Maharashtra Board Class 12 Hindi व्याकरण

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest व्याकरण Notes, Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi परिशिष मुहावरे

Maharashtra Board Class 12 Hindi व्याकरण अलंकार

का साधारण अर्थ आभूषण होता है। जिस प्रकार आभूषणों से शरीर की सुंदरता में वृद्धि होती है, उसी प्रकार जिन उपकरणों से काव्य में सौंदर्य उत्पन्न होता है, उन्हें अलंकार कहते हैं। अलंकार काव्य में शब्दों एवं अर्थों की सुंदरता में वृद्धि करके चमत्कार पैदा करते हैं। इनके कारण काव्य की भाषा में निखार उत्पन्न होता है।

साहित्य में शब्द और अर्थ दोनों का महत्त्व होता है। इस आधार पर अलंकार के मुख्य रूप से तीन भेद माने जाते हैं :

  1. शब्दालंकार
  2. अर्थालंकार
  3. उभयालंकार।

कक्षा ग्यारहवीं में हमने शब्दालंकार का अध्ययन किया था। यहाँ हम अर्थालंकार का अध्ययन करेंगे।

अर्थालंकार : जहाँ शब्दों के अर्थ से चमत्कार स्पष्ट होता है, वहाँ अर्थालंकार माना जाता है।

अर्थालंकार के भेद :
अर्थालंकार के पाँच प्रकार होते हैं :

  1. रूपक अलंकार
  2. उपमा अलंकार
  3. उत्प्रेक्षा अलंकार
  4. अतिशयोक्ति अलंकार
  5. दृष्टांत अलंकार।

1) रूपक अलंकार : जहाँ उपमेय पर उपमान का आरोप होता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। आरोप का अर्थ है, एक वस्तु के साथ दूसरी वस्तु को इस प्रकार रखा जाए कि दोनों अभिन्न मालूम हों। अर्थात् दोनों एकरूप मालूम हों। इस अलंकार में उपमेय और उपमान को एकरूप बना दिया जाता है।

जैसे –
चरण कमल बंदौं हरिराई।
यहाँ भगवान के चरणों (उपमेय) में कमल (उपमान) का आरोप हुआ है।

अथवा
उदित उदय गिरि मंच पर
रघुबर बाल पतंग।
प्रस्तुत दोहे में ‘उदय गिरि’ का ‘मंच’ पर तथा ‘बाल पतंग’ का ‘रघुबर’ पर आरोप किया गया है।
अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

(2) उपमा अलंकार : उपमा का अर्थ है समता अथवा तुलना।

जहाँ स्वभाव, गुण, धर्म, रूप, रंग अथवा आकार आदि की समानता के आधार पर एक वस्तु की दूसरी प्रसिद्ध वस्तु के साथ तुलना है की जाती है, अर्थात् जहाँ उपमेय की तुलना उपमान से की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार उत्पन्न होता है। जैसे –

  • पीपर पात सरिस मन डोला।
  • चरण-कमल-सम कोमल।
  • राधा वदन चंद सो सुंदर।

यहाँ मन की तुलना पीपर के पात से, चरण की तुलना कोमल कमल से तथा राधा के वदन की तुलना चंद्रमा से की गई है। इसलिए यहाँ उपमा अलंकार है।

(3) उत्प्रेक्षा अलंकार : उत्प्रेक्षा का अर्थ है – उत् + प्र + ईच्छा। अर्थात् प्रकट रूप से देखना। यहाँ देखने का अर्थ है संभावना करना।

जहाँ पर उपमेय में उपमान की संभावना प्रकट की जाए या उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

इस अलंकार में मानो, जानो, जनु-जानहुँ, मनु-मानहुँ, इव जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
(1) कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।

इन पंक्तियों में उत्तरा के अश्रुपूर्ण नेत्रों (उपमेय) में ओस जलकण युक्त पंकज (उपमान) की संभावना की गई है।

(2) सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात। है
मनो नीलमणि शैल पर, आतप पर्यो प्रभात।।

इस दोहे में उपमेय पीताम्बर ओढ़े हुए श्याम वर्ण के श्रीकृष्ण हैं और उपमान नीलमणि के पर्वत पर पड़ने वाली प्रातःकालीन धूप है। ‘मनो’ शब्द का प्रयोग कर उपमान की उपमेय में संभावना व्यक्त की गई है।

(3) सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल।
बहार लसत मनो पिए, दावानल की ज्वाल।।
यहाँ गुंजा की माला (उपमेय) में दावानल की ज्वाला (उपमान) की संभावना होने से उत्प्रेक्षा अलंकार है।

(4) अतिशयोक्ति अलंकार : जहाँ किसी वस्तु का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि वह लोक सीमा को पार कर जाए, है वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। जैसे –

(1) जेहि बर बाजि राम असवारा।
तेहि सारद हुँ न बरनै पारा॥

यहाँ यह कह गया है कि जिस उत्तम घोड़े पर श्रीराम सवार हैं, उसका वर्णन सरस्वती जी भी नहीं कर सकतीं। यह बात बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है। इसलिए यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

(2) हनूमान की पूँछ में, लग न पाई आग।
लंका सारी जल गई, गए निशाचर भाग।।

यहाँ भी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया है। अतः यहाँ भी अतिशयोक्ति अलंकार है।

(3) वह शर इधर गांडीव गुण से, भिन्न जैसे ही हुआ।
धड़ से जयद्रथ का इधर सिर, छिन्न वैसे ही हुआ।

इन पंक्तियों में कहा गया है कि गांडीव धनुष से बाण जैसे ही छूटा, तभी जयद्रथ का सिर धड़ से अलग हो गया। यहाँ भी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया है।

(5) दृष्टांत अलंकार : दृष्टांत का अर्थ है उदाहरण। जब किसी बात की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए उसी प्रकार की कोई दूसरी बात कही जाती है, जिससे पूर्व कथन की प्रामाणिकता सिद्ध हो जाए, तो वहाँ दृष्टांत अलंकार होता है। दृष्टांत में दो स्वतंत्र वाक्य रहते हैं। दोनों के अर्थ एक जैसे होते हैं। जैसे –

करत-करत अभ्यास के, जड़ मति होत सुजान।
रसरी आवत जात से, सिल पर परत निसान॥

यहाँ अभ्यास करते-करते निर्बुद्धि व्यक्ति का प्रवीण होना वैसा ही है, जैसे रस्सी के आने-जाने से सिल (पत्थर की पटिया) पर निशान पड़ना। यहाँ पहले वाक्य की सच्चाई सिद्ध करने के लिए दृष्टांत रूप में दूसरा वाक्य आया है। इस प्रकार यहाँ दृष्टांत अलंकार है।

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

प्रश्न. निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत अलंकार पहचानकर उसका नाम लिखिए :

प्रश्न 1.
पायोजी मैंने राम रतन धन पायो।
उत्तर :
रूपक अलंकार।

प्रश्न 2.
सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात।
मनो नीलमनि शैल पर, आतप पर्यो प्रभात।।
उत्तर :
उत्प्रेक्षा अलंकार।

प्रश्न 3.
सबै सहायक सबल के, कोउ न निबल सहाय।
पवन जगावत आग ही, दीपहिं देत बुझाय।।
उत्तर :
दृष्टांत अलंकार।

प्रश्न 4.
पड़ी अचानक नदी अपार
घोड़ा उतरे कैसे पार।।
राणा ने सोचा इस पार।
तब तक चेतक था उस पार।।
उत्तर :
अतिशयोक्ति अलंकार।

प्रश्न 5.
जियु बिनु देह, नदी बिनु वारी।
तैसे हि अनाथ, पुरुष बिनु नारी।।
उत्तर :
उपमा अलंकार।

प्रश्न 6.
झूठे जानि न संग्रही, मन मुँह निकसै बैन।
याहि ते मानहुँ किए, बातनु को बिधि नैन।।
उत्तर :
उत्प्रेक्षा अलंकार।

प्रश्न 7.
राधा-वदन चंद सो सुंदर।
उत्तर :
उपमा अलंकार।

प्रश्न 8.
चरण-सरोज पखारन लागा।
उत्तर :
रूपक अलंकार।

प्रश्न 9.
मोती की लड़ियों से सुंदर, झरते हैं झाग भरे निर्झर।
उत्तर :
उपमा अलंकार।

प्रश्न 10.
उस क्रोध के मारे, तनु उसका काँपने लगा।
मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।।
उत्तर :
उत्प्रेक्षा अलंकार।

प्रश्न. निम्नलिखित अलंकारों से युक्त पंक्तियाँ लिखिए :

प्रश्न 1.
उपमा अलंकार :
उत्तर :
ऊँची-नीची सड़क, बुढ़िया के कूबड़-सी।
नंदनवन-सी फूल उठी, छोटी सी कुटिया मेरी।।

प्रश्न 2.
दृष्टांत अलंकार :
उत्तर :
एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।

प्रश्न 3.
रूपक अलंकार :
उत्तर :
उधो, मेरा हृदयतल था, एक उद्यान न्यारा।
शोभा देती अमित उसमें, कल्पना-क्यारियाँ भी।।

प्रश्न 4.
अतिशयोक्ति अलंकार :
उत्तर :
पत्रा ही तिथि पाइयो, वाँ घर के चहुँ पास।
नित प्रति पून्यो ही रह्यो, आनन ओप उजास।।

प्रश्न 5.
उत्प्रेक्षा अलंकार :
उत्तर :
लता पवन ते प्रगट भए, ते हि अवसर दोउ भाइ।
निकसे जनु जुग विमल बिंधु, जलद पटल बिलगाइ।।

प्रश्न 6.
रूपक अलंकार :
उत्तर :
सिंधु-सेज पर धरा-वधू।
अब तनिक संकुचित बैठी-सी।।

प्रश्न 7.
उत्प्रेक्षा अलंकार :
उत्तर :
सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात।
मनो नीलमनि शैल पर, आतम पर्यो प्रभात।।

प्रश्न 8.
अतिशयोक्ति अलंकार :
उत्तर :
हनुमंत की पूँछ में, लग न पाई आग।
लंका सारी जल गई, गए निशाचर भाग।।

प्रश्न 9.
रूपक अलंकार :
उत्तर :
उदित उदय गिरि मंच पर।
रघुबर बाल पतंग।।

प्रश्न 10.
उत्प्रेक्षा अलंकार :
उत्तर :
कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।

प्रश्न 11.
अतिशयोक्ति अलंकार :
उत्तर :
जेहि बर बाजि राम असवारा।
तेहि सारद हुँ न बरनै पारा।।

प्रश्न 12.
उत्प्रेक्षा अलंकार :
उत्तर :
सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल।
बहार लसत मनो पिए, दावानल की ज्वाल।।

Maharashtra Board Class 12 Hindi व्याकरण रस

मनुष्य के हृदय में अनेक प्रकार के भाव मौजूद रहते हैं। इन भावों को विभिन्न नामों से जाना जाता है। कविता को पढ़ने-सुनने अथवा नाटक आदि को देखने से हृदय में मौजूद ये भाव जाग्रत होकर आनंद प्रदान करते हैं। यह आनंद अलौकिक होता है। इस आनंद को ही ‘रस’ कहा जाता है। विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी (संचारी) भाव और स्थायी भाव रस के अंग हैं। इन अंगों (तत्त्वों ) के संयोग से रस उत्पन्न होता है। रस को काव्य की आत्मा माना जाता है। साहित्य में शृंगार रस, शांति रस, करुण रस, हास्य रस, वीर रस, रौद्र रस, भयानक रस, वीभत्स रस, अद्भुत रस आदि नौ रस माने गए हैं। कालांतर में इनमें वात्सल्य एवं भक्ति रसों को भी शामिल किया गया।

इन सभी रसों के स्थायी भाव होते हैं। शृंगार का स्थायी भाव प्रेम है। शांत का शांति, करुण का शोक, हास्य का हास, वीर का उत्साह, रौद्र का क्रोध, भयानक का भय, वीभत्स का घृणा, अद्भुत का आश्चर्य, वात्सल्य का ममत्व तथा भक्ति का भक्ति स्थायी भाव है।

कक्षा ग्यारहवीं में हमने इन ग्यारह रसों में से करुण रस, हास्य रस, वीर रस, भयानक रस और वात्सल्य रस के लक्षण और उनके उदाहरणों का अध्ययन किया है। यहाँ हम रौद्र रस, वीभत्स रस, अद्भुत रस, शृंगार रस, शांत रस तथा भक्ति रस आदि शेष रसों का अध्ययन करेंगे।

(1) रौद्र रस : जहाँ शत्रु की ललकार, गुरुजनों एवं वरिष्ठ जनों के प्रति निंदात्मक अथवा अपमानजनक व्यवहार तथा किसी के असह्य वचन आदि से मन में मौजूद क्रोध का भाव जाग्रत हो जाता है, तब रौद्र रस उत्पन्न होता है। इस रस की अभिव्यंजना असह्य व्यवहार के प्रतिशोध के रूप में होती है।

उदाहरण :
श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगे।
संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
करते हुए यह घोषणा, वे हो गए उठकर खड़े।
उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उनका लगा।
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।

(2) वीभत्स रस : घृणित वस्तुएँ अथवा दृश्यों को देखने-सुनने तथा अरुचिकर, अप्रिय वस्तुओं के वर्णन से मन में जो क्षोभ होता है, उसे घृणा कहते हैं। यही घृणा वीभत्स रस में बदल जाती है।
उदाहरण :
सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत।
खींचत जीभहिं स्यार अतिहिं आनंद उर धारत।
गिद्ध जाँघ को खोदि-खोदि कै माँस उपारत,
स्वान आँगुरिन काटि-काटि कै, खात बिदारत।

(3) अद्भुत रस : जहाँ किसी आश्चर्यजनक या अलौकिक क्रियाकलाप अथवा किसी वस्तु-दृश्य को देखकर हृदय में विस्मय अथवा आश्चर्य का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ अद्भुत रस की व्यंजना होती है।
उदाहरण:
(1) लीन्हों उखारि पहार बिसाल, चल्यो तेहि काल, विलंब न लायौ।
मारुतनंदन मारुत को, मन को, खगराज को बेग लजायो।
तीखी तुरा तुलसी कहतो, पै हिए उपमा को समाउ न आयो।
मानो प्रतच्छ परब्बत की नभ लोक लसी कपि यों धुकि धायो।

(2) बिनु पग चलै, सुनै बिनु काना।
कर बिनु कर्म करे विधि नाना।
आनन रहित सकल रस भोगी।
बिनु बाणी वक्ता, बड़ जोगी।

(4) शृंगार रस : जहाँ स्त्री-पुरुष की प्रेमपूर्ण चेष्टाओं या क्रियाकलापों का शृंगारिक वर्णन होता है, वहाँ शृंगार रस की उत्पत्ति होती है।
उदाहरण :
दूलह श्री रघुनाथ बने, दुलही सिय सुंदर मंदिर माही।
गावत गीत सबै मिलि सुंदरि, वेद वहाँ जुरि विप्र पढ़ाहीं।
राम को रूप निहारति जानकी, कंकन के नग की परछाहीं।
याते सबै सुधि भूलि गई, कर टेकि रही पल टारत नाहीं।

(5) शांत रस : जहाँ भक्ति, नीति, ज्ञान, वैराग्य, धर्म, दर्शन तत्त्व ज्ञान अथवा सांसारिक नश्वरता संबंधी बातों का वर्णन होता हो, वहाँ शांत रस उत्पन्न होता है। ज्ञान होने अथवा मन में वैराग्य उत्पन्न होने पर मन में ऐसे भाव जाग्रत होते हैं।

उदाहरण:
(1) मन पछतैहैं अवसर बीते।
दुरलभ देह पाइ हरिपद भजु, करम वचन अरु होते।
सहसबाहु, दसवदन आदि नृप, बचे न काल बली ते।
हम हम करि धन धाम सँवारे अंत चले उठि रीते।
सुत बनितादि जानि स्वारथ रत न करु नेह सबही ते।

(2) माला फेरत जुग गया, गया न मन का फेर।
कर का मनका डारि कै, मन का मनका फेर।

(6) भक्ति रस : जहाँ मन में ईश्वर अथवा अपने किसी इष्ट है देव के प्रति श्रद्धा, अलौकिकता, स्नेह तथा विनयशीलता का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ भक्ति रस की व्यंजना होती है।
उदाहरण :
समदरसी है नाम तिहारो, सोई पार करो।
एक नदिया इक नार कहावत, मैलो नीर भरो।
एक लोहा पूजा में राखत, एक घर बधिक परो,
सो सुविधा पारस नहीं जानत, कंचन करत खरो।

प्रश्न. निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत रस पहचानकर उसका नाम लिखिए :
(1) माटी कहै कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोह।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोह।।
उत्तर :
शांत रस।

(2) एक अचंभा देखा रे भाई।
ठाढ़ा सिंह चरावै गाई।।
पहले पूत पाछे भाई।
चेला के गुरु लागे पाई।।
उत्तर :
अद्भुत रस।

(3) कहा-कैकेयी ने सक्रोध।
दूर हट! दूर हट! निर्बोध!
द्वि जिव्हे रस में विष मत घोल।
उत्तर :
रौद्र रस।

(4) कहुँ श्रृगाल उड़ि मृतक अंग पर घात लगावत।
कहुँ कोउ शव पर बैठि गिद्ध चहुँ चोंच चलावत।
जहँ-तहँ मज्जा मांस रुधिर लखि परत बगारे,
जित तित छिटके हाँड़, सेत कहुँ कहुँ रतनारे।
उत्तर :
वीभत्स रस।

(5) कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरे मौन में करत हैं, नैननु ही सौं बात।।
उत्तर :
शृंगार रस।

(6) तू दयालु दीन हौं, तू दानि हौं भिखारी।
हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप पुंज हारी।।
उत्तर :
भक्ति रस।

Maharashtra Board Class 12 Hindi व्याकरण मुहावरे

मुहावरा क्या है?
जब कोई शब्द-समूह अपने मूल या सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशिष्ट या लाक्षणिक अर्थ में प्रचलित हो जाता है, तो उसे ‘मुहावरा’ कहते हैं।

मुहावरों का जन्म लोकजीवन में होने वाली आम बातचीत से है हुआ है। कभी-कभी लोग कोई बात लाक्षणिक भाषा में कहते हैं। यही बात धीरे-धीरे मुहावरे का रूप धारण कर लेती है। इनके प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है। एक मुहावरा उतना कह देता है, . जितना हम लंबी-चौड़ी भूमिका बाँधकर भी नहीं कह सकते।

मुहावरों में प्रायः शरीर के अंगों, प्राकृतिक वस्तुओं या अन्य , पदार्थों का उल्लेख होता है। ऊपरी तौर पर इनका अर्थ अटपटा और निरर्थक प्रतीत होता है, परंतु इनसे जो लाक्षणिक अर्थ निकलता है,

वह महत्त्वपूर्ण होता है। उसी के कारण भाषा सजीव, प्रवाही एवं आकर्षक बनती है। जैसे – ‘तुम तो बस दिनभर दूसरों की टोपी उतारते रहते हो।’ यहाँ टोपी उतारने का अर्थ ‘सिर से टोपी उतारना’ नहीं है, बल्कि ‘दूसरों की बेइज्जती करना’ है।

इसी प्रकार ‘उसने पेट काट-काटकर धन जोड़ा है।’ इस वाक्य – में पेट काटना’ शब्द का प्रयोग सामान्य अर्थ में नहीं हुआ है। – यहाँ ‘पेट काटने’ का मतलब ‘बहुत किफायत करके या मुश्किल से’ होता है।

तुलनात्मक अध्ययन के लिए यहाँ कुछ सामान्य वाक्य और मुहावरों से युक्त वाक्य साथ-साथ दिए गए हैं। इनके अभ्यास द्वारा विद्यार्थियों को मुहावरों के स्वरूप और प्रयोग का अच्छा ज्ञान हो जाएगा।

सामान्य कथन

  • गुंडे को पकड़ने में पुलिस को बड़ी कठिनाई हुई। – मुहावरों का प्रयोग गुंडे को पकड़ने में पुलिस के दाँतों पसीना आ गया।
  • भारतीय क्रिकेट टीम की विजय से मुझे बड़ा आनंद हुआ। – भारतीय क्रिकेट टीम की विजय से मेरा दिल उछल पड़ा।
  • बहुत समझाने पर भी वह विचलित नहीं हुआ। – बहुत समझाने पर भी वह टस से मस नहीं हुआ।
  • मजदर अपना दःख मन में ही दबाकर रह गया। – मजदूर कलेजा थामकर रह गया।
  • बेटे के बारे में शिकायत सुनकर पिता को बड़ा क्रोध आया। – बेटे के बारे में शिकायत सुनकर पिता के माथे पर बल पड़ गए।

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि मुहावरों के प्रयोग द्वारा किसी सीधी-सादी बात को विशिष्ट ढंग से कैसे कहा जा सकता है।

मुहावरों का सार्थक वाक्यों में प्रयोग : मुहावरे सीधे-सादे कथनों को विशिष्ट ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इसलिए मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग करते समय उनसे सूचित होने वाले अर्थ को ठीक से समझ लेना चाहिए।

मुहावरों का महत्त्व : मुहावरों के उचित प्रयोग से भाषा की सुंदरता और कलात्मकता बढ़ जाती है। इनका सटीक प्रयोग भाषा को जानदार बना देता है। इनके कारण भाषा शक्तिशाली बनती है और उसके सामर्थ्य में वृद्धि होती है। मुहावरेदार भाषा अधिक मार्मिक होती है।

मुहावरों के सही प्रयोग से भाषा समृद्ध बनती है। इनके प्रयोग से बातचीत में चार चाँद लग जाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि मुहावरों का सही ज्ञान हो और उनका प्रयोग उचित ढंग से हो। इनका गलत या अनुचित प्रयोग भाषा के सौंदर्य को नष्ट करता है और प्रयोगकर्ता को उपहास का पात्र बना देता है।

यहाँ अर्थ और वाक्य प्रयोग के साथ पाठ्यपुस्तक में दिए गए मुहावरे दिए गए हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और याद रखिए।

मुहावरे और वाक्य प्रयोग
निर्देश : हर एक पाठ/कविता में विविध मुहावरें अर्थ और वाक्य प्रयोग के साथ दिए गए है। विद्यार्थी वहाँ से पढ़ें।

Maharashtra Board Class 12 Hindi व्याकरण काल परिवर्तन

काल : क्रिया के जिस रूप से समय का बोध होता है, उसे ‘काल’ कहते हैं। जैसे – खाता है, खाया, खाएगा आदि।

काल तीन प्रकार के होते है –

  1. वर्तमानकाल
  2. भूतकाल
  3. भविष्यकाल।

(1) वर्तमानकाल : क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के वर्तमान समय में होने का बोध होता है, उसे वर्तमानकाल कहते हैं। जैसे –

  • एक रागी साधु आया है, जो बाजारों में गा रहा है।
  • बच्चे की गलती क्षमा के योग्य है।

(2) भूतकाल : क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के बीते हुए समय में होने की जानकारी मिलती है, उसे भूतकाल कहते हैं। जैसे –

  • मौसी अपने गाँव की ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आदर्श बेटी बन गई थीं।
  • मौसी कुछ नही बोल रही थीं।

(3) भविष्यकाल : क्रिया के जिस रूप से किसी काम के भविष्य में होने का बोध होता है, उसे भविष्यकाल कहते हैं। जैसे –

  • मैं साँप को जीता नहीं छोडगा – पीस डालूँगा।
  • मैं आपकी हर आज्ञा का सिर झुकाकर पालन करूँगा।

(क) सामान्य वर्तमानकाल : क्रिया के जिस रूप से यह मालूम होता है कि कार्य बोलते या लिखते समय होता है, उसे सामान्य वर्तमानकाल कहते हैं। सामान्य वर्तमानकाल से इस बात का पता नहीं चलता कि क्रिया पूर्ण हुई अथवा अपूर्ण रही है। जैसे –

  • मैं प्रतिज्ञा करता हूँ।
  • शिष्य गुरु का ख्याल रखता है।

(ख) सामान्य भूतकाल : क्रिया के जिस रूप से केवल यह मालूम होता है कि कार्य बोलते या लिखते समय समाप्त हुआ, उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं। सामान्य भूतकाल से इस बात का बोध नहीं होता कि क्रिया बहुत समय पहले पूर्ण हुई अथवा अपूर्ण रही है। जैसे –

  • पेड़ ने अमरूद नहीं टपकाए।
  • अगले रोज चिड़ियाघर के लोग आए।

(ग) सामान्य भविष्यकाल : क्रिया के जिस रूप से यह मालूम होता है कि कार्य आने वाले समय में होगा, उसे सामान्य भविष्यकाल कहते हैं। जैसे –

  • मैं इस राग विद्या से किसी को हानि नहीं पहुँचाऊँगा।
  • आपका उपकार जन्मभर सिर से न उतरेगा।

(अ) सामान्य कालों के रूप

बहुत्व को स्पष्ट करने के लिए द्वितीय पुरुष बहुवचन के रूपों के साथ ‘लोग’ शब्द का भी प्रयोग होता है।

जैसे –

  • तुम लोग फल खाते हो।
  • आप लोग फल खाते हैं।

(ब) अपूर्ण वर्तमानकाल और अपूर्ण भूतकाल अपूर्ण वर्तमानकाल : क्रिया के जिस रूप से यह बोध होता हो कि क्रिया वर्तमानकाल में जारी है, पूर्ण नहीं हुई है, अर्थात् अपूर्ण है, उसे अपूर्ण वर्तमानकाल की क्रिया कहते हैं।

जैसे –

  • मैं अपने मित्र से मिल रहा हूँ।
  • विद्यार्थी आपस में बातें कर रहे हैं।

अपूर्ण भूतकाल : क्रिया के जिस रूप से यह बोध होता हो कि क्रिया भूतकाल में आरंभ हुई, पर बोलने वाले या लिखने वाले का जिस समय पर संकेत है, उस समय तक समाप्त नहीं हुई, अर्थात् वह अपूर्ण है, उसे अपूर्ण भूतकाल की क्रिया कहते हैं।

जैसे –

  • उसके सास-ससुर उसे बधाई दे रहे थे।
  • उन सबकी आँखों से स्नेह का भाव झट रहा था।

अपूर्ण वर्तमानकाल और अपूर्ण भूतकाल के रूप इस प्रकार होते हैं :

(क) पूर्ण वर्तमानकाल और पूर्ण भूतकाल
पूर्ण वर्तमानकाल : क्रिया के जिस रूप से यह बोध होता हो कि जो कार्य भूतकाल में आरंभ हुआ था वह वर्तमानकाल में समाप्त हो गया है, उसे पूर्ण वर्तमानकाल की क्रिया कहते हैं।

सामान्य भूतकाल की क्रिया + ‘होना’ क्रिया का वर्तमानकाल का उचित रूप = पूर्ण वर्तमानकाल की क्रिया।

  • (मैं आपके पैसे) लाया + हूँ = मैं आपके पैसे लाया हूँ।
  • (मैंने पाठ) पढ़ा + है = मैंने पाठ पढ़ा है।

पूर्ण भूतकाल : क्रिया के जिस रूप से यह बोध होता हो कि क्रिया बहुत पहले समाप्त हो चुकी है, निकट भूतकाल में नहीं, उसे पूर्ण भूतकाल की क्रिया कहते हैं।

सामान्य भूतकाल की क्रिया + ‘होना’ क्रिया का भूतकाल का उचित रूप = पूर्ण भूतकाल की क्रिया।

  • (उन्होंने) कहा + था = उन्होंने कहा था।
  • (मैंने छुट्टी) माँगी + थी = मैंने छुट्टी माँगी थी।

पूर्ण वर्तमानकाल और पूर्ण भूतकाल के रूप इस प्रकार होते हैं :

प्रश्न. निम्नलिखित वाक्यों का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए:

प्रश्न 1.
निराला जी अपने शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण हैं। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
निराला जी अपने शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण थे।

प्रश्न 2.
हर एक राही को भटककर दिशा मिलती है। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर :
हर एक राही को भटककर दिशा मिल रही है।

प्रश्न 3.
वह पंथ भूलकर भी नहीं रुकता। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर :
वह पंथ भूलकर भी नहीं रुकेगा।

प्रश्न 4.
प्रकाश की किरणें संसार पर नवीन जीवन की वर्षा कर रही थीं। (सामान्य वर्तमानकाल)
उत्तर :
प्रकाश की किरणें संसार पर नवीन जीवन की वर्षा करती हैं।

प्रश्न 5.
मेरी आँखें दूसरों की मौत को देखने के लिए हर समय तैयार (अपूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
मेरी आँखें दूसरों की मौत को देखने के लिए हर समय तैयार रहती थीं।

प्रश्न 6.
श्रद्धा भक्त की सबसे बड़ी भेंट होगी। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
श्रद्धा भक्त की सबसे बड़ी भेंट थी।

प्रश्न 7.
दिन-रात महान आरती होती है। (सामान्य भूतकाल)
उत्तर :
दिन-रात महान आरती हुई।

प्रश्न 8.
कोयल आम का स्वाद लेती है। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर :
कोयल आम का स्वाद ले रही है।

प्रश्न 9.
काठ की हाँड़ी दुबारा नहीं चढ़ेगी। (सामान्य वर्तमानकाल)
उत्तर :
काठ की हाँड़ी दुबारा नहीं चढ़ती।

प्रश्न 10.
शॉ के इन शब्दों में अहंकार की पैनी धार है। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर :
शॉ के इन शब्दों में अहंकार की पैनी धार होगी।

प्रश्न 11.
सुधारक का सत्य निंदा की रगड़ से और भी प्रखर हो जाता है। (अपूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
सुधारक का सत्य निंदा की रगड़ से और भी प्रखर हो रहा था।

प्रश्न 12.
कौन बहिन हम जैसे भुक्खड़ को भाई बनाएगी। (सामान्य वर्तमानकाल)
उत्तर :
कौन बहिन हम जैसे भुक्खड़ को भाई बनाती है।

प्रश्न 13.
वे सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखते थे। (सामान्य वर्तमानकाल)
उत्तर :
वे सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखते हैं।

प्रश्न 14.
आईना भला-बुरा बता देता है। (अपूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
आईना भला-बुरा बता रहा था।

प्रश्न 15.
मैं अपनी खिड़की के पास बैठकर निहारा करता था। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर :
मैं अपनी खिड़की के पास बैठकर निहारा करता हूँ।

प्रश्न 16.
वह पेड़ सीधा नहीं, टेढ़ा पड़ा है। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर :
वह पेड़ सीधा नहीं, टेढ़ा पड़ा होगा।

प्रश्न 17.
ये बातें बेटा-बेटी के लिए समान रूप से लागू होती हैं। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
ये बातें बेटा-बेटी के लिए समान रूप से लागू हुई थीं।

प्रश्न 18.
वे फल हमारे किसी काम के नहीं होंगे। (सामान्य वर्तमानकाल)
उत्तर :
वे फल हमारे किसी काम के नहीं होते हैं।

प्रश्न 19.
हमें सँभलकर बात करनी होगी और सूझबूझ से बात सँभालनी होगी। (पूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर :
हमें सँभलकर बात करनी है और सूझबूझ से बात सँभालनी है।

प्रश्न 20.
चट्टानों पर फूल खिलाना हमको आता है। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
चट्टानों पर फूल खिलाना हमें आया था।

प्रश्न 21.
विकास की इस दौड़ में जाने-अनजाने हमने अनेक विसंगतियों को जन्म दिया है। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर :
विकास की इस दौड़ में जाने-अनजाने हम अनेक विसंगतियों को जन्म देंगे।

प्रश्न 22.
फिलहाल यहाँ हम पर्यावरणीय प्रदूषण के सिर्फ एक पहलू की चर्चा कर रहे हैं। (अपूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
फिलहाल यहाँ हम पर्यावरणीय प्रदूषण के सिर्फ एक पहलू की चर्चा कर रहे थे।

प्रश्न 23.
वृद्धाश्रम के प्रबंधक का फोन सुनकर मैं अवाक रह गया। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर :
वृद्धाश्रम के प्रबंधक का फोन सुनकर मैं अवाक रह जाऊँगा।

प्रश्न 24.
मौसा एक-से-एक बड़े पद पर रहकर भारत सरकार के वित्त सचिव के पद से रिटायर हुए थे। (पूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर :
मौसा एक-से-एक बड़े पद पर रहकर भारत सरकार के वित्त सचिव के पद से रिटायर हुए हैं।

प्रश्न 25.
सावन-भादों के महीने में प्रकृति का सुंदर और मनमोहक दृश्य चारों ओर दिखाई देता है। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर :
सावन-भादों के महीने में प्रकृति का सुंदर और मनमोहक दृश्य चारों ओर दिखाई दे रहा है।

प्रश्न 26.
लोकगीतों में गेयता तत्त्व प्रमुखता से पाया जाता है। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर :
लोकगीतों में गेयता तत्त्व प्रमुखता से पाया जाएगा।

Maharashtra Board Class 12 Hindi व्याकरण वाक्य शुद्धिकरण

भाषा में शुद्धता का बहुत महत्त्व है। भाषा की कृतिपत्रिका में भाषा की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रश्न का उत्तर भले ही सही हो, परंतु उसमें भाषा संबंधी अशुद्धियाँ हों, तो पूरे अंक नहीं मिलते। इसलिए अच्छे अंक पाने के लिए यह जरूरी है कि भाषा में व्याकरण संबंधी दोष न हों। प्रश्नों के उत्तर विषयवस्तु की दृष्टि से ही नहीं, भाषा की दृष्टि से भी शुद्ध हों।

भाषा में विभिन्न कारणों से सामान्य गलतियाँ हो जाया करती हैं। इसलिए प्रश्नों के उत्तर लिखते समय इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

यहाँ लिखते समय वाक्यों में होने वाली कुछ गलतियों के बारे में बताया गया है। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर लिखते समय इस प्रकार की गलतियाँ करने से बचिए।

(1) गलत शब्दों का प्रयोग :

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) यहाँ शुद्ध गाय का दूध मिलता है। यहाँ गाय का शुद्ध दूध मिलता है।
(2) तुकाराम एक महान साधु थे। तुकाराम एक महान संत थे।
(3) गंगा शुद्ध नदी है। गंगा पवित्र नदी है।
(4) ज्ञानेश्वरी एक पुस्तक है। ज्ञानेश्वरी एक ग्रंथ है।

(2) वर्तनी की भूलें : वर्तनी का अर्थ है शब्द के सही रूप का ज्ञान। शब्द का सही रूप न जानने से अर्थ का अनर्थ होता है। जैसे –

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) पृथ्वी एक गृह है। पृथ्वी एक ग्रह है। (‘गृह’ का अर्थ घर होता है। ग्रह सूर्य से उत्पन्न एक पिंड है।)
(2) तुम जूठ बोलते हो। तुम झूठ बोलते हो। (खाना ‘जूठा’ होता है, बात जूठ नहीं, ‘झूठ’ होती है।)
(3) वाल्मीकि आदी कवि थे। वाल्मीकि आदि कवि थे। (आदी का अर्थ है – किसी अच्छी–बुरी चीज की लत (आदत) वाला। जबकि ‘आदि’ का अर्थ है – सबसे पहले।)
(4) वह बहुत सूखी है। वह बहुत सुखी है। (‘सूखी’ का अर्थ है – जो गीला या भीगा हुआ नहीं है, जबकि ‘सुखी’ का अर्थ है – सूख में रहने वाला।)

(3) भ्रमित करने वाले शब्द :
कुछ शब्दों की रचना एक-दूसरे से मिलती-जुलती होती है। जरा-सी असावधानी या अज्ञानता से ऐसे शब्दों के प्रयोग में गलती हो सकती है। –

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) अपने माता-पिता से मेरा प्रमाण कहना। अपने माता पिता से मेरा प्रणाम कहना। (प्रमाण का अर्थ सबूत है, जबकि प्रणाम का अर्थ है ‘नमस्कार’।)
(2) आपसे मुझे यही उपेक्षा थी। आपसे मुझे यही अपेक्षा थी। (उपेक्षा का अर्थ अवहेलना है, जबकि अपेक्षा का अर्थ आशा है।)
(3) राकेश बगीचे की और गया है। राकेश बगीचे की ओर गया है। (और का अर्थ तथा है, जबकि ओर का अर्थ तरफ है।)

(4) अर्थ भेद से होने वाली भूलें :
एक शब्द के अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग अर्थ होते हैं। ऐसे शब्दों का प्रयोग समझकर करना चाहिए।

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) पुलिस ने आरोपी को शिक्षा दी। पुलिस ने अपराधी को दंड दिया। (मराठी में दंड को शिक्षा कहते हैं।)
(2) उनके घड़ियाल की कीमत 50 हजार रुपए है। उनकी घड़ी की कीमत 50 हजार रुपए है। (गुजराती में घड़ी को घड़ियाल कहते हैं।)

(5) मातृभाषा के शब्दों का प्रयोग :
मराठी या गुजराती भाषी विद्यार्थी हिंदी लेखन में अपनी भाषा के शब्दों का प्रयोग कर देते हैं, जो अनुचित है।

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) रोहित को भूक (मराठी) लगी है। रोहित को भूख लगी है।
(2) कुत्ते की पूछड़ी (गुजराती) टेढ़ी होती है। कुत्ते की पूँछ टेढ़ी होती है।
(3) वह घर पहोंच (गुजराती) गया। वह घर पहुँच गया।
(4) मदन के हात (मराठी) में क्या है? मदन के हाथ में क्या है?

(6) सर्वनाम के प्रयोग में होने वाली भूलें :

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) वह लोग चले गए। वे लोग चले गए।
(2) उन्होंने जो पुस्तकें दी थीं, वह सब मैंने पढ़ ली है। उन्होंने जो पुस्तकें दी थीं, वे सब मैंने पढ़ ली हैं।
(3) तुम तुम्हारे घर जाओ। तुम अपने घर जाओ।
(4) हम हमारे देश की रक्षा करेंगे। हम अपने देश की रक्षा करेंगे।

(7) विशेषण का अनुचित प्रयोग :

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) ऋचा की हिंदी मातृभाषा नहीं थी। हिंदी ऋचा की मातृभाषा नहीं थी।
(2) भगतसिंह असली भारत के सपूत थे। भगतसिंह भारत के असली सपूत थे।
(3) इस मंदिर में अनेक गणेश की मूर्तियाँ हैं। इस मंदिर में गणेश की अनेक मूर्तियाँ हैं।
(4) उस दुकान में शुद्ध गाय का घी मिलता है। उस दुकान में गाय का शुद्ध घी मिलता है।
(5) जिंदगी उसकी अब नहीं बचेगी। अब उसकी जिंदगी नहीं बचेगी।

(8) वचन और लिंग के प्रयोग में होने वाली गलतियाँ :

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) वे महान व्यक्ति थीं। (मराठी में व्यक्ति शब्द स्त्रीलिंग है।) वे महान व्यक्ति थे। (हिंदी में व्यक्ति शब्द पुल्लिंग है।)
(2) मरीज का प्राण निकल गया। (मराठी में प्राण शब्द का प्रयोग एकवचन में होता है।) मरीज के प्राण निकल गए। (हिंदी में प्राण शब्द का प्रयोग सदा बहुवचन में होता है।)
(3) मैंने आवाज सुना। (मराठी/गुजराती में आवाज शब्द पुल्लिंग है।) मैंने आवाज सुनी। (हिंदी में आवाज शब्द स्त्रीलिंग है।)
(4) उस मरीज का मृत्यु हो गया। (मराठी/गुजराती में मृत्यु शब्द पुल्लिंग है।) उस मरीज की मृत्यु हो गई। (हिंदी में मृत्यु शब्द स्त्रीलिंग है।)
(5) उसका नाक कट गया। (मराठी/गुजराती में नाक शब्द नपुंसकलिंग है।) उसकी नाक कट गई। (हिंदी में नाक शब्द स्त्रीलिंग है।)

(9) वाक्यरचना के दोष :

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
(1) वे राग में अपने मगन था। वे अपने राग में मगन थे।
(2) राजेश की कमीज नरेश से अच्छी है। राजेश की कमीज नरेश की कमीज से अच्छी है।
(3) बकरी को काटकर घास खिलाओ। घास काटकर बकरी को खिलाओ।
(4) सभा में अनेकों लोग उपस्थित थे। सभा में अनेक लोग उपस्थित थे।
(5) क्या डॉक्टर साहब घर हैं? क्या डाक्टर साहब घर पर हैं?
(6) तुम तुम्हारे काम पर जाओ। तुम अपने काम पर जाओ।
(7) हमारे को कल स्कूल नहीं जाना। मुझे कल स्कूल नहीं जाना है।
(8) विश्वामित्र बहुत ज्ञानी व्यक्ति थे। विश्वामित्र बहुत ज्ञानी थे।
(9) वह महात्मा जी को धन्यवाद करता है। वह महात्मा जी को धन्यवाद देता है।
(10) मुझे केवल मात्र आपका समर्थन चाहिए। मुझे केवल आपका समर्थन चाहिए।
(11) मुझे एक व्याकरण की पुस्तक चाहिए। मुझे व्याकरण की एक पुस्तक चाहिए।
(12) क्या यह संभव हो सकता है? क्या यह संभव है।
(13) सारे कस्बे के लोगों में कोरोना पाया गया। कस्बे के सारे लोगों में कोरोना पाया गया।
(14) यहाँ ताजा भैंस का दूध मिलता है। यहाँ भैंस का ताजा दूध मिलता है।
(15) मजदूर खाना और पानी पीकर सो गए। मजदूर खाना खाकर और पानी पीकर सो गए।

प्रश्न. निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

प्रश्न 1.
शॉ कि बात सच्च है पर यह सच्चाई एकांगी है।
उत्तर :
शॉ की बात सच है, पर यह सच्चाई एकांगी है।

प्रश्न 2.
अब उसे लगता है की इस वेग से वह पीस जाएगा।
उत्तर :
अब उसे लगता है कि इस वेग से वह पिस जाएगा।

प्रश्न 3.
अपनी-अपनी बात कहने-सुनने से बंधन या संकोच कैसी।
उत्तर :
अपनी-अपनी बात कहने-सुनने में बंधन या संकोच कैसा।

प्रश्न 4.
मेरे को लगता है, पत्र का ये अंश तुम्हारे लिए कुछ भारी हो गया।
उत्तर :
मुझे लगता है, पत्र का यह अंश तुम्हारे लिए कुछ भारी हो गया।

प्रश्न 5.
हिन्दी युवकभारती एक ग्रंथ है।
उत्तर :
हिंदी युवकभारती एक पुस्तक है।

प्रश्न 6.
वे एक-दूसरे की रहा का रोड़ा नहीं, प्रेरणा ओर ताकत बनें।
उत्तर :
वे एक-दूसरे की राह का रोड़ा नहीं, प्रेरणा और ताकत बनें।

प्रश्न 7.
मैं इसके परिमाण का प्रतीक्षा करूँगी।
उत्तर :
मैं इसके परिणाम की प्रतीक्षा करूँगी।

प्रश्न 8.
ओजन एक गेस है, जो ऑक्सीजन के तीन परमाणु से मिलकर बनी है।
उत्तर :
आक्सीज एक गैस है, जो ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनी है।

प्रश्न 9.
किशोरी की घड़ियाल में तीन बजे है।
उत्तर :
किशोरी की घड़ी में तीन बजे हैं।

प्रश्न 10.
सास लेने के लिए स्वछ हवा मिलना मुश्किल हो रहा है।
उत्तर :
साँस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिलना मुश्किल हो रहा है।

प्रश्न 11.
सी.एफ.सी योगिकों का एक गुण खास है कि वे नष्ट नहीं होते।
उत्तर :
सी.एफ.सी. यौगिकों का एक खास गुण है कि वे नष्ट नहीं होते।

प्रश्न 12.
तुम मेरे गुरु का समान हैं।
उत्तर :
आप मेरे गुरु के समान हैं।

प्रश्न 13.
मुजे मेरे घर में ही शांति मिलती है।
उत्तर :
मुझे अपने घर में ही शांति मिलती है।

प्रश्न 14.
उस बगीचे में अनेक नारियल के वृच्छ हैं।
उत्तर :
उस बगीचे में नारियल के अनेक वृक्ष हैं।

प्रश्न 15.
दस दिन से बीमार मरीज का प्राण निकल गया।
उत्तर :
दस दिन से बीमार मरीज के प्राण निकल गए।

प्रश्न 16.
धारण-सा वृद्धास्रम का घर देखकर आश्चर्य लगा।
उत्तर :
वृद्धाश्रम का साधारण-सा घर देखकर आश्चर्य लगा।

प्रश्न 17.
आप दोनों इदर बैठो।
उत्तर :
आप दोनों इधर बैठिए।

प्रश्न 18.
बड़े लोग की माएँ क्या वृद्धाश्रम में अपने जीवन गुजारती हैं?
उत्तर :
बड़े लोगों की माएँ क्या वृद्धाश्रम में अपना जीवन गुजारती हैं?

प्रश्न 19.
मेरा नाना एक खाता-पीता किसान थे।
उत्तर :
मेरे नाना एक खाते-पीते किसान थे।

प्रश्न 20.
आपने मिलना किसको है?
उत्तर :
आपको मिलना किससे है?

प्रश्न 21.
बहोत देर तक हम दोनों रोता रहे।
उत्तर :
बहुत देर तक हम दोनों रोते रहे।

प्रश्न 22.
जब तलक एक भी सुपूत संसार में रहेगा, तब तक माएँ कष्ट सहकर संतान को जन्म देती रहेंगी।
उत्तर :
जब तक एक भी सपूत संसार में रहेगा, तब तक माएँ कष्ट सहकर संतान को जन्म देती रहेंगी।

प्रश्न 23.
निराला जी अपना शरीर, जिवन और साहित्य सभी में असाधारण हैं।
उत्तर :
निराला जी अपने शरीर, जीवन और साहित्य सभी में असाधारण हैं।

प्रश्न 24.
अपनी प्रतीकूल परिस्तिथियों से उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
उत्तर :
अपनी प्रतिकूल परिस्थितियों से उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

प्रश्न 25.
फूलों के श्पर्स से हरिणों ने सुध आई और वे चौकड़ी भरते हुए गायब हो गए।
उत्तर :
फूलों के स्पर्श से हरिणों को सुध आई और वे चौकड़ी भरते हुए गायब हो गए।

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest अपठित बोध Notes, Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi अपठित बोध

कृतिपत्रिका के प्रश्न 4 (इ) के लिए अपठित परिच्छेद क्र. 1

प्रश्न. निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 1
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 2

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए :
(1) मशीन – …………………………………….
(2) कक्षा – …………………………………….
(3) कपड़े – …………………………………….
(4) आवश्यकता – …………………………………….
उत्तर :
(1) मशीन – मशीनें
(2) कक्षा – कक्षाएँ
(3) कपड़े – कपड़ा
(4) आवश्यकता – आवश्यकताएँ।

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1.
‘गृहिणी की सुघड़ता’ विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
स्त्री की सुघड़ता उसके सौंदर्य के साथ-साथ उसके अच्छे व्यवहार और उसके अच्छे कामों से आँकी जाती है। सुघड़ गृहिणी अपने सद्व्यवहार और अपने काम से सबका दिल जीत लेती है। घर को सुव्यवस्थित रखना, बच्चों का उचित पालन-पोषण और उनकी शिक्षा-दीक्षा का प्रबंध करना, उनको अच्छे संस्कार देना, बुजुर्गों तथा अतिथियों की देखभाल तथा उनका सम्मान करना, सभी रिश्तेदारों से अच्छे संबंध बनाए रखना तथा सामाजिक व्यवहार निभाना आदि जिम्मेदारियाँ गृहिणी के ही हिस्से में आती हैं।

स्त्रियों के संबंध में सुघड़ता एक आवश्यक गुण है। सुघड़ स्त्री न केवल अपने परिवारजनों की बल्कि अपने समाज, जान-पहचानवालो और रिश्तेदारों की भी प्रशंसा की पात्र बन जाती है। लोगों द्वारा जगहजगह पर उसके उदाहरण दिए जाते हैं। इस प्रकार की सुघड़ता से उसका आत्मविश्वास बढ़ता हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

अपठित परिच्छेद क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 3
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 4

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(1) सूर्य = …………………………………….
(2) गति = …………………………………….
(3) आकाश = …………………………………….
(4) आँख = …………………………………….
उत्तर :
(1) सूर्य = रवि
(2) गति = रफ्तार
(3) आकाश = गगन
(4) आँख = नयन।

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1.
‘सौरमंडल’ विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपने १ विचार लिखिए।
उत्तर :
सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले ग्रहों, धूमकेतुओं, उल्काओं और अन्य आकाशीय पिंडों के समूह को ‘सौरमंडल’। कहते है। ये सभी एक-दूसरे में गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बँधे हुए हैं। सौरमंडल में 8 ग्रह हैं – बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेपच्यून।

ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं, जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं। सूर्य हमारी आकाशगंगा से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष दूरी पर स्थित है। सूर्य आकाशगंगा के चारों ओर 250 किमी प्रति सेकंड की गति से परिक्रमा कर रहा है। सूर्य अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम की ओर घूमता है।

सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है। बुध, शुक्र, शनि, बृहस्पति और मंगल इन पाँचों ग्रहों को बिना दूरबीन के भी देखा जा सकता है। सूर्य हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा पिंड है।

अपठित परिच्छेद क्र. 3
प्रश्न. निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 5
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 6

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
परिच्छेद में प्रयुक्त उपसर्गयुक्त शब्दों से मूल शब्द और उपसर्ग को अलग-अलग करके लिखिए :
(1) निर्विवाद
(2) अनिश्चित।
उत्तर :
(1) निर्विवाद = निर् + विवाद।
(2) अनिश्चित = अ + निश्चित।

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1.
‘जीवन-यापन के लिए समय से उचित व्यवसाय का चुनाव आवश्यक’ विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
दुनिया में दो तरह के मनुष्य होते हैं एक वे जो समाज में पारंपरिक रूप से किसी धंधे वाले परिवार से जुड़े हैं – जैसे किसान, लोहार, सुनार, नाई, धोबी आदि। इनके बच्चों को अकसर पारंपरिक कार्य सीखने का मौका मिल जाता है। इसी तरह छोटे-मोटे दुकानदार, कारखाना मालिक तथा बड़े-बड़े उद्योगपतियों का अपना व्यवसाय होता है।

इनके बच्चों को भी जन्म से ही अपने पारिवारिक व्यवसाय की जानकारी होती है और बड़े होने पर उनमें से अनेक अपने पारिवारिक धंधों से जुड़ जाते हैं। विशेष परेशानी उन लोगों को होती है, जो गरीब तबके से आते हैं और पढ़ने-लिखने के बाद भी उन्हें यह नहीं सूझता कि पढ़ाई के बाद व्यवसाय के अवसर कहाँ हैं, जहाँ वे हाथ-पाँव मारें। फिर भी इनमें से कुछ को किन्हीं कारणों से जीवन-यापन के अवसर उपलब्ध हो जाते हैं।

पर अधिकांश लोगों को यह सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाता। मजबूरी में उन्हें अपनी रुचि-अरुचि का ध्यान न रखते हुए कुछ-न-कुछ करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। कुछ लोग हिम्मत हारकर बैठ जाते हैं और माता-पिता के लिए बोझ बन जाते हैं। ऐसे लोगों को यह बात समझनी चाहिए कि जीवन-यापन के लिए कुछ-न-कुछ तो करना ही होगा, तभी उद्धार होगा। इसलिए उन्हें हारकर बैठने के बजाय, सदा प्रयासरत रहना चाहिए। प्रयास करने से कोई-न-कोई राह अवश्य मिलती है।

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

अपठित परिच्छेद क्र. 4
प्रश्न. निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 7
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 8

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :
(1) दुर्लभ x ………………………………
(2) कोमल x ………………………………
(3) सरल x ………………………………
(4) सजीव x ………………………………
उत्तर :
(1) दुर्लभ x सुलभ
(2) कोमल x कठोर
(3) सरल x कठिन
(4) सजीव x निर्जीव

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1.
‘पशुओं के प्रति दयाभाव’ विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपने विचार लिखिए :
उत्तर :
मनुष्यों की तरह ही पशु भी सृष्टि के आदि काल से पृथ्वी पर रहते आए हैं। पहले मनुष्य और पशु दोनों जंगलों में रहते थे। जब मनुष्य समूह बनाकर एक स्थान पर स्थायी रूप से रहने लगा और खेती करने लगा, तो उसने अपनी आवश्यकता के अनुसार अनेक पशुओं को पालतू बना लिया और उनसे काम लेने लगा। आज भी यह परंपरा जारी है। पर अनेक लोग पशुओं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते हैं। वे जानवरों से आवश्यकता से अधिक काम लेते हैं।

उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। अपने मनोरंजन के लिए निरीह जंगली जानवरों की हत्या करते हैं। लोगों को अपनी इस प्रवृत्ति से बाज आना जाहिए। हमें इन मूक प्राणियों के प्रति दया की भावना रखनी चाहिए और पशुओं के साथ होने वाले अत्याचार को रोकना चाहिए।

अपठित परिच्छेद क्र. 5
प्रश्न. निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 9
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध 10

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए :
(1) रसायन – ……………………………….
(2) वस्तु – ……………………………….
(3) धरती – ……………………………….
(4) तेल – ……………………………….
उत्तर :
(1) रसायन – पुल्लिंग
(2) वस्तु – स्त्रीलिंग
(3) धरती – स्त्रीलिंग
(4) तेल – पुल्लिंग।

कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1.
‘ध्वनि प्रदूषण’ विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
पर्यावरण में अनेक प्रकार के प्रदूषण हैं। ध्वनि प्रदूषण उनमें से एक है। ध्वनि प्रदूषण आधुनिक जीवन और बढ़ते हुए औद्योगीकरण का भयानक परिणाम है। इसके कुछ मुख्य स्रोत सड़क पर यातायात, परिवहन (ट्रक, बस, ऑटो, बाइक आदि) के द्वारा उत्पन्न शोर, भवन, सङक, बाँध, फ्लाई ओवर, हाइ-वे, स्टेशन आदि के निर्माण के समय बुलडोजर, डंपिंग ट्रक, लोडर आदि के कारण उत्पन्न शोर, औद्योगिक शोर, दैनिक जीवन में घरेलू उपकरणों का प्रयोग आदि हैं। ध्वनि प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।

Maharashtra Board Class 12 Hindi अपठित बोध

उच्च स्तर के ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है। तेज आवाज बेहरेपन और कान की अन्य जटिल समस्याओं का कारण बनती है। ध्वनि प्रदूषण चिंता, बेचैनी, थकान, सिरदर्द, घबराहट आदि का भी कारण बनता है। दिन-प्रति-दिन बढ़ता ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों की काम करने की क्षमता, गुणवत्ता तथा एकाग्रता को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष पारिभाषिक शब्दावली

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest परिशिष पारिभाषिक शब्दावली Notes, Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi परिशिष पारिभाषिक शब्दावली

1. पदनाम, प्रशासनिक एवं कार्यालय में प्रयुक्त शब्द

  • Ambassador = राजदूत
  • Honororium = मानदेय
  • Announcer = उद्घोषक
  • Internal = आंतरिक
  • Attesting Officer = साक्ंतकि अतधकारी
  • Invalid = अवैध Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष पारिभाषिक शब्दावली
  • Census Officer = जनगणना अधिकारी
  • Joining Date = कार्यग्रहण तिथि
  • Circle Inspector = अंचल निरीक्षक
  • Medical Benefit = चिकिस्ता सुविध
  • Custodian = अभिरक्षक
  • Registration = पंजीकरण
  • Interpreter = दुभाषिया
  • Suspension = निलंबन
  • Judge = न्यायाधीश
  • Temporary = अस्थायी
  • Justice = न्याय, न्यायमूर्ति
  • Warning = चेतावनी
  • Liaison Officer = संपर्क अधिकारी
  • Casual Leave = आकस्मिक छुट्टी/अवकाश
  • Verification Officer = सत्यापन अधिकारी
  • Earned Leave = अर्जित छुट्टी/अवकाश
  • Adjournment = स्थगन
  • Bye-Law = उपविधि
  • Advance = अग्रिम
  • Invoice = बीजक Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष पारिभाषिक शब्दावली
  • Commissioner = आयुक्त
  • Minutes = कार्यवृत्त
  • Agenda = कार्यसूची
  • Ordinance = अध्यादेश
  • Amendment = संशोधन
  • Procedure = कार्यविधि
  • Audit Objections = लेखापरीक्षा आपत्तियाँ
  • Public Accounts Committee = लोक लेखा समिति
  • Authentic = अधिप्रमाणित
  • Admiral = नौसेनाध्यक्ष
  • Autonomous = स्वायत्त

2. बैंक एवं वाणिज्य क्षेत्र से संबंधित शब्द

  • Bond = बंधपत्र
  • Accurued Interest = उपार्जित ब्याज
  • Charge Sheet = आरोपपत्र
  • Acknowledgement = पावती
  • Compensation = मुआवजा
  • Apex Bank = शिखर बैंक
  • Deduction = कटौती
  • Balance = शेष राशि Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष पारिभाषिक शब्दावली
  • Diciplinary Action = अनुशासनिक कार्रवाई
  • Bank Statement = बैंक विवरण
  • Eligibility = पात्रता
  • Commission = आढ़त
  • Enrolment = नामांकन
  • Dead Account = निष्क्रिय खाता
  • Exemption = छूट
  • Fixed Deposit = सावधि जमा
  • Expert = विशेषज्ञ
  • Payment = भुगतान, अदायगी
  • Gazetted = राजपत्रित
  • Pay Order = अदायगी आदेश
  • Reinvestment = पुनर्निवेश
  • Indemnity = नामित व्यक्ति
  • Surrender = आत्मसमर्पण
  • Dismiss = पदच्युत
  • Action = कार्यवाही
  • Paid Up = चुकता
  • Assured = बीमित
  • Arrears = बकाया
  • Balance Sheet = तुलना पत्र
  • Record = अभिलेख Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष पारिभाषिक शब्दावली
  • Balance of Payment = शेष भुगतान
  • Demurrage = विलंब शुल्क
  • Transaction = लेन-देन

3. वैज्ञानिक शब्दावली

  • Speed = गति
  • Friction = घर्षण
  • Antibiotics = प्रतिजैविक पदार्थ
  • Meteorology = मौसम विज्ञान
  • Antiseptics = रोगानुरोधक
  • Optic Fibre = प्रकाशीय तंतु

4. कंप्यूटर (संगणक) विषयक

  • Output = निकास
  • Graphic Table = आरेखन तालिका
  • Integrated Circuit = एकीकृत परिपथ
  • Auxilliary Memory = सहायक स्मृति

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ सुनु रे सखिया और कजरी

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest परिशिष भावार्थ : सुनु रे सखिया और कजरी Notes, Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi परिशिष भावार्थ : सुनु रे सखिया और कजरी

भावार्थ : पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्रमांक ६५–६६ : कविता – सुनु रे सखिया और कजरी

सुनु रे सखिया

इसमें नायिका अपनी सखियों से कह रही है कि सुन सखी, बसंत ऋतु आ गई है, सब तरफ फूल महकने लगे हैं। बसंत ऋतु के आने से सरसों फूल गई है, अलसी अलसाने लगी, पूरी धरती हरियाली की चादर ओढ़ खिल उठी है। कली–कली फूल बनके मुस्कुराने लगी है।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ सुनु रे सखिया और कजरी

इस ऋतु के आने से खेत, जंगल सब हरे–भरे हो गए हैं, जिसकी वजह से तन–मन भी हुलसने लगे हैं। इंद्रधनुष के रंगों की तरह रंग–बिरंगे फूल खिल उठे हैं। कजरारी आँखों में सपने मुस्कुराने लगे हैं और गले से मीठे गीत फूटने लगे हैं। बगिया के साथ यौवन भी अंगड़ाइयाँ लेने लगा है।

मधुर–मस्त बयार प्यार बरसाकर तार–तार रँगने लगी है। हर एक का मन गुलाब की तरह खिल रहा है। बाग–बगीचे हरे–भरे हो गए, कलियाँ खिलने लगीं, भौरे आस–पास मँडराने लगे। गौरैया भी माथे पर फूल सजा इतराने लगी है।

किंतु हे सखी, पिया के पास न होने से ये सब बबूल के काँटों की तरह चुभ रहे हैं। आँख में काजल धुल रहा है। आँसुओं की झड़ी लगी है पर बसंत फिर भी आ गया है फूलों की महक लेकर।

कजरी

मनभावन सावन आ गया। बादल घिर–घिर आने लगे। बादल गरजते हैं; बिजली चमकती है और पुरवाई चल रही है। रिमझिम–रिमझिम मेघ बरसकर धरती को नहला रहे हैं। दादुर, मोर, पपीहा बोलकर मेरे हृदय को प्रफुल्लित कर रहे हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ सुनु रे सखिया और कजरी

जगमग–जगमग जुगनू इधर–उधर डोलकर सबका मन लुभा रहे हैं। लता–बेल सब फलने–फूलने लगे हैं। डाल–डाल महक उठी है। सावन आ गया है।

सभी सरोवर और सरिताएँ भरकर उमड़ पड़ी हैं। हमारा हृदय सरस गया है। लोक कवि कहता है– ‘हे प्रिय ! शीघ्र चलो, श्याम की बंसी बज रही है।’

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ गुरुबानी वृंद के दोहे

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest परिशिष भावार्थ : गुरुबानी, वृंद के दोहे Notes, Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi परिशिष भावार्थ : गुरुबानी, वृंद के दोहे

भावार्थ : पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्रमांक २३, २४ : कविता – गुरुबानी – गुरु नानक

जो लोग गुरु से लापरवाही बरतते हैं और अपने–आपको ही ज्ञानी समझते हैं; वे व्यर्थ ही उगने वाले तिल की झाड़ियों के समान हैं। दुनिया के लोग उनसे किनारा कर लेते हैं। इधर से वे फलते–फूलते दिखाई देते हैं पर उनके भीतर झाँककर देखो तो गंदगी और मैल के सिवा कुछ दिखाई नहीं देगा।। १।।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ : गुरुबानी, वृंद के दोहे

मोह को जलाकर उसे घिसकर स्याही बनाओ। बुद्धि को श्रेष्ठ कागज समझो ! प्रेमभाव की कलम बनाओ। चित्त को लेखक और गुरु से पूछकर लिखो– नाम की स्तुति। और यह भी लिखो कि उस प्रभु का न कोई अंत है और न कोई सीमा।। २।।

हे मन ! तू दिन–रात भगवान के गुणों का स्मरण कर जिन्हें एक क्षण के लिए भी नहीं भूलता। संसार में ऐसे लोग विरले ही होते हैं। अपना ध्यान उसी में लगाओ और उसकी ज्योति से तुम भी प्रकाशित हो जाओ। जब तक तुझमें अहंभाव या ‘मैं, मेरा, मेरी’ की भावना रहेगी तब तक तुझे प्रभु के दर्शन नहीं हो सकते। जिसने हृदय से भगवान के नाम की माला पहन ली है; उसे ही प्रभु के दर्शन होते हैं।। ३।।

हे प्रभो ! अपनी शक्ति के सब रहस्यों को केवल तुम्हीं जानते हो। उनकी व्याख्या कोई दूसरा कैसे कर सकता है? तुम प्रकट रूप भी हो, अप्रकट रूप भी हो। तुम्हारे अनेक रंग हैं। अनगिनत भक्त, सिद्ध, गुरु और शिष्य तुम्हें ढूँढ़ते–फिरते हैं। हे प्रभु ! जिन्होंने तेरा नामस्मरण किया, उनको प्रसाद में (भिक्षा में) तुम्हारे दर्शन की प्राप्ति हुई है। तुम्हारे इस संसार के खेल को केवल कोई गुरुमुख ही समझ सकता है। तुम्हारे इस संसार में तुम्ही युग–युग में विद्यमान रहते हो।। ४।।

हे पंडित ! संसार में दिन–रात महान आरती हो रही है। आकाश रूपी थाल में सूर्य और चाँद दीपक और हजारों तारे–सितारे मोती बनकर जगमगा रहे हैं। मलय की खुशबूदार हवा का धूप महक रहा है। वायु चँवर से हवा कर रही है। जंगल के सभी वृक्ष फूल चढ़ा रहे हैं। हृदय में अनहद नाद का ढोल बज रहा है। हे मनुष्य ! इस महान आरती के होते हुए तेरी आरती की क्या आवश्यकता है, क्या महत्त्व है ? अर्थात भगवान की असली आरती तो मन से उतारी जाती है और श्रद्धा ही भक्त की सबसे बड़ी भेंट है। फिर आप लोग थालियों में ये थोड़े–थोड़े फल–फूल लेकर मूर्ति पर क्यों चढ़ाते हो? क्या उसके पास थालियों की कमी है? अरे ! आकाश ही उसका नीलम थाल है ! सूर्य और चंद्रमा की ओर देखो। वे भगवान की आरती में रखे हुए दीपक हैं। ये तारे ही उसके मोती हैं और हवा उसे दिन–रात चँवर झुला रही है।। ५।।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ : गुरुबानी, वृंद के दोहे

भावार्थ : पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्रमांक २७, २८ : कविता – वृंद के दोहे

माँ सरस्वती के ज्ञान भंडार की बात बड़ी ही अनूठी और अपूर्व है। यह ज्ञान भंडार जितना खर्च किया जाए, उतना बढ़ता जाता है और खर्च न करने पर वह घटता जाता है अर्थात ज्ञान देने से बढ़ता है और अपने पास रखने पर नष्ट हो जाता है ॥१॥

आँखें ही मन की सारी अच्छी–बुरी बातों को व्यक्त कर देती हैं… जैसे स्वच्छ आईना अच्छे–बुरे को बता देता है।।२।।

अपनी पहुँच, क्षमता को पहचानकर ही कोई भी कार्य कीजिए। जैसे– हमें उतने ही पाँव फैलाने चाहिए जितनी हमारी चादर हो।।३।।

यदि आप व्यापार करते हैं तो व्यापार में छल–कपट का सहारा न लें। छल–कपट से किया गया व्यवहार ग्राहक को आपसे दूर ले जाता है। जैसे– लकड़ी (काठ) की हाँडी आग पर एक ही बार चढ़ती है, बार–बार नहीं क्योंकि लकड़ी पहली बार में ही जल जाती है।।४।।

ऊँचे स्थान पर बैठने से बिना गुणोंवाला कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं बन जाता। ठीक वैसे ही जैसे मंदिर के शिखर पर बैठने से कौआ गरूड़ नहीं बन जाता।।५।।

दूसरे के भरोसे अपना कार्य अथवा व्यवसाय छोड़ देना उचित नहीं है। जैसे– पानी से भरे बादलों को देखकर पानी से भरा अपना घड़ा फोड़ देना बुद्धिमानी नहीं है।।६।।

दुष्ट अथवा छोटे व्यक्ति की संगति में रहना अथवा कुछ कहकर उसे छेड़ना श्रेयस्कर नहीं है। जैसे– कीचड़ में पत्थर फेंकने से वह कीचड़ हमपर ही उछलकर हमें गंदा कर देता है।।७।।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष भावार्थ : गुरुबानी, वृंद के दोहे

जो ऊँचाई पर, उच्च पद पर पहुँचता है, उसका नीचे उतर आना भी उतना ही स्वाभाविक है। जैसे– दोपहर के समय तपा हुआ दग्ध सूर्य शाम के समय अस्त हो जाता है, डूब जाता है।।८।।

जिसके पास गुण होते हैं, उसी के अनुसार उसे आदर प्राप्त होता है। जैसे– मधुर वाणी के कारण कोयल को आम प्राप्त होते हैं और कर्कश ध्वनि के कारण कौए को निबौरी (नीम का फल) प्राप्त होती है।।९।।

अविवेक के साथ किया गया कार्य स्वयं के लिए हानिकर सिद्ध होता है। जैसे– कोई मूर्ख अपनी अविवेकता से कार्य कर अपने पाँव पर अपने हाथ से कुल्हाड़ी मार बैठता है।।१०।।

पालने में बच्चे के लक्षण देखकर ही उसके अच्छे–बुरे होने का पता चल जाता है। जैसे– उत्तम बीज के पौधों के पत्ते चिकने अर्थात स्वस्थ पाए जाते हैं।।११।।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष मुहावरे

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest परिशिष मुहावरे Notes, Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi परिशिष मुहावरे

मुहावरा वह वाक्यांश जो सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में प्रयुक्त होता है; मुहावरे में उसके लाक्षणिक और व्यंजनात्मक अर्थ को ही स्वीकार किया जाता है। वाक्य में प्रयुक्त किए जाने पर ही मुहावरा सार्थक प्रतीत होता है।

Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष मुहावरे

  • अपना उल्लू सीधा करना – अपना स्वार्थ सिद्ध करना।
  • दिन दूना रात चौगुना बढ़ना – दिन–प्रतिदिन अधिक उन्नति करना।
  • अक्ल पर पत्थर पड़ना – बुद्धि काम न करना।
  • आँखों में धूल झोंकना – धोखा देना।
  • आँखें बिछाना – अति उत्साह से स्वागत करना।
  • कान में कौड़ी डालना – गुलाम बनाना।
  • कंगाली में आटा गीला होना – विपत्ति में और अधिक विपत्ति आना।
  • कुएँ में बाँस डालना – जगह–जगह खोज करना।
  • गुड़ गोबर करना – बने काम को बिगाड़ देना।
  • गड़े मुर्दे उखाड़ना – पुरानी कटु बातों को याद करना।
  • कटे पर नमक छिड़कना – दुखी को और दुखी बनाना।
  • एक और एक ग्यारह – एकता में शक्ति होना
  • घर फूंक तमाशा देखना – अपनी ही हानि करके प्रसन्न होना।
  • घाट-घाट का पानी पिया होना – हर प्रकार के अनुभव से परिपूर्ण होना।
  • चाँदी काटना – बहुत लाभ कमाना। Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष मुहावरे
  • जहर का चूंट पीना – अपमान को चुपचाप सह लेना।
  • जी-जान से काम करना – पूरी क्षमता के साथ काम करना।
  • तिल का ताड़ बनाना – छोटी बात को बढ़ा–चढ़ाकर कहना।
  • पत्थर की लकीर होना – पक्की बात।
  • पेट में दाढ़ी होना – छोटी आयु में बुद्धिमान होना।
  • फूंक-फूंककर पाँव रखना – अति सावधानी बरतना।
  • मुट्ठी गर्म करना – रिश्वत देना।
  • रंग में भंग होना – प्रसन्नता के वातावरण में विघ्न पड़ना।
  • शक्ल पर बारह बजना – बड़ा उदास रहना।
  • सितारा चमकना – भाग्योदय होना
  • आठ-आठ आँसू रोना – बहुत अधिक रोना।
  • आँखें चार होना – प्रेम होना।
  • अगर-मगर करना – टाल–मटोल करना।
  • अपना ही राग अलापना – अपनी ही बातें करते रहना।
  • आसमान पर थूकना – अशोभनीय कार्य करना।
  • उल्टी गंगा बहाना – उल्टा काम करना।
  • उगल देना – भेद बता देना।
  • ओखली में सिर देना – जान–बूझकर जोखिम उठाना।
  • एक लाठी से हाँकना – सबके साथ समान व्यवहार करना।
  • चार चाँद लगाना – शोभा बढ़ाना।
  • पापड़ बेलना – कड़ी मेहनत करना।
  • कान भरना – चुगली करना। Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष मुहावरे
  • कोल्हू का बैल – लगातार काम में लगे रहने वाला। बहुत परिश्रम करने वाला।
  • कब्र में पैर लटकना – मरने के समीप होना।
  • कागजी घोड़े दौड़ाना – लिखा–पढ़ी करना।
  • कौड़ी-कौड़ी का मोहताज – अत्यंत निर्धन होना।
  • खाला का घर – आसान काम।
  • खाल मोटी होना – बेशर्म होना।
  • गिरगिट की तरह रंग बदलना – अवसरवादी होना।
  • घोड़े बेचकर सोना – गहरी नींद सोना।
  • हाथ खींचना – निश्चिंत होकर सोना।
  • चोली-दामन का साथ होना – साथ न देना।
  • चोर की दाढ़ी में तिनका – घनिष्ठ संबंध होना।
  • जली-कटी सुनाना – अपराधी का भयभीत और सशंकित रहना।
  • डकार तक न लेना – कटु–चुभती बातें करना।
  • डूबती नाव पार लगाना – सब कुछ हजम कर लेना।
  • तलवे चाटना – कष्टों से छुटकारा देना।
  • दाल न गलना – खुशामद करना।
  • पेट काटना – काम न बनना।
  • पाँचों उँगलियाँ घी में होना – चतुराई काम न आना।
  • पोंगा होना – भूखा रहना। Maharashtra Board Class 12 Hindi परिशिष मुहावरे
  • बात का धनी – चहुँ तरफ लाभ होना।
  • मरने की फुरसत न होना – नासमझ होना।
  • मूंछ उखाड़ना – वचन का पक्का कामों में बहुत व्यस्त होना।
  • रोटियाँ तोड़ना – घमंड चूर-चूर कर देना।
  • वीरगति को प्राप्त होना-मुफ्त में खाना।
  • स्वांग भरना – युद्ध में वीरतापूर्वक मृत्यु पाना।
  • हवा लगना – विचित्र वेश बनाना, किसी की नकल उतारना।
  • हवाई किले बनाना – असर पड़ना/होना।
  • दाई से पेट छिपाना – बहुत अधिक कल्पना करना।
  • सिर खपाना – भेद जानने वाले से सच्ची बात छिपाना।
  • खबर गरम होना – कठोर परिश्रम करना। चर्चा-ही-चर्चा होना।
  • चिराग तले अँधेरा – गुणवान व्यक्ति में भी दोष होना।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव

12th Hindi Guide Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

पाठ पर आधारित

प्रश्न 1.
प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने के उद्देश्यों की जानकारी दीजिए।
उत्तर :
हम कोई भी काम करते हैं, तो उसके पीछे हमारा कोई-न-कोई उद्देश्य होता है। उसी तरह प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों का भी प्रकाश उत्पन्न करने के पीछे सार्थक उद्देश्य होता है।

वातावरण में लाखों कीट-पतंगे उड़ते रहते हैं। प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों का अँधेरे में प्रकाश उत्पन्न करने का एक कारण उजाले में अपने साथी की खोज करना होता है। इसके अलावा प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव इससे संकेतों का आदान-प्रदान भी करते हैं।

जीवों द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने का दूसरा उद्देश्य उजाले में अपने शिकार को खोजना होता है। वह उजाले में शिकार को स्पष्ट रूप से देखकर उसे अपना शिकार बना सकता है। कुछ जीव अपने प्रकाश से शिकार को आकर्षित करने का काम भी करते हैं। प्रकाश से आकर्षित होकर शिकार जब उसके पास आता है, तो वह आसानी से उसे अपना शिकार बना लेता है।

है कुछ जीव, विशेषकर मछलियाँ, कामाफ्लास के लिए प्रकाश उत्पन्न करते हैं। इस प्रकाश में वे अपने परिवेश से इतना घुल-मिल जाते हैं कि सरलता से वे दिखाई नहीं देते। इससे उन जीवों को शिकार करने और अपने आप को सुरक्षित रखने में सुविधा होती है।

जीवों द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने का उद्देश्य आत्मरक्षा करना भी होता है। सागरों और महासागरों में पाए जाने वाले कुछ जीव अपने प्रकाश उत्पादक अंगों से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। ये स्क्विड के समान अपने शरीर से एक विशेष प्रकार का तरल रसायन छोड़ते हैं, जो पानी में मिलकर चमकीला प्रकाश-सा हो जाता हैं। इससे उनका शत्र उन्हें देख नहीं पाता है और वे वहाँ से भागने में सफल हो जाते हैं।

इस प्रकार प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने के कई सार्थक उद्देश्य होते हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 12 लोकगीत

प्रश्न 2.
प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों की वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि से जानकारी लिखिए।
उत्तर :
प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के बारे में किए गए विभिन्न अध्ययनों से वैज्ञानिकों को अनेक प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त हुई हैं। प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव जमीन और जल दोनों स्थानों पर पाए जाते हैं। जल में पाए जाने वाले ये जीव तालाबों और नदियों के जल में नहीं पाए जाते। प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव खारे जल वाले गहरे समुद्रों में पाए जाते हैं। इनमें जेलीफिश, स्क्विड, क्रिल तथा विभिन्न जातियों वाले झींगे मुख्य हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव दो प्रकार से प्रकाश उत्पन्न करते हैं – एक तो अपने शरीर पर पाए जाने वाले जीवाणुओं के माध्यम से, दूसरे रसायन के पदार्थों की पारस्परिक क्रिया के द्वारा। जीवाणुओं द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के पूरे शरीर पर प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवाणु रहते हैं। ये निरंतर प्रकाश उत्पन्न करते रहते हैं।

इन जीवों में इस प्रकाश को ढकने अथवा प्रकाश वाले भाग को अपने शरीर के अंदर खींचने की क्षमता होती है। अतः वे अपनी आवश्यकता के अनुसार इस प्रकाश का उपयोग करते हैं। रसायनों के द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के शरीर में ल्यूसीफेरिन (Luciferin) और ल्यूसीफेरैस (Luciferase) नामक रसायन होते हैं। इन दोनों रसायनों की सहायता से ये जीव प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

अधिकांश जीव जीवाणुओं द्वारा अथवा रासायनिक क्रिया द्वारा प्रकाश उत्पन्न करते हैं। पर कुछ ऐसे भी जीव होते हैं, जिनके शरीर पर न तो प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवाणु रहते हैं और न ही उनके शरीर पर रसायन उत्पन्न करने वाले अंग ही होते हैं। फिर भी ये प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

इन जीवों के शरीर में विशेष प्रकार के द्रव पदार्थ वाली ग्रंथि होती है। यह द्रव पदार्थ पानी के संपर्क में आते ही प्रकाश उत्पन्न करता है। समुद्र में पाए जाने वाले प्रकाश उत्पादक जीवों के लिए पानी आवश्यक होता है। ये जीव पानी के बाहर प्रकाश उत्पन्न नहीं कर सकते।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों की संख्या काफी है। जीव वैज्ञानिक अभी प्रकाश उत्पन्न करने वाले नए-नए जीवों की खोज कर रहे हैं तथा उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले प्रकाश पर शोध कर रहे हैं।

व्यावहारिक प्रयोग

प्रश्न 1.
समुद्री जीवों पर शोधपूर्ण आलेख पढ़ें।
उत्तर :
पृथ्वी के तीन चौथाई हिस्से पर समुद्रों की विशाल जल राशि व्याप्त है। इस जल राशि में समुद्री जीवों की विचित्र दुनिया है। ऐसी दुनिया जिसके बारे में जानकर दाँतों तले ऊँगली दबा लेनी पड़ती है।

समुद्र बड़े-छोटे, रंगबिरंगे, खतरनाक विषैले जीवों तथा प्रकाश उत्पन्न करने वाले असंख्य जीवों से भरा पड़ा है।

एक ओर जहाँ समुद्र में पाए जाने वाले जीवों पर आधारित मत्स्य उद्योग, सजावटी सामानों तथा अन्य अनेक वस्तुओं के व्यवसाय फल-फूल रहे हैं, वहीं समुद्र में अभी भी ऐसे अनेक जीव हैं जिनके बारे में हम जानते तक नहीं।

समुद्र के अद्भुत संसार में पाया जाने वाला अद्भुत जीव है व्हेल। यह समुद्र का सबसे बड़ा जीव है। इसकी लंबाई 25 मीटर और वजन 150 से 180 टन तक होता है। गहरे पानी में पाया जाने वाला यह जीव साँस लेने के लिए जब अपने सिर में बने छेद से पानी फेंकता है तो लगता है, जैसे बादल फटकर बरसात हो रही हो। विशाल जीवों में खतरनाक शॉर्क मछली भी मशहूर है। यह इतनी खतरनाक होती है कि अन्य समुद्री जीव इससे दूरी बनाकर चलते हैं। समुद्र में बिजली की तरह करंट मारने वाली दो मीटर लंबी बामी मछली की शकल-सूरत वाली एक मछली पाई जाती है, जिसका नाम है ईल।

इसके शरीर में 860 वॉट का करंट प्रवाहित होता है। यह अपने इस करंट से मगर जैसे खतरनाक जीव को भी मार डालती है। समुद्र में पाई जाने वाली सॉर्ड फिश चपटे और बहुत बड़े आकार की होती है। उसका थूथना नुकीला होता है और वजन 600 किलो तक का होता है। स्टिंग रे फिश का आकार हवाई जहाज जैसा होता है और इसके जबड़ों के पास वाले दो बड़े-बड़े काँटे बहुत विषैले होते हैं। विषैली मछलियों में जेली फिश का भी समावेश हैं।

यह पारदर्शी होती है और इसके शरीर से लटकने वाले रेशे बहुत विषैले होते हैं। इसलिए इसे पकड़कर उठाते समय बहुत सावधानी बरतनी पड़ती हैं।

समुद्र में कुछ ऐसी मछलियाँ भी पाई जाती हैं, जो उड़ सकती हैं। इन्हें फ्लाइंग फिश के नाम से जाना जाता है। ये पानी की सतह के ऊपर तेज गति से उड़ती हुई जाती हैं। ये मछलियाँ आकार में छोटी होती हैं। समुद्र में तीक्ष्ण दाँतों वाली पॉफर नाम की एक विचित्र मछली पाई जाती है। वह सामान्य मछलियों की तरह लंबी होती है पर छूने पर यह गोल आकार धारण कर लेती है।

समुद्र सी-हार्स, शील, डाल्फिन, लायन फिश, शंख, सीपियों, धोंधों, केकड़ों, कछुओं तथा विभिन्न प्रकार के साँपों से भरा हुआ है। इसमें तरह-तरह की हजारों किस्म की रंगबिरंगी मछलियाँ पाई जाती हैं।

इसके अलावा समुद्र में प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों का विशाल संसार है। ये जीव अपने शिकार करने अथवा अपनी आत्मरक्षा के लिए प्रकाश उत्पन्न करते हैं। इन जीवों में ऑक्टोपस, एंगलर मछलियाँ, कटलफिश, कार्डिनल मछली, क्रिल, जेली फिश, टोड मछली, धनुर्धारी मछली, वाम्बेडक मछली, मूंगे, लालटेल मछली, वाइपर मछली, शंबुक, समुद्री कासनी, समुद्री स्लग, समुद्री स्क्विर्ट, स्क्विड तथा व्हेल मछली प्रमुख हैं। जीव वैज्ञानिक अभी भी समुद्र में प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों की खोज का कार्य कर रहे हैं।

जिस प्रकार समुद्र का आरपार नहीं है उसी प्रकार समुद्री जीवों का भी आरपार नहीं है।

प्रश्न 2.
प्रकाश उत्पन्न करने वाले किसी एक जीव की खोज कीजिए।
उत्तर :
संसार में प्रकाश उत्पन्न करने वाले अनेक जीव हैं। प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है। एक जमीन पर पाए जाने वाले जीव और दूसरे जल में पाए जाने वाले जीव। यहाँ हम जमीन पर पाए जाने वाले प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव जुगनू की जानकारी प्राप्त करेंगे।

जुगनू एक सामान्य कीड़ा है, जो रात के अंधेरे में आकाश में रुक-रुक कर प्रकाश करते हुए उड़ता है। यह ग्रामीण भागों में सर्वत्र पाया जाता है। गाँवों में अकसर बच्चे जुगनू को मुट्ठी में पकड़ कर खेलते हैं। दूसरे बच्चे यह देख कर ताज्जुब करते हैं कि आग को मुट्ठी में पकड़ने पर भी उसका हाथ जला क्यों नहीं। पर प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के प्रकाश में ऊष्मा नहीं होती। यह प्रकाश ठंडा होता है। इसलिए हाथ जलने का सवालही नहीं उठता।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव दो प्रकार से प्रकाश उत्पन्न करते ई हैं। एक जीवाणुओं द्वारा और दूसरे रासायनिक, पदार्थों की पारस्परिक क्रिया द्वारा। जुगनू रासायनिक पदार्थों की पारस्परिक क्रिया द्वारा प्रकाश उत्पन्न करता है।

वह रात के अंधेरे में आकाश में उड़ते हुए रुक-रुक प्रकाश छोड़ता है। यह प्रकाश उसके शरीर के पिछले हिस्से में चमकता हुआ दिखाई देता है। जुगनू अपने छोटे-छोटे परों से उड़ता है। रात के अँधेरे में उड़ते हुए जुगनू के प्रकाश उत्पन्न करने के कई कारण है। दिन में जुगनू चिड़ियों आदि के खाए जाने के डर से झाड़ियों में छुपा रहता है। रात के समय उत्युक्त आकाश में उसे उड़ने का अवसर मिलता है।

उड़ते समय वह अपने साथी की प्रकाश के द्वारा खोज करता है। इस तरह के प्रकाश में उसका एक मकसद अपने शिकार करने की खोज करना भी होता है। लेकिन उसके शरीर से प्रकाश उत्पन्न करने से वह अपने बड़े शत्रु कीट-पतंगे की नजर में आ जाता है और आसानी से वह उनका शिकार भी बन जाता है।

जुगनू के प्रकाश उत्पन्न करने के पीछे वैज्ञानिक कारण जो भी हों, उसे प्रकाश उत्पन्न करते हुए उड़ते देखना सब को अच्छा लगता है।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव Summary in Hindi

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव लेखक का परिचय

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव लेखक का नाम :
डॉ. परशुराम शुक्ल। (जन्म 6 जून, 1947.)

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव प्रमुख कृतियाँ :
‘जासूस परमचंद के कारनामे’ (बाल धारावाहिक), ‘नन्हा जासूस’ (बाल कहानी संग्रह), ‘सुनहरी परी और राजकुमार’ (बाल उपन्यास), ‘नंदनवन’, ‘आओ बच्चो, गाओ बच्चो’, ‘मंगल ग्रह जाएँगे’ (बाल कविता संग्रह) आदि।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव विशेषता :
बाल साहित्य लेखन और पशु जगत का विश्लेषण करने में सिद्धहस्त। आपकी अनेक कृतियों का अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, सिंधी आदि भाषाओं में अनुवाद। राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।

विधा :
लेख। लेख लिखने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसमें वस्तुनिष्ठता, ज्ञानपरकता तथा शोधपरकता जैसे तत्त्वों का समावेश होता है। लेख समाज विज्ञान, राजनीति, इतिहास जैसे विषयों का ज्ञानवर्धन करने के साथ-साथ जानकारी का नवीनीकरण भी करते हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव विषय प्रवेश :
हम प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों में केवल जुगनू से ही परिचित हैं। लेकिन जुगनू के अतिरिक्त ऐसे अनेक जीव हैं, जो प्रकाश उत्पन्न करते हैं। प्रस्तुत पाठ में लेखक ने प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के बारे में विस्तार से बताया है। लेखक कहना चाहते हैं कि हमें विज्ञान की दृष्टि से संसार को देखने की आवश्यकता है।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव पाठ का सार

विश्व के समस्त जीवों के लिए प्रकाश का बहुत महत्त्व है। मनुष्य ने अपने लिए प्रकाश की कई तरह की कृत्रिम व्यवस्था की. है। इसी तरह संसार में ऐसे अनेक जीव पाए जाते हैं जिनके शरीर पर प्रकाश उत्पन्न करने वाले अंग होते हैं। मानव द्वारा तैयार किए गए प्रकाश में ऊष्मा होती है, पर जीवों द्वारा उत्पन्न प्रकाश में ऊष्मा नहीं होती। जीवों के प्रकाश उत्पन्न करने की क्रिया को ल्युमिनिसेंस (Luminiscence) कहते हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव 1

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों में जुगनू (Firefly) प्रसिद्ध जीव है। यह कीट वर्ग का जीव है और पूरे वर्ष प्रकाश उत्पन्न करता है।

संसार में कवक (छत्रक) (Fungus) की कुछ जातियाँ रात में प्रकाश उत्पन्न करती हैं। इसी प्रकार मशरूम की कुछ जातियाँ भी रात में प्रकाश उत्पन्न करती हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव थल की अपेक्षा खारे पानी यानी सागरों-महासागरों में अधिक पाए जाते हैं। ये सागर के गहरे पानी में पाए जाते है। इनमें जेलीफिश, स्क्विड, क्रिल तथा विभिन्न जाति के झींगे मुख्य हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव दो प्रकार से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। एक जीवाणुओं द्वारा और दूसरे रासायनिक पदार्थों की पारस्परिक क्रिया द्वारा कुछ जीवों के शरीर पर ऐसे जीवाणु रहते हैं, जो प्रकाश उत्पन्न करते हैं। ये जीव प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं से सहजीवी संबंध बना लेते हैं और आवश्यकता के अनुसार इनके प्रकाश का उपयोग करते हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव 2

जीवाणुओं के प्रकाश का उपयोग करने वाले जीव इस प्रकाश का उपयोग दो तरह से करते हैं – एक शरीर के भाग को भीतर खींच कर और दूसरे प्रकाश उत्पन्न करने वाले भाग को ढककर। इससे वे उस स्थान का प्रकाश समाप्त कर देते हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले कुछ जीव रसायनों की सहायता से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। वे रसायन प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के शरीर में रहते हैं तथा ल्यूसीफेरिन तथा ल्यूसीफेरैस नामक रसायनों की सहायता से प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

अधिकांश जीव जीवाणुओं द्वारा अथवा रासायनिक क्रिया द्वारा प्रकाश उत्पन्न करते हैं। लेकिन कुछ जीव ऐसे होते हैं जिनके शरीर में विशेष प्रकार की ग्रंथि होती है, जिससे एक विशेष प्रकार का द्रव पदार्थ निकलता है। वह द्रव पदार्थ पानी के संपर्क में आते ही प्रकाश उत्पन्न करने लगता है।

समुद्र में पाए जाने वाले प्रकाश उत्पादक जीव पानी के बाहर प्रकाश उत्पन्न नहीं कर सकते हैं।

अध्ययनों से पता चला है कि जमीन और पानी के सभी जीव अपने अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपने-अपने ढंग से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। ये उद्देश्य इस प्रकार होते हैं – साथी की खोज और संकेतों का आदान-प्रदान, शिकार की खोज और शिकार को आकर्षित करना, कामाफ्लास उत्पन्न करना तथा आत्मरक्षा करना।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव 3

गहरे समुद्रों में अनेक जीव शिकार की खोज के लिए अपने शरीर से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। एंगलर मछली उनमें से एक है। समुद्र में अनेक जीव, विशेषकर मछलियाँ शिकार करने अथवा सुरक्षा की दृष्टि से कामाफ्लास के लिए प्रकाश उत्पन्न करती हैं। इससे उन्हें शिकार करने और सुरक्षित रहने में सहायता मिलती है। समुद्र के कुछ अन्य जीव भी आत्मरक्षा के लिए अपने प्रकाश अंगों से तरल रसायन छोड़कर चमकीला प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन सन 1600 के आसपास शुरू हुआ था। वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि कुछ जीव प्रकाश क्यों उत्पन्न करते हैं। सन 1794 तक जीव वैज्ञानिक यह समझते रहे कि समुद्री जीव फासफोरस की सहायता से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। किंतु फासफोरस विषैला पदार्थ होता है यह जीवित कोशिका में नहीं रह सकता। इसलिए इस मत को मान्यता नहीं मिल सकी।

सन 1794 में इटली के वैज्ञानिक स्पैलेंजानी, सन 1887 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक थिबाइस तथा सन 1894 में प्रोफेसर अलिरक डाहलगैट ने जीवों के प्रकाश उत्पन्न करने के बारे में विभिन्न मत व्यक्त किए। इससे प्रकाश उत्पन्न करने वाले नए-नए जीवों के खोज के कार्य को प्रोत्साहन मिला।

सागर में प्रकाश उत्पन्न करने वाले तरह-तरह के जीव पाए गए हैं, जो अपनी किस्म के निराले हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 18 प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव 4

धरती पर पाए जाने वाले प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों की संख्या बहुत है। इनमें ऑक्टोपस, एंगलर मछलियाँ, कटलफिश, कनखजूरा, कार्डिनल मछली, क्रिल, कोपपाड, क्लाम, जुगनू, जेलीफिश, टोड मछली, धनुर्धारी मछली, नलिका कृमि, पिडाक, वाम्बेडक मछली, ब्रिसलमाउथ, भंगुरतारा, मूंगा, लालटेल मछली, वाइपर मछली, शंबुक, शल्क कृमि, समुद्री कासनी, समुद्री स्लग, समुद्री स्क्विर्ट, स्क्विड तथा व्हेल मछली आदि प्रमुख हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव शब्दार्थ

कृत्रिम बनावटी।
आविष्कार ईजाद।
संरचना बनावट।
तंतु तागा, रेशा।
ऊष्मा गर्मी।
कवक छत्रक, कुकुरमुत्ता।
थल जमीन।
सहजीवी साथ रहने वाला।
जीवाणु क्षुद्रतम जीव।
नियंत्रित नियंत्रण में रखा हुआ।
रसायन पदार्थों का तत्त्वगत ज्ञान।
ग्रंथि शरीर का वह विशेष अंग जो शारीरिक क्रियाओं को जारी रखने के लिए आवश्यक रासायनिक यौगिका का निर्माण करके उसे शरीर में भेजता है।
रासायनिक रसायनशास्त्र या तत्त्व संबंधी।
अवयव अंग।
प्रयोगशाला वह स्थान जहाँ पदार्थ विज्ञान, रसायनशास्त्र आदि विषयक तथ्यों को समझने, जानने या नई बातों का पता लगाने की दृष्टि से विविध प्रयोग किए जाते हैं।
द्रव पदार्थ तरल पदार्थ।
विश्लेषण किसी चीज के अंगों को अलग करना।
कामाफ्लास किसी जीव की वह स्थिति, जिसमें वह अपने परिवेश में घुल मिल जाता है।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव शोधपरक लेखन के मुद्दे

  • विषय का उल्लेख
  • शोध की आवश्यकता
  • शोध को लेकर विविध पुस्तकों का अध्ययन
  • शोध विषय के पुष्ट्यार्थ विविध संदर्भ पुस्तकों का वाचन
  • शोध कार्य की सूची
  • शोधविषय की सिद्धता
  • सिद्धता का कॉपी में अंकन
  • शोधकार्य की साहित्यिक उपयोगिता

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 17 ब्लॉग लेखन

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 17 ब्लॉग लेखन Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 17 ब्लॉग लेखन

12th Hindi Guide Chapter 17 ब्लॉग लेखन Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

पाठ पर आधारित

प्रश्न 1.
ब्लॉग लेखन से तात्पर्य।
उत्तर :
ब्लॉग अपना विचार, अपना मत व्यक्त करने का एक डिजिटल माध्यम है। ब्लॉग के माध्यम से हम जो कुछ कहना चाहते हैं, उसके लिए किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। ब्लॉग लेखन में शब्द संख्या का बंधन नहीं होता। हम अपनी बात को जितना विस्तार देना चाहें, दे सकते हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 17 ब्लॉग लेखन

डिजिटल माध्यम हैं। ब्लॉग, वेबसाइट, पोर्टल आदि अखबार, पत्रिका या पुस्तक हाथ में लेकर पढ़ने के स्थान पर उसे कंप्यूटर, टैब या सेलफोन पर पढ़ना डिजिटल माध्यम कहलाता है। इसके कारण लेखक और पत्रकार भी ग्लोबल हो गए हैं। इस माध्यम के द्वारा पूरी दुनिया की कोई भी जानकारी क्षण भर में ही परदे पर उपलब्ध हो जाती है। नवीन वाचकों की संख्या मुद्रित माध्यम के वाचकों से बहुत अधिक है। इस वर्ग में युवा वर्ग अधिक संख्या में हैं।

जस्टीन हॉल ने सन 1994 में सबसे पहले इस शब्द का प्रयोग किया। जॉन बर्गर ने इसके लिए वेब्लॉग शब्द का प्रयोग किया था। माना जाता है कि 1999 में पीटर मेरहोल्स ब्लॉग शब्द को प्रस्थापित कर उसे व्यवहार में लाए। भारत मे 2002 के बाद ब्लॉग लेखन आरंभ हुआ और देखते-देखते यह माध्यम लोकप्रिय हो गया। साथ ही इसे अभिव्यक्ति के नए माध्यम के रूप में मान्यता भी प्राप्त हुई।

प्रश्न 2.
ब्लॉग प्रारंभ करने की प्रक्रिया।
उत्तर :
यह एक टेक्निकल अर्थात तकनीकी प्रक्रिया है। इसके लिए डोमेन अर्थात ब्लॉग के शीर्षक को रजिस्टर्ड कराना होता है। इसके बाद उसे किसी सर्वर से जोड़ना पड़ता है। उसमें अपनी विषय सामग्री समाविष्ट करके हम इस माध्यम का प्रयोग कर सकते हैं। भारत में 2002 के बाद ब्लॉग लेखन आरंभ हुआ और देखतेदेखते यह माध्यम लोकप्रिय हो गया। साथ ही इसे अभिव्यक्ति के नए माध्यम के रूप में मान्यता भी प्राप्त हुई।

विज्ञापन, फेसबुक, वॉट्सऐप, एस एम एस आदि द्वारा इसका प्रचार होता है। आकर्षक चित्रों, छायाचित्रों के साथ विषय सामग्री यदि रोचक हो तो पाठक ब्लॉग की प्रतीक्षा करता है और उसका नियमित पाठक बन जाता है। ब्लॉग लेखक के पास लोगों से संवाद स्थापित करने के लिए बहुत-से विषय होने चाहिए। विपुल पठन, चिंतन तथा भाषा का समुचित ज्ञान होना आवश्यक है। भाषा सहज और प्रवाहमयी हो तो पाठक उसे पढ़ना चाहेगा।

साथ ही लेखक के पास विषय से संबंधित संदर्भ, घटनाएँ और यादें हों तो ब्लॉग पठनीय होगा। जिस क्षेत्र या जिस विख्यात व्यक्ति के संदर्भ में आप लिख रहे हैं, उस व्यक्ति से आपका संबंध कैसे बना? किसी विशेष भेंट के दौरान उस व्यक्ति ने आपको कैसे प्रभावित किया? यदि वह व्यक्ति आपके निकटस्थ परिचितों में है तो उसकी सहृदयता, मानवता आदि से संबंधित कौन-सा पहलू आपकी स्मृति में रहा। ऐसे अनेक विषय शब्दांकित किए जा सकते हैं।

प्रश्न 3.
ब्लॉग लेखन में बरतनी जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :

ब्लॉग लेखन के विषय का चुनाव करते समय सूझबूझ का होना आवश्यक है।

  1. ब्लॉग लेखन में इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि उसमें मानक भाषा का प्रयोग हो। व्याकरणिक अशुद्धियाँ न हों।
  2. ब्लॉग लेखन के लिए प्राप्त स्वतंत्रता का उचित उपयोग करना चाहिए। लेखन की स्वतंत्रता से हमें यह नहीं समझना चाहिए कि हम कुछ भी लिख सकते हैं।
  3. ब्लॉग लेखन में सामाजिक स्वास्थ्य का विचार हो। वह समाज विघातक न हो। ब्लॉग लेखक को किसी की निंदा करना, किसी पर गलत टिप्पणी करना, समाज में तनाव की स्थिति उत्पन्न करना आदि बातों से दूर रहना चाहिए।
  4. ब्लॉग लेखन में आक्रामकता से अर्थात गाली-गलौज अथवा अश्लील शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। कोई भी पाठक ऐसी भाषा को पसंद नहीं करता। …
  5. बिना सबूत के किसी पर आरोप लगाना गंभीर अपराध है।
  6. पाठक ऐसे लेखकों की बात गंभीरता से नहीं पढ़ते। परिणामस्वरूप ब्लॉग की आयु अल्प हो जाती है।
  7. ब्लॉग लेखन में सामाजिक संकेतों का पालन आवश्यक है।
  8. ब्लॉग लेखन करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो पाठक ही हमारे ब्लॉग के प्रचारक बन जाते हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 17 ब्लॉग लेखन

व्यावहारिक प्रयोग

प्रश्न 1.
अपने शहर की विशेषताओं पर ब्लॉग लेखन कीजिए।
उत्तर :
मैं महाराष्ट्र के नाशिक जिले में रहता हूँ। यह महाराष्ट्र का एक छोटा शहर है। यह नाशिक-पुणे राजमार्ग पर स्थित है। यह एक सुंदर व आदर्श शहर है। यहाँ की इमारतें भव्य और दर्शनीय हैं।

शहर की जनसंख्या :
यह एक घना बसा हुआ नगर है। इसमें लगभग एक लाख लोग रहते हैं। यह मुख्य रूप से हिंदू बहुल नगर है। हिंदुओं के अतिरिक्त इसमें मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि अन्य धर्मों के लोग भी रहते हैं। हमारे नगर के लोग बहुत अच्छे हैं। वे सदैव एक-दूसरे की मदद करने को तत्पर रहते है। यहाँ के लोगों में बहुत एकता है। सभी लोग बहुत ईमानदार और परिश्रमी हैं।

शहर का मुख्य व्यवसाय :
यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय व्यापार है। यहाँ एक बड़ी शुगर मिल है। कुछ अन्य फैक्टरियाँ भी हैं, जो बोगियों के लिए धुरे और पहिये बनाती हैं। यहाँ तीन मंडियाँ हैं, जहाँ माल के क्रय-विक्रय के लिए आस-पास से बहुत-से लोग आते हैं।

विद्यालय, कॉलेज व चिकित्सालय :
हमारा शहर शिक्षा का एक केंद्र है। यहाँ दो स्नाकतोत्तर विद्यालय और चार उच्च माध्यमिक कॉलेज हैं। हमारे जिले का एकमात्र राजकीय गर्ल्स उच्च माध्यमिक कॉलेज हमारे शहर में ही है। आस-पास के गाँवों से बहुत-से लड़केलड़कियाँ यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। हमारे शहर में अनेक चिकित्सालय हैं और सरकारी डिस्पेंसरी भी है।

अन्य आकर्षण :
मेरे शहर के निकट शरद पूर्णिमा को नदी के किनारे प्रत्येक वर्ष मेला लगता है। नदी के निकट एक बहुत विशाल परिसर में शिव, दुर्गा, राम, कृष्ण तथा हनुमान जी के मंदिर हैं। इस मेले में बहुत भीड़ होती है। आस-पास के गाँवों के सैंकड़ों दुकानदार कई दिन पहले से ही मेले में अपनी दुकानें सजाने लगते हैं। लोग दूर-दूर से इस मेले को देखने आते हैं। लोगों की इतनी भीड़ होती है कि तिल रखने की जगह नहीं होती। मुझे अपने शहर से बहुत प्यार है। मैं अपना संपूर्ण जीवन इसी शहर में व्यतीत करना चाहता हूँ। मुझे नहीं लगता कि किसी अन्य शहर में मैं इतनी सुख और शांति से जीवन बिता सकूँगा।

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प्रश्न 2.
ग्रामीण समस्याओं पर ब्लॉग लेखन कीजिए।
उत्तर :
भारत की 70 प्रतिशत आबादी आज भी गाँवों में रहती है। अतः ग्रामीण क्षेत्रों की हालत ही हमारे देश का वास्तविक प्रतिबिम्ब है। भारतवर्ष उस गति से तरक्की नहीं कर पा रहा, जिस गति से उसे करनी चाहिए।

भारत के गाँवों में विभिन्न समस्याए :
गरीबी : 130 करोड़ लोगों के देश में लगभग 40 करोड़ लोग आज भी गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं। और यह आबादी अधिकांश रूप से गाँवों में ही हैं। छोटे किसान हमेशा कर्ज से लदे रहते हैं। वे बड़े किसानों पर निर्भर रहते है। अंततः बड़ जमींदार छोटे किसानों की जमीनें हड़प लेते हैं। आबादी में वृद्धि के कारण जमीनों का बँटवारा होता जा रहा है। अतः जमीन-जायदाद के टुकड़े हो जाते हैं। छोटे टुकड़े फलदायी नहीं रहते और उनके मालिक कृषि करके घाटा उठाते हैं। जिसके कारण हालात दिनोंदिन बदतर होते जा रहे हैं।

बेरोजगारी :
ग्रामीण इलाकों में रोजगार का अभाव होने से युवाओं को चिंता में देखा जा सकता है। खेतों में अन्न और सब्जियाँ उगाने का एक निश्चित चक्र है। बीज बोकर, सिंचाई करके फसलों को उगने के लिए छोड़ दिया जाता है। ऐसे समय पर न तो किसान के पास कोई काम होता है, न ही वह अपनी फसलों को छोड़कर कहीं और काम करने जा सकता है। अतः आंशिक बेरोजगारी कृषक जीवन का अभिन्न अंग बन गई है।

सूखा और बाढ़ :
जो लोग गाँवों में रहकर खून पसीना एक करते हैं, उन पर प्राकृतिक आपदाएँ कहर ढाया करती हैं। बाढ़, सूखा, तूफानी हवाएँ ऐसी अनेक परेशानियाँ हैं, जिन पर मनुष्य का कोई वश नहीं है। कभी सूखे के कारण फसलें नष्ट हो जाती हैं। ग्रामीण भारत में इन समस्याओं के कारण परेशानी बढ़ रही हैं।

शिक्षा का अभाव :
गाँवों में शिक्षा का नितांत अभाव है। गाँव के लोग आज भी शिक्षा को जरूरी नहीं समझते। स्त्री-पुरुष सभी अशिक्षित रह जाते हैं। परिणामस्वरूप वे गरीबी के कुचक्र को नहीं तोड़ पाते, क्योंकि वे शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने के सभी अवसर खो देते हैं। अपने बच्चों को भी समुचित शिक्षा नहीं दिला पाते। शिक्षा के अभाव में ग्रामीण लोग मानसिक रूप से विकसित नहीं हो पाते।

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स्वास्थ्य सुविधाएँ :
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की भी कमी है। कोई भी डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में नहीं रहना चाहता। प्राइमरी हैल्थ सेंटर्स में दी जाने वाली दवाइयाँ और डॉक्टरी परामर्श आज भी मध्ययुग जैसी हैं। ग्रामीण अपनी चिकित्सा पर अधिक खर्च नहीं कर सकते। यही कारण है कि गाँवों में झोलाछाप डॉक्टरों और दाइयों का धंधा खूब पनपता है।

ब्लॉग निर्माण की प्रक्रिया
ब्लॉग तैयार करने के लिए google में Gmail account होना आवश्यक है।

  • Internet Explorer में www.blogger.com खोलिए/में जाइए।
  • CREATYOUR BLOG पर क्लिक कीजिए।
  • अपने Gmail : googlaccount पासवर्ड से लॉग इन कीजिए।
  • नये पेज पर titl(शीर्षक) दीजिए और अपना blogger address तैयार कीजिए।
  • उदा. vidya1234.blogspot.com थीम (theme) का चयन कीजिए I CREATBLOG पर क्लिक कीजिए आपका ब्लॉग तैयार होगा।

ब्लॉग लेखन : आवश्यक सावधानियाँ

  • ब्लॉग लेखन के विषय का चुनाव करते समय सूझ-बूझ का होना आवश्यक है।
  • ब्लॉग लेखन में सामाजिक संकेतों का पालन आवश्यक है।
  • ब्लॉग लेखन में सामाजिक स्वास्थ्य का विचार हो वह समाज विघातक न हो।
  • ब्लॉग लेखन के लिए प्राप्त स्वतंत्रता का उचित उपयोग करना चाहिए।

ब्लॉग लेखन Summary in Hindi

ब्लॉग लेखक का परिचय

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ब्लॉग लेखन का नाम :
प्रवीण बर्दापूरकर। (जन्म : 3 सितम्बर, 1955.)

ब्लॉग लेखन प्रमुख कृतियाँ :
‘डायरी’, ‘नोंदी डायरीनंतरच्या’, ‘दिवस असे की’, ‘आई’, ‘ग्रेस नावांच गारूड’ आदि।

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ब्लॉग लेखन विशेषता :
प्रवीण बर्दापूरकर राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों का गहराई से अध्ययन करने वाले तथा उन्हें समझने वाले निर्भीक पत्रकार के रूप में सुपरिचित हैं। आपने पत्रकारिता के क्षेत्र में ब्लॉग लेखन को बहुत ही लोकप्रिय बनाया है।

प्रवीण जी ने ब्लॉग द्वारा बदलते सामाजिक विषयों को परिभाषित करते हुए जनमानस की विचारधारा को नयी दिशा प्रदान की है। सीधी-सादी, रोचक और संप्रेषणीय मराठी और हिंदी भाषा में लिखे गए ब्लॉग आपके धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं।

ब्लॉग लेखन विषय प्रवेश :
आधुनिक समय में पत्रकारिता के क्षेत्र में ब्लॉग लेखन का प्रचलन लोकप्रिय बनता जा रहा है। प्रस्तुत पाठ में लेखक ने ब्लॉग लिखने के नियम, ब्लॉग का स्वरूप और उसके वैज्ञानिक पक्ष की चर्चा करते हुए उसके महत्त्व को स्पष्ट किया है। ब्लॉग लेखन जहाँ एक ओर सामाजिक जागरण का माध्यम बन चुका है, वहीं पत्रकारिता के जीवित तत्त्व के रूप में भी स्वीकृत हुआ है तथा बड़ा ही लोकप्रिय माध्यम बन चुका है।

ब्लॉग लेखन पाठ का सार

ब्लॉग लेखन से तात्पर्य :
ब्लॉग अपना विचार, अपना मत व्यक्त करने का एक डिजिटल माध्यम है। ब्लॉग के माध्यम से हम जो कुछ कहना चाहते हैं, उसके लिए किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। ब्लॉग लेखन में शब्द संख्या का बंधन नहीं होता। हम अपनी बात को जितना विस्तार देना चाहें, दे सकते हैं।

ब्लॉग, वेबसाइट, पोर्टल आदि डिजिटल माध्यम हैं। अखबार, पत्रिका या पुस्तक हाथ में लेकर पढ़ने के स्थान पर उसे कंप्यूटर, टैब या सेलफोन पर पढ़ना डिजिटल माध्यम कहलाता है। इस प्रकार का वाचन करने वाली

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पीढ़ी का निर्माण इंटरनेट के महजाल के कारण हुआ है। इसके कारण लेखक और पत्रकार भी ग्लोबल हो गए हैं। नवीन वाचकों की संख्या मुद्रित माध्यम के वाचकों से बहुत अधिक है। इस वर्ग में युवा वर्ग अधिक संख्या में है। इस माध्यम के द्वारा पूरी दुनिया की कोई भी जानकारी क्षण भर में ही परदे पर उपलब्ध हो जाती है।

ब्लॉग की खोज :
ब्लॉग की खोज के संबंध में निश्चित रूप से कोई डॉक्युमेंटेशन उपलब्ध नहीं है, पर जो जानकारी उपलब्ध है, उसके अनुसार जस्टीन है हॉल ने सन 1994 में सबसे पहले इस शब्द का प्रयोग किया। जॉन बर्गर ने इसके लिए वेब्लॉग शब्द का प्रयोग किया था। माना जाता है कि 1999 में पीटर मेरहोल्स ब्लॉग शब्द को प्रस्थापित कर उसे व्यवहार में लाए। भारत मे 2002 के बाद ब्लॉग लेखन आरंभ हुआ और देखते-देखते यह माध्यम लोकप्रिय हो गया।

साथ ही इसे अभिव्यक्ति के नए माध्यम के रूप में मान्यता भी प्राप्त हुई।

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ब्लॉग लेखन शुरू करने की प्रक्रिया :
यह एक टेक्निकल अर्थात तकनीकी प्रक्रिया है। इसके लिए है डोमेन अर्थात ब्लॉग के शीर्षक को रजिस्टर्ड कराना होता है। इसके बाद उसे किसी सर्वर से जोड़ना पड़ता है। उसमें अपनी विषय सामग्री समाविष्ट करके हम इस माध्यम का प्रयोग कर सकते हैं। इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी ‘गूगल’ पर उपलब्ध है। कुछ विशेषज्ञ इस संदर्भ में सशुल्क सेवाएँ देते हैं।

ब्लॉग लेखक के लिए आवश्यक गुण :
ब्लॉग लेखक के पास लोगों से संवाद स्थापित करने के लिए बहुत-से विषय होने चाहिए। विपुल पठन, चिंतन तथा भाषा का समुचित ज्ञान होना आवश्यक है। भाषा सहज और प्रवाहमयी हो तो पाठक उसे पढ़ना चाहेगा। साथ ही लेखक के पास विषय से संबंधित संदर्भ, घटनाएँ और यादें हों तो ब्लॉग पठनीय होगा। जिस क्षेत्र या जिस विख्यात व्यक्ति के संदर्भ में आप लिख रहे हैं, उस व्यक्ति से आपका संबंध कैसे बना?

किसी विशेष भेंट के दौरान उस व्यक्ति ने आपको कैसे प्रभावित किया? यदि वह व्यक्ति आपके निकटस्थ परिचितों में है तो उसकी सहृदयता, मानवता आदि से संबंधित कौन-सा पहलू आपकी स्मृति में रहा। ऐसे अनेक विषय शब्दांकित किए जा सकते हैं।

ब्लॉग लेखन में विषय में आशय की गहराई आवश्यक है। प्रवाहमयी कथन शैली, सीधी-सादी और सहज भाषा का प्रयोग किया जाए, तो पाठक विषय सामग्री से शीघ्र ही एकरूप हो जाता है। ब्लॉग लेखन में क्लिष्ट शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। उचित विशेषणों का प्रयोग भाषा को सुंदरता प्रदान करता हैं और पाठक इसकी ओर आकर्षित होता है। भाषा केवल शब्दों का समूह ही नहीं होता, बल्कि प्रत्येक शब्द का एक विशिष्ट अर्थ होता है।

सहज-सरल होने के साथ-साथ भाषा का बाँकपन ब्लॉग लेखन की गरिमा को बढ़ाता है। किसी भी शैली का विकास एक दिन में नहीं हो जाता। सतत लेखन के द्वारा ही यह संभव है। जिस प्रकार एक गायक प्रतिदिन रियाज करके राग और बंदिश में निपुण हो पाता है, उसी प्रकार निरंतर लेखन से लेखक की एक शैली विकसित होती है और पाठक को प्रभावित करती है।

ब्लॉग लेखन में आवश्यक सावधानियाँ :
ब्लॉग लेखन में इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि उसमें मानक भाषा का प्रयोग हो। व्याकरणिक अशुद्धियाँ न हों। ब्लॉग लेखन के लिए प्राप्त स्वतंत्रता का उचित उपयोग करना चाहिए। लेखन की स्वतंत्रता से हमें यह नहीं समझना चाहिए कि हम कुछ भी लिख सकते हैं।

आक्रामकता का अर्थ गाली-गलौज अथवा अश्लील शब्दों का प्रयोग करना नहीं है। पाठक ऐसी भाषा को पसंद नहीं करते। ब्लॉग लेखक को किसी की निंदा करना, किसी पर गलत टिप्पणी करना, समाज में तनाव की स्थिति उत्पन्न करना है आदि बातों से दूर रहना चाहिए। बिना सबूत के किसी पर आरोप लगाना एक गंभीर अपराध है। पाठक ऐसे लेखकों की बात गंभीरता से नहीं पढ़ते। परिणामस्वरूप ब्लॉग की आयु अल्प हो जाती है।

ब्लॉग लेखन करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो पाठक ही हमारे ब्लॉग के प्रचारक बन जाते हैं। एक पाठक दूसरे से और दूसरा तीसरे से सिफारिश करता है और पाठकों की श्रृंखला बढ़ती चली जाती है।

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ब्लॉग लेखन का प्रसार :
ब्लॉग लेखक अपने ब्लॉग का प्रचार-प्रसार स्वयं कर सकता है। विज्ञापन, फेसबुक, वॉट्सऐप, एस एम एस आदि द्वारा इसका प्रचार होता है। आकर्षक चित्रों, छायाचित्रों के साथ विषय सामग्री यदि रोचक हो तो पाठक ब्लॉग की प्रतीक्षा करता है और उसका नियमित पाठक बन जाता है।

ब्लॉग लेखन से आर्थिक लाभ : ब्लॉग लेखन से आर्थिक लाभ भी होता है। विशेष रूप से हिंदी और अंग्रेजी ब्लॉग लेखन का पाठक वर्ग व्यापक होने के कारण इससे अच्छी आय होती हैं। विद्यार्थी अपने अनुभव तथा विचार ब्लॉग लेखन द्वारा साझे कर सकते हैं।

प्रत्येक विद्यार्थी अपनी जीवन शैली, अपना संघर्ष, अपनी सफलताएँ विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त कर सकता है। राजनीतिक विषयों के लिए अच्छा प्रतिसाद मिल सकता है। शिक्षा विषयक ब्लॉग पढ़ने वाला पाठक वर्ग बहुत बड़ा है। यात्रा वर्णन, आत्मकथात्मक तथा विश्व से जुड़े जीवन की प्रेरणा देने वाले विषय भी बड़े चाव से पढ़े जाते हैं।

ब्लॉग लेखन शब्दार्थ

वाचक पाठक।
मुद्रित छपा हुआ।
उपलब्ध प्राप्त।
प्रस्थापित स्थापित किया हुआ।
अभिव्यक्ति घोषणा।
मान्यता स्वीकृति।
समाविष्ट जिसका समावेश किया गया हो।
संदर्भ विषय।
संवाद बातचीत।
चिंतन मनन करना।
समुचित उचित।
प्रवाहमयी गतिशील। Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 17 ब्लॉग लेखन
विख्यात प्रसिद्ध।
निकटस्थ समीप का।
सहृदय दयालु।
शब्दांकित शब्दों द्वारा अंकित किया हुआ।
आशय अभिप्राय।
मापदंड वह कारक, जिसके द्वारा कोई निर्णय लेता है।
क्लिष्ट कठिन।
सटीक उचित।
सौष्ठव सुंदरता।
बाँकपन सजावट।
सतत निरंतर।
रियाज अभ्यास।
बंदिश रचना।
तात्पर्य अर्थ।
आक्रामकता प्रचंडता।
अश्लील लज्जाजनक।
टिप्पणी आलोचना।
अल्प छोटी।
सिफारिश किसी के गुणों का दूसरों के सामने बखान करना।
श्रृंखला कड़ी। Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 17 ब्लॉग लेखन
प्रचार-प्रसार फैलाव।
रोचक रुचि उत्पन्न करने वाला।
प्रतिसाद किसी कार्य के लिए मिलने वाली सकारात्मक प्रतिक्रिया।
आत्मकथात्मक आपबीती भरा।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 16 मैं उद्घोषक

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 16 मैं उद्घोषक Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 16 मैं उद्घोषक

12th Hindi Guide Chapter 16 मैं उद्घोषक Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

पाठ पर आधारित

प्रश्न 1.
‘सूत्र संचालक के कारण कार्यक्रम में चार चाँद लगते हैं’, इसे स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
आज के जमाने में सूत्र संचालक का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। कार्यक्रम छोटा हो या बड़ा, सूत्र संचालक अपनी प्रतिभा से उसमें चार चाँद लगा देता है। वह अपनी भाषा, आवाज में उतारचढ़ाव, अपनी हाजिरजवाबी, श्रोताओं से चुटीले संवादों, संचालन के बीच-बीच में सरसता लाने के लिए चुटकुलों, रोचक घटनाओं के प्रयोग, मंच पर उपस्थित महानुभावों के प्रति अपने सम्मान सूचक शब्दों के प्रयोग, कार्यक्रमों के अनुसार भाषा-शैली में परिवर्तन करने तथा अपनी गलती पर माफी माँग लेने आदि गुणों के कारण सूत्र संचालन में तो चार चाँद लगा ही देता हैं, उपस्थित जन-समुदाय की प्रशंसा का पात्र भी बन जाता हैं। सूत्र संचालक अपने मिलनसार व्यक्तित्व, अपने विविध विषयों के ज्ञान, कार्यक्रम के सुचारुसंचालन, अपनी अध्ययनशीलता, अपनी प्रभावशाली और मधुर आवाज के संतुलित प्रयोग आदि के बल पर कार्यक्रम में जान डाल देता है। सधे हुए सूत्र संचालक की प्रतिभा का लाभ कार्यक्रमों और उनके आयोजकों को मिलता है। इस तरह सधे हुए सूत्र संचालक के कारण कार्यक्रम में चार चाँद लग जाते हैं।

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प्रश्न 2.
उत्तम मंच संचालक बनने के लिए आवश्यक गुण विस्तार से लिखिए।
उत्तर :
मंच संचालन एक कला है। अच्छा मंच संचालक कार्यक्रम में जान डाल देता है। मंच संचालक श्रोता और वक्ता को जोड़ने वाली कड़ी होता है। वही सभा की शुरूआत करता है। उत्तम मंच संचालक बनने के लिए संचालक को अच्छी तैयारी करनी पड़ती है। जिस तरह का कार्यक्रम हो, उसी तरह की तैयारी भी होनी चाहिए। उसी के अनुरूप कार्यक्रम की संहिता लेखन करनी चाहिए। मंच संचालक के लिए प्रोटोकॉल का ज्ञान, प्रभावशाली व्यक्तित्व, हँसमुख, हाजिरजवाबी तथा विविध विषयों का ज्ञान होना चाहिए। इसके अतिरिक्त भाषा पर उसका प्रभुत्व होना आवश्यक है।

मंच संचालक को किसी कार्यक्रम में ऐन मौके पर परिवर्तन होने पर संहिता में परिवर्तन कर संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाना पड़ता है। यह क्षमता उसमें होनी चाहिए। अच्छे मंच संचालक को हर प्रकार के साहित्य का अध्ययन करना आवश्यक है। मंच संचालक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कार्यक्रम कोई भी हो, मंच की गरिमा बनी रहनी चाहिए। सबसे पहले मंच संचालक श्रोताओं के सामने आता है।

इसलिए उसका परिधान, वेशभूषा आदि सहज और गरिमामय होनी चाहिए। मंच संचालक के अंदर आत्मविश्वास, सतर्कता, सहजता के साथ श्रोताओं का उत्साह बढ़ाने का गुण होना आवश्यक है। इसके अलावा मंच संचालक में समयानुकूल छोटेछोटे चुटकुलों तथा रोचक घटनाओं से श्रोताओं को बाँधे रखने की शक्ति भी जरूरी है। अच्छे मंच संचालक को भाषा का पर्याप्त ज्ञान होना आवश्यक है।

भाषा की शुद्धता, शब्दों का चयन, शब्दों का उचित प्रयोग तथा किसी प्रख्यात साहित्यकार के कथन का उल्लेख कार्यक्रम को प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी बना देता है। यही उत्तम मंच संचालक की थाती होती है। उत्तम मंच संचालक बनने वाले व्यक्ति को उपर्युक्त गुणों को आत्मसात करना आवश्यक है।

प्रश्न 3.
सूत्र संचालन के विविध प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
आजकल संगीत संध्या तथा जन्मदिन की पार्टी का भी संचालन जरूरी हो गया है। सूत्र संचालक, मंच और श्रोताओं के बीच सेतु का कार्य करता है। कार्यक्रमों अथवा समारोहों में निखार लाने का कार्य सूत्र संचालक ही करता है। इसलिए सूत्र संचालक का बहुत महत्त्व होता है। सूत्र संचालन कई प्रकार के होते हैं। इसके मुख्यतः निम्न प्रकार होते हैं।

शासकीय कार्यक्रम का सूत्र संचालन, दूरदर्शन हेतु सूत्र संचालन, रेडियो हेतु सूत्र संचालन, राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सूत्र संचालन। अलगअलग कार्यक्रमों का संचालन करने के लिए सूत्र संचालक को अलग-अलग प्रकार की सावधानियाँ बरतनी पड़ती हैं।

शासकीय एवं राजनीतिक समारोहों के सूत्र संचालन में प्रोटोकॉल का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। इसके लिए पदों के अनुसार नामों की सूची बनानी पड़ती है। दूरदर्शन तथा रेडियो कार्यक्रमों का सूत्र संचालन करने के पहले उन पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करनी जरूरी है। कार्यक्रम की संहिता लिखकर तैयारी करनी होती हैं। सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सूत्र संचालन का कार्य हल्के-फुल्के ढंग का होता है। इनके लिए अलग संहिता लेखन की तैयारी करनी पड़ती है।

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व्यावहारिक प्रयोग।

प्रश्न 1.
अपने कनिष्ठ महाविद्यालय में मनाए जाने वाले ‘हिंदी दिवस समारोह’ का सूत्र संचालन कीजिए।
उत्तर :
सूत्र संचालक : दोस्तो! हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आज महात्मा गांधी स्मारक इंटर कालेज, नाशिक में आयोजित इस समारोह में आपका हार्दिक स्वागत है। इस अवसर पर मुझे अपनी भाषा हिंदी से संबंधित कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं –

जो थी तुलसी, चंद्र, सूर, भूषण को प्यारी।
थे रहीम, रसखान आदि जिस पर बलिहारी।
छवि ने जिसको लुभा लिया, जिसकी मनहारी।
सचमुच भाषा सकल राष्ट्र की वही हमारी।।

तो दोस्तो! हिंदी दिवस के इस अवसर पर अब बारहवीं कक्षा की छात्राओं द्वारा तैयार किया गया यह सुंदर नृत्य गीत प्रस्तुत है। आपके सामने यह नृत्य गीत प्रस्तुत कर रही हैं – ऋचा, ऋधि, मधुरिमा, रोहा और अन्विता!

(कक्षा बारहवीं की लड़कियाँ –
जय माँ भारती जय, जय।
जय माँ भारती जय, जय।।
गीत गाते हुए नृत्य करती हैं।)
(तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)

सूत्र संचालक : दोस्तो! तालियों की गड़गड़ाहट ही बता रही है कि यह नृत्य-गीत आप सबको कैसा लगा।

दोस्तो! अब हम आरंभ कर रहे हैं आज का मुख्य समारोह, यानी हिंदी दिवस का रंगारंग कार्यक्रम। मंच पर उपस्थित हैं हमारे कालेज के प्रिंसिपल श्री राजेंद्र पेंडसे जी, आज के प्रमुख अतिथि स्थानीय राणाप्रताप. कालेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष श्री लोकनाथ सिन्हाजी तथा कालेज के अन्य अध्यापकगण।

सूत्र संचालक : अब हम महात्मा गांधी स्मारक इंटर कालेज के हिंदी विभाग के प्रभारी श्री श्रीपत मिश्र जी से प्रार्थना करते है कि आप हमारे प्रमुख अतिथि श्री लोकनाथ सिन्हाजी को पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत करें। श्री श्रीपत जी मिश्र…

(श्रीपत मिश्र प्रमुख अतिथि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते है। तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)

दोस्तो! अब हम अपने महात्मा गांधी स्मारक इंटर कालेज के प्रिंसिपल श्री राजेंद्र पेंडसे जी की ओर से प्रमुख अतिथि श्री लोकनाथ सिन्हा जी से प्रार्थना करते हैं कि वे माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें माल्यार्पण करें। श्रीमान लोकनाथ सिन्हा जी!

(लोकनाथ सिन्हा जी माँ सरस्वती के समक्ष रखे दीपदान के दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। वे सरस्वती की मूर्ति को माला पहनाते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)

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सूत्र संचालक : अब कालेज की ग्यारहवीं कक्षा की छात्राएँ – सुनीता संघवी और जाह्नवी पांडेय देवी सरस्वती का वंदना गीत प्रस्तुत करेंगी…

(सुनीता और जाह्नवी माँ सरस्वती का वंदना गीत गाती हैं)
या कुन्देन्दुतुषार हार धवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा। या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वंदिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
(सरस्वती वंदना समाप्त होती है।) (तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)

सूत्र संचालक : अब कालेज के प्रिंसिपल श्री राजेंद्र पेंडसे जी । हमारे प्रमुख अतिथि श्री लोकनाथ सिन्हा जी का परिचय देंगे और कालेज की विभिन्न गतिविधियों से आप लोगों को परिचित कराएँगे। श्री राजेंद्र पेंडसे जी…

(श्री राजेंद्र पेंडसे प्रमुख अतिथि को समारोह का अतिथि पद स्वीकार करने के लिए बधाई देते हैं और संक्षेप में उनका परिचय देते हैं।)
(वे कालेज की गतिविधियों के बारे में बताते हैं।)

सूत्र संचालक : अब मैं प्रिंसिपल साहब राजेंद्र पेंडसेजी की ओर से प्रमुख अतिथि लोकनाथ सिन्हा जी से प्रार्थना करूँगा कि वे हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता, हिंदी अंत्याक्षरी प्रतियोगिता तथा परीक्षाओं .. में प्रथम तथा द्वितीय स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को अपने कर कमलों से पुरस्कार प्रदान करने की कृपा करें।

सूत्र संचालक : हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता जनार्दन शर्मा मंच पर आ जाएँ।

(प्रमुख अतिथि के हाथों जनार्दन शर्मा पुरस्कार लेते हैं। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब वाद-विवाद प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार पाने वाले जयंत साठे मंच पर आ जाएँ।

(जयंत साठे पुरस्कार लेते हैं। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब हिंदी अंत्याक्षरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाली स्नेहा पाण्डेय मंच पर आकर अपना पुरस्कार ग्रहण करें। स्नेहा पाण्डेय।
(स्नेहा पाण्डेय प्रमुख अतिथि से पुरस्कार ग्रहण करती है। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब मैं परीक्षाओं में प्रथम तथा द्वितीय स्थान पाने वाले विद्यार्थियों से आग्रह करता हूँ कि वे मंच पर आकर अपने-अपने पुरस्कार ग्रहण करें। मैं पुरस्कार विजेताओं को उनके नाम से बुलाऊँगा। सभी विजेता बारी-बारी से मंच पर आकर अपनाअपना पुरस्कार प्राप्त करें।

कक्षा नौवीं : प्रथम पुरस्कार – राकेश शिंदे।
द्वितीय पुरस्कार – स्मिता सिंह।

कक्षा दसवीं : प्रथम पुरस्कार – ओंकार शर्मा।
द्वितीय पुरस्कार – रोहिणी दवे।

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कक्षा ग्यारहवीं : प्रथम पुरस्कार – जतिन सेवक।
द्वितीय पुरस्कार – सचिन मेहरा।

(विजेता छात्र बारी-बारी से प्रमुख अतिथि से अपने-अपने पुरस्कार प्राप्त करते हैं। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब कालेज के विज्ञान विभाग के प्रभारी श्री पवन राव ‘हिंदी भाषा की विशेषता’ के बारे में अपने विचार आपके सामने रखेंगे।

(पवन राव हिंदी भाषा के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हैं। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब हमारे कालेज के वाणिज्य विभाग के प्रभारी श्री अशोक शास्त्री जी ‘हिंदी में संभावनाएँ’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। आप लोग ध्यान से सुनिए।

(श्री अशोक शास्त्री अपने विचार व्यक्त करते हैं। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब हमारे कालेज के हिंदी विभाग के प्रभारी श्रीपत मिश्र जी आपके समक्ष हिंदी भाषा में रोजगार की संभावनाओं के बारे में आपको बताएँगे। श्री श्रीपत मिश्र जी।

(श्री श्रीपत मिश्र अपना भाषण समाप्त करते हैं। तालियाँ बजती हैं।)

सूत्र संचालक : अब यहाँ उपस्थित सभी लोग उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहे होंगे कि हमारे प्रमुख अतिथि राणाप्रताप कालेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष श्री लोकनाथ सिन्हा जी हिंदी भाषा के बारे में अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ। अब वे आपके समक्ष हैं।

(श्री लोकनाथ सिन्हा अपने विचार बताते हैं। तालियाँ बचती हैं।)

सूत्र संचालक : दोस्तो! आज हमारी हिंदी भाषा के बारे में आप लोगों को काफी उपयोगी जानकारियाँ प्राप्त हुईं। और अब समय आ गया है कार्यक्रम की समाप्ति का।

अब कालेज के वाइस प्रिंसिपल श्री रंगनाथ दाते जी आज के हमारे प्रमुख अतिथि, अध्यापकों, विद्यार्थियों तथा उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त करेंगे।

(वाइस प्रिंसिपल श्री रंगनाथ दाते जी आभार व्यक्त करते हैं।) (अंत में दोपहर 12.00 बजे राष्ट्रगान के साथ समारोह समाप्त हुआ।)

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प्रश्न 2.
शहर के प्रसिद्ध संगीत महोत्सव का मंच संचालन कीजिए।
उत्तर :
मंच संचालक : भाइयो और बहनो! आज हमारे शहर कोल्हापुर में आयोजित प्रसिद्ध संगीत महोत्सव में आप सबका स्वागत है। और स्वागत है इस महत्त्वपूर्ण संगीत महोत्सव में अपने मधुर गीत-संगीत से श्रोताओं को सराबोर करने के लिए पधारे हुए संगीतकारों, गायक-गायिकाओं तथा उपस्थित जन-समुदाय का।।

मंच संचालक : …तो दोस्तो! प्रतीक्षा की घड़ियाँ समाप्त हुईं। अब आपके समक्ष मंच पर विराजमान हैं अपने साज-ओ-सामान के साथ शहर के प्रसिद्ध तबलावादक पंडित राधेश्यामजी। पंडित जी अपने तबलावादन के लिए पूरे जिले में विख्यात हैं। उनका साथ दे रही हैं शास्त्रीय गायिका शारदादेवी जी। पंडित जी के स्वागत में जोरदार तालियाँ…

(गायिका शारदादेवी के स्वरों के साथ पंडित राधेश्याम की उँगलियाँ तबले पर थिरकने लगती हैं। लोग वाह-वाह करते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठता है।)

मंच संचालक : वाह भाई वाह! वाह वाह। पंडित जी ने वाकई अपनी वाद्य कला से श्रोताओं का मन मोह लिया। सभागार में गूंजती हुई तालियों का शोर इसका सबूत है।

मंच संचालक : दोस्तो! अब आप सुनेंगे अपनी चहेती लोकगीत गायिका राधा वर्मा को। वे आपको सावन माह की वर्षा की फुहारों के बीच गाए जाने वाले मधुर गीत कजरी के रस से सराबोर करेंगी। उनके साथ हारमोनियम पर हैं रामनाथ शर्माजी और ढोलक पर हैं पंडित राधारमण त्रिपाठी जी।

(राधा वर्मा जी अपने कजरी गीत से समां बाँध देती हैं और लोग तालियाँ बजाकर ‘वन्स मोर… वन्स मोर…’ कहकर शोर मचाते हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! शांत रहिए… शांत! राधा जी आपके आग्रह का मान जरूर रखेंगी। राधा जी प्लीज! प्लीज!

(राधा वर्मा दूसरी बार कजरी गाना शुरू करती हैं। अब श्रोता भी उनके स्वर में स्वर मिलाकर गाना शुरू कर देते हैं।)

मंच संचालक : वाह! वाह! दोस्तो, कजरी गीत है ही ऐसा।

समूह में गाने पर इसका आनंद और ज्यादा, और ज्यादा बढ़ने लगता । है। वाह भाई वाह!

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मंच संचालक : अब मंच पर आपके समक्ष हैं प्रसिद्ध भजन गायक सुमित संत जी। संत जी की गायकी से तो आप सब परिचित ही हैं। अपने भजनों से संत जी आपको भक्ति रस से सराबोर कर देंगे। सुमित जी के साथ तबले पर हैं कामता प्रसाद जी। हारमोनियम 1 पर हैं रामदास और सारंगीवादन कर रहे हैं प्रभु नारायण जी।

(सुमित संत ‘पायोजी मैंने रामरतन धन पायो’ तथा ‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई’ जैसे भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से सराबोर कर देते हैं। तालियों और वाह! वाह के स्वर गूंजते हैं।)

मंच संचालक : वाह भाई! मेरे तो गिरधर गोपाल… (गुनगुनाते । हैं) वाह! भक्ति रस का जवाब नहीं। आत्मा-परमात्मा का मिलन
कराने वाला रस है भक्ति रस। वाह! वाह! वाह!

मंच संचालक : दोस्तो! अब आपको हम गजल गायकी की दुनिया में ले चलते हैं। मंच पर आपके सामने हैं प्रसिद्ध गजल गायक राजेंद्र शर्मा जी। गजल संभ्रांत श्रोताओं का गीत है। गजल के कई गायकों को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है। श्री राजेंद्र शर्मा जी…

(राजेंद्र शर्मा की गायकी पर श्रोता झूमते हैं। एक-एक शब्द पर दाद देते हैं। वाह-वाह के शब्द सुनाई देते हैं। राजेंद्र शर्मा अपना गायन समाप्त करते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट होती हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! अब आप के समक्ष सितारवादक रमाशंकर जी तंत्रवाद्य सितार की मधुर ध्वनि से आपका मनोरंजन करने आ रहे है। सितारवादक रविशंकर का नाम तो आपने सुना ही होगा। अब सुनिए रमाशंकर जी को।

(सितारवादक रमाशंकर अपने सितार पर मधुर ध्वनि से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। तालियों की गडगडाहट होती है।)

मंच संचालक : दोस्तो! मृदंग के मधुर स्वर से तो आप परिचित ही होंगे। मृदंग मंदिरों में बजाया जाने वाला वाद्य हैं। इसके अलावा गाँवों में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना में मृदंग वाद्य का प्रयोग होता है। तो सुनिए अब मृदंग के मधुर स्वर पंडित कमलाकांत शर्मा जी से।

(पंडित कमलाकांत अपने मृदंग पर ऐसी थपकियाँ देते हैं कि श्रोता वाह-वाह करने लगते हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! अब हम एक ऐसे वाद्य और उसे बजाने वाले व्यक्ति से आपका परिचय कराते हैं, जो वाद्य पुराने जमाने में लड़ाई के समय सैनिकों में उत्साह पैदा करने के लिए बजाया जाता था। लेकिन आजकल इसका प्रयोग गाँवों में नौटंकियों में किया जाता है। इसका नाम है नगाड़ा। आज इसे मंच पर बजा रहे हैं पंडित श्यामनारायण जी। श्यामनारायण जी का पेशा ही है नौटंकियों में नगाड़ा बजाना। तो श्यामनारायण जी… कड़कड़… कड़कड़… धम्म!

(श्यामनारायण जी नौटंकी की तर्ज पर नगाड़ा बजाते हैं। श्रोता मस्ती से सिर हिलाते हैं। कुछ दर्शक अपने स्थान पर खड़े होकर नगाड़े की तर्ज पर अभिनय भी करने लगते हैं। श्यामनारायण जी नगाड़ा वादन बंद करते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट होती हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! अब मैं आपके सामने आपका परिचित वाद्य यानी बाँसुरी बजाने वाले कलाकार को मंच पर अपने बाँसुरी वादन से आपका मनोरंजन करने के लिए बुलाता हूँ। दोस्तो! बाँसुरी की धून बहुत कर्णप्रिय होती है। भगवान श्री कृष्ण की बाँसुरी सुनकर गायें तक उनके पास दौड़ी चली आती थीं। तो शीतल यादव जी मंच पर अपनी बाँसुरी के साथ आपके सामने हैं।

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(शीतल यादव बाँसुरी बजाते हैं। उनकी बाँसुरी की धुन से पंडाल गूंजने लगता है। तालियाँ बजती हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! संगीत महोत्सव का कार्यक्रम हो और उसमें फिल्मी गीत-संगीत का समावेश न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। दोस्तो! हम आज आपको फिल्मी गीतों के करावके संगीत की महफिल में ले चलते हैं। तो फिर देर किस बात की।…

(मंच पर करावके संगीत बजता है। इसमें सन 1960 से लेकर सन 1980 तक के मधुर गीतों के मुखड़ों संगीत बजते हैं और गायक मधुर स्वर में इन गीतों को गाते हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! आपको पॉप संगीत का मजा दिलाए बिना भला हम कैसे जाने देंगे। ऐसी कल्पना भी मत कीजिए। तो हो जाए धम… धमा… धम…।
(मंच पर दिल दहला देने वाला पॉप संगीत बजता है। लोग इस संगीत के साथ नाचने लगते हैं।)

मंच संचालक : अरे भाई, हम तो भूल ही गए। हमारे बीच एक १ बहुत ही उदीयमान कलाकार कब से अपनी बारी की प्रतीक्षा कर १ रहे हैं। ये हैं बैंजो वादक मास्टर देवांश पांडेय जी। तो पांडेय जी, शुरू हो जाइए।

(देवांश पांडेय जी अपने बैंजो वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। चारों ओर से वाह-वाह का शोर होता हैं।)

मंच संचालक : अरे भाई, हमें पता है कि आप हमारे चहेते कलाकार पुत्तूचेरी पिल्लई को सुने बिना नहीं जाने वाले हैं। भाइयो! आखिर में आपके सामने श्रीमान पिल्लई साहब ही आ रहे हैं। आप तो जानते ही हैं कि वे –
प्यारा भारत देश हमारा।
हमको प्राणों से है प्यारा।

गीत हिंदी, मराठी, गुजराती, तमिल और तेलुगु भाषाओं में सुनाते १ हैं। आप यह देशभक्तिपूर्ण मधुर गीत सुनिए।

(श्री पिल्लई पाँच भाषाओं में यह गीत गाते हैं। तालियाँ बजती है।) (गीत समाप्त होता हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! इस गीत के साथ ही हमारा आज का संगीत महोत्सव का यह समारोह समाप्त होता है।

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॥ जय हिंद ।।
(राष्ट्रगान बजता है, परदा गिरता है।)

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मैं उद्घोषक Summary in Hindi

मैं उद्घोषक लेखक का परिचय

मैं उद्घोषक लेखक का नाम :
आनंद प्रकाश सिंह। (जन्म : 21 जुलाई, 1958.)

मैं उद्घोषक प्रमुख कृतियाँ :
पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर लेख, समीक्षाएँ, कहानियाँ, कविताएँ आदि प्रकाशित।

मैं उद्घोषक विशेषता :
पंडित भीमसेन जोशी तथा कई अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों द्वारा लेखक के सूत्र-संचालन की प्रशंसा। किंग ऑफ वॉईस, संस्कृति शिरोमणि तथा अखिल आकाशवाणी जैसे पुरस्कारों से सम्मानित।

मैं उद्घोषक विधा :
आत्मकथा। आत्मकथा लेखन हिंदी साहित्य में रोचक और पठनीय लेखन माना जाता है। अपने अनुभवों तथा व्यक्तिगत प्रसंगों को पूरी निष्ठा से बताना आत्मकथा की पहली शर्त है। आत्मकथा उत्तम पुरुष वाचक सर्वनाम ‘मैं’ में लिखी जाती है।

मैं उद्घोषक विषय प्रवेश :
आजकल मंच संचालन अथवा सूत्र संचालन बहुत लोकप्रिय और महत्त्वपूर्ण माना जाता है। लेखक एक सफल मंच संचालक और सूत्र संचालक रहे हैं। प्रस्तुत लेख में उन्होंने बताया है कि सफल उद्घोषक अथवा मंच संचालक बनने के लिए व्यक्ति में कौन-कौन से आवश्यक गुण होने चाहिए। लेखक के अनुसार कार्यक्रम की सफलता मंच संचालक अथवा सूत्र संचालक के आकर्षक एवं उत्तम संचालन तथा उसके अपने विशेष गुणों पर आधारित होती है।

मैं उद्घोषक पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में यह बताया गया है कि एक सफल उद्घोषक बनने के लिए व्यक्ति में कौन-कौन से गुण होने चाहिए और इसमें रोजगार की क्या संभावनाएँ हैं। इस लेख के लेखक स्वयं लंबे अरसे तक एक प्रतिष्ठित उद्घोषक रहे हैं। इस आत्मकथात्मक लेख में उन्होंने अपने अनुभव से अर्जित अनेक गुणों से परिचित कराया है।

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Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 16 मैं उद्घोषक

उद्घोषक, मंच संचालक और एंकर अलग-अलग नाम हैं उद्घोषक के। यह श्रोता और वक्ता को जोड़ने वाली कड़ी का काम करता है। किसी भी कार्यक्रम में मंच संचालक की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। उद्घोषक ही आयोजकों तथा अतिथियों को मंच पर आमंत्रित करता है तथा पूरे कार्यक्रम का संचालन करता है।

उदघोषक बनने के लिए कठिन अभ्यास की आवश्यकता होती है। आरंभ में मंच पर बोलने में सबको झिझक होती है। पर हिम्मत जुटाकर अभ्यास करते रहने से यह झिझक दूर हो जाती है। अधिकांश मंच संचालकों के साथ ऐसी घटनाएँ अकसर होती हैं। धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास आ जाता है।

सूत्र संचालन के कई प्रकार होते हैं। इसके मुख्य प्रकार हैं – शासकीय कार्यक्रम का सूत्र संचालन, दूरदर्शन हेतु सूत्र संचालन, रेडियो हेतु सूत्र संचालन, राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक
कार्यक्रमों का सूत्र संचालन।

शासकीय एवं राजनीतिक समारोहों के सूत्र संचालन में प्रोटोकॉल १ का ध्यान रखते हुए अधिकारियों के पदों के अनुसार नामों की सूची बनाकर किसका किसके हाथों स्वागत करना है, इसकी योजना बनानी पड़ती है। इसमें आलंकारिक भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

दूरदर्शन तथा रेडियो कार्यक्रम का सूत्र संचालन करने के लिए इन पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों की पूरी जानकारी होनी जरूरी है। इनके कार्यक्रमों की संहिता लिखकर तैयार करनी होती है।

सूत्र संचालन करते समय रोचकता, रंजकता तथा विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख कार्यक्रम में करने से उसमें जान आ जाती है। कार्यक्रम और श्रोताओं के अनुसार भाषा का प्रयोग जरूरी होता है।

सत्र संचालक को यह ध्यान रखना होता है कि जिस प्रकार का कार्यक्रम हो उसी तरह की उसकी तैयारी की जानी चाहिए और उसी तरह उसकी संहिता लेखन करना चाहिए। संचालक को चाहिए कि वह संचालन के लिए आवश्यक तत्त्वों का अध्ययन करे।

सूत्र संचालक में कुछ गुणों का होना आवश्यक है। उसे मिलनसार, हँसमुख, हाजिरजवाबी तथा विविध विषयों का जानकार होने के साथ भाषा पर उसका अधिकार होना चाहिए। इसके अलावा उसे आयोजकों की ओर से अचानक मिली सूचना के अनुसार संहिता में परिवर्तन कर संचालन करना आना चाहिए।

लेखक कहते हैं कि कार्यक्रम कोई भी हो, मंच संचालक को मंच की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति मंच संचालक होता है। अतएव उसका परिधान, वेशभूषा, केश सज्जा आदि सहज और गरिमामय होना चाहिए। उसका व्यक्तित्व और आत्मविश्वास उसके शब्दों में उतरना चाहिए।

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सतर्कता, सहजता और उत्साह वर्धन उद्घोषक के मुख्य गुण हैं। उद्घोषक को कार्यक्रम का आरंभ रोचक ढंग से करना चाहिए। बीच-बीच में प्रसंग के अनुसार चुटकुले, शेर-ओ-शायरी के अंश का प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए उद्घोषक को निरंतर अध्ययन करते रहना होता है।

उपर्युक्त बातों पर ध्यान देने वाला व्यक्ति अच्छा उद्घोषक बन सकता है। मंच पर उद्घोषक श्रोता एवं दर्शकों के समक्ष होता है, पर रेडियो और कभी-कभी टीवी का सूत्रधार परदे के पीछे होता है। उसकी केवल आवाज सुनाई देती है। लेकिन उसका दायरा विस्तृत होता है। तब उसको अपनी आवाज का कमाल दिखाना होता है।

इस क्षेत्र में रोजगार की पर्याप्त संभावनाएँ हैं। विशेषकर भाषा का अध्ययन करने वाले विद्याथियों के लिए। सूत्र संचालन में तो भाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

मैं उद्घोषक शब्दार्थ

वक्ता बोलने वाला।
नामचीन नामी, मशहूर।
भूरि-भूरि बहुत ज्यादा।
हस्ती व्यक्तित्व।
गौरवान्वित गौरवयुक्त।
अहम महत्त्वपूर्ण।
पापड़ बेलना घोर परिश्रम करना, बहुत कष्ट झेलना।
थरथराना काँपना।
हकलाना जिह्वा के दोष के कारण रुकरुककर बोलना।
शासकीय सरकारी। Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 16 मैं उद्घोषक
प्रोटोकॉल शिष्टाचारपूर्वक, विधिवत।
सत्कार सम्मान।
आलंकारिक अलंकारयुक्त।
संहिता सूची।
संकलन संग्रह।
सेतु पुल।
सटीक बिलकुल ठीक।
मुशायरा शायरों का इकट्ठा होकर शेर पढ़ना।
हाजिरजवाबी बात का तुरंत बढ़िया जवाब सोच लेने की शक्ति।
ज्ञाता जानकार।
परिधान पहनने का कपड़ा।
गरिमामयी गौरवमयी।
सतर्कता सावधानी।
जिज्ञासाभरा जानने की इच्छा से परिपूर्ण।
प्रेरणादायक प्रेरणा देने वाली।
रोजगार जीविका।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 15 फीचर लेखन Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन

12th Hindi Guide Chapter 15 फीचर लेखन Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

पाठ पर आधारित

प्रश्न 1.
फीचर लेखन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
फीचर किसी विशेष घटना, व्यक्ति, जीव-जंतु, स्थान, प्रकृति-परिवेश से संबंधित व्यक्तिगत अनुभूतियों पर आधारित आलेख होता है। फीचर समाचारों को नया आयाम देता है, उनका परीक्षण करता है तथा उन पर नया प्रकाश डालता है। फीचर समाचारपत्र का प्राण तत्त्व होता है। पाठक की प्यास बुझाने, घटना की मनोरंजनात्मक अभिव्यक्ति की कला का नाम फीचर है। फीचर किसी गद्य गीत की तरह होता है जो बहुत लंबा, नीरस और गंभीर नहीं होना चाहिए। इससे पाठक बोर हो जाते हैं और ऐसे फीचर , कोई पढ़ना नहीं चाहता। फीचर किसी विषय का मनोरंजक शैली में विस्तृत विवेचन है।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन

अच्छा फीचर नवीनतम जानकारी से परिपूर्ण होता है। किसी घटना की सत्यता, तथ्यता फीचर का मुख्य तत्त्व है। फीचर लेखन में शब्द चयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। लेखन की भाषा सहज, संप्रेषणीयता से परिपूर्ण होनी चाहिए। प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों, उद्धरणों, लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग फीचर में है चार चाँद लगा देता है। फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए, क्योंकि नीरस फीचर कोई भी नहीं पढ़ना चाहता।

फीचर से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। विश्वसनीयता के लिए फीचर ३ में तार्किकता आवश्यक है। तार्किकता के बिना फीचर अविश्वसनीय ३ बन जाता है। फीचर में विषय की नवीनता होना आवश्यक है, क्योंकि उसके अभाव में फीचर अपठनीय हो जाता है। फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए।

फीचर के विषयानुकूल चित्रों, कार्टूनों अथवा फोटो का उपयोग किया जाए तो फीचर अधिक प्रभावशाली बन जाता है। फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण तथा समसामयिक विषयों का समावेश होना है चाहिए। फीचर पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि के अनुसार होना चाहिए।

प्रश्न 2.
फीचर लेखन के सोपानों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
फीचर लेखन की प्रक्रिया के निम्नलिखित सोपान हैं :

  1. प्रस्तावना : प्रस्तावना में फीचर के विषय का संक्षिप्त परिचय दिया जाता है। यह परिचय आकर्षक और विषयानुकूल होना चाहिए। परिचय पढ़कर पाठकों के मन में फीचर पढ़ने की जिज्ञासा जाग्रत होती है और पाठक अंत तक फीचर से जुड़ा रहता है।
  2. विवरण अथवा मुख्य कलेवर : फीचर में विवरण का महत्त्वपूर्ण स्थान है। फीचर में लेखक स्वयं के अनुभव, लोगों से प्राप्त जानकारी और विषय की क्रमबद्धता, रोचकता के साथ-साथ संतुलित तथा आकर्षक शब्दों में पिरोकर उसे पाठकों के सम्मुख रखता है जिससे फीचर पढ़ने वाले को ज्ञान और अनुभव से संपन्न कर दे।
  3. उपसंहार : यह अनुच्छेद संपूर्ण फीचर का सार अथवा निचोड़ होता है। इसमें फीचर लेखक फीचर का निष्कर्ष भी प्रस्तुत कर सकता है अथवा कुछ अनुत्तरित प्रश्न पाठकों के ऊपर भी छोड़ सकता है। उपसंहार ऐसा होना चाहिए जिससे पाठक को विषय से संबंधित ज्ञान भी मिल जाए और उसकी जिज्ञासा भी बनी रहे।
  4. शीर्षक : विषय का ओचित्यपूर्ण शीर्षक फीचर की आत्मा है। शीर्षक संक्षिप्तं रोचक और जिज्ञासावर्धक होना चाहिए। नवीनता, आकर्षकता और ज्ञानवृद्धि उत्तम शीर्षक के गुण हैं।

प्रश्न 3.
फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ :

  • फीचर लेखन में आरोप-प्रत्यारोप करने से बचना चाहिए।
  • फीचर लेखन में आलंकारिक और अति क्लिष्ट भाषा का है प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • फीचर लेखन में अति नाटकीयता से बचना चाहिए।
  • झूठा तथ्यात्मक आँकड़े, प्रसंग अथवा घटनाओं का उल्लेख है करना उचित नहीं।
  • फीचर लेखन में अति कल्पनाओं और हवाई बातों के प्रयोग है से बचना चाहिए।
  • फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए, क्योंकि नीरस फीचर कोई भी नहीं पढ़ना चाहता।
  • फीचर बहुत लंबा, ऊबाऊ और गंभीर नहीं होना चाहिए। फीचर में विषय की नवीनता होना आवश्यक है।
  • फीचर लेखन की भाषा सहज, संप्रेषणीयता से परिपूर्ण होनी चाहिए।
  • फीचर से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। विश्वसनीयता के लिए फीचर में तार्किकता आवश्यक है।
  • फीचर लेखन पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
  • फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए।
  • फीचर के विषयानुकूल चित्रों, कार्टूनों अथवा फोटो का उपयोग किया जाए तो फीचर अधिक प्रभावशाली बन है जाता है।
  • फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण तथा समसामयिक विषयों का समावेश होना चाहिए।

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व्यावहारिक प्रयोग

प्रश्न 4.
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर फीचर लेखन कीजिए।
उत्तर :
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम डॉ विक्रम साराभाई की संकल्पना है। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। वर्तमान में इस कार्यक्रम की कमान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के हाथों में है। इसरो की स्थापना 1969 में डॉ. विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में की गई। इसका मुख्यालय बंगलौर में है। भारत ने अपने पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ की थी।

जब पहले उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि भारत का अंतरिक्ष यान किसी दिन मंगल ग्रह के लिए जा सकेगा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से कई बड़े वैज्ञानिक जुड़े रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान दे चुके हैं।

स्थापना के बाद से ही भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अच्छी तरह से ऑर्केस्ट्रेटेड किया गया है और इसमें संचार और रिमोट सेंसिंग के लिए उपग्रह, अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली और अनुप्रयोग कार्यक्रम जैसे तीन अलग-अलग तत्त्व थे। प्राकृतिक संसाधनों और आपदा प्रबंधन सहायता की निगरानी और प्रबंधन के लिए दूरसंचार, टेलिविजन प्रसारण और मौसम संबंधी सेवाओं और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट के लिए दो प्रमुख परिपालन प्रणालियों को भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह स्थापित किया गया है।

1960 और 1970 के दशक के दौरान भारत ने भू राजनीतिक और आर्थिक विचारों के कारण अपना स्वयं का लॉन्च वाहन कार्यक्रम प्रारंभ किया। देश ने एक साउंडिंग रॉकेट प्रोग्राम विकसित किया और 1980 के दशक तक सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल – 3 और अधिक उन्नत, संवर्धित सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (ए एस एल वी) को परिचालन सहायक बुनियादी ढाँचे के साथ पूरा किया।

सबसे पहले धुंबा को रॉकेट लॉन्चिग सेंटर के तौर पर चुना गया था। धरती की भू चुंबकीय भूमध्य रेखा धुंबा से गुजरती है। भारत ने पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को लॉन्च किया था यानी मंगल यान से करीब 50 साल पहले। ये एक नाइक-अपाचे रॉकेट था। 1975 में भारत ने अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया और इस तरह अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया। इसका वजन सिर्फ 360 किलोग्राम था और इसका नाम प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलविद आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था।

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भास्कर – 1 भारत का पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट था, इस उपग्रह का कैमरा जो तस्वीरें भेजता था, उन्हें वन, पानी और सागरों के अध्ययन में इस्तेमाल किया जाता था। चंद्रयान का भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्त्वपूर्ण स्थान है। चंद्रयान ने चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज की थी।

इसरो ने प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी की उन्नति के लिए अपनी ऊर्जा को आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप पी एस एल वी और जी एस एल वी प्रौद्योगिकियों का निर्माण हुआ। पिछले साढ़े चार दशकों में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक सुसंगठित, आत्मनिर्भर कार्यक्रम के माध्यम से प्रभावशाली प्रगति की है।

प्रश्न 5.
लता मंगेशकर पर फीचर लेखन कीजिए।
उत्तर :
भारतरत्न लता मंगेशकर भारत की अप्रतिम गायिका हैं। उनकी मधुर आवाज की पूरी दुनिया दीवानी है। पिछले छह-सात दशकों से भारतीय सिनेमा को अपनी आवाज के जादू से सराबोर करने वाली लता का जन्म 28 सितंबर, 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल के घर में हुआ। लता के पिता रंगमंच के कलाकार और गायक भी थे। अतः संगीत लता को विरासत में मिला। लता के जन्म के कुछ दिन बाद ही इनका परिवार महाराष्ट्र चला गया।

लता मंगेशकर ने अपनी संगीत यात्रा का प्रारंभ मराठी फिल्मों से किया। इन्होंने ‘हिंदुस्तान क्लासिकल म्यूजिक’ के उस्ताद अमानत अली खान से क्लासिकल संगीत सीखना शुरु किया। भारत बँटवारे के बाद उस्ताद अमानत अली खान के पाकिस्तान चले जाने के बाद लता ने बड़े गुलाम अली खान, पंडित तुलसीदास शर्मा तथा उस्ताद अमानत खान देवसल्ले से संगीत सीखा।

गुलाम हैदर ने 1948 में लता को ‘मजबूर’ फिल्म में पहला ब्रेक दिया। तब से लेकर 1989 तक लता मंगेशकर ने 30000 से भी अधिक गाने गाए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस दौर में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का शायद ही कोई ऐसा फिल्म निर्देशक और संगीत निर्देशक होगा, जिसके साथ लता जी ने काम न किया हो। लता मंगेशकर अत्यंत शांत स्वभाव और प्रतिभा की धनी हैं।

उन्होंने रागों पर आधारित अनेक गाने गाए, तो दूसरी ओर ‘अल्लाह. तेरो नाम’ और ‘प्रभु तेरो नाम’ जैसे भजन भी गाए, वहीं 1963 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में देश का सबसे जीवंत गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया। इस गाने को सुनते समय नेहरू जी की आँखों से आँसू बह निकले थे।

लता मंगेशकर भारतीय संगीत में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के लिए पद्मभूषण, पद्मविभूषण, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड, महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड, भारतरत्न, 3 बार राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड, बंगाल फिल्म पत्रकार संगठन अवॉर्ड, फिल्म फेअर लाइफटाइम अचीवमंट अवॉर्ड सहित अनेक अवॉर्ड जीत चुकी हैं। आज पूरी संगीत दुनिया उनके आगे नतमस्तक है।

फीचर के प्रकार

  • समाचार फीचर
  • खोजपरक फीचर
  • मानवीय रुचिपरक फीचर
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों से संबंधित फीचर
  • व्याख्यात्मक फीचर
  • ऐतिहासिक फीचर
  • जन रुचि के विषयों पर आधारित फीचर
  • विज्ञान फीचर
  • खेल-कूद फीचर
  • फोटो फीचर
  • पर्वोत्सवी फीचर
  • इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आधारित फीचर
  • विशेष घटनाओं पर आधारित फीचर
  • व्यक्तिगत फीचर
  • रेडियो फीचर

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन

फीचर लेखन Summary in Hindi

फीचर लेखन का परिचय

फीचर लेखन लेखक का नाम :
डॉ. बीना शर्मा। (जन्म 20 अक्तूबर 1959.)

फीचर लेखन प्रमुख कृतियाँ :
‘हिंदी शिक्षण – अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य’, ‘भारतीय सांस्कृतिक प्रतीक’ आदि।

फीचर लेखन विशेषता :
डॉ. बीना का लेखन शिक्षा क्षेत्र और भारतीय संस्कृति से प्रेरित है। स्त्री विमर्श और समसामयिक विषयों पर आपका विशेष लेखन। आपका साहित्य भारतीय संस्कारों और जीवन मूल्यों के प्रति आग्रही है।

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फीचर लेखन विषय प्रवेश :
आज के दौर में फीचर लेखन पत्रकारिता क्षेत्र का आधार स्तंभ बन गया है। फीचर का मुख्य कार्य पाठक के सम्मुख किसी विषय का सजीव वर्णन करना होता है। प्रस्तुत पाठ में लेखिका फीचर लेखन का स्वरूप, उसकी विशेषताएँ, प्रकार आदि पर प्रकाश डालते हुए इस तथ्य को उद्भासित कर रही है कि फीचर लेखन जहाँ एक ओर समाज के दर्पण के रूप में कार्य कर सकता है, वहीं यह आजीविका का स्रोत भी बन सकता है।

फीचर लेखन पाठ का सार

स्नेहा एक पत्रकार है। आज वह और उसका पूरा परिवार आनंद और गर्व की भावना से भरा है। पत्रकारिता के क्षेत्र में फीचर लेखन के लिए दिए जाने वाले ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर लेखन’ के लिए स्नेहा को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आज उसके परिवार द्वारा एक पार्टी का आयोजन किया गया है। स्नेहा के पति, उसके सास-ससुर, पुत्री प्रिया और पुत्र नैतिक उसे बधाई दे रहे हैं। स्नेहा की आँखों में खुशी के आँसू हैं।

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स्नेहा अतीत में खो जाती है। बी. ए. कर लेने के बाद पिता द्वारा भविष्य के बारे में पूछने पर वह पत्रकारिता का कोर्स करने है की इच्छा प्रकट करती है, जिसे माता द्वारा भी समर्थन मिलता है। स्नेहा पत्रकारिता का कोर्स ज्वाइन कर लेती है। पत्रकारिता की कक्षा का प्रथम दिवस – पहले लेक्चर में प्रोफेसर ने पत्रकारिता पाठ्यक्रम का पहला पेपर पढ़ाना शुरु किया। विषय था – फीचर लेखन। उन्होंने फीचर लेखन की विभिन्न परिभाषाओं को समझाते हुए कहा – फीचर लेखन के क्षेत्र में चर्चित जेम्स डेविस कहते हैं – ‘फीचर समाचारों को नया आयाम देता है, उनका परीक्षण करता है तथा उन पर नया प्रकाश डालता है।’

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स्नेहा की फीचर लेखन में विशेष रुचि थी। उसके द्वारा प्रसिद्ध फीचर लेखक पी. डी. टंडन का उल्लेख करने पर प्रोफेसर ने बताया कि पी. डी. टंडन के अनुसार ‘फीचर किसी गद्य गीत की तरह होता है, जो बहुत लंबा, नीरस और गंभीर नहीं होना चाहिए। इससे पाठक बोर हो जाते हैं और ऐसे फीचर कोई पढ़ना नहीं चाहता। फीचर किसी विषय का मनोरंजक शैली में विस्तृत विवेचन है।’

इन परिभाषाओं के द्वारा स्नेहा अच्छी तरह समझ गई कि फीचर समाचारपत्र का प्राण तत्त्व होता है। पाठक की प्यास बुझाने, घटना की मनोरंजनात्मक अभिव्यक्ति की कला का नाम फीचर है। पत्रकारिता कोर्स के बीतते दिन-महीने, फीचर लेखन के संबंध में सुने हुए लेक्चर्स, प्रोफेसरों के साथ की गई चर्चाएँ, अध्ययन, परीक्षा, फीचर लेखन का प्रारंभ फीचर लेखन और आज का दिन। फीचर लेखन की सिद्धहस्त लेखिका बनना ही स्नेहा का एकमात्र सपना था।

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स्नेहा को याद आ रहा है वह दिन जब उसे पत्रकारिता कोर्स में फीचर लेखन पर व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया था। आज उसे अपना परिश्रम सार्थक होता नजर आ रहा था। रोचक प्रसंगों के साथ स्नेहा फीचर लेखन की विशेषताएँ बताने लगी – अच्छा फीचर नवीनतम जानकारी से परिपूर्ण होता है।

किसी घटना की सत्यता, तथ्यता फीचर का मुख्य तत्त्व है। फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों का समावेश होना चाहिए क्योंकि समाचारपत्र दूर-दूर तक जाते हैं। साथ ही फीचर का विषय समसामयिक होना चाहिए।

फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए, क्योंकि नीरस फीचर कोई भी नहीं पढ़ना चाहता। फीचर से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। विश्वसनीयता के लिए फीचर में तार्किकता आवश्यक है। तार्किकता के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है। फीचर में विषय की नवीनता होना आवश्यक है क्योंकि उसके अभाव में फीचर अपठनीय हो जाता है। फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए।

फीचर लेखन करते समय लेखक को पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना चाहिए। प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों, उद्धरणों, लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग फीचर में चार चाँद लगा देता है। फीचर लेखक को निष्पक्ष रूप से अपना मत व्यक्त करना चाहिए तभी पाठक उसके विचारों से सहमत हो सकेगा। फीचर लेखन में शब्द चयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। लेखन की भाषा सहज, संप्रेषणीयता से परिपूर्ण होनी चाहिए। फीचर के विषयानुकूल चित्रों, कार्टूनों अथवा फोटो का उपयोग किया जाए तो फीचर अधिक प्रभावशाली बन जाता है।

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एक विद्यार्थी के पूछने पर स्नेहा बताती है कि फीचर किसी विशेष घटना, व्यक्ति, जीव-जंतु, तीज-त्योहार, दिन, स्थान, प्रकृतिपरिवेश से संबंधित व्यक्तिगत अनुभूतियों पर आधारित आलेख होता है। इस आलेख को कल्पनाशीलता, सृजनात्मक कौशल के साथ मनोरंजक और आकर्षक शैली में प्रस्तुत किया जाता है। फीचर अनेक प्रकार के हो सकते हैं।

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फीचर लेखन मुख्य रूप से –

  • व्यक्तिपरक फीचर
  • सूचनात्मक फीचर
  • विवरणात्मक फीचर
  • विश्लेषणात्मक फीचर
  • साक्षात्कार
  • विज्ञापन फीचर

स्नेहा ने आगे फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया :

  • फीचर लेखन में आरोप-प्रत्यारोप करने से बचना चाहिए।
  • फीचर लेखन में क्लिष्ट और आलंकारिक भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • फीचर लेखन में झूठे तथ्यात्मक आँकड़े, प्रसंग अथवा घटनाओं का उल्लेख करना उचित नहीं है।
  • फीचर अति नाटकीयता से परिपूर्ण नहीं होना चाहिए।
  • फीचर लेखन में लेखक को अति कल्पनाओं और हवाई बातं के प्रयोग से बचना चाहिए।

इन सभी सावधानियों को ध्यान रखेंगे तो फीचर लेखन अधिकाधिक विश्वसनीय और प्रभावी बन सकता है।

फीचर लेखन की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए स्नेहा ने बताया कि फीचर लेखन के मुख्य तीन अंग हैं :

  1. विषय का चयन : फीचर लेखन में विषय का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विषय रोचक, ज्ञानवर्धक और उत्प्रेरित करने वाला हो। अतः फीचर का विषय समयानुकूल और समसामयिक होना चाहिए। विषय जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला हो।
  2. सामग्री का संकलन : फीचर लेखन में विषय संबंधी सामग्री का संकलन करना महत्त्वपूर्ण अंग है। उचित जानकारी और अनुभव के अभाव में लिखा गया फीचर नीरस सिद्ध हो सकता है। विषय से संबंधित उपलब्ध पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं से सामग्री जुटाने के अलावा बहुत-सी सामग्री लोगों से मिलकर, कई स्थानों पर जाकर जुटानी पड़ती है।
  3. फीचर योजना : फीचर लिखने से पहले फीचर का एक योजनाबद्ध ढाँचा बनाना चाहिए।

एक अन्य विद्यार्थी की जिज्ञासा शांत करते हुए स्नेहा ने बताया – निम्न चार सोपानों अथवा चरणों के आधार पर फीचर लिखा जाता है :

  1. प्रस्तावना : प्रस्तावना में फीचर के विषय का संक्षिप्त परिचय होता है। यह परिचय आकर्षक और विषयानुकूल होना चाहिए। इससे पाठकों के मन में फीचर पढ़ने की जिज्ञासा जाग्रत होती है और पाठक अंत तक फीचर से जुड़ा रहता है।
  2. विवरण अथवा मुख्य कलेवर : फीचर में विवरण का महत्त्वपूर्ण स्थान है। फीचर में लेखक स्वयं के अनुभव, लोगों से प्राप्त जानकारी और विषय की क्रमबद्धता, रोचकता के साथसाथ संतुलित तथा आकर्षक शब्दों में पिरोकर उसे पाठकों के सम्मुख रखता है जिससे फीचर पढ़ने वाले को ज्ञान और अनुभव से संपन्न कर दे।
  3. उपसंहार : यह अनुच्छेद संपूर्ण फीचर का सार अथवा निचोड़ होता है। इसमें फीचर लेखक फीचर का निष्कर्ष भी प्रस्तुत कर सकता है अथवा कुछ अनुत्तरित प्रश्न पाठकों के ऊपर भी छोड़ सकता है। उपसंहार ऐसा होना चाहिए जिससे पाठक को विषय से संबंधित ज्ञान भी मिल जाए और उसकी जिज्ञासा भी बनी रहे।
  4. शीर्षक : विषय का औचित्यपूर्ण शीर्षक फीचर की आत्मा है। शीर्षक संक्षिप्त, रोचक और जिज्ञासावर्धक होना चाहिए। नवीनता, आकर्षकता और ज्ञानवृद्धि उत्तम शीर्षक के गुण हैं।

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फीचर लेखन शब्दार्थ

आनंदित  प्रसन्न।
सम्मानित  आदर किया हुआ।
उपलक्ष्य  उद्देश्य।
छलछलाना  आँसू भर आना।
समर्थन  किसी मत की पुष्टि।
पत्रकारिता  पत्रकार का काम।
चर्चित  जिसकी चर्चा की जाती हो।
आयाम  विस्तार।
परीक्षण  परीक्षा।
विश्लेषण  अलग करना।
परिभाषित  जिसकी परिभाषा की गई हो।
नीरस Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन  जिसमें रस न हो।
मनोरंजक  मन को प्रसन्न करने वाला।
विस्तृत  विस्तार वाला।
विवेचन  व्याख्या।
प्राण तत्त्व  आत्मा।
प्रविष्ट  अंदर आना।
आँखें फटी-की-फटी रह जाना बहुत अधिक आश्चर्य होना।
विख्यात  प्रसिद्ध।
बरबस  अचानक।
शीर्ष  सर्वोच्च।
सिद्धहस्त  जिसका हाथ कोई काम करने में मँजा हो।
व्याख्यान  भाषण।
सार्थक  सफल।
रोचक  रुचि उत्पन्न करने वाला।
परिपूर्ण  संपूर्ण।
तथ्यता  यथार्थता।
समावेश  शामिल होना।
समसामयिक  समकालीन, एक ही समय में होने वाला।
विश्वसनीयता  विश्वास के योग्य होने का गुण।
तार्किकता  तर्क करने की योग्यता।
अविश्वसनीय  विश्वास न करने योग्य। Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन
अपठनीय  जो पढ़ने योग्य न हो।
उद्धरण  किसी लेख के अंश को दूसरे लेख में प्रयोग करना।
लोकोक्ति  लोगों द्वारा कही गई उक्ति अर्थात कथन।
निष्पक्ष  जो किसी तरह का पक्षपात न करता हो।
विषयानुकूल  विषय के अनुकूल।
आश्वस्त  जिसे आश्वासन दिया गया हो।
परिवेश  वातावरण।
अनुभूति अनुभव।
आलेख  लेख।
व्यक्तिपरक  व्यक्तिगत।
सूचनात्मक  सूचना संबंधी।
विवरणात्मक  सविस्तार वर्णन वाला।
साक्षात्कार  भेंट।
सटीक  उचित।
तर्कसंगत  जो तर्क पर आधारित हो।
क्लिष्ट  कठिनाई से समझ में आने वाला।
चयन Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन  चुनाव।
ज्ञानवर्धक  ज्ञान बढ़ाने वाला।
उत्प्रेरित  उत्साहित।
समयानुकूल  समय के अनुकूल।
संकलन  संग्रह।
मंतव्य  विचार।
सोपान  सीढ़ी।
कलेवर  ऊपरी ढाँचा।
क्रमबद्धता  क्रम के अनुसार।
अनुच्छेद  पैराग्राफ।
अनुत्तरित  जिसका उत्तर न दिया गया हो।
औचित्यपूर्ण  उपयुक्त।
जिज्ञासावर्धक  जानने की इच्छा बढ़ाने वाला।
शंका  प्रश्न।
समाधान  किसी प्रश्न का संतोषजनक उत्तर।
विख्यात  प्रसिद्ध। Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 15 फीचर लेखन
योगदान  सहायता देना।
कुतूहल  अचरज।
कृतज्ञता  उपकार मानना।