदि सभी दिशाओं में आनंद ही आनंद व्याप्त है। कोई भी दिशा आनंद-शून्य नहीं है। ऐसे समय में भी नियति नामक शक्ति-विशेष के समस्त कार्य संपन्न हो रहे हैं। कोई रुकावट नहीं। वह एक भाव से अर्थात् अकेले-अकेले और चुपचाप अपने कर्तव्यों का निर्वाह किए जा रही है।

है बिखेर देती …………………………… छलकाता है।।
चाँदनी रात में पृथ्वी सबके सो जाने पर ओस रूपी मोतियों को बिखेर देती है। सूर्य हमेशा सुबह होने पर उन मोतियों को अपनी किरणों . से बटोर लेता है और अस्त होने से पहले ही वह आराम प्रदान करने वाली संध्या देकर चला जाता है। मानो आकाश को साँवला शरीर देकर वह अपना नया-सा रूप छलका जाता है।

पंचवटी की ……….. …………….. होता है।।
कवि कहते है कि पंचवटी की घनी छाया में पत्तों की एक सुंदर कुटिया बनी हुई है। इस कुटिया के सामने एक स्वच्छ तथा विशाल पत्थर पड़ा हुआ है और उस पत्थर के ऊपर धैर्यशाली, निर्भय मनवाला पुरुष बैठा हुआ है। सारा संसार सो रहा है परंतु यह धनुषधारी कौन है जो इस समय भी जाग रहा है? यह वीर ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे भोग करनेवाला कामदेव यहाँ योगी बनकर आ बैठा हो।

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शब्दार्थ:

  1. चारु – सुंदर
  2. थल – धरती
  3. स्वच्छ – साफ, निर्मल
  4. चाँदनी – चंद्रमा की किरणें
  5. अवनि – धरती
  6. अंबर – आकाश
  7. पुलक – खुशी,रोमांच
  8. तृण – घास
  9. झूम – झूमना
  10. तरु – पेड़
  11. निस्तब्ध – सन्नाटे से भरी
  12. निशा – रात
  13. स्वच्छंद – स्वतंत्र
  14. सुमंद – मंद-मंद
  15. गंधवाह – वायु
  16. निरानंद – आनंदरहित
  17. नियति – नियतिरूपी
  18. नटी – नर्तकी
  19. कार्य-कलाप – क्रिया-कलाप, गतिविधि
  20. एकांत – सुनसान, विरान
  21. वसुंधरा – धरती
  22. विरामदायिनी – आराम देने वाली
  23. शून्य – आकाश
  24. श्याम तनु – साँवला शरीर
  25. पर्ण कुटीर – पत्तों की कुटिया
  26. सम्मुख – सामने
  27. शिला – चट्टान, पत्थर
  28. निर्भीक मना – निडर मन वाला
  29. भुवन – संपूर्ण संसार
  30. भोगी – भोग करनेवाला
  31. कुसुमायुध – कामदेव
  32. योगी – तपस्वी
  33. दृष्टिगत – जो दिखाई पड़ता है

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Hindi Lokvani 9th Digest Chapter 2 झुमकाQuestions And Answers

1. आकृति पूर्ण कीजिए।

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 झुमका 1

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 झुमका 2

प्रश्न 3.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 झुमका 3

2. निम्नलिखित घटनाओं को कालक्रमानुसार लिखिए। 

प्रश्न 1.
निम्नलिखित घटनाओं को कालक्रमानुसार लिखिए।
i. आलमारी के नीचे विछे कागज तक उलटकर देख लिए।
ii. कांति सिर से पाँव तक सिहर उठी।
iii. बिस्तर हटाकर दो-दो बार झाड़ डाला।
iv. कांति ने घर का कोना-कोना ढूँढ़ मारा।
उत्तर :
(iv), (i), (iii), (ii)

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3. कारण लिखिए।

प्रश्न 1.
कारण लिखिए।
i. कांति को सर्वेश से झुमका खरीदवाने की हिम्मत नहीं हुई –
ii. कांति ने कमलाबाई को एक हजार रुपए दिए
उत्तर :
i. मार्च का महीना और इनकम टैक्स का टेंशन था इसलिए कांति को सर्वेश से झुमका खरीदवाने की हिम्मत नहीं हुई।
ii. एक झुमके की कीमत एक हजार रुपए थी।

4. निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।

  1. नीचे ………
  2. खरीदना …………
  3. अगला …………
  4. खूबसूरत ……….
  5. सुबह ……….
  6. संकोच ………

उत्तर:

  1. ऊपर
  2. बेचना
  3. पिछला
  4. बदसूरत
  5. शाम
  6. नि:संकोच

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5. सही विकल्प चुनकर पूर्ण वाक्य फिर से लिखिए । 

प्रश्न i.
कमलाबाई की लड़की दो महीने से ………….
(क) ससुराल में है।
(ख) ननिहाल में है।
(ग) मायके में है।
उत्तर:
(ग) मायके में है।

प्रश्न ii.
कमलाबाई ने भर आई आँखों की कोरों को ………….
(क) रूमाल से पोंछ डाला।
(ख) तौलिए से पोंछ डाला।
(ग) कोहनी से पोंछ डाला।
उत्तर:
(ग) कोहनी से पोंछ डाला।

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6. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए।

  1. निद्रा
  2. मुश्किल
  3. रोजगार
  4. आभूषण

उत्तर:

  1. नींद
  2. कठिनाई
  3. नौकरी
  4. गहना

7. ‘दहेज’ समाज के लिए एक कलंक है, इस पर अपने विचार लिखिए।

प्रश्न 1.
‘दहेज’ समाज के लिए एक कलंक है, इस पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
दहेज आज कन्या-पक्ष के शोषण का माध्यम बन गया है। कहीं यह शोषण नगद धन-राशि के रूप में होता है, तो कहीं आभूषण, तो कहीं गाड़ी, मोटर-साइकिल, स्कूटर आदि के रूप में होता है। वधुओं को अनेक प्रकार की शारीरिक तथा मानसिक यातनाएँ दी जाती हैं। कभी वधु को जलाकर मार डाला जाता है तो कभी बहू को विष देकर मार डाला जाता है तो कभी इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वह स्वयं आत्महत्या कर लेती है। सबसे बड़ा दुख तो इस बात का है कि हमारे समाज में शिक्षित वर्ग भी दहेज को अपना समर्थन दे रहा है।

8.  एक से दो शब्दों में उत्तर दीजिए। 

प्रश्न 1.
एक से दो शब्दों में उत्तर दीजिए।
i. कमलाबाई की पगार
ii. कमलाबाई ने नोट यहाँ रखे
उत्तर:
i. दौ सौ रुपए
ii. पल्लू में

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9. ‘सौ’ शब्द का प्रयोग करके कोई दो कहावतें लिखिए।

प्रश्न 1.
‘सौ’ शब्द का प्रयोग करके कोई दो कहावतें लिखिए।
उत्तर:
i. सौ सुनार की, एक लोहार की।
ii. एक अनार, सौ बीमार।

10. अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
निम्न सामाजिक समस्याओं को लेकर आप क्या कर सकते है, बताइए। ।
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 झुमका 5
उत्तर :
अशिक्षा और बेरोजगारी देश के सम्मुख प्रमुख समस्याएँ हैं जो प्रगति के मार्ग को तेजी से अवरुद्ध करती हैं। स्वतंत्रता के पचास वर्षों बाद भी सभी को रोजगार देने और शिक्षित करने के अपने लक्ष्य से हम मीलों दूर हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि बेरोजगारी और अशिक्षा के प्रमुख कारणों जैसे बढ़ती जनसंख्या, शिक्षा व्यवस्था, लघु उद्योगों का नष्ट होना आदि पर विशेष ध्यान दिया जाए और इसके निदान हेतु सार्थक उपाय किए जाएं।

इसके लिए सर्वप्रथम हमें अपने छात्र-छात्राओं तथा युवक-युवतियों की मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा। यह तभी प्रभावी हो सकता है जब हम अपनी शिक्षा पद्धति में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। विद्यालयों में तकनीकी कार्य पर आधारित शिक्षा दें जिससे उनकी शिक्षा का प्रयोग उद्योगों व फैक्ट्रियों में हो सके और वे आसानी से नौकरी पा सकें।

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11. एक-दो शब्दों में ही उत्तर लिखिए।

प्रश्न 1.
एक-दो शब्दों में ही उत्तर लिखिए।
(क) दुबली-पतली
(ख) कमजोर-सी
(ग) दो महीने से मायके में है-
(घ) दो महीने से यहीं है
उत्तर:
(क) कमलाबाई की लड़की
(ख) कमलाबाई की लड़की
(ग) कमलाबाई की लड़की
(घ) मायके में

12. अपने घरों में काम करने वाले नौकरों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। उस पर आधारित अपने विचार लिखिए।

प्रश्न 1.
अपने घरों में काम करने वाले नौकरों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। उस पर आधारित अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
घर के नौकरों को अपने परिवार का ही एक सदस्य समझना चाहिए। उसके साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करना चाहिए। नौकर घर के अन्य कामों के साथ ही घर के लोगों का भी ख्याल करता है । इसलिए घर के लोगों को भी उसका ख्याल करना चाहिए। नौकर के खाने, कपड़े तथा दवा आदि का ध्यान देना चाहिए। उसकी ईमानदारी पर हमें पूरा भरोसा होना चाहिए। उसे कभी भी पराया नहीं समझना चाहिए। सुख-दुख में उसका साथ देना चाहिए। उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा अपनेपन का भाव रखना चाहिए।

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13. भाषाई कौशल पर आधारित पाठगत कृतियाँ

भाषा बिंदु : 

प्रश्न 1.
रेखांकित शब्दों के विलोम शब्द लिखकर नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:

विलोम शब्द वाक्य
1. कांति को कमला पर विश्वास था। अविश्वास सैनिकों के मन में राजा के प्रति अविश्वास फैल गया।
2. बड़ी मुश्किल से उसकी आँख लगी। आसान भारत से क्रिकेट मैच जीतना आसान नहीं है।
3. दुकानदार रमा का परिचित था। अपरिचित हम महात्मा की शक्तियों से अपरिचित हैं।
4. सोच समझकर व्यय करना चाहिए। आय हमें सरकार को अपनी आय का ब्यौरा देना चाहिए।
5. हमें सदैव अपने लिए किए गए कामों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। कृतघ्न मैं कितना कृतघ्न हूँ कि माँ-बाप को ही भूला दिया।
6. पूर्व दिशा में सूर्योदय होता है। सूर्यास्त पश्चिम दिशा में सूर्यास्त होता है।

14. रचनात्मकता की ओर लेखनीय :

प्रश्न 1.
‘दहेज’ समाज के लिए एक कलंक है, इस पर अपने विचार लिखिए।
उत्तरः
दहेज आज कन्या-पक्ष के शोषण का माध्यम बन गया है। कहीं यह शोषण नगद धन-राशि के रूप में होता है, तो कहीं आभूषण, तो कहीं गाड़ी, मोटर-साइकिल, स्कूटर आदि के रूप में होता है। वधुओं को अनेक प्रकार की शारीरिक तथा मानसिक यातनाएँ दी जाती हैं। कभी वधु को जलाकर मार डाला जाता है तो कभी बहू को विष देकर मार डाला जाता है तो कभी इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वह स्वयं आत्महत्या कर लेती है। सबसे बड़ा दुख तो इस बात का है कि हमारे समाज में शिक्षित वर्ग भी दहेज को अपना समर्थन दे रहा है।

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15. मौलिक सृजन

प्रश्न 1.
हम समाज के लिए समाज हमारे लिए’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
हम एक सामाजिक प्राणी हैं जो आपस में मिल-जुलकर रहते हैं। हमें अपना जीवन सुचारु रूप से चलाने के लिए एक-दूसरे के सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। व्यक्ति दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करता है, दूसरे भी उसके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं। इसलिए हमें समाज के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। समाज-से अलग रहने वाला व्यक्ति पशु के समान माना जाता है। हम समाज को अच्छा-बुरा जो भी देते हैं. हमें भी वापस वही मिलता है। हम कह सकते हैं कि हम और समाज एक-दूसरे के पूरक हैं।

16. पाठ के आगे :

प्रश्न 1.
आभूषणों की सूची तैयार कीजिए और शरीर के किन अंगों पर पहने जाते हैं, बताइए।
उत्तरः
शरीर के विविध अंगों पर पहने जानेवाले आभूषण निम्नलिखित रूप में है: नाक-कील, पाँव-पायल, गला-हार, अंगुली-अंगूठी, कमरकरधनी, कलाई-चूड़ियाँ, कान-कुंडल आदि।

Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 2 झुमका Additional Important Questions and Answers

(क) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति क (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानिए।
i. झुमके
ii. दुकानदार
उत्तर:
i. पुल्लिंग
ii. पुल्लिंग

कृति क (3): स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘मार्च महीना और इनकम टैक्स’ का तात्पर्य 8 से 10 पंक्तियों में लिखिए।
उत्तर:
सरकार द्वारा निर्धारित राशि से अधिक आय होने पर बढ़े हुए आय का कुछ अंश हमें सरकार के खाते में जमा करना पड़ता है। जिसे ‘टैक्स’ कहते हैं। यह टैक्स हर वर्ष मार्च महीने के अंत में भरना पड़ता है। सरकार की वित्तनीति के अनुसार यह टैक्स पिछले 12 महीने की आय का होता है। जिसकी समयावधि पिछले वर्ष के 1 अप्रैल से लेकर वर्तमान वर्ष के 31 मार्च तक के बीच की होती है।

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(ख) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ख (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
घटनानुसार उचित क्रम लगाकर वाक्य फिर से लिखिए।

  1. घर आकर कांति ने झुमके का पैकेट मेज़ पर रख दिया।
  2. सुनार के यहाँ से तो दोनों झुमके लाई थी।
  3. अभी चलकर ठीक करा ले।

उत्तर :

  1. अभी चलकर ठीक करा ले।
  2. घर आकर कांति ने झुमके का पैकेट मेज़ पर रख दिया।
  3. सुनार के यहाँ से तो दोनों झुमके लाई थी।

प्रश्न 2.
सत्य या असत्य पहचानकर लिखिए।
i. कांति तुरंत ही रमा के साथ टैक्सी करके सुनार के यहाँ चली गई।
ii. घर आकर कांति ने झुमके का पैकेट आलमारी पर रख दिया।
उत्तर:
i. असत्य
ii. असत्य

प्रश्न 3.
उपर्युक्त गद्यांश से दो ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों –
i. मेज़
ii. झुमका
उत्तर:
i. घर आकर कांति ने झुमके का पैकेट कहाँ पर रख दिया?
ii. सुनार ने आधे घंटे में क्या ठीक करके दे दिया?

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कृति ख (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए ।
i. झुमके
ii. आलमारी
उत्तर:
i. झुमका
ii. आलमारियाँ

प्रश्न 2.
गद्यांश में आए शब्द-युग्म चुनकर लिखिए।
उत्तर :
काम-काज, छोटी-मोटी, मामूली-सी

कृति ख (3) : स्वमत अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
‘स्त्री और आभूषण’ पर 8 से 10 पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
स्त्री और आभूषण का संबंध प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। स्त्रियों को आभूषणों से गहरा प्रेम होता है और आभूषण पहनने से स्त्रियों की सुंदरता में चार चाँद लग जाता है। प्राचीन काल में सोने और चांदी के आभूषणों का प्रचलन कम होने के कारण उस समय की नारियाँ फूल और पत्तों से बने आभूषण पहनती थी, परंतु आधुनिक युग की स्त्रियाँ सोने, चाँदी, हीरे व मोती से बने आभूषणों का प्रयोग करती हैं। कुछ आभूषणों का अपना अलग महत्त्व है।

ये ग्रहों को प्रभावित करते हैं इसलिए ग्रहों को प्रभावशाली बनाने के लिए अलग-अलग धातु व रत्नों से बने गहने पहने जाते हैं। आज के युग में आभूषणों का प्रचलन बहुत अधिक होता जा रहा है। आधुनिक युग की स्त्रियाँ अपने वस्त्रों के अनुसार ही आभूषण धारण करती हैं।

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(ग) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ग (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
एक-एक शब्द में उत्तर लिखिए ।

  1. खाना खाकर दोपहर की नींद लेने के लिए कांति कहाँ पर लेटी?
  2. कांति की बंद आँखों के सामने क्या घूमता रहा?
  3. दरवाजे की घंटी किसने बजाई?
  4. कमलाबाई की लड़की का घरवाला किस कंपनी में काम करता है?

उत्तर:

  1. बिस्तर
  2. झुमका
  3. कमलाबाई
  4. ट्रांसपोर्ट

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 झुमका 4

कृति ग (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 3.
गद्यांश से शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए ।
उत्तर :
i. दो-चार
ii. चौका-बासन

(घ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति घ (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
निम्नलिखित विधान सत्य है या असत्य लिखिए।
i. कमलाबाई अपनी पिछले महीने की पगार लेती जाना।
ii. कमलाबाई झुमका कहीं बेचने जाएगी तो कोई समझेगा कि चोरी का है।
उत्तर:
i. असत्य
ii. सत्य

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कृति घ (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 2.
गद्यांश में आए हुए शब्द-युग्म लिखिए।
उत्तर :
i. सौ-सौ
ii. हलका – फुलका

(ङ) गद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति ङ (1) : आकलन कृति

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 2 झुमका 6

कृति ङ (2) : शब्द संपदा

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।
i. करीब ……….
ii. होश ………..
उत्तर:
i. दूर
ii. बेहोश

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प्रश्न 2.
लिंग परिवर्तन कीजिए।
i. पति
ii. सुहाग
उत्तर:
i. पत्नी
ii. सुहागन

झुमका Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन-परिचय : सुशील सरित जी आधुनिक हिंदी कथाकार हैं। आपकी कहानियाँ, निबंध विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्राय: प्रकाशित होती रहती हैं।

गद्य-परिचय :

वर्णनात्मक कहानी : जीवन की किसी घटना का रोचक, प्रवाही वर्णन ही वर्णनात्मक कहानी है। इसमें वर्णन की प्रधानता होती है।
प्रस्तावना : प्रस्तुत कहानी के माध्यम से लेखक ने परोपकार, दया एवं अन्य मानवीय गुणों को दर्शाते हुए इन्हें अपनाने तथा नौकरों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार एवं उनकी मदद करने का मानवीय संदेश दिया है।

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सारांश :

प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बताया है कि कांति नाम की एक महिला का एक झुमका गायब हो गया जिसे वह पूरे घर में ढूँढ़ती रही पर वह नहीं मिला। उसने वह झुमका दो साल की बचत के बाद खरीदा था जिसके बारे में उसके पति सर्वेश को भी नहीं मालूम था। दरअसल झुमके का वह जोड़ा बहुत ही खूबसूरत था तथा सुनार ने परिचित होने के कारण चार तोले का लगनेवाले उस झुमके को सिर्फ दो हजार में दे दिया था।

वह झुमके को अपनी ‘मैरिज एनिवर्सरी’ पर पहनने वाली थी। झुमके में बगलवाला मोती टूटने के कारण वह सुनार के पास वापस गई तो सुनार ने उसे ठीक कर दिया। घर आकर उसने झुमके का पैकेट मेज़ पर रख दिया और घर के कार्यों में व्यस्त हो गई। घर का काम निपटाकर जब वह पैकेट देखने लगी तो उसमें से एक झुमका गायब था।

जिसके कारण उसे दोपहर की नींद नहीं आई। उसकी नौकरानी कमलाबाई के आने पर कांति ने दरवाजा खोला। कमलाबाई ने आकर बताया कि उनकी बेटी दो महीने से मायके में है क्योंकि उसके ससुराल वाले दहेज और गहने की माँग कर रहे हैं। गरीब होने के कारण वह इतना दहेज नहीं दे सकती। घर के कामों को निपटाकर जब वह जाने लगी तो कांति ने उसे उसकी दो सौ रुपए पगार दिया। कमलाबाई ने दरवाजे से वापस लौटकर कांति को एक झुमका देते हुए बताया कि उसे वह रास्ते में सड़क पर पड़ा मिला।

वह बेचेगी तो कोई समझेगा कि चोरी का है। वह झुमका बेचकर अपनी लड़की के लिए गहने बनवाना चाहती थी। अत: उसने कांति को झुमका बेचने के लिए कहा। कांति ने झुमका देखकर पहचान लिया कि वह उसी का है। किंतु कमलाबाई के लड़की के हालात को समझकर वह चुप रही तथा झुमके को आलमारी में रख दिया और कमलाबाई को एक हजार रुपया देते हुए कहा कि यदि झुमका बेचने पर अधिक पैसा मिलेगा तो वह उसे दे देगी। पैसा पाकर कमलाबाई कांति को आशीर्वाद देते हुए सुनार के पास अपनी लड़की के लिए गहने खरीदने चली गई।

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शब्दार्थ :

  1. कोना-कोना ढूँढ़ मारा – हर जगह ढूँढ़ना
  2. झुमका – कान में पहने जाने वाला एक आभूषण, कुंडल
  3. गनीमत – संकट में संतोष की बात
  4. तसल्ली – धोरज
  5. कोहनी – टिहुनी (बाँह के बीच का जोड़)
  6. रकम – पैसा
  7. इकट्ठा – एकत्रित, जमा
  8. दरअसल – सच में, वास्तव में खूबसूरत
  9. चार तोले – 40 ग्राम
  10. परिचित – जाना-पहचाना, पहचान वाला
  11. आग्रह – निवेदन
  12. चौका-बासन – रसोई घर, बरतन साफ करना
  13. इनकम टैक्स – आयकर
  14. टेंशन – तनाव
  15. मामूली-सी – छोटी-सी
  16. नि:संकोच – जिना संकोच के
  17. तसल्ली – दिलासा
  18. पैकेट – थैली
  19. ड्राइंग रूम – बैठक
  20. तबीयत – सेहत
  21. सफाई देना – ईमानदारी दर्शाना
  22. मायके – माँ का घर
  23. खबर – सूचना
  24. घरवाला – पति
  25. झबिया – छोटी टोकरी
  26. भर आई आँखें – आँसूभरी आँखें
  27. सहानुभूति – हमदर्दी
  28. समेटकर – इकट्ठा कर
  29. किचन – रसोई घर
  30. सहम – डर
  31. गंदुमी – गेहुँआ रंग
  32. सुहाग सलामत रखे – पति बने रहें, पति दोधार्यु हो

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मुहावरे :

  1. सिहर उठना – भय से काँपना।
  2. घर सर पर उठा लेना – शोर मचाना।
  3. वादा करना – वचन देना।
  4. आँख फटना – चकित हो जाना।
  5. वादा करना – वचन देना।
  6. आँख फटना – चकित हो जाना।

Hindi Lokvani 9th Std Digest पहली इकाई

Vishwakosh Question Answer Class 9 Marathi Chapter 20.1 Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Kumarbharti Chapter 20.1 विश्वकोश Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Class 9 Marathi Aksharbharati Chapter 20.1 विश्वकोश Question Answer Maharashtra Board

विश्वकोश Std 9 Marathi Chapter 20.1 Questions and Answers

1. टिपा लिहा:

प्रश्न 1.
विश्वकोशाचा उपयोग.
उत्तर:
शिक्षणाचा प्रसार खूप झपाट्याने झाला. औदयोगिकीकरणामुळे समाजाच्या वैज्ञानिक व तांत्रिक गरजा वाढल्या. विविध प्रकारचे शब्द अस्तित्वात आले व भाषा समृद्ध झाल्या. त्यामुळे आजच्या यंत्रयुगातील व विज्ञानयुगातील माणसाला आपले ज्ञान विश्वव्यापी व अदययावत करण्यासाठी विश्वकोशाची गरज निर्माण झाली. मानव्यविदया, विज्ञान व तंत्रज्ञान यांतील सर्वसंग्रहित विषयांची माहिती व ज्ञान विश्वकोशात समाविष्ट असते. मुख्य विषय व त्याच्या संलग्न विषयांचे ज्ञान मिळवण्यासाठी विश्वकोशाचा अत्यंत निकडीचा उपयोग आहे.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश

प्रश्न 2.
विश्वकोशाची निर्मिती प्रक्रिया.
उत्तर:
मानव्यविदया, विज्ञान व तंत्रज्ञान यांतील सर्व विषयांचे अययावत ज्ञान संकलित करण्यासाठी विश्वकोशाची निर्मिती झाली. प्रथम विषयवार तज्ज्ञांच्या समितीची रचना करण्यात आली. प्रत्येक विषयाच्या नोंदीची शीर्षके निश्चित करण्यात आली. नोंदीचे तीन प्रकार करण्यात आले – मुख्य, मध्यम व लहान नोंदी. त्यांतील मुद्द्यांची टाचणे करण्यात आली.

नोंदींच्या मर्यादा आखून टाचणांमध्ये तशा सूचना दिल्या. प्रत्येक विषयातील नोंदींच्या त्यांच्या प्रकारांनुसार यादया तयार करण्यात आल्या. अकारविल्यानुसार या यादया क्रमवार लावण्यात आल्या. अशा प्रकारे 1976 साली महाराष्ट्र राज्य साहित्य संस्कृती मंडळाने मराठी विश्वकोशाचा पहिला खंड प्रकाशित केला. आतापर्यंत विश्वकोशाचे अठरा खंड प्रकाशित झाले आहेत.

2. ‘शब्दकोडे सोडवल्यामुळे भाषिक कौशल्य वाढते,’ याविषयी तुमचे मत लिहा.

प्रश्न 1.
‘शब्दकोडे सोडवल्यामुळे भाषिक कौशल्य वाढते,’ याविषयी तुमचे मत लिहा.
उत्तर:
विविध मासिकांमधून व वर्तमानपत्रांमधून पुरवण्यांच्या द्वारे शब्दकोडी सर्रास दिली जातात. शब्दकोडे सोडवल्यामुळे अनेक जुने-नवे शब्द कळतात. आपली शब्दसंपत्ती वाढते. त्यामुळे बुद्धीत भर पडतेच पण आपल्याला शब्दांच्या अर्थछटा माहीत होऊन आपले ज्ञान वाढते. शब्दसमूहासाठी एक शब्द, एका शब्दांचे भिन्न अर्थ, प्रतिशब्द व विरुद्धार्थी शब्द यांचा बहुमोल खजिना लुटता येतो.

उदाहरणार्थ, जंगल या शब्दाला – अरण्य, रान, वन, कानन, विपीन असे पर्यायी शब्द कळल्यामुळे आपण शब्दसंपन्न होतो. शब्दकोडे सोडवताना गंमत येतेच, शिवाय बौद्धिक व मानसिक निर्मळ आनंद मिळतो. कालानुरूप शब्दांच्या अर्थकक्षा कशा रुंदावल्या व फैलावल्या यांची जाण शब्दकोड्यामुळे येते. अशा प्रकारे शब्दकोडे सोडवल्यामुळे भाषिक कौशल्य वाढते.

3. विश्वकोश पाहण्याचे तुमच्या लक्षात आलेले फायदे लिहा.

प्रश्न 1.
विश्वकोश पाहण्याचे तुमच्या लक्षात आलेले फायदे लिहा.
उत्तर:
आपल्याला माहीत नसलेल्या विषयांची सांगोपांग माहिती मिळवण्यासाठी विश्वकोश आपला मदतनीस होतो. त्या विषयाच्या अनुषंगाने असलेले संलग्न विषय कळतात व विषयसाखळीमुळे त्या त्या विषयाचे सखोल ज्ञान प्राप्त होते. आपले ज्ञानाविषयीचे कुतूहल शमवण्याचे विश्वकोश हे एक उत्तम साधन आहे. विश्वकोश पाहण्याने आपले जागतिक ज्ञानक्षेत्राचे क्षितिज विस्तारते. आपल्या अभिव्यक्तीला योग्य चालना मिळते. मराठी विश्वकोश हाताळल्यामुळे सर्व प्रकारचे प्रगल्भ व सूक्ष्म ज्ञान मराठी भाषेतून मिळते व आपल्या ज्ञानविषयक गरजा भागतात.

4. केशभूषेचे उद्देश सांगून, त्यात कोणत्या गोष्टींचा अंतर्भाव होतो, ते स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
केशभूषेचे उद्देश सांगून, त्यात कोणत्या गोष्टींचा अंतर्भाव होतो, ते स्पष्ट करा.
उत्तर:
मोकळे केस इतरांना दिसू नयेत, म्हणून पुरातन स्त्रियांनी केशबंधनाची कल्पना राबवली असावी. या कल्पनेतून केशभूषेचा उगम झाला असावा. लेण्यांमधल्या शिल्पकृतीत आढळणाऱ्या स्त्रियांनी केलेल्या प्राचीन केशरचनांचे अनुकरण भारतीय स्त्रिया करताना आढळतात. केशभूषेचा मुख्य उद्देश हा आकर्षकता व सौंदर्य वाढवणे हा आहे. सामाजिक संकेतानुसार प्रतीकात्मक केशभूषा करणे, हा केशभूषेचा सामाजिक उद्देश ठरतो. केशभूषेत केस कापणे, केस धुणे, नीट करणे, विंचरणे, कुरळे किंवा सरळ करणे या गोष्टींचा अंतर्भाव होतो.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश

5. विश्वकोशाचा उपयोग तुम्हांला मराठी भाषेतील ज्ञान प्राप्त करण्यासाठी कसा होऊ शकेल, ते लिहा.

प्रश्न 1.
विश्वकोशाचा उपयोग तुम्हांला मराठी भाषेतील ज्ञान प्राप्त करण्यासाठी कसा होऊ शकेल, ते लिहा.
उत्तर:
मराठी भाषेतील कोणत्याही विषयाचे ज्ञान मिळवण्यासाठी मराठी विश्वकोश हे अतिशय उत्तम साधन आहे. ज्ञान, विज्ञान, तंत्रज्ञान, तत्त्वज्ञान, क्रीडा व कला इत्यादी अनेक ज्ञानक्षेत्रांबद्दलचे आपले कुतूहल पूर्ण करण्याचे कार्य मराठी विश्वकोशातर्फे सुलभ झाले आहे. मराठी भाषेची व्युत्पत्ती, तिचा इतिहास, वेदांपासून ते अदययावत साहित्याविषयीची सर्वांगीण माहिती व ज्ञान मिळवणे विश्वकोशामुळे सहज झाले आहे. मराठी भाषा ही माझी मातृभाषा आहे. तिच्यावर माझे नितांत प्रेम आहे. मराठी भाषेतील प्राचीन काव्य, अनेकविध रचनाबंध समजून घेण्यासाठी मला मराठी विश्वकोशाचा उपयोग होईल. मराठी भाषेतील अद्ययावत ज्ञानाने माझे व्यक्तिमत्त्व संपन्न होण्यास मदत होईल.

भाषा सौंदर्य:

विश्वकोश अकारविल्ल्यानुसार (अनुज्ञेय) पाहाबा हे आपल्याला कळले. त्यासाठी संपूर्ण वर्णमाला (आता अँव ऑ हे स्वर धरून) आपल्याला क्रमाने मुखोद्गत असायला हवी. त्या योग्य वर्णाची आणि त्यांची उच्चारस्थाने, परिपूर्ण आकलनही असावयास हवे. (उदा., स्वर, स्वरादी, व्यंजन, महाप्राण, मृदू व्यंजने, कठोर व्यंजने, अनुनासिके).

प्रश्न 1.
पुढील कोडे सोडवा:
Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 1

  1. पैसे न देता, विनामूल्य.
  2. पाणी साठवण्याचे मातीचे गोल भांडे.
  3. जिच्यात रेतीचे प्रमाण खूप जास्त असते अशी जमिनीची जात.
  4. रहस्यमय.
  5. खास महाराष्ट्रीय पक्वान्न. पोळ्या, मोदक, करंज्या यांमध्ये हे भरतात.

उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 2
वरील कोडे वैशिष्ट्यपूर्ण आहे. त्याचे उत्तर तुम्हाला सोडवायचे आहे. हे कोडे सोडवल्यावर तुम्हांला निश्चितच भाषेचे सौंदर्य व गंमत लक्षात येईल. अशा कोड्यांचा अभ्यास करा. त्यातील भाषिक वैशिष्ट्ये समजून घ्या व अशी विविध वैशिष्ट्यांची कोडी तयार करण्याचा तुम्ही स्वतः प्रयत्न करा.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश

मैत्री तंत्रज्ञानाशी:

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 3
वडील: (सोनालीच्या आईशी बोलताना.) “अग, लाईटबिल भरण्याची अंतिम तारीख आजच आहे; पण आज माझी ऑफिसमध्ये महत्वाची मीटिंग आहे. काय करावं बरं?”

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 4
सोनाली: “बाबा, एवढी काळजी कशाला करता, लाईट बिलच भरायचय ना? आणा इकडे, मी भरते एका मिनिटांत, तेही उन्हातान्हात बाहेर न जाता, धावपळ न करता.”

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 5
सोनाली: “अग आई, एवढं आश्चर्यानं काय पाहतेस? आपल्याकडे संगणक आहे, आंतरजाल आहे. आता आपण ऑनलाईन बिल घरच्या घरी भरू शकतो. चल आई, मी तुला ऑनलाईन बिल कसे भरायचे ते दाखवते.”

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 6
आई: (मुलगी ऑनलाईन बिल भरते. आई-वडील तिच्या कृतींचे निरीक्षण करतात.) “शाबास बाळा! किती आत्मविश्वासाने संगणक हाताळतेस. बाजार करणं, बिलं भरणं, खरेदी करणं, वस्तू विकणं, असे ऑनलाईन व्यवहार मलाही शिकव.”

प्रश्न 1.
कमी वेळात, कमी कष्टात ऑनलाईन प्रक्रियेद्वारे तुम्ही कोणकोणती कामे करू शकता? त्यांची यादी करा.
उत्तर:

  1. लाईट बिल भरणे
  2. टेलिफोन बिल भरणे
  3. गॅसचे बिल भरणे
  4. आवश्यक वस्तू खरेदी करणे
  5. वस्तू विकणे
  6. गृहोपयोगी वस्तूंची मागणी करणे
  7. प्रवासासाठी बस, रेल्वे, विमान किंवा खाजगी वाहन यांची बुकिंग करणे
  8. भेटवस्तू पाठवणे.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश

उपक्रम:

प्रश्न 1.
ऑनलाईन व्यवहार करण्यासाठी उपलब्ध असलेले विविध अॅप्स कोणते?
त्यांचा वापर कसा करावा याविषयीची माहिती मिळवा.

विश्वकोश Summary in Marathi

पाठाचा परिचय:

या पाठात विश्वकोशाची ओळख करून दिली आहे. विश्वकोश का व कसा तयार झाला, वेगवेगळे संदर्भ मिळवण्याची आनंददायी प्रक्रिया, भाषासमृद्धी, तसेच एका विषयाच्या निमित्ताने अनेक संलग्न विषयांची माहिती मिळणे, ही विश्वकोशाची वैशिष्ट्ये आहेत.

पाठातील महत्त्वाचे मुद्दे:

1. आपल्या शाळेत, गावात, शहरात ग्रंथालय (वाचनालय) असते. मराठीतील विविध साहित्यसंपदा व अनेक विषयांची पुस्तके उपलब्ध होतात. मराठी विश्वकोश, मराठी चरित्रकोश, मराठी व्युत्पत्तिकोश इत्यादी ग्रंथसंपदा हा प्रत्येक ग्रंथालयाचा ‘मानबिंदू’ आहे.
2. मानव्यविदया (Social sciences), विज्ञान (Pure science) व तंत्रज्ञान (Technology) यांतील सर्व विषयांचे आजतागायतचे ज्ञान संकलित करण्यासाठी विश्वकोशाची निर्मिती झाली. मुख्य विषय व त्याच्या संलग्न विषयाचे ज्ञान मिळवण्यासाठी मराठी विश्वकोशाचा उपयोग होतो.
3. विश्वकोशाची गरज: भारतात शिक्षणाचा प्रसार वेगाने होऊ लागला. वाढत्या औदयोगिकीकरणामुळे समाजाच्या वैज्ञानिक व तांत्रिक गरजा वाढू लागल्या. अनेक शब्द अस्तित्वात येऊन भाषा समृद्ध होऊ लागली. त्यामुळे सर्वविषयसंग्राहक अशा विश्वकोशाची गरज निर्माण झाली.

उच्च शिक्षणाचे माध्यम म्हणून मराठी भाषेचा स्वीकार झाला. त्यामुळे मराठीमध्ये निर्माण झालेली संदर्भग्रंथांची तीव्र आवश्यकता, तसेच शासनव्यवहाराची भाषा म्हणून राज्यपातळीवर मराठीला मिळालेली मान्यता या पार्श्वभूमीवर मराठी भाषेतील सर्वविषयसंग्राहक विश्वकोशाची गरज निर्माण झाली. स्वातंत्र्यपूर्वकाळात ज्ञानकोशकार डॉ. श्रीधर व्यंकटेश केतकर यांनी विश्वकोशाची मुहूर्तमेढ रोवली.

1. विश्वकोश असा तयार झाला…

  1. विषयवार तज्ज्ञांच्या समितीची रचना केली गेली.
  2. प्रत्येक विषयाच्या नोंदीची शीर्षके निश्चित केली गेली.
  3. मुख्य, मध्यम, लहान नोंदींतील मुद्द्यांची टाचणे तयार केली गेली.
  4. नोंदींच्या मर्यादा आखून टाचणांमध्ये तशा सूचना दिल्या गेल्या.
  5. प्रत्येक विषयातील मुख्य, मध्यम, लहान व नाममात्र नोंदींच्या यादया तयार केल्या गेल्या.
  6. अकारविल्यानुसार या यादया लावण्यात आल्या.

1976 या वर्षी महाराष्ट्र राज्य साहित्य संस्कृती मंडळाने मराठी विश्वकोशाचा पहिला खंड प्रकाशित केला. सध्या विश्वकोशाचे अठरा खंड प्रसिद्ध आहेत.

2. विश्वकोश यासाठी पाहावा…

  1. आपल्या ज्ञानविषयक गरजा मराठीतून भागवण्यासाठी.
  2. जागतिक ज्ञानक्षेत्राचे क्षितिज विस्तारताना आपल्या विविध विषयांतील कुतूहलास इष्ट वळण लागण्यासाठी.
  3. अभिव्यक्तीला योग्य चालना मिळण्यासाठी.
  4. सर्व प्रकारचे प्रगल्भ व सूक्ष्म ज्ञान मराठी भाषेतून मिळण्यासाठी.

3. विश्वकोश असा पाहावा…
1. शब्द अकारविल्हे (अनुज्ञेय) नुसार पाहावेत.
2. बाराखडीतील स्वर व व्यंजन यांच्या स्थानानुसार अनुक्रमे दिलेला शब्द पाहावा.

4. मूलध्वनी (मराठी वर्णमाला):
Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 7.1

5. व्यंजने (34)
Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 8
स्वर + व्यंजने = अक्षरे/अर्थपूर्ण क्रमाने येणारी अक्षरे = शब्द/ अर्थपूर्ण शब्दांचा समूह = वाक्य.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश

चौदाखडी:

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 9
तुम्हांला आवडणारे कोणतेही शब्द… त्यांचे अर्थ… संदर्भ विश्वकोशातून शोधा व भाषेचे अनोखे अंग जाणून घ्या. विश्वकोश आता एका क्लिकवर – https://en.wikipedia.org/wiki/Marathi_Vishwakosh

1. मुलांना आवडणारी शब्दकोडी व फँशनपैकी केशरचना या ” शब्दांचे संदर्भ विश्वकोशाच्या आधारे दिले आहेत.

1. शब्दकोडी:
Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 10
अशा कल्पनांवर आधारलेले अनेक प्रकार रूढ आहेत. संगणकीय खेळांमध्ये विविध प्रकारच्या शाब्दिक कोड्यांचा समावेश होतो.

1. प्रसिद्ध विधान अथवा अवतरण देऊन त्याचे लेखक ओळखण्यास सांगणे.
2. एका शब्दातील अक्षरे फिरवून नवीन शब्द तयार करणे.
3.  काही शब्दांतील रिकाम्या अक्षरांच्या जागा भरणे.

2. पुढील शब्दकोडे दिलेल्या वाक्यांच्या आधारे सोडवा:

  1. ‘स्वेदगंगा’ या कवितासंग्रहाचे कवी.
  2. एका साहित्यिकाचे आडनाव ‘श्रीपाद कृष्ण …’
  3. तुरुंगात असतानादेखील ज्यांची काव्यप्रतिभा बहरून येई, असे साहित्यिक (देशभक्त).
  4. ‘सुधारक’चे संपादक.
  5. कवी यशवंत यांचे आडनाव.
  6. एका विनोदी साहित्यिकाचे आडनाव.
  7. मालतीबाई बेडेकर यांनी वापरलेल्या टोपणनावातील आडनाव.
  8. कवी कुसुमाग्रज यांचे आडनाव.

उत्तरांसह कोड्याची आकृती : (पाठ्यपुस्तकानुसार)

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश 11

Maharashtra Board Class 9 Marathi Kumarbharti Solutions Chapter 20.1 विश्वकोश

2. केशभूषा:

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आदिम लोक केसांना मातीचा लेप लावून आपला पराक्रम व गुणवैशिष्ट्ये दाखवण्याकरिता त्यात विजयचिन्हे आणि पदके लावत.
( केशभूषेचा उगम यातून झाला असावा. )
(केस इतरांना दिसू न देण्याच्या पुरातन स्त्रीच्या प्रयत्नातून केशबंधाची कल्पना पुढे आली असावी.)
अजिंठा, वेरूळ, कोणार्क, खजुराहो येथील शिल्पाकृतींत आढळणाऱ्या स्त्री-पुरुषांच्या केशरचना उल्लेखनीय आहेत. या प्राचीन केशरचनांचे अनुकरण भारतीय स्त्रिया करताना आढळतात.

9th Std Marathi Questions And Answers:

Sarvatmaka Shivsundara Question Answer Class 9 Marathi Chapter 1 Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Class 9 Marathi Aksharbharati Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा Question Answer Maharashtra Board

सर्वात्मका शिवसुंदरा Std 9 Marathi Chapter 9 Questions and Answers

कवीचा परिचय :

नाव : विष्णु वामन शिरवाडकर
कालावधी : 1912 – 1999

ज्ञानपीठ पारितोषिक विजेते, प्रसिद्ध लेखक, कवी, नाटककार. ‘जीवनलहरी’, विशाखा’, ‘समिधा’, ‘स्वगत’, ‘हिमरेषा’, ‘वादळवेल’, ‘मारवा’, ‘किनारा’ इत्यादी काव्यसंग्रह; ‘वैजयंती’, ‘राजमुकुट’, ‘कौतेय’, ‘नटसम्राट’, ‘वीज महणाली धरतीला’, ‘विदूषक’ इत्यादी नाटके प्रसिद्ध.

प्रस्तावना :

‘सर्वात्मका शिवसुंदरा’ ही प्रार्थना कवी कुसुमाग्रज यांनी लिहिली आहे. या प्रार्थनेत परमेश्वरास वंदन करून अंधारातून उजेडाकडे नेण्याची, संकटातही सामना करण्याची शक्ती देण्याची विनंती कवीने केली आहे.

A famous poet Kusumagraj has written the prayer Sarvatmaka Shivsundara’. In this prayer, the poet is seeking guidance from the almighty God. He is asking the Lord to bestow upon him the strength to survive in all tough, difficult situations. He is asking the God to transport him from the darkness of everyday life to enlightenment

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा

भावार्थ :

सर्वात्मका शिवसुंदरा …………………….. आमुच्या ने जीवना।।
हे सर्व प्राणीमात्रांच्या ठिकाणी असलेल्या शिवसुंदरा परमेश्वरा, तू आमचे वंदन स्वीकार कर. हे परमेश्वरा, तू आमच्या जीवनाला अंधाराकडून प्रकाशाकडे घेऊन जा. आमच्या जीवनाला योग्य मार्ग दाखव.

सुमनांत तू गगनात …………………….. चोहीकडे रूपे तुझी जाणीव ही माझ्या मना ।।
हे परमेश्वरा, सुमनात म्हणजेच प्रत्येक फुलात, गगनात तूच सामावलेला आहे. तान्यांमध्ये देखील तू फुललेला म्हणजेच भरलेला, व्यापलेला आहेस. या जगामध्ये जे जे सद्धमनि वागतात त्या सर्वांमध्ये तू राहतोस. या सृष्टीमध्ये चोहीकडे तुझीच रूपे आहेत, याची मला जाणीव आहे.

श्रमतोस तू शेतामधे ……………………. तिथे तुझे पद पावना ।।
हे परमेश्वरा, शेतामध्ये त्या कष्ट करणाऱ्या लोकांबरोबर तू स्वत: मेहनत करतोस. या जगामध्ये जे जे दुःखी, कष्टी जीवनाने त्रासलेले आहेत, त्या लोकांची आसवे तू पुसतोस. म्हणजेच या सर्वांचे दुःख, त्रास तू दूर करतोस. जिथे कोणत्याही स्वार्थाशिवाय तुझी सेवा केली जाते, तिथे तुझे पावन चरण पाहायला मिळतात. तिथे तुझे अस्तित्व जाणवते.

न्यायार्थ जे लढती रणी………………….मुनी होतोस त्यांची साधना।।
पुढे कवी सांगतात की, जे लोक अन्यायाविरुद्ध लढतात, न्यायासाठी तलवार हातात घेऊन रणांगणावर लवण्यासाठी जातात, त्यांच्या हातातल्या तलवारीमध्ये परमेश्वरा तू राहतोस. तसेच जे लोक ध्येयवेडे असतात. जे आपले ध्येय प्राप्त करण्यासाठी अंधारातून (संकटातून) ही मार्ग काढतात तू त्यांच्यामध्ये दीप बनून राहतोस. त्यांच्यात आत्मविश्वास, हिंमत निर्माण करतोस. म्हणजेच ध्येय प्राप्तीचा योग्य मार्ग तू त्यांना दाखवतोस. तसेच जे ज्ञानाची लालसा मनामध्ये धरून त्याची कास धरतात, त्यासाठी तप करतात, त्यांची ज्ञानसाधना तू होतोस.

करुणाकरा करुणा तुझी ………………. नित जगवि भीतीवाना।।
कवी परमेश्वराला सांगतो, हे करुणाकरा तुझा आशीर्वाद पाठीशी असताना मला कुठलीही भीती नाही. त्यामुळे आयुष्याच्या वाटेवर चालताना माझ्या प्रत्येक पावलाबरोबर तुझे पाऊल असेल, याची मला पक्की खात्री आहे. त्यामुळे माझ्याकडून नेहमीच सूजनत्व मणजेच नवनिर्मिती होईल. माझ्या मनात त्याविषयी कोणतीच भीती असणार नाही.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा

शब्दार्थ :

  1. ज्ञानपीठ पुरस्कार – साहित्य क्षेत्रातील सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार
  2. सर्वात्मका – सर्व प्राणिमात्रांच्या ठिकाणी असलेला जीवात्मा, परमेश्वर (the soul of all, the entire self)
  3. शिव – शंकर (God Shiva)
  4. सुंदरा – सुंदर (beautiful)
  5. स्वीकार – अंगीकार (acceptance)
  6. अभिवादन – वंदन, नमन (salutation)
  7. तिमिर – अंधार, काळोख (darkness)
  8. तेज – प्रकाश, लकाकी (brightness)
  9. प्रभु – ईश्वर, देव (God, Lord)
  10. जीवन – आयुष्य (life)
  11. सुमन – फूल (a flower)
  12. गगन – आकाश, नभ (the sky)
  13. तारा – चांदणी (star)
  14. सद्धर्म – चांगला धर्म, सदाचार (good quality, good conduct)
  15. जग – दुनिया, विश्व (the world, the universe)
  16. वसणे – राहणे, वस्ती करणे (to establish, to stay)
  17. चोहिकडे – सभोवार, सर्वत्र (everywhere, all round)
  18. रूप – आकार (form, shape)
  19. जाणीव – बोध, आकलन (consciousness, realization)
  20. मन – चित्त, अंत:करण (the mind)
  21. राबसी – राबतोस, भरपूर कष्ट करतोस (to work hard)
  22. श्रमिक – कामकरी, कष्ट करणारा (a labour, a worker)
  23. रंजले – त्रासले (to be harassed)
  24. गांजणे – त्रासून जाणे, सतावले जाणे (to be harassed)
  25. आसवे – अश्रू (tears)
  26. स्वार्थ – स्वत:चा लाभ, मतलब (selfishness)
  27. पद – पाय, पाऊल (a foot, a foot step)
  28. न्याय – नीती (justice)
  29. रण – रणभूमी, युद्धाची जागा, रणांगण (battlefield)
  30. कर – हस्त, ह्यत (hand)
  31. ध्येय – उद्दिष्ट, साध्य (a goal, an aim)
  32. तमी – तम, अंधकार काळोख (darkness)
  33. अंतरी – आतमध्ये (in interior)
  34. ज्ञान – माहिती, प्रतिती (knowledge)
  35. तपती – तपतात (experience burning, blazing, heat)
  36. मुनि – ऋषी, साधू, तपस्वी (a holy sage)
  37. साधना – तपश्चर्या (penance)
  38. करुणा – दया (compassion, mercy)
  39. भय – भीती, धास्ती (fear, fright)
  40. मार्ग – रस्ता (way)
  41. सदा – नेहमी (always)
  42. तव – तुझे (yours)
  43. पावले – पाऊले, पाय (feet)
  44. सूजनत्व – नवनिर्मिती (creation)
  45. नित – नेहमी, सदा (always, daily, everyday)
  46. जगवि – जागव (to wake up)

9th Std Marathi Questions And Answers: