Class 11 Hindi Chapter 2 Laghu Kathayen Question Answer Maharashtra Board

Std 11 Hindi Chapter 2 Laghu Kathayen Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 11th Digest Chapter 2 लघु कथाएँ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Yuvakbharati 11th Digest Chapter 2 लघु कथाएँ Questions And Answers

11th Hindi Digest Chapter 2 लघु कथाएँ Textbook Questions and Answers

आकलन

1. लिखिए :

प्रश्न अ.
दावत में होने वाली अन्न की बरबादी पर उषा की प्रतिक्रिया –
उत्तर :
उषा की आँखों में आँसू आ गए।

Maharashtra Board Class 11 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 2 लघु कथाएँ

प्रश्न आ.
संवादों का उचित घटनाक्रम –
(i) “रुपये खर्च हो गए मालिक।”
(ii) “स्कूल नहीं जाता तू? अजीब है….!”
(iii) “अरे क्या हुआ ! जाता क्यों नहीं?”
(iv) “माँ, बाल-मजदूरी अपराध है न?’
उत्तर :
(i) “स्कूल नहीं जाता तू? अजीब है….!”
(ii) “माँ, बाल-मजदूरी अपराध है न?’
(iii) “अरे क्या हुआ ! जाता क्यों नहीं?”
(iv) “रुपये खर्च हो गए मालिक।”

शब्द संपदा

2.

प्रश्न अ.
समूह में से विसंगति दर्शानेवाला कृदंत/तद्धित शब्द चुनकर लिखिए –
(i) मानवता, हिंदुस्तानी, ईमानदारी, पढ़ाई
(ii) थकान, लिखावट, सरकारी, मुस्कुराहट
(iii) बुढ़ापा, पितृत्व, हँसी, आतिथ्य
(iv) कमाई, अच्छाई, सिलाई, चढ़ाई
उत्तर :
(i) पढ़ाई, (कृदंत शब्द)
(ii) सरकारी – (तद्धित शब्द)
(iii) हँसी – (कृदंत शब्द)
(iv) अच्छाई – (तद्धित शब्द)

प्रश्न आ.
निम्नलिखित वाक्यों में आए हुए शब्दों के वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए –

(i) पेड़ पर सुंदर फूल खिला है।
उत्तर :
पेड़ों पर सुंदर फूल खिले हैं।

(ii) कला के बारे में उनकी भावना उदात्त थी।
उत्तर :
कलाओं के बारे में उनकी भावनाएँ उदात्त थीं।

(iii) दीवारों पर टँगे हुए विशाल चित्र देखे।
उत्तर :
दीवार पर टँगा हुआ विशाल चित्र देखा।

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(iv) वे बहुत प्रसन्न हो जाते थे।
उत्तर :
वह बहुत प्रसन्न हो जाता था।

(v) हमारी-तुम्हारी तरह इनमें जड़ें नहीं होती।
उत्तर :
हमारी-तुम्हारी तरह इसमें जड़ नहीं होती।

उत्तर :
(vi) ये आदमी किसी भयानक वन की बात कर रहे थे।
उत्तर :
यह आदमी किसी भयानक वन की बात कर रहा था।

(vii) वह कोई बनावटी सतह की चीज है।
उत्तर :
वे कोई बनावटी सतह की चीजें हैं।

(इ) निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन करके प्रत्येक का वाक्य में प्रयोग कीजिए –
अध्यापक, रानी, नायिका, देवर, पंडित, यक्ष, बुद्धिमान, श्रीमती, दुखियारा, विद्वान

परिवर्तित शब्द वाक्य में प्रयोग
(1) ………………………………………. (1) ……………………………………….
(2) ………………………………………. (2) ……………………………………….
(3) ………………………………………. (3) ……………………………………….
(4) ………………………………………. (4) ……………………………………….
(5) ………………………………………. (5) ……………………………………….
(6) ………………………………………. (6) ……………………………………….
(7) ………………………………………. (7) ……………………………………….
(8) ………………………………………. (8) ……………………………………….
(9)  ………………………………………. (9) ……………………………………….
(10) ………………………………………. (10) ……………………………………….

उत्तर :

परिवर्तित शब्द  वाक्य में प्रयोग
अध्यापिका  मेरा सपना था कि एक दिन अध्यापिका बन जाऊँ।
राजा  राजा प्रजाहित दक्ष था।
नायक  वह उस चित्रपट का नायक था।
देवरानी  देवरानी ने चूड़ियाँ पहनी।
पंडिताइन  पंडिताइन मौसी ने मुझे पुकारा।
यक्षिनी  यक्षिणी और अप्सराएँ विहार कर रही थीं।
बुद्धिमती  वह एक बुद्धिमती नारी है।
श्रीमान  आइए, श्रीमान जी थोड़ा आराम कीजिए।
दुखियारी  बुढ़िया बेचारी दुखियारी लग रही है।
विदुषी  उस विदुषी नारी ने सभा में तात्विक चर्चा की।

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अभिव्यक्ति
3.
प्रश्न अ.
‘अन्न बैंक की आवश्यकता’, इसपर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
‘वित्त बैंक’, ‘ब्लड बैंक’ यह शब्द हम सुनते हैं किंतु ‘अन्न बैंक’ शब्द कभी सुना नहीं है। सचमुच ऐसा बैंक अगर खुल जाए तो गरीबों के जीवन में भूखा सोने की नौबत नहीं आएगी। आज अमीरों के घरों का बहुत सारा खाना कूड़े-कचरे के हवाले हो जाता है।

होटलों का, शादी-ब्याह में लोगों के प्लेटों का बचा-खुचा खाना अगर जरूरतमंदों को मिल जाए तो बेचारों की जिंदगी खुशी से भर जाएगी। अत: ‘अन्न बैंक’ खुलवाकर वहाँ अगर ऐसा अन्न दिया जाए तो इस अन्न को सुरक्षित रखने की व्यवस्था हो जाएगी और आवश्यकता के अनुसार यह अन्न गरीबों को दे दिया जाए तो देश की भूख की समस्या हल हो पाएगी।

प्रश्न आ.
‘शिक्षा से वंचित बालकों की समस्याएँ’, इस विषय पर अपना मत लिखिए।
उत्तर :
भारत सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत 06 से 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का कानून बनाया है। फिर भी आज तक अनेक बालक हशिये पर हैं। निरक्षरता सभी समस्याओं की नींव है। इसी कारण सरकार ने शिक्षा अभियान का प्रारंभ किया है।

बंजारे, आदिवासी, गड़रिया, भटकते मजदूरों की टोलियाँ इन लोगों के बच्चे शिक्षा से वंचित रहते हैं। झुग्गी-झोपड़ियों में रहनेवाले गरीबों के बच्चे भी पेट के पीछे दौड़ते स्कूल से वंचित रहते हैं। इन समस्याओं पर सरकार के साथ हम सबका योगदान भी आवश्यक है।

आज सरकार मुक्त विद्यालय की स्थापना कर चुकी है। जिसके माध्यम से नियमित स्कूल न जानेवाले बच्चे भी शिक्षा से जुड़े रह सकते हैं। हर पढ़े-लिखे व्यक्ति ने स्कूल से वंचित बच्चों को पढ़ाने के लिए दिल से प्रयास किया तो संभव है कि समस्या कुछ हद तक मिट पाएगी।

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पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न

4.
प्रश्न अ.
‘उषा की दीपावली लघुकथा द्वारा प्राप्त संदेश लिखिए।
उत्तर :
‘उषा की दीपावली’ यह श्रीमती संतोष श्रीवास्तव जी द्वारा लिखित एक सुंदर मर्मस्पर्शी (heart touching) लघुकथा है।

इस पाठ की छोटी उषा एक संवेदनशील (sensitive) लड़की है। दीपावली के अवसर पर वह देखती है कि सफाई का काम करने वाला बबन ‘नरक चौदस’ पर जलाए हुए आटे के दीपक कूड़े-कचरे के डिब्बे में न फेंकते हुए अपनी जेब में रख रहा है। बबन इतना गरीब था कि ये दीपक सेंककर खाना चाहता था। ये आटे के दीप जिसे लोग कचरे में फेंकते हैं वे किसी का पेट भरने के भी काम आते हैं। यह सुनकर उषा को तकलीफ होती है।

शादी-ब्याह में लोग प्लेटों में जरूरत से ज्यादा खाना लेकर बाद में बचा हुआ खाना फेंकते हैं। यह दृश्य उषा को याद आया और उषा दीपावली के पकवान बबन को देकर सच्ची खुशी महसूस करती है। इस कहानी से अन्न की बरबादी टालकर बचा-खुचा अन्न गरीबों तक पहुँचाने का संदेश मिलता है। ‘देने की खुशी महसूस करने का अनोखा संदेश इस कहानी से मिलता है।

प्रश्न आ.
‘मुस्कुराती चोट’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘मुस्कुराती चोट’ एक प्रेरणादायी लघुकथा है। इस कथा का बबलू अभाव में जीता है। ‘पिता की बीमारी’ माँ का संघर्ष देखकर खुद भी घर-घर जाकर रद्दी इकट्ठा करता है। किताबें न मिलने से उसकी पढ़ाई रुक गई है। बबूल एक दिन एक घर में रद्दी लेने के लिए जाता है तो उसकी बाल-मजदूरी पर बिना वजह उसके माँ-बाप को दोष देकर मालकिन ताने मारती है।

मालकिन की लड़की जब रद्दी की किताबें उसकी पढ़ाई के लिए मुफ्त में देना चाहती है, तब मालकिन विरोध करती है। किताबें लेकर वह पढ़ाई करेगा इस पर अविश्वास प्रकट करती है। ये बातें बबलू के मन को चोट पहुँचाती हैं। परंतु बाद में जब मालकिन को पता चलता है कि उन किताबों को रद्दी में बेचने के बजाय उसने खुद की पढ़ाई के लिए किताबें अलग रखी हैं तो उसे अपने अपशब्दों पर पछतावा होता है और वह बबलू की आगे की पढ़ाई का सारा खर्चा स्वयं उठाने का निश्चय करती है। इससे बबलू की चोट मुस्कुराहट में परिवर्तित होती है।

दिल की चोट अब खुशी में बदलती है। अत: सुखांत वाली इस लघुकथा को ‘मुस्कुराती चोट’ यह शीर्षक अत्यंत सार्थक लगता है।

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साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान

5. जानकारी दीजिए:

प्रश्न अ.
संतोष श्रीवास्तव जी लिखित साहित्यिक विधाएँ –
……………………………………………………………………………………….
……………………………………………………………………………………….
उत्तर :
कहानी, उपन्यास, लघुकथा, ललित निबंध तथा यात्रा संस्मरण इन अनेक गद्य विधाओं में संतोष जी का संचार हुआ

प्रश्न आ.
अन्य लघुकथाकारों के नाम –
……………………………………………………………………………………….
……………………………………………………………………………………….
उत्तर :
डॉ. कमल किशोर गोयनका, डॉ. सतीश दुबे, संतोष सुपेकर, कमल चोपड़ा आदि।

Yuvakbharati Hindi 11th Textbook Solutions Chapter 2 लघु कथाएँ Additional Important Questions and Answers

कृतिपत्रिका

(अ) निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

गद्यांश : आटे के दीपक कंपाउंड की मुंडेर पर जलकर ……………………………………….. आँसू छलक आए। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 5)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए :
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उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 2 लघु कथाएँ 2

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उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
उषा की आँखों के सामने दावतों में दिखाई देनेवाला यह दृश्य आया …………………………………………..
उत्तर :
जरा-सा ट्रॅगने वाले मेहमान भरी प्लेटें कचरे के हवाले करते हैं।

प्रश्न 2.
उषा ने बबन को यह दे दी …………………………………………..
उत्तर :
दीपावली के लिए बने पकवानों की थैली।

प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए शब्द उचित स्थान पर लिखिए : (दीपक, जेब, आँखें, पटाखा)
उत्तर :
पुल्लिंग शब्द – स्त्रीलिंग शब्द
दीपक – आँखें
पटाखा – जेब

प्रश्न 5.
‘शादी में अन्न की बरबादी’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
आज समाज में अमीर और गरीब के बीच एक बड़ी खाई है। आज-कल शादी मतलब बड़प्पन दिखाने का एक जरिया बन गया है। शादी में होने वाला खर्चा एक अलग चिंता का विषय है। बड़े लोग शादी में जो भोजन खिलाते हैं, उनमें इतनी विविधता होती है कि खाने वाला परेशान होता है कि क्या खाया जाए और क्या न खाया जाए। खड़खाना (बुफे पद्धति) आज काफी लोकप्रिय है।

इसमें लोग कतार में खड़े होने से बचने के लिए प्लेटों में एक ही बार ढेर सारा खाना ले लेते हैं। इतना ज्यादा खाना खा नहीं पाने से आखिर जूठा फेंका जाता है। यह सारा अन्न कूड़े-कचरे में जाकर बरबाद होता है। दूसरी ओर दिन-रात परिश्रम करके भी गरीबों को पेटभर खाना नसीब नहीं होता। एक वक्त की रोटी पाने के लिए वे तरसते हैं। यह बरबाद होने वाला अन्न गरीबों तक पहुँचाने की सुविधा हो तो शादी में दुल्हा-दुल्हन को सच्ची दुआएँ मिलेंगी।

(आ) निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

गद्यांश : घर में बाबा बीमार थे ……………………………………….. इसलिए पढ़ाई रुक गई। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 6)

प्रश्न 1.
तालिका पूर्ण कीजिए :
उत्तर :
बबलू की जानकारी –
पिता – बीमार
माता – चौका-बर्तन का काम करना
पढ़ाई – वीच में ही छूटना
कार्य – बाल मजदूरी / रद्दी इकट्ठा करना

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प्रश्न 2.
कारण लिखिए :

(i) बबलू की पढ़ाई रुक गई थी क्योंकि
उत्तर :
किताबों के लिए पैसे नहीं थे।

(ii) रद्दी तौलते समय बबलू की नजर स्कूल की किताबों पर थीं क्योंकि ….
उत्तर :
वह चाह रहा था कि वे किताबें उसे मिल जाएँ।

प्रश्न 3.
(क) गद्यांश से शव्दयुग्म ढूँढ़कर लिखिए :
(i) ……………………………
उत्तर :
(i) चौका-बर्तन

(ii) ……………………………
उत्तर :
(ii) घर-घर

उदा. –
माँ-बाप

(ख) निम्न शब्दों के लिए हिंदी मानक शब्द लिखिए :
(i) स्कूल –
उत्तर :
(i) स्कूल – पाठशाला (विद्यालय)

(ii) कॉलेज – …………………………………………
उत्तर :
(ii) कॉलेज – महाविद्यालय

प्रश्न 4.
‘वाल-मजदूरी : कारण और उपाय’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
भारत में ‘बाल-मजदूरी’ करवाना एक गुनाह मान लिया जाता है, किंतु दुकान हो या खेती, होटल हो या ठेला अनेक जगहों पर छोटी उम्र के बच्चे काम करते हुए दिखाई देते हैं। बाल-मजदूरी कानूनन अपराध होने पर भी इसपर रोक नहीं लगा पा रहे हैं।

इसके पीछे अनेक कारण हैं। गरीबी, व्यसनी पिता, बीमार माता-पिता, माँ-बाप का अभाव। विपन्नावस्था (poverty) के कारण जिस उम्र में बच्चे को स्कूल जाना जरूरी है उस उम्र में उन्हें परिवार के लिए काम करना पड़ता है। इसमें न माँबाप को खुशी मिलती है न बच्चों को, परंतु दोनों ओर मजबूरी होती है।

इस समस्या को मिटाने के लिए देश में बढ़ रही अमीरी और गरीबी की खाई का मिटना बहुत जरूरी है। यह संभव नहीं तो हर अमीर परिवार द्वारा कुछ बच्चों का खर्चा चलाकर उनकी पढ़ाई का बोझ उठाने पर उनका भविष्य सुधर जाएगा।

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(इ) निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

गद्यांश : बबलू ने रद्दी के पैसे ……………………………………………… बबलू की खुशी का ठिकाना न था। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 6)

प्रश्न 1.
घटनाक्रम के अनुसार वाक्यों का उचित क्रम लगाइए :
(i) डाँट खाने के बावजूद बबलू मुस्कुरा रहा था।
(ii) बबलू ने बोरे में से किताबें निकालकर अलग रख दीं।
(iii) रास्ते में बबलू को मालकिन और उनकी लड़की मिल गई।
(iv) दुकानदार बबलू पर झल्ला उठा।
उत्तर :
(i) बबलू ने बोरे में से किताबें निकालकर अलग रख दीं।
(ii) दुकानदार बबलू पर झल्ला उठा।
(iii) डाँट खाने के बावजूद बबलू मुस्कुरा रहा था।
(iv) रास्ते में बबलू को मालकिन और उनकी लड़की मिल गई।

प्रश्न 2.
कारण लिखिए :
(i) मालकिन ने बबलू की आगे की पढ़ाई का खर्चा उठाने का निश्चय किया ……………………………………
उत्तर :
मालकिन ने बबलू की आगे की पढ़ाई का खर्चा उठाने का निश्चय किया क्योंकि उसने बबलू की पढ़ाई के प्रति लालसा को देखा।

(ii) बबलू अब स्कूल जा सकेगा ……………………………………
उत्तर :
बबलू अब स्कूल जा सकेगा क्योंकि उसके पास किताबें थीं।

प्रश्न 3.
(क) कृदंत रूप लिखिए :

(i) मुस्कुराना – ……………………………………
उत्तर :
मुस्कुराहट

(ii) झुकना – ……………………………………
उत्तर :
(ii) झुकाव

(ख) अपशब्द शब्द में ‘अप’ उपसर्ग लगा है, ‘अप’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए :
(i) …………………………………..
(ii) …………………………………..
उत्तर :
(i) अपहरण
(iii) अपयश

उदा. – अपमान

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प्रश्न 4.
शिक्षा से वंचित वालकों की सहायता हेतु उपाय मुझाइए।
उत्तर :
यह बात सत्य है कि आज शिक्षा प्राप्ति के प्रति समाज के सभी वर्गों में जागरुकता आई है लेकिन आज भी कुछ बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। अनुसूचित जाति जनजाति के बच्चों तक सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।

अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए छात्रावास तथा छात्रवृत्ति का प्रावधान सरकारी तथा निजी संस्थाओं द्वारा, एन्.जी.ओ. द्वारा होना चाहिए। विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के लिए जो शारीरिक रूप से अक्षम है उनके लिए विशिष्ट शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए और उनके लिए विशेष अध्यापकों की नियुक्ति सरकार द्वारा होनी चाहिए। सर्वशिक्षा अभियान के साथ-साथ ‘समावेशन’ भी आवश्यक है ताकि शिक्षा से कोई भी बालक वंचित न रहें।

लघु कथाएँ Summary in Hindi

लघु कथाएँ लेखक परिचय :

श्रीमती संतोष श्रीवास्तव जी का जन्म मध्यप्रदेश के मंडला नामक गाँव में 23 नवंबर 1952 को हुआ। आधुनिक नारी जीवन के विविध आयाम तथा सामाजिक जीवन की विसंगतियाँ (discrepancy) आपके साहित्य द्वारा चित्रित है।

लघु कथाएँ रचनाएँ :

आपकी बहुविध रचनाएँ प्रकाशित हैं : जैसे ‘दबे पाँव प्यार’ ‘टेम्स की सरगम’ ‘ख्वाबों के पैरहन (उपन्यास)’ ‘बहके बसंत तुम’, ‘बहते ग्लेशियर’ (कहानी संग्रह), ‘फागुन का मन’ (ललित निबंध संग्रह) ‘नीली पत्तियों का शायराना हरारत’ (यात्रा संस्मरण)

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लघु कथाएँ विधा परिचय :

‘लघुकथा’ यह एक गद्य विधा है। कथा तत्त्वों से परिपूर्ण किंतु आकार से लघुता यह उसकी विशेषता है। अत्यंत कम शब्दों में जीवन की पीड़ा, संवेदना, आनंद की गहराई को प्रकट करने की क्षमता लघुकथा में होती है। कोई भी छोटी घटना, प्रसंग, परिस्थिति का आधार लेकर लघुकथा लिखी जाती है। हिंदी साहित्य में डॉ. कमल किशोर गोयनका, डॉ. सतीश दुबे, संतोष सुपेकर, कमल चोपड़ा आदि को प्रमुख लघुकथाकार के रूप में पहचाना जाता है।

लघु कथाएँ विषय प्रवेश :
(अ) उषा की दीपावली : ‘उषा की दीपावली’ यह एक मर्मस्पर्शी (touching) लघुकथा है। अनाज की बरबादी पर बालमन की संवेदनशील प्रतिक्रिया का सुंदर चित्रण है। एक ओर शादी-ब्याह में थालियों में जरूरत से ज्यादा खाना लेकर उसे जूठा छोड़ने वाले श्रीमान लोग तो दूसरी ओर एक वक्त की रूखी-सूखी रोटी के लिए भी तरसने वाले लोग, इस सामाजिक विरोधाभास (paradox) का चित्रण इस लघुकथा में है।

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(आ) ‘मुस्कुराती चोट’ : ‘मुस्कुराती चोट’ इस दूसरी लघुकथा में गरीबी के कारण इच्छा होकर भी पढ़ाई जारी न रख पानेवाला एक छोटा लड़का ‘बबलू’ की उथल-पुथल भरी जिंदगी है। बबलू की पढ़ाई की अदम्य (indomitable) इच्छा, उसकी बाधाएँ, छोटी-छोटी चोटें और अंत में मुस्कुराहट फैलानेवाली सुखद बात पाठकों को लुभाती है। दोनों लघुकथाएँ ‘आशावाद’ को जगाती है।

लघु कथाएँ महावरा :

टस से मस न होना – बिल्कुल प्रभाव न पड़ना, कुछ परिणाम न होना।

लघु कथाएँ सारांश :

(अ) उषा की दीपावली : दीपावली का त्योहार : दीपावली का त्योहार था। नरक-चौदस के दिन लोगों ने कंपाउंड के मुंडेर पर आटे के दीप जलाए थे। सुबह तक वे दीप बुझ गए थे।

बबन की गरीबी : सुबह बबन सफाई के लिए आया था, जो एक गरीब इन्सान था। बुझे दीप उठाकर कूड़े में फेंकने के बजाय वह जेब में रख रहा था। दस साल की उषा ने यह दृश्य देखा। उसे पूछने पर पता चला कि बबन वे आटे के दीपक सेंककर खाना चाहता है।

उषा की संवेदना : उषा की आँखों के सामने वह दृश्य घूमने लगा, जो उसने अनेक बार देखा था। अमीर लोग शादी-ब्याह में ढेर सारा खाना प्लेटों में लेकर बचा-खुचा फेंक देते हैं। उषा की आँखें भर आईं। घर में जाकर उसने दीपावली के मौके पर बनाए हुए पकवान लाकर बबन को दे दिए जिसकी वजह से बबन की आँखों में खुशी के हजारों दीप जगमगा उठे। उषा की दीपावली भी इससे खुशहाल हो गई।

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(आ) मुस्कुराती चोट : ‘बबलू की गरीबी’ – इस लघुकथा का बबलू, गरीब परिवार का लड़का है। माँ चौका-बर्तन करके कुछ पैसे कमाती है। पिता जी बीमार है। माँ का हाथ बँटाने के लिए बबलू घर-घर जाकर रद्दी इकट्ठा करके रद्दी वाले को बेचता है। बबलू के पास किताबें खरीदने के लिए पैसे न होने से उसका स्कूल छूट गया था।

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अविश्वास की चोट : एक दिन वह एक घर में रद्दी लेने गया था। उस रददी में किताबें थीं। घर मालकिन की बेटी वे किताबें बबलू को पढ़ने के लिए मुफ्त में देना चाहती थी। परंतु घर मालकिन का बबलू पर भरोसा नहीं था। वह किताबें बेचकर चैन करेगा ऐसा उसे शक था। बबलू ने रद्दी में से किताबें अलग रखवा दीं। रद्दी वाले को किताबों के पैसे खर्च करने की झूठ बात बताकर उससे डाँट सुनकर भी चुप रहा।

पछतावा : बबलू किताबें लेकर वापस आ रहा था। मालकिन ने उसे देखा तो अपने अपशब्दों पर उसे पछतावा हुआ। उसे पता चला कि बबलू पढ़ने की अदम्य इच्छा रखता है। बबलू की आगे की सारी पढ़ाई का खर्चा उठाने का उसने निश्चय किया। सुखद अंत वाली यह कहानी आशावादी है।

लघु कथाएँ शब्दार्थ :

  • सैलाब = बाढ़ (Flood),
  • देहरी = दहलीज (threshold),
  • तरबतर = भीगा हुआ, गीला (wet),
  • लालसा = इच्छा (desire),
  • मुंडेर = दीवार का ऊपरी भाग जो छत के चारों ओर कुछ उठा होता है। (parapet),
  • झल्लाना = परेशान होना (irritated)
  • देहरी = दहलीज
  • तरबतर = गीला, भीगा
  • कृशकाय = दुबला-पतला शरीर
  • बेरहमी = निर्दयता, दयाहीनता

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Class 11 Hindi Chapter 1 Prerna Question Answer Maharashtra Board

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Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 11th Digest Chapter 1 प्रेरणा Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Yuvakbharati 11th Digest Chapter 1 प्रेरणा Questions And Answers

11th Hindi Digest Chapter 1 प्रेरणा Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

आकलन

1. सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

प्रश्न अ.
कारण लिखिए –

(a) माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है –
उत्तर :
माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है क्योंकि उसकी ममता आँसुओं के रूप में फूट पड़ती है।

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(b) बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है –
उत्तर :
बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है क्योंकि माता-पिता पर काम पर जाने की मजबूरी है।

(c) कवि की उम्र बढ़ती ही नहीं है –
उत्तर :
कवि की उम्र बढ़ती ही नहीं है क्योंकि उसने अपनी आँखों में स्वयं को एक बालक के रूप में पाया।

प्रश्न आ.
लिखिए –

(a)
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उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 प्रेरणा 2

काव्य सौंदर्य

2.

प्रश्न अ.
ममत्व का भाव प्रकट करने वाली कोई भी एक त्रिवेणी ढूँढ़कर उसका अर्थ लिखिए।
उत्तर :
‘माँ मेरी बे-वजह ही रोती है
फोन पर जब भी बात होती है
फोन रखने पर मैं भी रोता हूँ।’

प्रस्तुत त्रिवेणी में ममत्व का भाव प्रकट हुआ है। जब कभी कवि अपनी माँ को फोन करता है तब पुत्र की आवाज सुनकर माँ की ममता रो पड़ती है। कवि भले ही इसे बे-वजह रोना कहता है, परंतु सच्चाई तो यही है कि कवि भी फोन रखने के बाद रोता है क्योंकि माता और पुत्र दोनों एक-दूसरे के स्नेह के लिए तरसते हैं और उनका एक-दूसरे के प्रति स्नेह आँसुओं के रूप में आँखों से बहने लगता है।

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प्रश्न आ.
निम्न पंक्तियों में से प्रतीकात्मक पंक्ति छाँटकर उसे स्पष्ट कीजिए –
(a) चलते-चलते जो कभी गिर जाओ
(b) रात की कोख ही से सुबह जनम लेती है
(c) अपनी आँखों में जब भी देखा है
उत्तर :
‘रात की कोख से सुबह जनम लेती है’ यह पंक्ति प्रतीकात्मक (symbolic) पंक्ति है। यहाँ रात दुख एवं अँधेरे का प्रतीक है और सुबह सुख एवं उजाले का प्रतीक है। सुख और दुख का आना-जाना दिन और रात के समान है। दोनों स्थायी रूप से जीवन में कभी नहीं रहते। जैसे रात के बाद दिन का आना निश्चित है वैसे ही दुख के बाद सुख का आना भी निश्चित है। अत: दुखसुख दोनों का सहर्ष (readily) स्वागत करते हुए जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।

अभिव्यक्ति

3.

प्रश्न अ.
पालनाघर की आवश्यकता पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
आज कामकाजी महिलाओं को घर से बाहर जाना पड़ता है और यह समय की माँग भी है कि पति-पत्नी दोनों अपने परिवार नैया की पतवार सँभालें। ऐसी स्थिति में इनके छोटे बच्चों को परेशानी होती है। कभी-कभी इसका परिणाम इनके कार्य पर भी पड़ता है। ऐसे में कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए पालनाघर की सुविधा आवश्यक है। पालनाघर में बच्चों को घर जैसी देखरेख और सुरक्षा मिलती है।

अगर पालनाघर में बच्चे को घर जैसा माहौल मिलता हो तो महिलाएँ निश्चित होकर आत्मनिर्भर बनने के लिए कदम उठा पाती हैं। भारत की आधी आबादी महिलाओं की है। अत: महिलाएँ अगर श्रम में योगदान दें तो भारत का विकास तेजी से होगा। पालनाघर की सुविधा मुहैया कराने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास पर इसका असर अवश्य दिखाई देगा। उन्हें बच्चों की देखभाल करने के लिए काम छोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

घरेलु आमदनी में भी इजाफा (increase) होगा। परिणामत: बच्चों की सेहत और शिक्षा में भी सुधार होगा। संक्षेप में महिलाओं का काम करना महत्त्वपूर्ण है ताकि उन्हें अलग पहचान मिले और इसके लिए पालनाघर की सुविधा अगर उनके कार्य-स्थल के आस-पास हो तो सोने पे सुहागा हो सकता है।

प्रश्न आ.
नौकरीपेशा अभिभावकों के बच्चों के पालन की समस्या पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
आजकल माता-पिता दोनों का नौकरी करना बहुत ही आम बात है। ऐसे में उनके बच्चों के पालन की समस्या उभर आती है। बच्चों की तरफ पूरा-पूरा ध्यान दे पाना उनके लिए मुश्किल होता है। नौकरी और बच्चों का लालन-पालन दोनों में संतुलन बनाना कठिन हो जाता है।

बच्चों की परवरिश उनके लिए एक समस्या बन जाती है। वास्तव में कामकाजी माता-पिता के पास अक्सर समय की कमी होती है। समय का उचित नियोजन करके इस समस्या से निजात (escape) पाया जा सकता है। अपने छोटे-छोटे कार्यों में बच्चों को सम्मिलित कर लेने से बच्चों को भी अहमियत मिल जाती है और बच्चे जिम्मेदार भी बन जाते हैं। घर का समय बच्चों को देकर उन्हें खुश रखा जा सकता है।

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उन्हें अच्छी आदतें सिखाने का समय मिल जाता है। माता-पिता के जीवन में बच्चे महत्त्वपूर्ण हैं इस बात का एहसास दिलाया जा सकता है। अक्सर कामकाजी माता-पिता के बच्चों के मन में यह भावना पनपती (flourish) रहती है कि माता-पिता के लिए काम ही महत्त्वपूर्ण है और वे बच्चों से प्यार नहीं करते। कई बार दफ्तर की परेशानियाँ घर तक ले आते हैं और अपना क्रोध वे बच्चों पर निकाल देते हैं।

ऐसे में डर के कारण बच्चे अभिभावकों से दूर हो जाते हैं। इस स्थिति से बचने की कोशिश अभिभावक अवश्य करें। बच्चों की बातें चाव से सुनना, दफ्तर की बातें उन्हें बताना, साथ में भोजन करना, छुट्टी के दिन घूमने ले जाना जैसी छोटी-छोटी बातें भी कामकाजी अभिभावक और बच्चों का रिश्ता मजबूत करती हैं। इस प्रकार समस्या हैं तो उसके उपाय भी है जिन पर अवश्य अमल करना चाहिए।

रसास्वादन

4. आधुनिक जीवन शैली के कारण निर्मित समस्याओं से जूझने की प्रेरणा इन त्रिवेणियों से मिलती है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(i) शीर्षक : प्रेरणा
(ii) रचनाकार : त्रिपुरारि
(iii) केंद्रीय कल्पना : अर्थ प्रधान एवं अतिव्यस्त आधुनिक जीवन शैली अपनाने के कारण आज मनुष्य न चाहते हुए भी अकेला पड़ गया है। तनाव में जी रहा है। मानसिक असंतुलन, चिंता, उदासी, सूनापन आदि से चारों ओर से घिरा है। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में आगे निकलने की होड़ लगी हैं और उसके रिश्ते पीछे छूट रहे हैं। जिंदगी की आपाधापी में जुटे माता-पिता के बच्चों को स्नेह भी टुकड़ों में मिलता है।

जीवन की इन समस्याओं को उजागर करते हुए त्रिपुरारि जी ने अपनी त्रिवेणियों में माँ के ममत्व और पिता की गरिमा को भी व्यक्त किया है। जीवन में आगे निकलने की होड़ में चोट खाकर गिरने पर भी सँभलकर फिर से चलने की, आगे बढ़ने की सलाह दी है।

(iv) रस-अलंकार : तीन पंक्तियों के मुक्त छंद में इस कविता की त्रिवेणियाँ लिखी हुई हैं।

(v) प्रतीक विधान : जीवन के प्रति सकारात्मकता का विधान है – पेड़ में बीज और बीज में पेड़ छुपा है। यहाँ बीज हमारी भावनाओं का प्रतीक है और उसे आँसुओं के जल से सींचकर खुशियों का वृक्ष फलता फूलता है।

(vi) कल्पना : खुद के भीतर छिपे बालक को जीवित रखने की कल्पना हमें तनाव, कुंठा से मुक्ति देगी।

(vii) पंसद की पंक्तियाँ तथा प्रभाव :
‘चाहे कितनी ही मुश्किलें आएँ
छोड़ना मत उम्मीद का दामन
नाउम्मीदी तो मौत है प्यारे।’
यह त्रिवेणी मुझे पसंद है क्योंकि सचमुच कठिनाइयों से घबराकर निराश व्यक्ति जीते जी मर जाता है। हर अंधेरी काली रात के बाद सुबह उजाला लेकर अवश्य आता है। ठीक इसी तरह दुख के बाद सुख का आना निश्चित है इस उम्मीद के साथ जीना चाहिए। यही जीवन के प्रति सकारात्मकता है।

(viii) कविता पसंद आने के कारण : सामयिक स्थितियाँ, रिश्ते और जीवन के प्रति सकारात्मकता कविता का मुख्य विषय है जो प्रेरणादायी है। त्रिपुरारि जी की ये त्रिवेणियाँ हमें जीने की कला सिखाती है, इसीलिए मुझे कविता पसंद है।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान

5. जानकारी दीजिए:

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प्रश्न अ.
त्रिवेणी’ काव्य प्रकार की विशेषताएँ –
(a) ……………………………………………..
(b) ……………………………………………..
उत्तर :
(a) तीन पंक्तियों का मुक्त छंद है।
(b) मात्र तीन पंक्तियों में कल्पना और यथार्थ (reality) की अभिव्यक्ति (expression) होती है।

प्रश्न आ.
त्रिपुरारि जी की अन्य रचनाएँ –
(a) ……………………………………………..
(b) ……………………………………………..
उत्तर :
(a) नींद की नदी (कविता संग्रह)
(b) नॉर्थ कैंपस (कहानी संग्रह)

रस

काव्यशास्त्र में आचार्यों ने रस को काव्य की आत्मा माना है। विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी (संचारी) भाव और स्थायी भाव रस के अंग हैं और इन अंगों अर्थात तत्त्वों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।

साहित्यशास्त्र में नौ प्रकार के रस माने गए हैं। कालांतर में अन्य दो रसों को सम्मिलित किया गया है।

रस  स्थायी भाव
(१) शृंगार  प्रेम
(७) भयानक  भय
(२) शांत  शांति
(८) बीभत्स  घृणा
(३) करुण  शोक
(९) अद्भुत  आश्चर्य
(४) हास्य  हास
(१०) वात्सल्य  ममत्व
(५) वीर  उत्साह
(११) भक्ति  भक्ति
(६) रौद्र  क्रोध

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करुण रस :
किसी प्रियजन या इष्ट के कष्ट, शोक, दुख, मृत्युजनित प्रसंग के कारण अथवा किसी प्रकार की अनिष्ट आशंका के फलस्वरूप हृदय में पीड़ा या क्षोभ का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ करुण रस की अभिव्यंजना होती है।
उदा. –
(१) वह आता –
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।
पेट – पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
– मैथिलीशरण गुप्त

(२) अबला जीवन हाय ! तुम्हारी यही कहानी,
आँचल में है दूध और आँखों में पानी।
चल रहा लकुटिया टेक
मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को,
मुँह फटी झोली फैलाता।
– सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Yuvakbharati Hindi 11th Textbook Solutions Chapter 1 प्रेरणा Additional Important Questions and Answers

कृतिपत्रिका

(अ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

पद्यांश : माँ मेरी बे-वजह ………………………………………… टुकड़ों में मिले हैं माँ-बाप (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 1)

प्रश्न 1.
कारण लिखिए :

(i) माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है –
उत्तर :
माँ, मेरी आवाज सुनकर रोती है क्योंकि उसकी ममता आँसुओं के रूप में फूट पड़ती है।

(ii) बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है –
उत्तर :
बच्चों को माता-पिता का प्यार टुकड़ों में मिलता है क्योंकि माता-पिता पर काम पर जाने की मजबूरी है।

प्रश्न 2.
पर्यायवाची शब्द लिखिए :
उत्तर :
(i) माँ = …………………………. , ………………………….
उत्तर :
जननी, माता, धात्री

(ii) रात = …………………………. , ………………………….
उत्तर :
रजनी, निशा, यामिनी

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प्रश्न 3.
पद्यांश की द्वितीय त्रिवेणी का भावार्थ लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश कवि त्रिपुरारि जी लिखित त्रिवेणी संग्रह ‘साँस के सिक्के’ से लिया गया है। इस त्रिवेणी में पिता की गरिमा व्यक्त करते हुए कवि कह रहे हैं कि पिता को कठोर हृदय का समझने की भूल हम सब करते हैं। परंतु सच्चाई यही है कि वह ऊपर से जितने सख्त नजर आते हैं भीतर से उतने ही कोमल होते हैं।

जब संतान को चोट लगती है तो पिता का कोमल हृदय भी तड़प उठता है। हर पिता में इस तरह कोई माँ भी छुपी होती है अर्थात पिता भी अपनी संतान से उतना ही प्यार करता है, जितना कि एक माँ। दोनों के स्नेह में कोई तुलना नहीं होनी चाहिए।

(आ) निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

पद्यांश : चाहे कितना भी हो घनघोर अंधेरा ……………………………………………… जहाँ पर भी कदम रखोगे। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 2)

प्रश्न 1.
परिणाम लिखिए :

(i) अँधेरा होने पर भी आस रखने का परिणाम
उत्तर :
अँधेरा होने पर भी आस रखने से किसी दिन उजाला अवश्य होता है।

(i) एक ही दीप से आगाज-ए-सफर कर लेने का परिणाम –
उत्तर :
एक ही दीप से आगाज-ए-सफर कर लेने से जहाँ भी कदम रखते हैं वहाँ रोशनी हो जाती है।

प्रश्न 2.
पद्यांश से विलोम शब्द की जोड़ियाँ ढूँढ़कर लिखिए :
उत्तर :
(i) …………………………… x ……………………………
अंधेरा x उजाला x …….

(ii) …………………………… x ……………………………
पास x दूर

प्रश्न 3.
पद्यांश की किसी एक त्रिवेणी का काव्य सौंदर्य लिखिए :
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश ‘प्रेरणा’ कविता से लिया गया है। कवि त्रिपुरारि जी लिखित साँस के सिक्के ‘त्रिवेणी संग्रह’ में ये त्रिवेणियाँ संकलित (consalidated) हैं। दिए गए पद्यांश की द्वितीय त्रिवेणी में वीर रस की निर्मिति (build up) हुई है। प्राप्त परिस्थितियों में भी उत्साह के साथ आगे बढ़ने की कोशिश यहाँ दिखाई देती है। अपनी आयु के कुछ पल उधार लेकर ही सही हसरत के बीज बोने का साहस करके सपनों को साकार करने की बात वीरतापूर्ण है। निराशा के बादलों के बीच आशा का संचार इस त्रिवेणी की विशेषता है।

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(इ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

पद्यांश : अपनी आँखों में जब भी …………………………………………….. नाउम्मीदी तो मौत है प्यारे। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. 2)

प्रश्न 1.
उचित जोड़ियाँ मिलाइए :
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‘अ’ ‘आ’
(1) …………………………… ……………………………
(2) …………………………… ……………………………
(3) …………………………… ……………………………
(4) …………………………… ……………………………

उत्तर :

‘अ’  ‘आ’
(1) सच्चा  ज्ञानी
(2) पेड़  बीज
(3) ना उम्मीदी  मौत
(4) एक शय  आँसू-खुशियाँ

प्रश्न 2.
पद्यांश की प्रथम त्रिवेणी का भावार्थ लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश त्रिवेणी विधा में लिखी कविता ‘प्रेरणा’ से लिया गया है। कवि त्रिपुरारि जी ने पद्यांश की प्रथम त्रिवेणी में हमारे अंदर छिपे बालक को जीवित रखने की सलाह दी है। उन्होंने जब भी स्वयं की आँखों में देखा स्वयं को एक बच्चे की तरह ही पाया और उन्हें लगा कि दुनिया उन्हें बड़ा बनाकर दुनियादारी निभाने पर मजबूर करती है।

इसकी वजह से जीवन की अबोधता (innocence), मासूमियत नष्ट हो जाती है और मन अशांत हो जाता है। इससे छुटकारा पाना है तो कभी अपने भीतर छिपे बालक को मरने नहीं देना चाहिए।

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स्वाध्याय
आकलन : 1. सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

(अ) कारण लिखिए –

प्रश्न 1.
घनघोर अँधेरे में भी उजाले की आस रखनी चाहिए –
उत्तर :
घनघोर अँधेरे में भी उजाले की आस रखनी चाहिए क्योंकि रात की कोख से ही सुबह का जन्म होता है।

प्रश्न 2.
उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए –
उत्तर :
उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि नाउम्मीदी मौत के समान है।

(आ) लिखिए –
उत्तर:
काव्य सौंदर्य :

व्याकरण

रस :

काव्यशास्त्र (poetics) में आचार्यों ने रस को काव्य की आत्मा माना है। विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी (संचारी) भाव और स्थायी भाव रस के अंग हैं और इन अंगों अर्थात तत्त्वों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। साहित्यशास्त्र में नौ प्रकार के रस माने गए हैं। कालांतर (afterward) में अन्य दो रसों को सम्मिलित किया गया है।

रस  स्थायी भाव
(1) शृंगार  प्रेम
(2) शांत  शांति
(3) करुण  शोक
(4) हास्य  हास
(5) वीर  उत्साह
(6) रौद्र  क्रोध
(7) भयानक  भय
(8) बीभत्स  घृणा
(9) अद्भुत  आश्चर्य
(10) वात्सल्य  ममत्व
(11) भक्ति  भक्ति

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1. शृंगार रस :
इसे रसराज कहा गया है। यह संयोग और वियोग इन दो भागों में विभाजित है। जब किसी काव्य में नायक नायिका के प्रेम, मिलने-बिछड़ने आदि का वर्णन होता है तो वह शृंगार रस कहलाता है।

उदा.
(i) रे मन आज परीक्षा मेरी।
सब अपना सौभाग्य मनावें।
दरस परस नि:श्रेयस पावें।
उद्धारक (redeemer) चाहें तो आवें।
यही रहे यह चेरी। – मैथिलीशरण गुप्त

(ii) बतरस लालच लाल की मुरली धरि लुकाय।
सौंह करै, भौहनि हँस, दैन कहै, नटि जाय।
– बिहारी

2. शांत रस :
जब कभी काव्य को पढ़कर मन में असीम शांति का एवं दुनिया से मोह खत्म होने का भाव उत्पन्न हो तो शांत रस की अनुभूति होती है। ज्ञान की प्राप्ति और संसार से वैराग्य होने पर शांत रस की उत्पत्ति होती है।

उदा.
(i) जब मैं था हरि नाहिं अब हरि है मैं नाहिं
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं
– कबीर

(ii) देखी मैंने आज जरा!
हो जावेगी क्या ऐसी मेरी यशोधरा?
हाय! मिलेगा मिट्टी में वह वर्ण सुवर्ण खरा?
सूख जावेगा मेरा उपवन जो है आज हरा?
– मैथिलीशरण गुप्त

3. करुण रस :
किसी प्रियजन या इष्ट के कष्ट, शोक, दुख, मृत्युजनित प्रसंग के कारण अथवा किसी प्रकार की अनिष्ट (undesired) आशंका के फलस्वरूप हृदय में पीड़ा या क्षोभ का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ करुण रस की अभिव्यंजना (expression) होती है।

उदा.
(i) वह आता –
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।
पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
चल रहा लकुटिया टेक
मुट्ठी भर दाने को, भूख मिटाने को, मुँह फटी झोली फैलाता।
– सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

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(ii) अबला जीवन हाय ! तुम्हारी यही कहानी,
आँचल में है दूध और आँखों में पानी।
– मैथिलीशरण गुप्त

4. हास्य रस :
जब किसी काव्य को पढ़कर हँसी आ जाती है तब हास्य रस की उत्पत्ति होती है। सभी रसों में यह रस सबसे अधिक सुखात्मक रस है।
उदा.
(i) हाथी जैसा देह, गेंडे जैसी चाल।
तरबूजे सी खोपड़ी, खरबूजे से गाल।।

(ii) बुरे समय को देखकर गंजे तू क्यों रोय।
किसी भी हालत में तेरा बाल न बाँका होय।।

5. वीर रस :
शत्रु को मिटाने, दीन-दुखियों का उद्धार करने, धर्म की स्थापना, उद्धार करने आदि में जो मन में उत्साह उमड़ता है वही वीर रस की उत्पत्ति होती है।

उदा.
(i) सच है, विपत्ति जब आती है।
कायर को ही दहलाती (horror) है,
सूरमा नहीं विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
कर शपथ विघ्नों को गले लगाते हैं,
काँटों में राह बनाते हैं।
– रामधारी सिंह दिनकर

(ii) तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ।
– हरिवंशराय बच्चन

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6. रौद्र रस :
अपमान, निंदा आदि से मन में क्रोध उत्पन्न होता है तब रौद्र रस की उत्पत्ति होती है।

उदा.
(i) अस कहि रघुपति चाप बढ़ावा,
यह मत लछिमन के मन भावा।
संधानेहु प्रभु बिसिख कराला,
उठि ऊदधि उर अंतर ज्वाला।।
– तुलसीदास

(ii) उस काल मारे क्रोध के तन काँपने उसका लगा
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।
मैथिलीशरण गुप्त

7. भयानक रस :
भयोत्पादक वस्तुओं को देखने या सुनने से अथवा शत्रु आदि के अनिष्ठ आचरण से भयानक रस की
निष्पत्ति होती है। इसका स्थायी भाव भय है। अंतर्गत कंपन, पसीना छूटना, मुँह सूखना, चिंता आदि भाव भय के कारण उत्पन्न होते हैं।

उदा.
(i) अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलते कंकाल
कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार।
– सुमित्रानंदन पंत

(ii) एक ओर अजगर हिं लखि, एक ओर मृगराय
विकल बटोही बीच ही, पर्यो मूरछा खाय।

8. बीभत्स रस :
वीभत्स यानि घृणा इसका स्थायी भाव है। घृणित वस्तुओं घृणित चीजों या घृणित व्यक्तियों को देखकर, उनके संबंध में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा या ग्लानी बीभत्स रस को पुष्टि करती है।

उदा.
(i) आँखें निकाल उड़ जाते, क्षण भर उड़कर आ जाते
शव जीभ खींचकर कौए, चुभला-चभलाकर खाते
भोजन में श्वान लगे मुरदे थे भू पर लेटे
खा माँस चाट लेते थे, चटनी सैम बहते बहते बेटे
– श्यामनारायण पांडेय

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(ii) विष्टा पूय रुधिर कच हाडा
बरबई कबहु उपल बहु छाडा।
– तुलसीदास

9. अद्भुत रस :
इसका स्थायी भाव आश्चर्य है। जब व्यक्ति के मन में विचित्र अथवा आश्चर्यजनक वस्तुओं को देखकर विस्मय उत्पन्न होता है तो अद्भुत रस की निष्पत्ति होती है।

उदा.
(i) देख यशोदा शिशु के मुख में सकल विश्व की माया
क्षणभर को वह बनी अचेतन (unconscious), हिल न सकी कोमल काया।
– सूरदास

(ii) पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार तब तक चेतक था उस पार।।
– श्यामनारायण पांडेय

10. वात्सल्य रस :
माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरु का शिष्य के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति से वात्सल्य रस की निष्पत्ति होती है। ममत्व, अनुराग, स्नेह इस रस का स्थायी भाव है।
उदा.
(i) वह मेरी गोदी की शोभा, सुख सुहाग की है लाली,
शाही शान भिखारिन की है मनोकामना मतवाली।
– सुभद्राकुमारी चौहान

(ii) सुत मुख देखि जसोदा फूली।
हरषति देख दूध की द॑तिया,
प्रेम मगन तन की सुधि भूली।
– सूरदास

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11. भक्ति रस :
इस रस में ईश्वर के प्रति अनुराग का, प्रेम का वर्णन होता है। श्रद्धा, स्मृति, मति, धृति, उत्साह आदि भाव इसमें समाविष्ट होते हैं। भक्ति भाव के मूल में दास्य, साख्य, वात्सल्य, माधुर्य भक्ति भाव समाविष्ट हैं।

उदा.
(i) अँसुवन जल सिंची-सिंची प्रेम-बेलि बोई
मीरा की लगन लागी, होनी हो सो होई
– मीरा

(ii) कहत कबीर सुनहु रे लाई
हरि बिन राखनहार न कोई।
– कबीर

प्रेरणा Summary in Hindi

प्रेरणा कवि परिचय :

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एरौत (बिहार) (5 दिसंबर, 1988) में जन्मे त्रिपुरारि कुमार शर्मा जी एक कवि, लेखक, संपादक (editor) और अनुवादक (translater) हैं। शिक्षा, रचनात्मक लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य करते हुए ‘त्रिवेणी’ काव्य (poetry) रचना में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। नींद की नदी’, ‘नॉर्थ कैंपस, साँस के सिक्के आदि आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कविताएँ, कहानियाँ, लेख आदि प्रकाशित हुए हैं।

प्रेरणा कविता का परिचय :

प्रस्तुत रचना ‘त्रिवेणी’ विधा में लिखी कविता है। ‘त्रिवेणी’ एक तीन पंक्तियों वाली कविता है जिसे प्रसिद्ध गीतकार और कवि गुलजार साहब ने विकसित (develop) किया है। शब्दों की किफायत और एहसासों की अमीरी इस विधा की विशेषता है। एक चलचित्र की तरह इसकी पहली दो पंक्तियाँ कहानी को गढ़ती है और तीसरी पंक्ति कहानी की परिपूर्णता को अभिव्यक्त करते हुए क्लाइमेक्स व्यक्त कराती है। प्रस्तुत त्रिवेणियों में त्रिपुरारि जी ने कहीं माँ की ममता, पिता का गौरव तो कहीं जीवन की कठोर सच्चाई को व्यक्त करते हुए मुश्किलों का डटकर सामना करने की सलाह दी है और उम्मीद का दामन पकड़कर आगे बढ़ने का मशवरा दिया है।

प्रेरणा कविता का भावार्थ (purport) :

जीवन की आपाधापी में माता-पुत्र बिछड़ जाते हैं। दोनों ही एक-दूसरे के स्नेह के लिए तरसते हैं। पुत्र माँ से फोन पर बात करता है तब पुत्र की आवाज सुनकर ही माँ की ममता आँसुओं के रूप में फूट पड़ती है। माँ को रोते देखकर पुत्र को लगता है माँ बे-वजह ही रोती है। परंतु जब फोन पर बातचीत पूरी हो जाती है और पुत्र फोन रखता है तो वह भी अपनी भावनाएँ रोक नहीं पाता और रोता है।

पिता माँ की अपेक्षा कठोर हृदय के होते हैं ऐसा लोग कहते हैं, परंतु उनका हृदय भी कोमल ही होता है। जब संतान को चोट लगती है तो वह तड़प उठते हैं। यह इस बात का सबूत है कि पिता में भी कोई माँ छुपी होती है अर्थात स्नेह की बात आती है तो माँ के ममत्व (mother’s love) को अधिक अहमियत दी जाती है परंतु पिता भी अपनी संतान से उतना ही स्नेह करते हैं जितना कि एक माँ।

Maharashtra Board Class 11 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 प्रेरणा

जीवन की जरूरतें पूरी करने हेतु माता-पिता दोनों काम पर जाते हैं। कभी-कभी शिफ्ट में ड्युटी करने वाले अभिभावक (guardian) अपनी ड्युटी इस तरह से लेने की कोशिश करते कि दोनों में से एक बच्चे के साथ रहे। ऐसे में पिता महीनों तक दिन की शिफ्ट जाता है और माता महीनों तक रात की शिफ्ट जाती है। बच्चे को दोनों का स्नेह ऐसी स्थिति में टुकड़ों में ही मिलता है। नन्हा बच्चा जब माँ का स्नेह पाता है तब पिता नहीं होते और पिता का स्नेह पाता है तब माँ काम पर गई होती है।

उगते सूरज का स्वागत सभी करते हैं, परंतु डूबते सूरज के प्रति उदासीनता दिखलाते हैं। कवि का मशवरा है कि डूबते सूरज को भी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि, डूबना-उगना तो केवल नजरों का धोखा है। सूरज तो आसमान में ही है। हमारी धरती ही सूरज की परिक्रमा करते हुए हमें सूरज के डूबने-उगने का आभास कराती है अर्थात सच्चाई से मुख न मोड़कर हमें हर स्थिति में तटस्थ रहना चाहिए।

जीवन पथ पर चलते-चलते कभी-कभी गिर भी गए तो खुद को सँभालकर आगे बढ़ना चाहिए। गिरने पर जो चोट लगती है वह हमें जीवन का नया पाठ सिखाती है क्योंकि ठोकर खाकर ही हमें जीने की कला का सबक मिलता है। अनुभव से बड़ा कोई शिक्षक नहीं। बस, जीवन चलने का नाम है, आगे बढ़ने का नाम है इसे याद रखना होगा।

जीवन पथ पर आगे बढ़ते समय कभी मार्ग में घनघोर अँधकार छाया हुआ मिले लेकिन तब भी हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। किसी दिन उजाला अवश्य होगा यही आशा रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि रात की कोख से ही सुबह जन्म लेती है। इस त्रिवेणी में कवि हमें निराशा के अंधकार से आशा के उजाले की ओर ले जाना चाहते हैं और इस सत्य से अवगत (aware) कराते हैं कि जीवन में दुःख के बाद सुख अवश्य आता है। सुख-दुख, दिन-रात की तरह आते-जाते रहते हैं इसीलिए दुख की स्थिति में निराश नहीं होना चाहिए।

अपनी आयु के कुछ पल उधार लेकर मैंने हसरत के बीज बोए क्योंकि विचारों की जमीन मेरे पास पहले से थी अर्थात (means) हमारे सपनों को पूरा करने के लिए आयु कम ही पड़ती है। परंतु सपने अवश्य देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने की कोशिश भी करनी चाहिए।

मंजिल बहुत दूर है यह सोचकर हमें यात्रा रोकनी नहीं चाहिए बल्कि छोटे से दीपक की धुंधली सी रोशनी में भी यात्रा आरंभ कर लेनी चाहिए क्योंकि हिम्मत से आगे बढ़ने वाले यात्री के कदम जहाँ भी पड़ेंगे वहाँ रोशनी होगी और मंजिल का मार्ग प्रशस्त (wide) होगा। कवि हमें सकारात्मक सोच से जीवन में आगे बढ़ने का मशवरा दे रहे हैं।

Maharashtra Board Class 11 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 प्रेरणा

मैंने जब कभी अपनी आँखों में देखा स्वयं को एक बालक की तरह अबोध, (innocent) निष्पाप पाया। इससे तो यही सिद्ध होता है कि उम्र बढ़ती ही नहीं। वास्तव में उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे हम मासुमियत खो देते हैं और दुनियादारी निभाते-निभाते हमारे भीतर छिपे बालक को बड़ा बुजुर्ग, अनुभवी बनाकर जीवन की सुंदरता का गला घोट देते हैं। मन को अशांत, तनाव पूर्ण, कुंठा (frustration) ग्रस्त बना देते हैं। इससे मुक्ति पाना है तो खुद के भीतर छिपे बालक को जीवित रखना चाहिए।

आँसू और खुशियाँ एक ही वस्तु के दो नाम हैं। जैसे पेड़ में बीज छुपा है और बीज में पेड़ वैसे ही आँसू में खुशी और खुशी में आँसू छिपे होते हैं। जो इस बात को समझ गया वही सच्चा ज्ञानी है क्योंकि आँसू और खुशियाँ जीवन के दो अंग हैं और ये जीवन में आते-जाते रहते हैं। हर खुशी में आँसू छिपे हैं जो हमारी भावनाओं के प्रतीक (symbol) हैं और आँसुओं के जल से सींचकर खुशियों का वृक्ष फलता-फूलता है।

जीवन में कितनी ही कठिनाइयाँ क्यों न आए हमें उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि नाउम्मीदी तो मृत्यु के समान है अर्थात् कठिनाइयों से घबराकर निराशा का दामन थामने वाला जीते जी मर जाता है। जैसे हर अँधेरी रात के बाद सुबह अवश्य आती है वैसे ही दुख के बाद सुख का आना निश्चित है। इस सकारात्मकता (positivity) के साथ जीना ही जिंदगी है। सुख-दुख की स्थिति में स्थिर रहना ही मनुष्य की सच्ची पहचान है इस तथ्य को कभी नहीं भूलना चाहिए।

प्रेरणा शब्दार्थ:

  • घनघोर = घना
  • हसरत = चाह, इच्छा
  • आगाज-ए-सफर = यात्रा का आरंभ
  • शय = वस्तु, चीज
  • सख्त = कठोर (strict),
  • नाजुक = कोमल (sensitive),
  • महज = केवल, मात्र (just),
  • चोट = आघात, प्रहार, घाव (hurt),
  • घनघोर = घना, डरावना (dense),
  • आस = आशा, भरोसा (hope),
  • कोख = पेट, गर्भाशय (womb),
  • लम्हा = पल, क्षण (moment),
  • हसरत = चाह, इच्छा (desire),
  • खयाल = स्मृति, विचार (idea),
  • आगाज-ए-सफर = यात्रा का आरंभ (set off),
  • शय = वस्तु, चीज (thing), Maharashtra Board Class 11 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 प्रेरणा
  • दामन = आँचल, पल्लु (fringe),
  • जरा = थोड़ा सा (little bit)

Hindi Yuvakbharati 11th Digest Maharashtra Board

Vyakaran Shabd Bhed Class 11 Marathi Bhag 5.5 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 5.5 Exercise Question Answer Maharashtra Board

व्याकरण शब्दभेद 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 5.5 व्याकरण शब्दभेद Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
शब्दांतील उच्चार साधर्म्यावरून कृती करा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 1
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 11

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद

प्रश्न 2.
शब्दलेखनातील सूक्ष्म बदल.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 2
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 12

प्रश्न 3.
संदर्भानुसार शब्दप्रयोजन.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 3
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 13

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद

प्रश्न 4.
अक्षर फरकाने अर्थबदल.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 4
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 14

11th Marathi Book Answers Chapter 5.5 व्याकरण शब्दभेद Additional Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
शब्दांतील उच्चार साधर्म्यानुसार कृती करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 15

प्रश्न 2.
शब्दलेखनातील सूक्ष्म बदलानुसार कृती करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 16

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद

प्रश्न 3.
संदर्भानुसार शब्दप्रयोजन कृती करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 17

प्रश्न 4.
अक्षरफरकाने होणारा अर्थबदल कृती करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 18

शब्दभेद प्रास्ताविक:

दैनदिन जीवनात आपण भाषेतील अनेकविध शब्दांचा वापर अगदी सहजतेने करत असतो. चांगले बोलणे व चांगले लिहिणे यांसाठी शब्दज्ञानाची आवश्यकता असते. शब्दज्ञान, त्या शब्दाचा विशिष्ट अर्थ, सूक्ष्म अर्थच्छटा, शब्दांचे योग्य लेखन, शब्दांच्या अचूक संदर्भाचे ज्ञान आवश्यक आहे. प्रभावी अभिव्यक्तीसाठी शब्दज्ञानाची आवश्यकता आहे.

शब्दांच्या योग्य ज्ञानाअभावी आपले बोलणे व लिहिणे प्रभावशाली होत नाही. म्हणूनच शब्दभेद समजून घेणे आवश्यक आहे. चांगले बोलणे हे चांगले ऐकण्यातून आकारास येते. चांगले ऐकणे म्हणजे श्रवण, समजून बोलणे म्हणजे भाषण, आकलन करून ग्रहण करणे म्हणजे वाचन आणि या तिहींचा समन्वय म्हणजे लेखन.

शब्दभेदाचे आकलन जर नीट झाले नाही, तर अर्थभेद, अर्थहानी आणि अर्थविसंगती होते. म्हणूनच शब्दभेद समजून घेणे आवश्यक आहे.

1. शब्दांचे उच्चार साधर्म्य

शब्दाच्या उच्चारातून व लेखनातून जेव्हा सूक्ष्म बदल जाणवतात व अर्थाच्या दृष्टीने खूप फरक निदर्शनास येतात तेव्हा तिथे शब्दभेद असतो.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 5

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद

भाषेतील दोन शब्दांच्या उच्चारात काहीसे साधर्म्य (सारखेपणा) असते. परंतु संदर्भ साधर्म्य अजिबात नसते. दोन शब्दांचा उच्चार वरवर जरी सारखा वाटत असला तरी योग्य संदर्भ पूर्णपणे जाणून न घेतल्यामुळे शब्दांचा योग्य प्रकारे वापर केला जात नाही.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 6

यांसारखे अन्य काही शब्द

  • कळ – वेदना, भांडणाचे मूळ
  • घाट – डोंगरातील वळणाचा रस्ता, नदीवरील पायऱ्यांचे बांधकाम
  • तट – किनारा, किल्ल्याची संरक्षक भिंत.
  • दर्प – वास, गर्व
  • पात्र – लायक, नाटकातील भूमिका, भांडे
  • वार – दिवस, धारदार शस्त्राचा घाव, लांबी मोजण्याचे एकक.
  • सुमन – फूल, निर्मळ मन

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद

2. शब्दलेखनातील सूक्ष्म बदल

भाषा विषयात शुद्धलेखनाचे महत्त्व अनन्यसाधारण आहे. शब्दलेखन करताना हस्व – दीर्घ, अनुस्वार, काना, मात्रा यांकडे जाणीवपूर्वक लक्ष दयावे. शब्दलेखनात चूक झाली तर बराचसा चुकीचा अर्थ प्राप्त होतो.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 7

यांसारखे अन्य काही शब्द

  • अध्ययन – शिकारी, अध्यापन – शिकविणे
  • खत – पिकाला घालायचे खत, खंत – काळजी
  • गृह – घर, ग्रह – सूर्यमालेतील ग्रह.
  • पिक – कोकिळ पक्षी, पीक – शेतात उत्पन्न आलेले धान्य
  • मास – महिना, मांस – प्राण्यांचे मांस वदन – तोंड, वंदन – नमस्कार
  • शिव – शंकर, शीव – सीमा
  • सन – वर्ष, सण – उत्सव
  • सुर – देव, सूर – स्वर
  • तण – गवत, तन – शरीर

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 व्याकरण शब्दभेद

3. शब्दांच्या संदर्भाची अचूक जाण

बोलताना वा लेखन करताना कोणता शब्द कोठे वापरावा याबद्दल काही संकेत असतात. या संकेतांना विशिष्ट अशा संदर्भाची पार्श्वभूमी असते. संदर्भ आणि संकेत यांत अंतर पडल्यास अर्थातही फरक पडतो. बोलण्या, लिहिण्यातली ही अर्थविसंगती मनाला खटकते.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 8

4. शब्दांच्या लेखनात एखादया अक्षराचा फरक

दोन शब्दांच्या एखादया अक्षराचा जरी फरक असला तरी अर्थात खूप मोठा फरक पडतो. हा फरक समजण्यासाठी शब्दांच्या अर्थाची योग्य जाण असणे आवश्यक आहे.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 9
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.5 शब्दभेद 10

11th Marathi Textbook भाग-५ व्याकरण

Vyakaran Kal Class 11 Marathi Bhag 5.4 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.4 व्याकरण काळ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 5.4 Exercise Question Answer Maharashtra Board

व्याकरण काळ 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 5.4 व्याकरण काळ Textbook Questions and Answers

कृती

1. खालील वाक्यांतील रीती काळाचा प्रकार ओळखा.

प्रश्न 1.
नजमा उत्तम कविता लिहीत असे. …………………………………………
उत्तर :
रीती भूतकाळ

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 2.
मी लोकांना मदत करत राहीन. …………………………………………
उत्तर :
रीती भविष्यकाळ

प्रश्न 3.
अभिजित सतार उत्तम वाजवत असतो. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 4.
शिक्षक जे सांगतात, ते विदयार्थी लक्षपूर्वक ऐकत असतात. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 5.
एका गावात एक उत्तम चित्रकार राहत होता. …………………………………………
उत्तर :
रीती भूतकाळ

प्रश्न 6.
राहल प्रार्थनेला नेहमीच उशिरा येत असतो. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 7.
माधवराव नेहमीच सुगम संगीत ऐकत असत. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 8.
दादासाहेब दररोज फिरायला जात असतात. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 9.
तो सदोदित आजारी पडत असतो. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

2. खालील वाक्यांतील काळ ओळखून त्यापुढे दिलेल्या कंसातील सूचनेनुसार वाक्यबदल करा.

प्रश्न 1.
मी तबला वाजवतो. (रीती भूतकाळ करा.)
उत्तर :
मी तबला वाजवत असे.

प्रश्न 2.
मुले खो-खो खेळत होती. (पूर्ण भूतकाळ करा.)
उत्तर :
मुले खो-खो खेळली होती.

प्रश्न 3.
रस्त्याच्या डाव्या बाजूने चालावे. (साधा वर्तमानकाळ करा.)
उत्तर :
रस्त्याच्या डाव्या बाजूने चल.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 4.
तो विदयार्थी अडखळत वाचत असतो. (साधा भूतकाळ करा.)
उत्तर :
तो विदयार्थी अडखळत वाचत होता

प्रश्न 5.
वर्गातील विद्यार्थी लक्षपूर्वक ऐकत होते. (साधा भविष्यकाळ करा.)
उत्तर :
वर्गातील विदयार्थी लक्षपूर्वक ऐकतील / वर्गातील विदयार्थी लक्षपूर्वक ऐकत असतील.

11th Marathi Book Answers Chapter 5.4 व्याकरण काळ Additional Important Questions and Answers

1. खालील कृती सोडवा व काळाचे नाव लिहा. (कंसातील क्रियापदांचे योग्य रूप वापरा)

प्रश्न 1.
या वर्षी मी काश्मीर सहलीला ……………………………. (जाणे)
उत्तर :
या वर्षी मी काश्मीर सहलीला जाईन. [भविष्यकाळ]

प्रश्न 2.
काल झालेल्या निबंध स्पर्धेत मी उत्तम निबंध ……………………………. (लिहिणे)
उत्तर :
काल झालेल्या निबंध स्पर्धेत मी उत्तम निबंध लिहिला. [भूतकाळ]

प्रश्न 3.
हे बघ आनंद, उदया तू सहलीला असल्यामुळे लवकर ……………………………. (जाणे, उठणे)
उत्तर :
हे बघ आनंद, उदया तू सहलीला असल्यामुळे लवकर ऊठ. [वर्तमानकाळ]

प्रश्न 4.
परवा सुरेशने सुरेल गीत ……………………………. (गाणे)
उत्तर :
परवा सुरेशने सुरेल गीत गायले. [भूतकाळ]

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 5.
काल बाळूने बागेतील आंबे शेजाऱ्यांना ……………………………. (देणे)
उत्तर :
काल बाळूने बागेतील आंबे शेजाऱ्यांना दिले. [भूतकाळ]

प्रश्न 6.
वकिलाने आरोपीला आपली बाजू मांडू ……………………………. (देणे)
उत्तर :
वकिलाने आरोपीला आपली बाजू मांडू दिली. [भूतकाळ]

प्रश्न 7.
भविष्यात मी कधीतरी विमानातून प्रवास ……………………………. (करणे)
उत्तर :
भविष्यात मी कधीतरी विमानातून प्रवास करेन. [भविष्यकाळ]

प्रश्न 8.
हसणे हा मनुष्यस्वभाव ……………………………. असणे.
उत्तर :
हसणे हा मनुष्यस्वभाव आहे. [वर्तमानकाळ]

प्रश्न 9.
काल रात्री सारखा विजांचा गडगडाट ……………………………. (होणे)
उत्तर :
काल रात्री सारखा विजांचा गडगडाट होता. [भूतकाळ]

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 10.
उदया मी ही मालिका पुन्हा ……………………………. (बघणे)
उत्तर :
उदया मी ही मालिका पुन्हा बघेन. [भविष्यकाळ]

सरावासाठी कृती :

1. खालील वाक्यांतील काळ ओळखा.

प्रश्न 1.
(a) दहा वर्षांपूर्वी मी या शाळेत रुजू झाले.
(b) आणखी वर्षानंतर मामू या शाळेतून सेवानिवृत्त होणार!
(c) माझ्या हाती पुस्तक देताना त्यानं त्यावरून मायेनं हात फिरविला.
(d) या मंडळींनी गेल्या पंचवीस वर्षांत साऱ्या जगाचं एका ‘मॉल’ मध्ये रूपांतर केलं.
(e) या वयातही ठणठणीत प्रकृती आहे माझी.
उत्तर :
(a) भूतकाल
(b) भविष्यत्काल
(c) वर्तमानकाल
(d) भूतकाल
(e) वर्तमानकाल

2. कंसातील सूचनेनुसार वाक्यबदल करा.

प्रश्न 1.
ही शाळा सरकारी आहे. (रीती भविष्यकाळ करा)
उत्तर :
ही शाळा सरकारी असेल.

प्रश्न 2.
सोपानदेवांची आणि माझी वीस-बावीस वर्षांची मैत्री आहे. (पूर्ण भूतकाळ करा)
उत्तर :
सोपानदेवांची आणि माझी वीस-बावीस वर्षांची मैत्री होती.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 3.
प्रास्ताविकानंतर कार्यक्रमाला सुरुवात झाली. (पूर्ण भविष्यकाळ करा)
उत्तर :
प्रास्ताविकानंतर कार्यक्रमाला सुरुवात होईल.

प्रश्न 4.
एक फळ मात्र मी रोज नेमानं खात असतो. (रीती भूतकाळ करा)
उत्तर :
एक फळ मात्र मी रोज नेमानं खात असे.

प्रश्न 5.
सभागृहात टाचणी पडेल अशी शांतता पसरली. (काळ ओळखा)
उत्तर :
वर्तमानकाळ

3. खालील वाक्यातील रीती काळाचा प्रकार ओळखा.

प्रश्न 1.
a. विदयार्थी मामूचा हात खेचून त्याला आग्रहाने चहाला नेतात.
b. टी.व्ही.ची गाडी रोजच्यासारखी चारला येणार होती.
c. उषा वहिनी नेहमीप्रमाणे पर्स घ्यायला आत जातील.
d. ही आजची भीषण स्थिती असे.
e. पुस्तकांचा अविट सुगंध मनाच्या गाभाऱ्यात दरवळत जाईल.
उत्तर :
a. रीती वर्तमानकाळ
b. रीती भूतकाळ
c. रीती भविष्यकाळ
d. रीती भूतकाळ
e. रीती भविष्यकाळ

काळ प्रास्ताविकः

वाक्याचा अर्थ पूर्ण करणाऱ्या क्रियावाचक शब्दास क्रियापद असे म्हणतात. उदा. विदयार्थ्यांनी नियमित अभ्यास करावा. यातील ‘करावा’ या शब्दातून अभ्यास करण्याची क्रिया दर्शविली जाते. वाक्यात दिलेल्या क्रियापदावरून जसा क्रियेचा बोध होतो. तसाच ती क्रिया कोणत्या वेळी घडत आहे याचा बोध होतो. क्रिया कोणत्या वेळी घडत आहे याचा जो बोध होतो त्यास काळ असे म्हणतात.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

उदा.

  • माधुरी गीत गाते. (गाण्याची क्रिया सुरू आहे – आता घडत आहे)
  • माधुरीने गीत गाईले/गायले (गाण्याची क्रिया पूर्वी घडत आहे – पूर्वी कधी तरी)
  • माधुरी गीत गाईल. (गाण्याची क्रिया पुढे घडणार आहे – भविष्यात कधी तरी)

यावरून काळाचे तीन मुख्य प्रकार पडतात.

  • वर्तमानकाळ – (क्रिया आता घडली आहे.)
  • भूतकाळ – (क्रिया पूर्वी घडली आहे.)
  • भविष्यकाळ – (क्रिया पुढे कधी तरी घडेल)

काळ व काळाचे प्रकार :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 काळ 1

‘वाचणे’ ही क्रिया काळाच्या सर्व प्रकारांत खालीलप्रमाणे दर्शविली जाते.

वर्तमानकाळ भूतकाळ भविष्यकाळ
साधा/सामान्य
उदा. मी पुस्तक वाचतो.
(क्रिया सुरू / घडत आहे.)
साधा/सामान्य
उदा. मी पुस्तक वाचले.
(क्रिया पूर्वी घडली आहे.)
साधा/सामान्य
उदा. मी पुस्तक वाचेन.
(क्रिया पुढे घडणार आहे.)
अपूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचत आहे.
(वाचन संपलेले नाही. क्रिया सुरू आहे, परंतु अपूर्ण आहे.)
अपूर्ण
उदा.
मी पुस्तक वाचत होतो.
अपूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचत असेन.
पूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचले आहे.
(पुस्तक वाचन पूर्ण झाले आहे.)
पूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचले होते.
पूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचले असेन.
रीती
उदा. मी पुस्तक वाचत असतो.
(पुस्तक वाचन क्रिया नेहमी घडत असते.)
रीती
उदा. मी पुस्तक वाचत असे.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ
रीती
उदा. मी पुस्तक वाचत जाईन.

लक्षात ठेवा :

  • वाक्यात क्रियापद एकटेच असेल तर तो साधा काळ असतो.
  • क्रिया सुरू आहे म्हणजेच संपलेली नाही तर अपूर्ण आहे हे समजते तो अपूर्ण काळ असतो.
  • क्रिया पूर्ण झाली याचा बोध होतो तेव्हा तो पूर्ण काळ असतो.
  • एखादी क्रिया नेहमी वा सतत घडत असेल तर तो रीती काळ असतो.

रीती काळ :

क्रियापदाच्या स्वरूपावरून त्या विशिष्ट क्रियेची रीत, पद्धत, सवय, वहिवाट समजते तेव्हा तो रीती काळ असतो.
उदा.

  • धावपटू धावण्याचा सतत सराव करत असतात. (रीती वर्तमानकाळ) (धावण्याच्या कृतीचा सराव – रीत)
  • माझ्या एकत्र कुटुंबात आजी उत्तम संस्कार करत असे. (रीती भूतकाळ) (आजीची उत्तम संस्काराची रीत)

हिरव्या पालेभाज्या आवश्यक असल्यामुळे सर्वच व्यक्ती रोजच्या आहारात त्या खात जातील. (रीती भविष्यकाळ) (हिरव्या पालेभाज्यांची आवश्यकता सर्वांना – खात जातील.)

रीती काळाची वैशिष्ट्ये :

वैशिष्ट्ये उदाहरण
1. रीती काळात सामान्यपणे संयुक्त क्रियापदांचा वापर असतो. 1. सुरेखा गीत गात असते. (वर्तमानकाळ) (नेहमी गीत गाण्याची सवय) गात असते संयुक्त क्रियापद
2. संयुक्त क्रियापदावरून क्रियेचे सतत चालणारे रूप समजते. क्रियेची पुनरावृत्ती दिसते. 2. तो वर्गात नेहमी बोलत असे. (भूतकाळ) (पूर्वी त्याला असणारी बोलण्याची सवय)
3. क्रियापदाच्या स्वरूपावरून सतत चालणारी क्रिया कोणत्या काळात घडत आहे हे समजते. Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ 3. क्रीडांगणावर मुले खेळत असतील. (भविष्यकाळ) (मुलांची खेळण्याची सवय)
4. धातूला प्रत्यय लावून क्रियापद तयार होते. उदा. खात, बोलत, करत इ. 4. समीर पुस्तक वाचत असे. (भूतकाळ) (वाच पासून वाचत हे धातूसाधित रूप असे – क्रियावाचक शब्द वाचत असे संयुक्त क्रियापद

11th Marathi Textbook भाग-५ व्याकरण

Vyakaran Vakya Sanshleshan Class 11 Marathi Bhag 5.3 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 5.3 Exercise Question Answer Maharashtra Board

व्याकरण वाक्यसंश्लेषण 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्यांचे संयक्त, मिश्रव केवल वाक्य असे वर्गीकरण करा.

a. मी माणसे मोजून पाहिली; पण ती आठच भरली.
उत्तरः
संयुक्त वाक्य (‘पण’ न्यूनत्वबोधक प्रधानत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

b. सोनाली चहा किंवा कॉफी घेते.
उत्तरः
संयुक्त वाक्य (‘किंवा’ विकल्पबोधक प्रधानत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

c. आम्ही मुंबईला पोहोचलो आणि खूप अडचणी निर्माण झाल्या.
उत्तरः
संयुक्त वाक्य (‘आणि’ समुच्चयबोधक प्रधानत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

d. पाऊस पडला, तर शेतकरी वर्ग आनंदी होईल.
उत्तरः
मिश्र वाक्य (‘तर’ या ठिकाणी ‘जर’ अध्याहृत धरावा) संकेतबोधक गौणत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय

e. मुले बागेत खेळली. ती खूप दमली.
उत्तरः
केवल वाक्य (दोन स्वतंत्र केवल वाक्ये – मुले उद्देश्य. खेळली – विधेय. ती उद्देश्य, दमली – विधेय

f. सर म्हणाले, की प्रामाणिक प्रयत्नांनी यश मिळते.
उत्तरः
मिश्र वाक्य (‘की’ स्वरूपबोधक गोणत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

प्रश्न 2.
सूचनेनुसार वाक्यसंश्लेषण करा.

a. तो उत्तीर्ण झाला. सर्वांना आनंद झाला. (केवल वाक्य करा.)
उत्तरः
तो उत्तीर्ण झाल्यामुळे सर्वांना आनंद झाला.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

b. श्याम घरी आला. वादळाला सुरुवात झाली. (मिश्र वाक्य करा.)
उत्तरः
श्याम घरी आला तेव्हा वादळाला सुरुवात झाली.

c. आम्हाला शिकवायला नवीन शिक्षक आले. आमच्या अडचणी दूर झाल्यात. (संयुक्त वाक्य करा.)
उत्तरः
आम्हांला शिकवायला नवीन शिक्षक आले आणि आमच्या अडचणी दूर झाल्या.

d. माझे वडील म्हणाले. मला तुझे यश बघून तुझा अभिमान वाटला. (मिश्र वाक्य करा.)
उत्तरः
माझे वडील म्हणाले, की तुझे यश बघून मला तुझा खूप अभिमान वाटला.

e. हे आधुनिक लोकशाहीचे युग आहे. जाहिरातीला महत्त्व आहे. समाजाने जाहिरातीचा योग्य अर्थ समजून घ्यावा. (केवल वाक्य करा.)
उत्तरः
आधुनिक लोकशाही युगात जाहिरातींना महत्त्व असल्यामुळे समाजाने जाहिरातींचा योग्य अर्थ समजून घ्यावा.

11th Marathi Book Answers Chapter 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण Additional Important Questions and Answers

सरावासाठी कृती

प्रश्न 1.
सूचनेनुसार वाक्यसंश्लेषण करा.

(a) प्रार्थना संपते, ‘जनगणमन’ ची इशारत मिळते. (केवल वाक्य करा)
(b) पुस्तकं आपल्याला घडवतात; काही वेळा उद्ध्वस्तही करतात. (संयुक्त वाक्य करा)
(c) वाक्य संपलं आणि त्यांचे डोळे लकाकले. (केवल वाक्य करा)
(d) घरातली कामं मला दिसतात. त्यांना दिसत नाहीत. (मिश्र वाक्य करा)
(e) टॉलस्टायला वाचनाची आवड होती. त्याचा वाचनाचा वेग उत्तम होता. (संयुक्त वाक्य करा)
उत्तर :
(a) केवल वाक्य प्रार्थना संपताच ‘जनगणमन’ ची इशारत मिळते.
(b) संयुक्त वाक्य पुस्तकं आपल्याला घडवतात; पण काही वेळा उद्ध्वस्तही करतात.
(c) केवल वाक्य वाक्य संपताच त्यांचे डोळे लकाकले.
(d) मिश्र वाक्य घरातील कामं जशी मला दिसतात, तशी त्यांना दिसत नाहीत.
(e) संयुक्त वाक्य टॉलस्टायला वाचनाची आवड होती आणि त्याचा वाचनाचा वेगही उत्तम होता.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

प्रश्न 2.
खालील वाक्यांचे संयुक्त , मिश्र, केवल वाक्य असे वर्गीकरण करा.
उत्तर :

  • शाळेत तो शिपाई आहे; शाळेबाहेर तो बहुरूपी आहे. – संयुक्त वाक्य
  • जे आवडेल ते खुशाल घेऊन जा. – मिश्र वाक्य
  • एक गोष्ट मात्र खरी की, उत्तम साहित्यकृती आपल्याला जन्मभर भावनिक सोबत करतात. – मिश्र वाक्य
  • त्यांनी गाणी रचली आणि त्यातली थोडीशी कुणीतरी टिपून ठेवली. – संयुक्त वाक्य
  • पोट कितीही भरले तरी ते शेवटी रिकामे होणारच – मिश्र वाक्य

वाक्यसंश्लेषण प्रास्ताविक:

एक पूर्ण विचार व्यक्त करणाऱ्या शब्दसमूहास वाक्य असे म्हणतात. वाक्य म्हटले की, त्यात कोणाविषयी तरी बोलणे असते आणि ज्याच्याविषयी बोलायचे आहे त्याबद्दल काहीतरी सांगितलेले म्हणजे विधान केलेले असते. यामुळेच वाक्याचे दोन भाग पडतात.

उदा. सूर्य रोज पूर्वेला उगवतो.

वरील वाक्य सूर्याबद्दल आहे. ‘सूर्य’ हे वाक्याचे उद्देश्य आहे. सूर्याबद्दल ‘रोज पूर्वेला उगवतो’ हे विधान केलेले आहे.

व्याकरणाच्या भाषेत उद्देश्य म्हणजे कर्ता (सूर्य) व विधेय म्हणजे क्रियापद (उगवणे – उगवतो), वाक्यातील इतर शब्द हे उद्देश्य विस्तार आणि विधेय विस्तार आहेत.

एका वाक्यात किती विधाने असतात यावरून वाक्याचे पुढील प्रकार पडतात.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

वाक्यप्रकार:

वाक्यातील विधानांवरून वाक्यांचे पुढील प्रकार पडतात.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 1
केवल, मिश्र व संयुक्त वाक्य प्रकारांची वैशिष्ट्ये पुढीलप्रमाणे आहेत.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 2
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 3
लक्षात ठेवा :

मिश्र व संयुक्त वाक्यांत काही अव्यये समान असली तरी जोडली जाणारी वाक्ये आणि वाक्यांतील अव्ययांचे अर्थ लक्षात घेऊन वाक्य मिश्र वा संयुक्त आहे हे निश्चित करा.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

वाक्यसंश्लेषण/वाक्यसंकलन :

एकमेकांशी संबंध असलेलली दोन वा अधिक केवल वाक्ये दिली असता त्यांचे एक वाक्य तयार करण्याच्या प्रक्रियेला वाक्यसंश्लेषण असे म्हणतात.

वाक्यसंश्लेषणाचे महत्त्वः

  • वाक्यरचनेवर प्रभुत्व संपादन करण्यासाठी
  • आपल्या मनातील भाव नेमकेपणाने व्यक्त करण्यासाठी
  • सुटी – सुटी वाक्ये विस्कळीतपणे मांडण्याऐवजी ती एकत्रित करून मांडल्यामुळे आपल्या विचारात सुसूत्रता येते. वाक्य आटोपशीर, व्यवस्थित तयार करता येते.
  • उत्तम लेखनकौशल्य आत्मसात करण्यासाठी वाक्यसंकलनाची कला प्रत्येकास अवगत असणे आवश्यक आहे.

वाक्यसंश्लेषणाचे प्रकारः
वाक्य संकलनाच्या वेळी दोन वा अधिक वाक्ये एकत्र करून आपण एक जोडवाक्य तयार करतो. हे जोडवाक्य केवल, मिश्र वा संयुक्त यांपैकी एक असते. म्हणजेच वाक्यसंश्लेषण हे तीन प्रकारचे असते.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 4
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 5

11th Marathi Textbook भाग-५ व्याकरण

Vyakaran Kavya Gun Class 11 Marathi Bhag 5.2 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 5.2 Exercise Question Answer Maharashtra Board

व्याकरण काव्यगुण 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 5.2 व्याकरण काव्यगुण Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
खालील तक् पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 9
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 4

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

प्रश्न 2.
खालील उदाहरणांमधील काव्यगुण ओळखा
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 10
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 5

प्रश्न 3.
वाचा. चौकिती काव्गुण वलहा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 11
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 7

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

11th Marathi Book Answers Chapter 5.2 व्याकरण काव्यगुण Additional Important Questions and Answers

सरावासाठी कृती

प्रश्न 1.
खालील पदयपंक्तीतील काव्यगुण लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 8

काव्यगुण प्रास्ताविकः

मानवी जीवनात शब्दांचे, वाणीच्या व्यापाराचे महत्त्व अनन्यसाधारण आहे. मानवी मनात कोमलतेपासून कठोरतेपर्यंत अनेकविध भाव निर्माण करण्याचे सामर्थ्य शब्दांत असते.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

प्रत्येक व्यक्तीत काही समान तर काही विशेष गुण असतात. व्यक्तीप्रमाणेच सर्जनशील लेखनात काही गुण असतात. अशा या गुणांमुळेच ती वाङमयीन रचना उठावदार व प्रभावी होण्यास मदत होते. प्रसाद, माधुर्य व ओज या काव्यगुणांमुळेच अभिव्यक्ती परिणामकारक होते. पदय असो वा गदय वाचकांच्या अंत:करणाला भिडण्याची शक्ती काव्यगुणांमध्ये असते. काव्यात्मक गुणांमुळे साहित्यभाषेला सौंदर्याचा एक अनोखा साज चढतो.

काव्यगुण:

अभिव्यक्तीस पोषक असे योजलेले शब्द असतील तर काव्याची शोभा वाढते. काव्यरचनेतील अनेक काव्यगुणांपैकी प्रसाद, माधुर्य व ओज हे तीन गुण महत्त्वाचे आहेत.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 1

काव्यगुणातील शब्दांची वैशिष्ट्ये:

  • सोपे, सुटसुटीत व उच्चारण्यास सहजसुलभ असे शब्द
  • शब्दांमधील नादमधुरता – कोमल व मृदु वर्णांच्या योजनेत ते शब्द कानाला मधुर, सुखद व नादमाधुर्यामुळे ते गुणागुणावसे वाटतात.
  • शब्दांमधील गेयता व त्या शब्दांच्या अर्थाचा आंतरिक गोडवा.
  • काव्यपंक्तीतून व्यक्त होणारा भाव.

काव्यगुण असणाऱ्या शब्दांमधून काव्याची शोभा वाढते. ती काव्यरचना श्रवणीय ठरते. रसिकांना त्या पंक्ती, विधाने सहजपणे मुखोद्गत होतात कवितेचे रसग्रहण करताना काव्यगुण सांगणे आवश्यक असते.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

काव्यगुण प्रकार व त्यांची वैशिष्ट्ये:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 2
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 3

11th Marathi Textbook भाग-५ व्याकरण

Vyakaran Shabd Shakti Class 11 Marathi Bhag 5.1 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 5.1 Exercise Question Answer Maharashtra Board

व्याकरण शब्दशक्ती 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
सूचनेनुसार सोडवा.
‘मी वि. स. खांडेकर’ वाचले. या वाक्यातील लक्ष्यार्थ लिहा.
(अ) मी वि. स. खांडेकर यांना पाहिले.
(आ) मी वि. स. खांडेकर यांच्याशी बोललो.
(इ) मी वि. स. खांडेकर यांचे साहित्य वाचले.
उत्तरः
(इ) मी वि. स. खांडेकर यांचे साहित्य वाचले.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

प्रश्न 2.
मूळ शब्दशक्ती …………………………….. आहेत.
(अ) एक
(आ) चार
(इ) तीन
उत्तरः
(इ) तीन

प्रश्न 3.
“निवडणुका आल्या, की कावळ्यांची कावकाव सुरू होते.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) अभिधा
(आ) लक्षणा
(इ) व्यंजना
उत्तरः
(इ) व्यंजना

प्रश्न 4.
‘आपल्याभोवती वावरणाऱ्या कोल्ह्यांपासून दूरच राहावे.’ या वाक्यातील कोल्हा’ या शब्दातून व्यक्त होणारा लक्ष्यार्थ….
(अ) जंगलातील धूर्त प्राणी
(आ) मळ्यातील मका खाणारा
(इ) धूर्त माणसे
उत्तरः
(अ) जंगलातील धूर्त प्राणी

प्रश्न 5.
‘घरावरून मिरवणूक गेली.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) अभिधा
(आ) लक्षणा
(इ) व्यंजना
उत्तरः
(आ) लक्षणा

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

प्रश्न 6.
‘मी एक लांडगा पाहिला.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) व्यंजना
(आ) अभिधा
(इ) लक्षणा
उत्तरः
(आ) अभिधा

प्रश्न 7.
‘समाजातील असले साप ठेचलेच पाहिजेत.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) लक्षणा
(आ) व्यंजना
(इ) अभिधा
उत्तरः
(आ) व्यंजना

प्रश्न 8.
खालील तक्ते पूर्ण करा.

(अ) शब्दशक्ती ओळखा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 1
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 5

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

(आ) शब्दशक्तीनुसार शब्द व वाक्य लिहा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 2
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 6

(इ) शब्दशक्तीनुसार तक्ता पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 3
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 7

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

11th Marathi Book Answers Chapter 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती Additional Important Questions and Answers

सूचनेनुसार कृती करा.

प्रश्न 1.
‘घड्याळाने पाचचे ठोके दिले.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती ओळखा.

पर्याय :
(अ) अभिधा
(आ) व्यंजना
(इ) लक्षणा
उत्तर:
(अ) अभिधा

प्रश्न 2.
आम्ही बाजरी खातो’ या वाक्यातून शब्दशक्तीचा हा अर्थ समजतो.
पर्याय :
(अ) वाच्यार्थ
(आ) लक्ष्यार्थ
(इ) व्यंगार्थ
उत्तर:
(आ) लक्ष्यार्थ

प्रश्न 3.
समाजमान्य अर्थ व्यक्त करणाऱ्या शक्तीस म्हणतात.
पर्याय :
(अ) लक्षणा
(आ) व्यंजना
(इ) अभिधा
उत्तर:
(इ) अभिधा

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

प्रश्न 4.
‘आम्ही सगळे भारतीय आहोत.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती ओळखा.
पर्याय :
(अ) व्यंजना
(आ) लक्षणा
(इ) अभिधा
उत्तर:
(इ) अभिधा

प्रश्न 5.
‘संप म्हणजे सामान्यांचे मरणच!’ या वाक्यातील शब्दशक्ती ओळखा.
पर्याय :
(अ) अभिधा
(आ) लक्षणा
(इ) व्यंजना
उत्तर:
(आ) लक्षणा

शब्दशक्ती प्रास्ताविकः

आपल्या मनातील विचार, भावना, कल्पना आपण भाषेतील शब्दांच्या माध्यमातून इतरांपर्यंत प्रभावीपणे पोहोचवत असतो. समाज जीवनात वावरताना माणसांचे परस्परांमधील व्यवहार भाषेच्या माध्यमातून सुलभपणे चालत असतात. भाषेच्या माध्यमातूनच साहित्याची निर्मिती होत असते. प्रतिभावंत लेखक-लेखिका, कवी-कवयित्रींकडून वैशिष्ट्यपूर्ण असे भाषिक आविष्कार निर्माण होत असतात.

श्रवण, वाचन, भाषण आणि लेखन ही महत्त्वाची भाषिक कौशल्ये आहेत. बोलण्याची तयारी ऐकण्यापासून होत असते. वाचनाने व्यक्तिमत्त्व बहुश्रुत होते. आपल्या बोलण्याला रंग, रूप, गुण, उंची, खोली असली की आपल्या मनातील आशय इतरांपर्यंत नेमकेपणाने आणि प्रभावीपणे पोहोचवता येतो. मनातील अमूर्त विचार शब्दांद्वारेच मूर्त होत असतात. म्हणूनच माऊली म्हणतात त्याप्रमाणे,

“बिंब जरी बचके एवढे। परी प्रकाशाशी त्रिभुवन थोकडे।

शब्दांची व्याप्ती येणे पाडे। अनुभवावी।।” आपले शब्द हे आपल्या समग्र व्यक्तिमत्त्वाचा हुंकार असतो. प्रसंगानुसार शब्दयोजना व आशयानुसार केलेली अभिव्यक्ती श्रोत्यांना व वाचकांना आपल्या कवेत घेते.

शब्दशक्ती

शब्दांच्या अंगी शब्दाच्या मूळ अर्थाव्यतिरिक्त वेगळा असा अर्थ संदर्भाने प्रकट करण्याचे विशिष्ट प्रकारचे सामर्थ्य असते. शब्दांच्या या सामर्थ्यालाच शब्दशक्ती असे म्हणतात.
उदा.

  • मी आज मोठा दगड पाहिला.
  • त्याचे बोलणे म्हणजे काळ्या दगडावरची रेघ.
  • माझ्या मना बन दगड.

पहिल्या वाक्यात ‘दगड’चा अर्थ पाषाण/धोंडा असा आहे. दुसऱ्या वाक्यात काळा दगड चा अर्थ पक्का/कधीही न बदलणारा/ठाम असा आहे. तिसऱ्या वाक्यात दगड चा अर्थ कठोर अंत:करण करणे असा आहे.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

शब्दांच्या अंगची ही शक्ती तीन प्रकारची आहे.

शब्दशक्ती :

  • अभिधा
  • लक्षणा
  • व्यंजना
अभिधा लक्षणा व्यंजना
(१) शब्द वाचल्याबरोबर त्याचा शब्दश: अर्थ समजतो. (१) शब्दाचा मूळ अर्थ उपयोगी पडत नाही म्हणून संदर्भानुसार दुसराच अर्थ घ्यावा लागतो. (१) शब्दाच्या मूळ अर्थाशी सुसंगत असा वेगळाच अर्थ सूचित होतो.
(२) अभिधा शक्तीच्या साहाय्याने प्रकट होणाऱ्या अर्थाला ‘वाच्यार्थ’ म्हणतात. (२) लक्षणा शक्तीच्या साहाय्याने प्रकट होणाऱ्या अर्थास ‘लक्ष्यार्थ’ म्हणतात. (२) व्यंजना शक्तीच्या साहाय्याने प्रकट होणाऱ्या अर्थास ‘व्यंगार्थ’ म्हणतात.
(३) रूढ, समाजमान्य व शब्दकोशात हा अर्थ दिलेला असतो. (३) संदर्भानुसार दुसराच अर्थ घ्यावा लागतो. मूळ अर्थ दुसऱ्या अर्थाला लक्षितो. (३) मूळ अर्थाशी सुसंगत असा वेगळाच अर्थ घ्यावा लागतो.
(४) शब्दाचा मूळ अर्थ (४) शब्दाच्या मूळ अर्थास बहुतेक वेळा बाधा येते. (४) मूळ अर्थाला बाधा न येता दुसराच सुसंगत असा अर्थ.
उदा.
1. काल मला रानात साप दिसला. (साप सर्प / नाग)
2. नानां काल पर्वतीवर गेले. (काल म्हणजे कालच) अभिधा शक्तीत साधा, सरळ अर्थ समजतो.
उदा.
1. घरावरून साप गेला.(घरावरून घरासमोरून, घराजवळून)
2. नाना काल पर्वतीवर गेले. (पर्वतीवर मृत्यू पावले) लक्षणा शक्तीत हे कसे शक्य आहे? म्हणून दुसराच अर्थ घ्यावा लागतो.
उदा.
1. समाजातील असले साप ठेचलेच पाहिजेत. (साप दुष्ट/वाईट/लबाड व्यक्ती)
2. नाना काल पर्वतीवर गेले. (पर्वतीचा डोंगर चढून गेले) व्यंजना शक्तीचा वापर दुसऱ्याला नावे ठेवण्यासाठी केला जातो.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

व्यंगार्थाची गंमत :

व्यंजना या शब्दशक्तीने व्यंगार्थ समजतो.
उदा. सूर्य उगवला – म्हणजेच सूर्योदय झाला. परंतु व्यक्तिगणिक याचा अर्थ वेगवेगळा सूचित होतो.

वाक्य व्यक्ती व्यक्तींच्या दृष्टीने अर्थ
सूर्योदय झाला. घरातील काही व्यक्ती झोपेतून उठण्याची वेळ झाली.
घरातील गृहिणी झाडलोट व सडापाणी करण्याची वेळ झाली.
घरातील आजी – आजोबा प्रातः प्रार्थनेची वेळ झाली.
शाळेत जाणारे विदयार्थी मुला – मुलींची आंघोळीची वेळ झाली.

शब्दशक्तींची गरज :

साहित्यिकांना ललित वाङ्मयात आपल्या जीवनानुभवांचे दर्शन इतरांना प्रभावीपणे घडविण्यासाठी, शब्दांच्या पलिकडचा भाव व्यक्त करण्यासाठी, मूळ भावार्थाशी संलग्न अर्थच्छटांना दर्शविण्यासाठी, काव्यात व्यंगामुळे सूचकता व अधिक परिणामकारकता निर्माण करण्यासाठी शब्दशक्तीच्या माहितीची आवश्यकता आहे.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 4

11th Marathi Textbook भाग-५ व्याकरण

Radio Jockey Class 11 Marathi Bhag 4.5 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 4.5 रेडिओजॉकी Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 4.5 Exercise Question Answer Maharashtra Board

रेडिओजॉकी 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 4.5 रेडिओजॉकी Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
उत्तम रेडिओजॉकी होण्यासाठी तुम्हांला प्राप्त करावी लागणारी भाषिक कौशल्ये लिहा.
उत्तरः
उत्तम रेडिओजॉकी होण्यासाठी तुम्हांला मूलभूत भाषिक कौशल्ये म्हणजे लेखन, वाचन, भाषण-संभाषण, श्रवण कौशल्ये आत्मसात करणे अपेक्षित आहे. रेडिओजॉकी होण्यासाठी तुम्हांला मराठी, हिंदी व इंग्रजी भाषेचे ज्ञान असणे गरजेचे आहे. वाचन चौफेर हवे तसेच रेडिओजॉकी व्यासंगी हवा.

भाषा, साहित्य व संस्कृती यांची त्याला चांगली जाण असावी. त्याची भाषा साधी, सोपी व ओघवती असावी. शब्दफेक, बोलण्यातील सहजता, माधुर्य त्याच्या निवेदनात असावे. उच्चार सुस्पष्ट व निसंदिग्ध असावेत. भाव-भावना यांची जाणीव असावी. मिंग्शिल (मराठी-इंग्लिश), हिंग्लिश (हिंदी-इंग्लिश) तसेच स्थानिक भाषांची सरमिसळ करून आरजे निवेदन करत असतो. भाषा सकारात्मक. श्रोत्यांचे मन प्रसन्न करणारी. मिस्किल अशी असावी.

रेडिओजॉकीला भाषेचे उत्तम ज्ञान असावे. बोलताना शब्दातील भाव भावना यांचे प्रकटीकरण व्हावे. त्याचा अर्थ भाषेतून श्रोत्यांपर्यंत जाणे अपेक्षित आहे. थोडक्यात भाषेची उत्तम जाण व सरावातून, चांगल्या प्रकारे रेडिओजाकीला निवेदन करता येऊ शकते.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी

प्रश्न 2.
‘आरजे-एक संवादी व्यक्तिमत्त्व’ हे स्पष्ट करा.
उत्तरः
आरजे ए.एम, एफ.एम. व विविध कार्यक्रमांतून श्रोत्यांशी संवाद साधत असतो. त्याला बोलण्याची व गप्पा मारण्याची आवड असते. उत्कृष्ट संवाद कौशल्य व विनोदाची जाण असणारे व्यक्तिमत्त्व असते. स्टुडिओत वेगवेगळ्या क्षेत्रांतील मान्यवरांच्या मुलाखतीतून त्यांना बोलते करण्याचे कौशल्य आरजेकडे असते.

वेगवेगळ्या कार्यक्रमाच्या निमित्ताने फोनद्वारे श्रोत्यांशी संवाद साधत असतो. श्रोत्यांशी संवाद साधताना तो अनेकदा अनौपचारिक असतो. ‘डायल इन’ या कार्यक्रमाच्या थेट प्रसारणात आटोपशीर आणि अधिकाधिक श्रोत्यांना सामावून घेणारा असतो. श्रोत्यांशी संवाद साधताना मार्दवपणा व हजरजबाबीपणा असतो. आरजे समोरच्याला अधिकाधिक बोलण्याची संधी देत असतो. आरजेचे बोलणे संवादी, गतिमान व सहजस्फूर्त असते.

सलग दोन-तीन तासांच्या निवेदनात आरजे विविध गाणी, किस्से सादर करता-करता श्रोत्यांशी मनमोकळा संवाद साधत असतो. वेगवेगळ्या क्लुप्त्या वापरून फोनवरून श्रोत्यांशी संभाषण व चर्चा करत असतो. विविध स्पर्धांचे आयोजन, कोड्यांची रचना व त्यांची उत्तरे, विशेष दिनाची चर्चा यातून आरजेचे संवादी व्यक्तिमत्त्व समोर येते. अनेकदा थेट प्रक्षेपित कार्यक्रमांतून प्रवाही संवाद होत असतो. थोडक्यात आरजे हे संवादी व्यक्तिमत्त्व आहे. श्रोते व मान्यवरांशी होणाऱ्या विविधांगी संवादातून त्याचे व्यक्तिमत्त्व आकारास येते.

प्रश्न 3.
रेडिओजॉकी या क्षेत्रातील व्यवसायाच्या संधी वाढण्याची तुम्हाला जाणवणारी कारणे लिहा.
उत्तरः
आज प्रादेशिक, राष्ट्रीय आणि आंतरराष्ट्रीय रेडिओ स्टेशन्सच्या स्थापनेमुळे रेडिओ चॅनल हा उदयोग वाढत आहे. ऑल इंडिया रेडिओ, ए.एम., एफ.एम., जाहिरात एजन्सी, विशिष्ट प्रसंग, विशिष्ट कार्यक्रम, विविध मनोरंजन कंपन्या अशा विविध क्षेत्रांत व्यवसायाच्या अनेक संधी रेडिओजॉकीला उपलब्ध होत आहेत. रेडिओ स्टेशन्सच्या वाढलेल्या संख्येमुळे या क्षेत्रातील व्यवसायाच्या संधी वाढत आहेत.

त्याचबरोबर विविध मनोरंजन कंपन्यांद्वारे विविध कार्यक्रमांचे आयोजन केले जाते. वेगवेगळ्या जाहिरात एजन्सीत रेडिओजॉकीला नोकरीची संधी मिळते. आजकाल विविध प्रकारची उत्पादने, सेवा यांच्या जाहिरातीचे युग आहे. प्रत्येक क्षेत्रात जाहिरात होत असते. यातून रेडिओजॉकीला संधी मिळते.

विशिष्ट प्रसंगांत, आयोजित कार्यक्रमात तसेच ऑल इंडिया रेडिओत अनेक कार्यक्रमांतून रेडिओजॉकीला संधी उपलब्ध होत आहे. थोडक्यात आजच्या युगात वेगवेगळ्या क्षेत्रात होणाऱ्या विविध कार्यक्रमांमुळे रेडिओजॉकीला अनेक नोकरीच्या संधी उपलब्ध होत आहेत.

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प्रश्न 4.
रेडिओजॉकीच्या कामाचे स्वरूप स्पष्ट करा.
उत्तरः
रेडिओजॉकी अर्थात आरजेचे विविध कार्यक्रम प्रसारित होत असतात. ए.एम., एफ.एम. या खाजगी रेडिओवरून श्रोत्यांची आवड, छंद ओळखून विविध स्वरूपाचे कार्यक्रम प्रसारित होत असतात. विविध वयोगट, महिला, विविध क्षेत्र यांनुसार कार्यक्रमाचे स्वरूप व संहिता बदलत असते. एकाच प्रकारचे कार्यक्रम प्रसारीत झाले तर ते श्रोत्यांना कंटाळवाणे व निरस वाटू लागतात. म्हणून त्यात वैविध्य आणून रंजकता वाढवली जाते.

रेडिओजॉकीचे कार्यक्रम महिलांची आवड-निवड, छंद यांचा विचार करून महिलांसाठी, तसेच युवकांची आवड, ध्येये, स्वप्न डोळ्यांसमोर ठेवन कार्यक्रम तयार केले जातात. शालेय कार्यक्रमाचे आयोजन केले जाते. शेती व त्याच्याशी निगडित मलाखती. मार्गदर्शन. सल्ला यांचा कार्यक्रमात अंतर्भाव असतो.

भारतीय संस्कृतीत सण-उत्सवाला खूप महत्त्व आहे. या सण-उत्सवाच्या निमित्ताने त्यांची माहिती, परंपरा व संस्कृतीचे दर्शन घडवणारे कार्यक्रम आरजे सादर करत असतो. श्रोत्यांच्या आवडीचा आणि रंजनाचा विषय म्हणजे संगीत. त्याचे अनेक कार्यक्रम तो सादर करतो. विशेषतः सलग दोन-तीन तास बॉलीवुड हिट गाणी वाजवून श्रोत्यांचे मनोरंजन करत असतो. वेगवेगळ्या विषयांवर परिसंवादाचे आयोजन केले जाते. त्यातून उद्बोधन होत असते.

श्रोत्यांच्या पत्रांना उत्तरे हा एक कार्यक्रम असतो. वेगवेगळ्या कार्यक्रमांच्या निमित्ताने विचारलेल्या प्रश्नांना उत्तरे दिली जातात तसेच, श्रोत्यांची विविध कार्यक्रमांच्या संदर्भात दिलेली प्रतिक्रिया पत्राद्वारे व्यक्त होत असते. कधी कधी अचानक घडलेल्या घटनांवर कार्यक्रम असतो. उदा.

नैसर्गिक आपत्ती, दुर्घटना इत्यादी. विज्ञानविषयक घडामोडी, त्यावर भाष्य करणाऱ्या बातम्या प्रसारित होतात. प्रासंगिक घडामोडी, चालू घडामोडी यांवर तसेच विविध सामाजिक, राजकीय विषयांवर श्रोत्यांशी संवाद साधणारे कार्यक्रम असतात. वेगवेगळ्या महत्त्वाच्या व्यक्तींच्या मुलाखतींद्वारे विविध विषयांवर प्रकाश टाकला जातो. थोडक्यात आरजेचे कार्यक्रम हे एकसूरी नसून त्यात विविधता असते.

प्रश्न 5.
‘उत्तम भाषिक कौशल्ये संपादन केलेली व्यक्ती उत्तम रेडिओजॉकी होऊ शकते.’, हे विधान स्पष्ट करा.
उत्तरः
लेखन, वाचन, श्रवण, भाषण-संभाषण ही भाषेची कौशल्ये आहेत. कोणत्याही भाषेवर प्रभुत्व मिळवण्यासाठी ही कौशल्ये आत्मसात करणे गरजेचे असते. रेडिओजोंकी हा संवादी निवेदक, सत्रसंचालक असतो. उत्तम रेडिओजॉकी होण्यासाठी भाषिक कौशल्ये आत्मसात करावीच लागतात. भाषेची जाण असणे.

भाषाशैली, अरोह-अवरोह, उच्चारातील स्पष्टता, निसंदिग्धता असावी लागते. उत्तम भाषिक कौशल्य वाचन आणि व्यासंगाने प्राप्त होत असते. रेडिओजॉकीचे वाचन खूप असावे. राजकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक, क्रीडा, मनोरंजन अशा विविध विषयांची जाण व अभ्यास असावा. रेडिओजॉकीची भाषा साधी, सोपी, सरळ, ओघवती असावी तसेच त्यात मार्दव व माधुर्य असावे.

शब्दफेक, वाक्यांची रचना, सलगता, बोलण्याचा वेग, आत्मविश्वास, आवाजातील भारदस्तपणा या सर्व गोष्टी भाषेची कौशल्ये आत्मसात केल्यानंतरच येऊ शकतात. मराठी, हिंदी, इंग्रजी भाषेचा अभ्यास, त्यातील बारकावे, भाव-भावना यांच्या अभ्यासाने भाषेवर प्रभुत्व प्राप्त होत असते व त्यातूनच भाषिक कौशल्यांचा विकास होताना दिसतो. हे सर्व गुण रेडिओजॉकीत असावेत. त्यातूनच तो उत्तम रेडिओजॉकी होऊ शकतो.

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रेडिओजॉकीला सलग दोन-तीन तास कार्यक्रमाचे सादरीकरण करावे लागते. वेगवेगळ्या विषयांची, प्रसंगांची, घडामोडींची माहिती देणे, श्रोत्यांशी अनौपचारिक-औपचारिक संवाद साधणे, मुलाखती, श्रोत्यांशी खेळ खेळणे या सर्व कार्यक्रमात रेडिओजॉकीची भाषा अतिशय ओघवती, प्रवाही, मिश्किल, सहजस्फूर्त अशी असावी. याचाच अर्थ असा की उत्तम भाषिक कौशल्ये आत्मसात केलेली व्यक्ती उत्तम रेडिओजॉकी होऊ शकते या विधानात सत्यता आहे.

प्रश्न 6.
‘उत्कृष्ट संभाषण कौशल्य आणि बहुआयामी व्यक्तिमत्त्व हे यशस्वी रेडिओजॉकीचे महत्त्वाचे पैलू आहेत.’ स्पष्ट करा.
उत्तरः
ए.एम., एफ.एम. रेडिओवरून सलग दोन-तीन तास श्रोत्यांशी मनमोकळा संवाद साधत विविध गाण्यांची मधून-मधून पेरणी करत श्रोत्यांच्या हृदयापर्यंत भिडणारे व्यक्तिमत्त्व म्हणजे रेडिओजॉकी. रेडिओजॉकीकडे उत्कृष्ट संभाषण कौशल्य असावे. तो श्रोत्यांशी वेगवेगळ्या विषयांवर संवाद साधत असतो.

वेगवेगळी कोडी, खेळ इ. माध्यमातून श्रोत्यांना बोलते करत असतो. वेगवेगळ्या व्यक्तींच्या मुलाखतीतून विषय सविस्तरपणे श्रोत्यांसमोर मांडण्याचे कौशल्य रेडिओजॉकीत असते. प्रासंगिक घडामोडी, वाढदिवस, दिनविशेष अशा निमित्ताने मान्यवरांशी संवाद, मुलाखती, अनौपचारिक चर्चा यांतून त्याचे सुसंवादी व्यक्तिमत्त्व श्रोत्यांसमोर येत असते. समयसूचकता, हजरजबाबीपणा, मिश्किलपणा, विनोदीवृत्तीने कार्यक्रमाची रंजकता तो वाढवत असतो.

रेडिओजॉकीचे व्यक्तिमत्त्व हे बहुआयामी असावे. त्याचे व्यक्तिमत्त्व प्रसन्न, आत्मविश्वासू असते. मातृभाषेबरोबरच हिंदी, इंग्रजी भाषेचे ज्ञान त्याला असावे. राजकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक, सांगीतिक, क्रीडा, अर्थ अशा विविध विषयांची सखोल माहिती रेडिओजॉकीला असावी. चालू घडामोडी, समाजाचा एखादया गोष्टीकडे पाहण्याचा दृष्टिकोन, फॅशन, क्रीडा, बॉलीवुड, युवक-युवतींचा कल या सर्व बाबींचा सखोल अभ्यास असावा.

समाजात आजुबाजूला घडणाऱ्या बारीक-सारीक घटना, प्रसंग यांची माहिती असावी. सूक्ष्म निरीक्षण क्षमता, सर्जनशीलता ही रेडिओजॉकीची खास वैशिष्ट्ये. थोडक्यात सुसंवाद, प्रवाही भाषा, शब्दफेक, कार्यक्रमाची सलगता टिकवणे, रंजन, सर्जनशीलता या गुणांच्या आधारे रेडिओजॉकीचे व्यक्तिमत्व बहुआयामी बनत असते. हेच व्यक्तिमत्त्व यशस्वी व उत्तम रेडिओजॉकी म्हणून श्रोत्यांसमोर येते.

प्रकल्प.
रेडिओवरील आरजेचे काही कार्यक्रम ऐका. तुम्ही आरजे आहात, अशी कल्पना करून ‘युवकांसाठी करिअरच्या संधी’ या विषयावरील लाईव्ह कार्यक्रमासाठी संहिता तयार करा.

11th Marathi Book Answers Chapter 4.5 रेडिओजॉकी Additional Important Questions and Answers

कृती : १ आकलन कृती
खालील उताऱ्याच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 1
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 2

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प्रश्न 2.
अदययावतता’ हा शब्द उत्तर म्हणून येईल असा प्रश्न तयार करा.
उत्तरः
आकाशवाणीचे महत्त्वाचे वैशिष्ट्य कोणते?

आधुनिक जीवनात संपर्क …………………………….. आपल्यासमोर आला आहे. (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. ११४)

प्रश्न 3.
म्हैसूर संस्थानाने १९३५ मध्ये स्थापन केलेल्या रेडिओ केंद्रास दिलेले नाव – [ ]
उत्तरः
म्हैसूर संस्थानाने १९३५ मध्ये स्थापन केलेल्या रेडिओ केंद्रास दिलेले नाव – [आकाशवाणी]

प्रश्न 4.
१९२७ मध्ये भारतात आकाशवाणी केंद्र सुरू करणारी खाजगी कंपनी – [ ]
उत्तरः
१९२७ मध्ये भारतात आकाशवाणी केंद्र सुरू करणारी खाजगी कंपनी – [इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी]

उपयोजित कृती-१.

प्रश्न 1.
आकाशवाणीवरील किंवा खाजगी रेडिओ केंद्रावरील तुम्हाला परिचित असणारे दोन कार्यक्रम.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 3
उत्तर :
आकाशवाणीवरील किंवा खाजगी रेडिओ केंद्रावरील तुम्हाला परिचित असणारे दोन कार्यक्रम.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 4

प्रश्न 2.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 5
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 6

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प्रश्न 3.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 7
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 8

स्वाध्याय कृती

प्रश्न 1.
‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ या आकाशवाणीच्या ब्रीदवाक्याचा तुम्हाला समजलेला अर्थ तुमच्या शब्दांत मांडा.
उत्तर :
आकाशवाणी हे अगदी सामान्यातल्या सामान्य घरात पोहोचलेले सुलभ माध्यम आहे. अतिशय शीघ्र गतीने घराघरात पोहोचलेले असे माध्यम शिवाय शहराच्या कानाकोपऱ्यापर्यंत उपलब्ध असलेले माध्यम आहे. म्हणूनच आकाशवाणीच्या माध्यमातून दिलेली माहिती देशाच्या राज्याच्या कानाकोपऱ्यापर्यंत पोहचते. आकाशवाणीचे हे गुण ओळखूनच भारत सरकारने १९२७ साली ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी’ या खाजगी कंपनीद्वारे भारतात मुंबई व कोलकाता येथे अधिकृत आकाशवाणी केंद्रे स्थापन केली.

अगदी सुरुवातीला स्वातंत्र्यपूर्व काळात जेव्हा दूरदर्शन माध्यम घराघरात पोहचले नव्हते त्या काळात स्वातंत्र्याची ज्योत लोकांच्या मनात पेटवत ठेवण्याचे मोठे कार्य आकाशवाणीच्या माध्यमातून झाले. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारताचे माजी पंतप्रधान पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांसारख्या अनेक स्वातंत्र्यसेनानींची भाषणे आकाशवाणीवरून प्रसारित होत असत. आज स्वातंत्र्यानंतरसुद्धा लोकोपयोगी सरकारी सामाजिक उपक्रमांची माहिती सातत्याने या माध्यमातून लोकांपर्यंत पोहचवली जाते. आकाशवाणीवर विविध विषयांना वाहिलेले कार्यक्रम असतात.

त्यातून फक्त लोकांचे मनोरंजनच होते असे नाही तर अनेक उपयुक्त माहिती श्रोत्यांना पुरवली जाते. आज मोबाईलमध्ये आकाशवाणी व खाजगी रेडिओ वाहिन्या सहजपणे ऐकता येतात. अगदी ट्रेनच्या प्रवासात ते दूर शेतात डोंगरपाड्यावर रेडिओ ऐकता येतो. लोकांना सजग करण्याचे, त्यांना माहितीपूर्ण ज्ञान देण्याचे, सरकारी उपक्रम घराघरात पोचवण्याचे हे अत्यंत प्रभावी साधन आहे. सर्वांच्या हितासाठी व सर्वांच्या सुखासाठी वर्षानुवर्षे या माध्यमातून प्रयत्न होत आहेत. म्हणूनच ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ हे आकाशवाणीचे ब्रीदवाक्य सार्थ ठरले आहे असे म्हणायला हरकत नाही.

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कृती : ३

प्रश्न 1.
खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.

(अ) खालील आकृतिबंध पूर्ण करा.
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उत्तर:
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(ब) चौकटीत योग्य माहिती भरा.
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उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 12

रेडिओजॉकीच्या व्यक्तिमत्वाचे पैलू – व्यक्तिमत्त्व प्रसन्न ………………………………….. त्यांना हे क्षेत्र खुणावत आहे. (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. ११६)

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प्रश्न 2.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 13
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 14

प्रश्न 3.
रेडिओजॉकीला या घटकांची चांगली जाण असावी.
१. ……………………………..
२. ……………………………..
३. ……………………………..
उत्तरः
रेडिओजॉकीला या घटकांची चांगली जाण असावी
१. भाषा
२. साहित्य
३. सांस्कृतिक घडामोडी

प्रश्न 4.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 15
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.5 रेडिओजॉकी 16

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स्वमत:

प्रश्न 1.
रेडिओजॉकी ही संकल्पना स्पष्ट करा.
उत्तर:
आकाशवाणीवरील विविध कार्यक्रमांचे अतिशय प्रभावी, प्रवाही शैलीत निवेदन करणाऱ्या रेडिओ व्यक्तिमत्त्वाला रेडिओजॉकी (आरजे) असे म्हणतात. रेडिओजॉकीला मराठीत ‘उद्घोषक’ असे म्हणतात. रेडिओजॉकी संगीत शैलीचा परिचय करून देत टॉक रेडिओ शोचे आयोजन करत असतो. मुलाखती घेणे, श्रोत्यांशी संवाद साधणे, हवामान, खेळ, बातम्या इ. संबंधीची माहिती देत असतो. विविध सामाजिक, राजकीय विषयांवर श्रोत्यांशी संवाद साधत असतो. स्थानिक भाषा हिंदी, इंग्लिश या भाषांची सरमिसळ करून तो निवेदन करत असतो. सलग दोन-तीन तास श्रोत्यांचे मनोरंजन करत असतो.

प्रसंगावधान, हजरजबाबीपणा, समयसूचकता साधत कार्यक्रम सुसूत्रपणे मांडण्याचे कसब रेडिओजॉकीकडे असते. सलग दोन-तीन तासांतील कार्यक्रमात वैविध्य आणण्यासाठी व त्यातील एकसुरीपणा टाळण्यासाठी वेगवेगळ्या क्लुप्त्या वापरल्या जातात. त्यात कोडी, स्पर्धा, श्रोत्यांशी प्रश्नोत्तरे, संवाद, संगीत, दिनचर्या, वाढदिवस यांद्वारे श्रोत्यांना खिळवून ठेवण्याची क्षमता रेडिओजॉकीत असते.

बॉलीवुड क्षेत्रातील लोकांच्या मुलाखती, गाणी ऐकवणे हे रेडिओजॉकीचे काम असते. थोडक्यात भाषेवर प्रचंड प्रभुत्व, स्पष्ट उच्चार, आत्मविश्वास, निवेदनातील सहजता, व्यासंग यातून रेडिओजॉकी बहारदार सादरीकरण करत असतो. आरजे संग्राम, आरजे अपूर्वा, आरजे प्रसन्ना, आरजे काव्या अशी ओळख करून देत खाजगी रेडिओशी श्रोत्यांना जोडण्याचे काम रेडिओजॉकी करतो. अनेक खाजगी रेडिओ आरजेच्या नावावर ओळखल्या जातात.

रेडिओजॉकी प्रास्ताविकः

आजच्या काळात संपर्काची अनेक साधने उपलब्ध आहेत. यामध्ये मुद्रित, श्राव्य आणि दृकश्राव्य या माध्यमांद्वारे एकमेकांशी संपर्क साधणे सुलभ झाले आहे. लिखित माध्यमात वृत्तपत्रे, नियतकालिके, मासिके, हस्तपुस्तिका येतात. श्राव्य माध्यमात आकाशवाणी, दूरध्वनी, ध्वनीफिती इत्यादींचा समावेश होतो.

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तर दृकश्राव्य माध्यमात दूरचित्रवाणी, चित्रपट, ध्वनिचित्रफिती, संगणक, इंटरनेट इत्यादींचा समावेश होतो. या सर्व प्रसारमाध्यमांद्वारे संप्रेषण, समाजप्रबोधन, मार्गदर्शन, ज्ञान, माहिती व मनोरंजन समाजापर्यंत पोहोचवले जाते. १९२७ मध्ये भारतात इंडियन ब्राडकस्टिंग कंपनीने मुंबई व कोलकाता या ठिकाणी आकाशवाणी केंद्र सुरू केले. १९३५ मध्ये म्हैसूर संस्थानने स्थापन केलेल्या रेडिओ केंद्रास ‘आकाशवाणी’ हे नाव दिले.

पुढे भारत सरकारने हेच नाव स्वीकारले. ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ हे ब्रीदवाक्य घेऊन आकाशवाणी विविध कार्यक्रम प्रक्षेपित करत आहे. आकाशवाणी व खाजगी एफ.एम. मध्ये महत्त्वाचा असतो तो निवेदक. खाजगी एफ.एम.मधील रेडिओजॉकी नव्या रूपात आपल्यासमोर आला आहे.

रेडिओजॉकीची पार्श्वभूमी आणि संकल्पना :

१९२०-३० ते १९९३ पर्यंत रेडिओचा प्रवास आहे. २००१ पासून भारतात खाजगी एफ.एम.ची सुरुवात झाली. ‘रेडिओ सिटी बेंगलोर’ हे भारतातील पहिले खाजगी एफ.एम. रेडिओ स्टेशन होय. तर ‘द टाईम्स ग्रुपने ‘रेडिओ मिर्ची’ हे स्टेशन इंदौर येथे सुरू केले, महाराष्ट्रात खाजगी एफ.एम. २००२ मध्ये सुरू झाले. एफ.एम. रेडिओत ‘बॉलिवुड हिट’ मधील तरुणाईला आवडतील अशी गाणी वारंवार ऐकवून मध्ये मध्ये सूत्रसंचालन करणारा रेडिओजॉकी तरुणाईला आर्कषित करतो. रेडिओजॉकीची (आर.जे.) निवेदन शैली ओघवती असावी, मराठी, हिंदी, इंग्रजी भाषेवर प्रचंड प्रभुत्व असावे.

सलग दोन-तीन तास निवेदन करून श्रोत्यांशी संवाद साधून त्यांचे मनोरंजन करण्याची क्षमता आर.जे. कडे असते. यात तो संभाषण, चर्चा, वाढदिवस, दिनविशेष, कोडी, स्पर्धा यांचे आयोजन करून श्रोत्यांचे मनोरंजन करतो. थेट प्रक्षेपणाच्या विविध कार्यक्रमाबरोबरच बॉलिवूडमधील सेलिब्रेटिंशी संवाद साधून श्रोत्यांना अनोखी मेजवानी देत असतो.

रेडिओजॉकीच्या कामाचे स्वरूप :

आजच्या काळात रेडिओ जॉकीच्या कामाचे स्वरूप प्रचंड आहे. एफ.एम., ए.एम. रेडिओजॉकी सार्वजनिक रेडिओ स्टेशनद्वारे प्रेक्षकांशी संवाद साधू शकतो. उपग्रह रेडिओजॉकीद्वारे एफ.एम.ए.एम. स्पष्ट माहिती व संगीत ऐकवू शकतो. स्पोर्टस टॉकद्वारे क्रीडा, बातम्या, माजी खेळाडू, क्रीडालेखक, निवेदक यांची माहिती देऊन श्रोत्यांशी संवाद साधू शकतो. तसेच सामाजिक, राजकीय विषयांवर श्रोत्यांशी संवाद साधू शकतो. थोडक्यात वरील सर्व विषयांवर माहिती देणारा व श्रोत्यांशी संवाद साधणारा रेडिओजॉकी आपणास खाजगी एफ.एम.द्वारे श्रोत्यांची मने जिंकतो.

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रेडिओजॉकीचा आवाज, निवेदन, अभ्यास व व्यक्तिमत्त्वः

रेडिओजॉकीचा आवाज सुस्पष्ट व उत्तम असावा. आरोह-अवरोहाचे उत्तम ज्ञान असावे. भाषा सोपी, साधी व प्रवाही असावी. निवडलेली गाणी, किस्से यात सुसंगतता असावी. निवेदनात आनंद उत्साहीपणा असावा. तर श्रद्धांजलीच्या कार्यक्रमात आवाजात कारुण्य असावे. रेडिओ जॉकीला सर्वच क्षेत्राचे उत्तम ज्ञान असावे. व्यासंग व चौफेर वाचनातून ते भान येते. मातृभाषेबरोबरच हिंदी, इंग्रजीचे ज्ञान असावे. भाषेवर प्रभुत्व हवे.

कार्यक्रमाची संहिता लेखन करता येणे अपेक्षित असते. व्यक्तिमत्त्व प्रसन्न, हरहुन्नरी असावे. हजरजबाबीपणा, बोलण्याची आवड असावी. उत्कृष्ट संवादकौशल्य व विनोदाची जाण असावी. सूक्ष्म निरीक्षण कौशल्यातून आजुबाजूच्या घटनांकडे पाहण्याची दृष्टी त्याच्याकडे असावी. थोडक्यात रेडिओजॉकीचे व्यक्तिमत्त्व, बहुआयामी असावे की जेणेकरून त्यातून उत्तम व प्रभावी सूत्रसंचालन त्याला करता येऊ शकेल.

रेडिओजॉकीच्या कार्यक्रमाचे स्वरूप व क्षेत्रे:

रेडिओजॉकीचे कार्यक्रम विविध स्वरूपाचे असतात. समाजातील विविध क्षेत्रांतील सर्व घटकांसाठी ए.एम. व एफ.एम. वरून कार्यक्रम सादर होत असतात. त्यात प्रासंगिक घडामोडी, मुलाखती, वैज्ञानिक, युवक, महिला, शालेय, कृषी, सण-उत्सव, संगीत, परिसंवाद, श्रोत्यांची पत्रे व अचानक घडलेल्या घटना अशा विविध विषयांवर कार्यक्रमाचे प्रसारण होत असते. त्यामुळे रेडिओजॉकींना नोकरी व व्यवसायाची ही उत्तम संधी आहे.

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विविध मनोरंजन कंपन्या, जाहिरात एजन्सी, विशेष कार्यक्रम, विशिष्ट प्रसंग, ऑल इंडिया रेडिओ, ए.एम, एफ.एम. चॅनल इत्यादी क्षेत्रांत करिअरची उत्तम संधी मिळू शकते. त्यासाठी त्याच्याकडे प्रभावी संवाद कौशल्य, वाचन, व्यासंग, स्पष्ट उच्चार, सर्जनशीलता, बहुश्रुतता, समयसूचकता, निरीक्षणक्षमता, बहुआयामी व्यक्तिमत्त्व असे असावे. आपल्यातील क्षमता आणि कौशल्याचा विकास साधल्यास उत्तम आरजे बनण्याची संधी आहे व त्यातून युवक-युवतींसाठी उत्तम करिअरचा मार्ग मिळू शकतो.

11th Marathi Book Answers भाग-४ उपयोजित मराठी

Anudini Blog Lekhan Class 11 Marathi Bhag 4.4 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 4.4 अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 4.4 Exercise Question Answer Maharashtra Board

अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 4.4 अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन Textbook Questions and Answers

कृती

खालील कृती करा.

प्रश्न 1.
अनुदिनी लेखनाची गरज स्पष्ट करा.
उत्तरः
अनुदिनी किंवा ब्लॉग हे एक सामाजिक माध्यम आहे. विविध विषयांवरील आपले व्यक्तिगत विचार समाजाला कळावे या उद्देशाने व्यक्तीने निर्माण केलेले ‘संकेतस्थळ’ म्हणजे ‘ब्लॉग’. आपले मत, विचार, कल्पना अभिव्यक्त करण्यासाठी संवादाचे प्रभावी माध्यम म्हणून अनुदिनी लेखन करता येते. अनुदिनी लेखन हे सामाजिक संपर्कस्थळ असल्याने त्यावर प्रसिद्ध होणारी माहिती अनेक वाचकांना उपयुक्त ठरू शकते. ‘अनुदिनी’चा उदय होण्यापूर्वी ‘डायरी लेखन’ केले जात होते. व्यक्ती त्याच्या आयुष्यातील दैनंदिन घडामोडींची नोंद त्या डायरीत करून ठेवत असे. ही डायरी त्याची त्याच्यापुरती खाजगी होती.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.4 अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन

एक प्रकारे ती ‘स्व-अभिव्यक्ती’ होती. अशा लिहिलेल्या काही डायऱ्या नंतरच्या काळात सामाजिक-ऐतिहासिकदृष्ट्या अत्यंत महत्त्वाच्या ठरल्या. उदा. अॅन फ्रँक हिची डायरी, लक्ष्मीबाई टिळक यांनी लिहिलेली ‘स्मृतिचित्रे’ ही डायरी. त्यामुळे आज डायरी लेखनाचे महत्त्व अनन्यसाधारण आहे. पूर्वी हे लिखाण अनेकांपर्यंत जात नव्हते. परंतु आज ते अनेकांपर्यंत जावे, माहितीची विचारांची देवाण-घेवाण व्हावी, संवादाचे पूल बांधले जावेत, क्रिया-प्रतिक्रियांमधून विचारांचे कंगोरे समोर यावेत अशा अनेक कारणांमळे ‘अनदिनी’ची गरज निर्माण झाली आहे.

स्वविचार-स्वभावना यांना शिस्त आणि स्वातंत्र्याची जोड देऊन अभिव्यक्त होण्यासाठी ‘अनुदिनी’ हे उत्तम माध्यम आहे. त्यामुळे एखादया कार्यक्रमाची माहिती, एखादे छायाचित्र, चित्रफिती, पाककृती, प्रवासवर्णन, राजकीय मत मतांतरे अशा अनेक गोष्टी सगळ्यांपर्यंत पोहचवता येतात. याचा लाभ ती अनुदिनी वाचणाऱ्यांना होतो. ज्ञानाच्या कक्षा रुंदावतात. विचारांची देवाण-घेवाण होते. म्हणूनच अनुदिनी वाचणाऱ्यांची संख्या दिवसेंदिवस वाढत आहे.

प्रश्न 2.
अनुदिनी लेखनाची क्षेत्रे स्पष्ट करा.
उत्तरः
अनुदिनी लेखनाचे महत्त्व दिवसेंदिवस वाढत आहे. अनेक लोक अनुदिनी लेखन आणि वाचन यांचा उपयोग स्वजाणिवा विकसित करण्यासाठी करतात. वैयक्तिक अनभवाच्या अभिव्यक्तीसाठी निर्माण झालेल्या ‘अनदिनी’ने आपले कार्यक्षेत्र हळहळ विस्तारले आहे. व्यक्तिगत भावनांपास थेट निवडणुकीत मत मागण्यापर्यंत किंवा व्यक्ती-व्यक्तीतील हितगुज सार्वत्रिक करण्यापासून ते वस्तूची जाहिरात व विक्री करण्यापर्यंत ब्लॉगला कोणतेही क्षेत्र वर्ण्य नाही. ब्लॉगची क्षेत्रे ही खालील प्रमाणे आहेत.

  1. वैयक्तिक : यात व्यक्ती आपल्या दैनंदिन जीवनातील गोष्टी, आपले आवडते संगीत, नृत्य, एखादी सहल अशा अनेक बाबींवर व्यक्तिगत पातळीवरील विचार व्यक्त करते.
  2. सामाजिक : यात व्यक्ती सभोवताली घडणाऱ्या सामाजिक घटनांबाबत संवेदनशील असते. त्यावर आपले बरे-वाईट, सकारात्मक नकारात्मक विचार तिला व्यक्त करावेसे वाटतात. त्यातून मग साद-प्रतिसादाची वैचारिक साखळी तयार होते. विषयाचे विविध कंगोरे समोर येतात.
  3. व्यावसायिक : व्यवसायवृद्धी हे देखील ‘ब्लॉग’ निर्माण करण्याचे महत्त्वाचे कारण आहे. यात एखादे उत्पादन, त्याची वैशिष्ट्ये, एखादी सेवा, त्याविषयीच्या आर्थिक बाबी इत्यादींची माहिती दिली जाते.
  4. वाङ्मयीन : यामध्ये साहित्य आणि साहित्यातील विविध प्रवाह यांच्यावर लेखन होते. समीक्षात्मक लेखन ते थेट एखादे ललित . वाङ्मय असा हा प्रवास असू शकतो. काही वाङ्मयीन ब्लॉग एखादया लेखकाला वाहिलेला असतो. त्या लेखकाच्या साहित्याची चर्चा, ओळख तिथे नियमित करून दिली जाते. उदा. पु.ल. देशपांडे यांच्या नावाचा उपलब्ध असलेला ब्लॉग.
  5. सामूहिक : यात दोन-तीन व्यक्ती एकत्रितपणे लेखन करतात.
  6. पर्यटन : पर्यटन विषयाला वाहिलेले लेखन-यावर माहिती, पर्यटनस्थळे, चित्र, तिथले अनुभव यांची माहिती दिली जाते.
  7. शैक्षणिक : अनेक शैक्षणिक संस्थांचे स्वत:चे ब्लॉग आहेत. त्यावर शिक्षण विषयक घडामोडींची माहिती दिली जाते.
  8. राजकीय : यात राजकीय व्यक्ती स्वत:चे ब्लॉग निर्माण करून स्वत:च्या राजकीय-सामाजिक कार्याची माहिती लोकांपर्यंत पोहोचवतात.
    उदा. I support Narendra Modi नावाचा ब्लॉग सतत पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या विषयीची माहिती देत असतो.

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प्रश्न 3.
चांगल्या अनुदिनीची वैशिष्ट्ये तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तरः
ब्लॉग / अनुदिनी लिहिणाऱ्यांची संख्या मुबलक आहे. त्याद्वारे मनात येणारे विचार मुक्तपणे मांडले जातात. या लेखनाचे क्षेत्र जरी व्यापक असले तरी प्रत्येकाच्या आवडीचे क्षेत्र, प्राविण्याचे क्षेत्र भिन्न असते. ब्लॉग सुरू करताना जे विषय आवडतात, ज्या विषयांवर प्रभुत्व आहे अशा विषयांना प्राधान्य देणे योग्य ठरेल. हे लेखन करताना खालील गोष्टी लक्षात घेणे गरजेचे आहे.

  • आकर्षक शीर्षक
  • आकर्षक विषय मांडणी
  • छोटी, सुटसुटीत, सोपी आणि आकलनसुलभ वाक्यरचना
  • परिच्छेदांची समर्पक मांडणी.
  • एका परिच्छेदातून दुसऱ्या परिच्छेदात जाण्याची सहजशैली
  • रिकाम्या जागेचा योग्य वापर.
  • वाचकांची उत्सुकता टिकवून ठेवणारी शैली
  • संवादात्मकता
  • दृक-श्राव्य किंवा श्राव्य फीतींची लिंक
  • शब्द मर्यादेचे पालन, विषयातील अद्ययावतता / आधुनिकता

प्रश्न 4.
तुम्हांला उपलब्ध असलेली अनुदिनी वाचून त्यासंबंधीच्या तुमच्या प्रतिक्रिया स्पष्ट करा.
उत्तरः
सध्याच्या इंटरनेटच्या युगात ब्लॉगचे महत्त्व फारच वाढले आहे. असंख्य लोक आता मराठीतून ब्लॉग लिहू लागले आहेत. त्यातील काही ब्लॉग खरंच दर्जेदार असतात तर काही सुमार दर्जाचे. प्रत्येक वेळेला ब्लॉगचा URL टाकून त्या ब्लॉगवर जाणे, नवीन काही पोस्ट झाले आहे का हे पाहणे फारच त्रासदायक ठरू शकते. त्यामुळे ब्लॉग लिस्ट नावाच्या संकेतस्थळाला भेट हे खूपच सोयीचे आहे. वेगवेगळे ब्लॉग यावर जोडलेले आहेत.

प्रत्येकाची ताजी पोस्ट त्या ब्लॉगच्या नावावरच झळकत राहते त्यामुळे काय वाचावे हे लगेच ठरवता येते. ‘अक्षरगंध मनातले काही तरंग’, ‘लेखन प्रपंच’, ‘आनंदयात्रीचा ब्लॉग’, ‘झाले मोकळे आकाश’, ‘सहयाद्री बाणा’, ‘माझी वाङ्मय शेती’, ‘माझे ट्रेक अनुभव’ अशा अनेक ब्लॉगला एकाच ठिकाणी भेट देऊन सगळ्या ब्लॉगच्या ताज्या पोस्ट एकाच ठिकाणी वाचता येतात. यात गंगाधर मुटे हे ‘माझी वाङ्मय शेती’ या ब्लॉगमध्ये अभंगरचनेच्या आधारे शेतकरी जीवनावर काव्य रचना करतात ते वाचनीय असते. पु.ल. प्रेम नावाचा ब्लॉग मला खूप आवडतो.

याचा पत्ता आहे pulaprem.blogspot.com या ब्लॉगवर पु.ल. देशपांडे यांच्या ‘व्यक्ती आणि वल्ली’ या पुस्तकांतील व्यक्तिरेखा आहेत. शिवाय पु.लं.ची इतर पुस्तके, त्यांची भाषणे, पत्रे हे सगळे वाचायला मिळते. याशिवाय पु.लं.च्या पत्नी सुनीताताई देशपांडे यांचे लेखन वाचण्यास उपलब्ध आहे. शिवाय इतरांनी पुलंवर लिहिलेले लेखन उपलब्ध आहे. पु.लं.च्या काही कविता, विनोदी किस्से वाचायला मिळतात. समग्र पु.लं. अनुभवण्यासाठी हा एक उत्तम ब्लॉग आहे.

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प्रश्न 5.
तुमची स्वत:ची अनुदिनी तयार करताना ती परिपूर्ण व आकर्षक होण्यासाठी पाळावयाची पथ्ये लिहा.
उत्तरः
ब्लॉग तयार करणे सोपं आहे. पण दर्जेदार ब्लॉग लेखन करणं ही कठीण बाब आहे. स्वत:ची अनुदिनी तयार करताना या अनुदिनीद्वारे आपण लोकांसमोर काय मांडणार आहोत याचा पक्का विचार प्रथम करणे गरजेचे आहे. अनुदिनीसाठी एखादे आकर्षक शीर्षक तयार करावे लागेल. जो विषय आपण अनुदिनीसाठी निवडला आहे त्या विषयाचे आपल्याला सखोल व्यवस्थित ज्ञान आहे का याची चाचपणी केली पाहिजे. एखादया विषयावर लेखन करताना भाषा आकर्षक-सुटसुटीत हवी. तशीच ती समजण्यास सोपी हवी. योग्य ठिकाणी परिच्छेदांची निर्मिती करणे गरजेचे आहे.

एका परिच्छेदाचा दुसऱ्या परिच्छेदाशी सहज संबंध जुळला जाईल असे लेखन हवे. जिथे रिकामी जागा आहे त्याचा समर्पक वापर करणे आवश्यक आहे. वाचकांना पुढेपुढे वाचत जावेसे वाटेल अशी लेखन शैली हवी. यात जर संवादात्मकता असेल तर अधिक उत्तम. आपण एका समूहाशी बोलतो आहोत असा भाषेचा बाज हवा. विविध चित्रे, दृक-श्राव्य फिती, श्राव्य फीती यांची लिंक दिली तर लेखन अधिक आशयघन होते. नवीन नवीन विषय सतत लोकांसमोर मांडता आले पाहिजेत. शब्दमर्यादेचे पालन करणे हे अत्यंत गरजेचे ठरते. त्यामुळे या सगळ्या बाबी विचारात घेऊन ब्लॉग लेखन केले तर ते परिपूर्णतेकडे जाऊ शकते.

प्रश्न 6.
खालील विषयांवर ब्लॉग लिहा.

(अ) महाविद्यालयातील पहिला दिवस
उत्तरः
शाळा संपून महाविदयालयीन जीवनात प्रवेश करणे म्हणजे जणू एका विश्वातून दुसऱ्या विश्वात जाण्यासारखे असते. कानी कपाळी ‘आता तुम्ही मोठे झालात, जबाबदारीने वागा’ अशा सूचना मिळत असतात. बालपण संपल्याची हूरहूर तर तारुण्याची चाहूल लागण्याची उत्सुकता अशा संमिश्र भावनेने मन भरून गेलेले असते. माझ्याही मनाची अशीच अवस्था असताना मी महाविदयालयात प्रवेश केला.

सुदैवाने दहावीत गुण चांगले मिळाले असल्याने मनासारखे महाविदयालय मिळाले होते. गणवेशाची कटकट नसल्याने छानपैकी मॉर्डन स्टाईलची जीन्स आणि टी-शर्ट घालून महाविदयालयात प्रवेश केला. प्रवेशद्वाराजवळ सुरक्षारक्षकाने अडवले. अजून ओळखपत्र नसल्याने रिसिट दाखवून प्रवेश केला. विस्तीर्ण पसरलेली महाविदयालयाची इमारत बघून मन दडपून गेलं. त्याभोवती छान हिरवळ असलेला बगीचा होता.

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फुलांचे ताटवे डोलत होते. फुलांसारखीच गोड मुले-मुली गप्पा मारत इकडे-तिकडे बागडत होते. मी कोणालाच ओळखत नव्हतो. त्यामुळे ते सर्व रमणीय दृश्य मनात साठवतच इमारतीच्या आत शिरलो. माझी रिसिट पाहून तिथल्या एका शिक्षिकेने मला माझा वर्ग दाखवला. मी मुकाट वर्गात जाऊन बसलो. वर्ग भरलेला होता. मग एकेक शिक्षक येत गेले. प्राचार्य आले. त्यांनी महाविदयालयाची माहिती दिली. नियम समजावून दिले आणि वर्ग सोडून दिला. दोनचार मुला-मुलींशी बोलून मैत्री केली. पण एकूणच पहिला दिवस प्रसन्न गेला. तीच प्रसन्नता घेऊन मी घरी गेलो.

(आ) फेसबुक मैत्री आवश्यक की अनावश्यक
उत्तरः
अमेरिकेतील कॅलिफोर्निया राज्यात ‘फेसबुक’चे मुख्यालय आहे. फेसबुकचा संस्थापक आहे मार्क झुकरबर्ग. अमेरिकेतील सर्वात लोकप्रिय ‘सोशल नेटवर्किंग’ संकेतस्थळ आहे. संपर्कक्रांती घडवून आणणाऱ्या या सोशल मिडियाने आज जगभरातील बहुतांश नागरिकांचे जीवन व्यापून टाकले आहे.

भारतासारख्या देशात तर या नव समाजमाध्यमांचा पगडा दिवसेंदिवस वाढत चालला आहे. मात्र त्यामुळे व्यक्ती संकुचित बनत चालल्या आहेत का? माणूस माणसापासून दुरावतो आहे का? या आभासी दुनियेतील मैत्री खऱ्या जीवनात कितपत उपयुक्त ठरते या सर्वांचा विचार गांभीर्याने करण्याची गरज आहे.

फेसबुक, वॉट्सअपचा वापर हा जीवनावश्यक सवयींचा भाग बनत चालला आहे. फेसबुकवर मित्र जमवणे, त्यांची संख्या वाढवत नेणे हे आता व्यसन बनले आहे. एखादी पोस्ट टाकल्यानंतर त्याला किती लाईक्स मिळतात यावर बऱ्याच जणांच्या आनंदाचं गणित ठरत आहे. हे अतिशय चिंताजनक आहे. या संदर्भात नुकतेच एक सर्वेक्षण केले गेले. त्यानुसार सोशल मिडीयाचा वापर केल्यामुळे नैराश्य येते असे पाचपैकी एक व्यक्ती सांगते.

३० वर्षांहून कमी वयोगटाच्या लोकांत तर सोशल मिडिया महत्त्वाचा घटक बनला आहे. फेसबुकवर भरमसाठ मित्र मैत्रिणी असणारे अनेकजण प्रत्यक्ष जीवनात एकटेच असतात हे सत्य आहे. इतकेच नव्हे तर इतरांशी संवाद साधण्यासही ते असमर्थ असल्याचे दिसून येते. स्नॅपचॅट, इन्स्टाग्राम आणि फेसबुक सतत पाहात राहणे आयुष्यातील प्रत्येक गोष्टीचे अपडेट सोशल मिडियावर टाकत राहणे या सवयींनी तरुण वर्ग ग्रासून गेला आहे.

इतके या सगळ्याच्या अधीन जाणे ही भविष्यात धोक्याची घंटा ठरू शकते. यामुळे चिंता, एकटेपणा, आत्मविश्वासाची कमतरता यांचे वास्तव जीवनात प्रमाण वाढताना दिसत आहे.

ऑनलाईन विश्वात मनुष्य आपल्या आयुष्याचे एक चित्र रंगवतो जे वास्तवात असतेच असे नाही. त्यामुळे स्वत:विषयी उगाच अपेक्षा वाढतात. त्यामुळे मग या दुनियेतील मित्र-मैत्रिणींनी आपल्या पोस्टला कमी लाईक्स दिले तर तरुण पिढीतील न्यूनगंड वाढीस लागताना दिसतो आहे. म्हणूनच खऱ्या जीवनातील जीवाला जीव देणारे सच्चे मित्र असणे हीच खरी श्रीमंती आहे. मग ते एक-दोन का असेनात. म्हणून फेसबुकवरील मैत्री अनावश्यक वाटते.

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11th Marathi Book Answers Chapter 4.4 अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन Additional Important Questions and Answers

कृती : १
खालील कृती स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
अनुदिनी लेखनासाठी पाळायची पथ्ये लिहा.
उत्तरः
अनुदिनी लेखन हे एक प्रभावी सामाजिक माध्यम आहे. याचे लेखन हे गंमत म्हणून नव्हे तर गांभीर्याने करायचे लेखन आहे. कारण याचे समाजमनात, जीवनात दूरगामी पडसाद उमटत असतात. अनुदिनी लेखन जेव्हा अभ्यासपूर्ण असते तेव्हा त्याला सामाजिक-सांस्कृतिक राजकीय-ऐतिहासिक मोल असते. या लेखनात मर्यादित शब्दांत ‘उत्तम, सकस आणि दर्जेदार लेखन’ अपेक्षित आहे. या लेखनाला विचार आणि संशोधनाची जोड दिली की हे लेखन उत्कृष्टतेकडे जाते. उत्तम ‘ब्लॉग’ लिहिणाऱ्या ‘ब्लॉगर्स’चे अनेक वाचक असतात. हे वाचक त्यांच्या संपर्क माध्यमातून ब्लॉगर्सशी चर्चा करतात.

मात्र अनुदिनी लेखन करताना काही पथ्ये पाळणे गरजेचे असते. ती पथ्ये खालीलप्रमाणे :

  • अनुदिनी लेखन करताना विषयाचे तारतम्य असणे आवश्यक आहे.
  • अनुदिनी लेखन अविवेकी असता कामा नये. लेखनविषयक शिस्त, समाजभान याची जाणीव सतत डोक्यात ठेवणे गरजेचे असते.
  • अनुदिनी लेखन प्रसिद्ध झाल्यावर त्यावरील प्रतिक्रिया उलटसुलट असू शकतात. त्याला उत्तर देण्याची क्षमता असणे गरजेचे आहे.
  • अनुदिनी लेखनात सामाजिक स्वास्थ्य, शांतता थोडक्यात येईल असे विचार मांडता कामा नयेत.
  • अनुदिनी लेखनात मिळालेले स्वातंत्र्य हे स्वैराचाराकडे जाणार नाही याची काळजी घेतली पाहिजे.

कृती : २ आकलन कृती

प्रश्न 1.
खालील परिच्छेद वाचून सुचनेनुसार कृती करा.
(अ) मायक्रोब्लॉगिंगचे फायदे – [ ]
(आ) कॉर्पोरेट आणि संस्थात्मक ब्लॉग निर्माण करण्याचा उद्देश – [ ]
(इ) गट ब्लॉगची व्याख्या – [ ]
(ई) विषयानुसार ब्लॉगचे काही विषय – १. ………….. २. ………….. ३. ………….. ४. …………..
उत्तरः
(अ) मायक्रोब्लॉगिंगमुळे वेळ आणि श्रम यांची बचत होते.
(आ) आपल्या कर्मचाऱ्यांपर्यंत अदययावत माहिती पोहोचवण्यासाठी कॉर्पोरेट आणि संस्थात्मक ब्लॉग निर्माण करतात.
(इ) जेव्हा एकापेक्षा अधिक ब्लॉगर्स वेब ब्लॉगमध्ये पोस्ट लिहितात तेव्हा त्याला गट ब्लॉग म्हणतात.
(ई) विषयानुसार ब्लॉगचे विषय
(a) प्रवास
(b) आरोग्य
(c) बागकाम
(d) फोटोग्राफी

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वैयक्तिक ब्लॉग- एखादी व्यक्ती स्वत:च्या ब्लॉगवर …………………………………. मजकूर प्रसिद्ध केला जातो. (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ क्र. ११०, १११)

प्रश्न 2.
अनुदिनीचे प्रकार –
a. ………………
b. ………………
c. ……………..
d. ………………
e. ………………
f. ………………
उत्तरः
a. वैयक्तिक ब्लॉग
b. सहयोगी/गट ब्लॉग
c. मायक्रोब्लॉगिंग
d. कॉर्पोरेट आणि संस्थात्मक ब्लॉग
e. एकत्रित ब्लॉग
f. विषयानुसार ब्लॉग

प्रश्न 3.
ब्लॉग आकर्षक करण्यासाठी याचा वापर करता येतो.
(a) ……………………………..
(b) ……………………………..
(c) ……………………………..
उत्तरः
(a) चित्र
(b) ध्वनिफित
(c) चित्रफित

स्वाध्याय कृती :

प्रश्न 1.
‘अनुदिनीच्या माध्यमातून स्वतःची नाममुद्रा महाजालावर उमटविण्याची संधी प्रत्येकाला मिळते’ या मताची पुष्टी करा.
उत्तरः
अनुदिनीचा उदय होण्यापूर्वी डायरी लेखन केले जात होते. व्यक्ती आपल्या दैनंदिन जीवनाचा तपशील डायरीत नोंदवून ठेवत असत. पण ही डायरी खाजगी लेखन होते. काही डायऱ्या मात्र इतिहासात-साहित्यात अजरामर झाल्या. उदा. अना फ्रँकची डायरी यात दुसऱ्या महायुद्धाच्या काळात मरणयातना भोगणाऱ्या, नाझी नरसंहाराचा सामना करणाऱ्या ज्यू समाजाचे चित्रण येते. मराठीत लक्ष्मीबाई टिळक यांची डायरी ‘स्मृतिचित्रे’ या नावाने प्रसिद्ध आहे. त्या काळातील समाजजीवन विशेषतः स्त्री-जीवनाचे सविस्तर वर्णन त्यात येते.

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आज डायरी लेखन ‘अनुदिनी’च्या माध्यमातून केले तर ती खाजगी बाब राहत नाही. महाजालावर आपली अनुदिनी अनेकांकडून वाचली जाते.

पण लिहिलेल्या लेखनावर सकारात्मक-नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त होतात. या सर्वांना सामोरे जाण्याची ताकद आपल्या लेखणीत असणे गरजेचे आहे. तुमचे विचार जितके स्वच्छ, अभ्यासपूर्ण, रंजक असतील, तुमची शैली जितकी आकर्षक ओघवती असेल, तुमचे लेखन माहितीपर, ज्ञानवर्धक, समाजउपयोगी असेल तितका ब्लॉगला चांगला प्रतिसाद मिळतो. त्यामुळे आपली बुद्धिमत्ता, व्यासंग, वैचारिक क्षमता यांचा कस लागला जातो.

या आव्हानांना जो पुरून उरतो त्याची नाममुद्रा महाजालावर उमटतो. मग ती व्यक्ती कुठल्याही प्रांताची, धर्माची का असेना. त्याच्या लेखनाची सुजाण वाचकांकडून दखल घेतली जाते.

सरावासाठी ब्लॉग लेखनाचे नमुने.

प्रश्न 2.
निसर्गरम्य परिसराला भेट दिल्याचा अनुभव.
उत्तरः
अहमदनगर जिल्हयातील अकोले तालुका म्हणजे निसर्गसौंदर्याची खाणच! प्रत्येक ऋतूत इथला निसर्ग पर्यटकांना आपल्याकडे आकर्षित करत असतो. पावसाळ्यापूर्वीचा काजवा महोत्सव, पावसाळ्यातील रानफुलांचे सौंदर्य, खळाळणारे लहान मोठे झरे व उंचावरून कोसळणारे पांढरे शुभ्र धबधबे सारेच काही भुरळ पाडणारे. पर्यटकांना मोहिनी घालणारी गर्द हिरवाई, आसमंतात पसरलेले धुके, थंडगार शहारे आणणारा वारा व बरसणाऱ्या पावसाच्या रिमझिम वा जोरदार धारा याचा वेगळाच आनंद प्रत्येकाला होतो.

या परिसरात खूप काही बघण्यासारखे आहे. रंधा धबधबा, भंडारदरा धरण, कळसूबाईचे शिखर, हरिश्चंद्रगडचा परिसर, रतनगड, अमृतेश्वराचे मंदिर, साम्रद जवळील सांदणदरी व नेकलेस आकाराचा धबधबा सारं काही अपूर्व. रिमझिमणाऱ्या पावसात निसर्गाच्या सहवासातील आनंदी अनुभव देणारा हा परिसर.

इथले प्रत्येक ठिकाण एखादा स्वतंत्र दिवस राखून ठेवून पाहण्यासारखा आहे. मुक्काम व भोजनाची व्यवस्था अनेक ठिकाणी उपलब्ध आहे माहिती जालावर कोठून कसे जावयाचे याबाबतची सर्व माहिती आहे. एकदा येऊन अनुभवण्यासारखा इथला निसर्ग नक्कीच आहे. जवळचे रेल्वे स्टेशन-इगतपुरी, नाशिक आहे. महामंडळाची बससेवा अनेक ठिकाणाहून उपलब्ध आहे.

प्रश्न 3.
माझा आवडता महिना – श्रावण.
उत्तरः
श्रावण हा मराठी कालगणनेनुसार पाचवा महिना. इंग्रजी कॅलेंडर वर्षात साधारणत: जुलै – ऑगस्ट मध्ये हा महिना येतो. ज्येष्ठ – आषाढातील धुवांधार पावसाचा वर्षाव संपून श्रावण सरींना प्रारंभ होतो. बालकवी म्हणतात त्याप्रमाणे ‘श्रावणमासी, हर्ष मानसी, हिरवळ दाटे चोहिकडे क्षणात येते, सरसर हिरवे, क्षणात फिरूनी ऊन पडे’ चा साक्षात्कार घडविणारा असा हा महिना. श्रावणातील धरणी मातेचे रूप, आकाशातील इंद्रधनूचे सौंदर्य, मराठी संस्कृतीतील महत्त्वाचे सण, व्रतवैकल्यांचे पुण्य अशा अनेक दृष्टीने एक चैतन्य निर्माण होते. घरात व घराबाहेर सारेच काही भान हरपून टाकणारे.

श्रावणात धरणीमाता हिरवा शालू नेसून अन्नब्रम्हाच्या पुजेस बसल्यासारखी भासते. सूर्य व ढगांमधील लपाछपी रंगात येते. ऊन – पावसाचा अनोखा खेळ सुरू होतो. सप्तरंगी इंद्रधनुचे तोरण आकाशाला आगळी शोभा आणते.

श्रावणात मराठी संस्कृतीतले सर्वच महत्त्वाचे सण, व्रते येतात. श्रावणी सोमवार, बैलपोळा, नागपंचमी, नारळी पौर्णिमा – रक्षाबंधन, गोकुळाष्टमी, घराघरात चालणारे धार्मिक ग्रंथांचे पठण यातून भाव-भक्तीचा एक वेगळाच दरवळ सर्वत्र जाणवतो. आबाल-वृद्धांपर्यंत सर्वांच्या मनात आनंदाची अनुभूती निर्माण करणारा असा हा श्रावण, मला खूपच आवडतो.

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प्रश्न 4.
वसुंधरेचे हिरवेपण जपूया.
उत्तरः
आपली वसुंधरा, तिचे हिरवेपण टिकवणे हे केवळ आपल्याच हातात आहे. आपल्या सभोवतालच्या पर्यावरणाची काळजी प्रत्येकाने घेतली पाहिजे. स्वच्छ, सुंदर पर्यावरण राखणे, पर्यावरणीय बांधिलकीची जाण सदैव मनात ठेवणे आवश्यक आहे.

पृथ्वीवरील पर्यावरणाचा समतोल राखण्यासाठी सर्वात मोठी भूमिका ही जंगलांची आहे. जंगले, झाडे, झुडपे वाढली पाहिजेत. त्यासाठी वृक्ष / झाडे लावली पाहिजेत. ‘झाडे लावूया, झाडे जगवूया’ ची मोहीम त्यासाठी आवश्यक आहे. झाडांचे योग्यप्रकारे संवर्धन आज आपण केले नाही तर उदयाची पिढी आपल्याला कधीही माफ करणार नाही हे सर्वांनी लक्षात घेतले पाहिजे. बेसुमार वृक्षतोडीमुळे हवामानात बदल होत आहेत. जागतिक तापमानात वाढ, पर्जन्याचे दिवसेंदिवस घटत चाललेले प्रमाण, दुष्काळाचे संकट, शुद्ध हवेची कमतरता या समस्या निर्माण झाल्या आहेत.

वसुंधरेचे हिरवेपण टिकवण्यासाठी उघड्या डोंगरांवर, ओसाड माळरानांवर देशी झाडांच्या बिया भरपूर उधळल्या पाहिजेत. घनदाट अशा झाडांसाठी कवयित्रीने सुचविलेला उपाय हिरवेपणासाठी खूपच आवश्यक असा आहे. वृक्षारोपणास चालना मिळावी म्हणून वाढदिवस, हळदीकुंकू समारंभ इत्यादींमध्ये रोपे वाटून वृक्षारोपण उपक्रम राबविता येईल.

प्रत्येक शाळेने ‘एक मूल एक झाड’ सारखी दत्तक योजना स्वीकारून त्याची अमंलबजावणी योग्य प्रकारे केल्यास प्रत्येक गाव, परिसरात निश्चितच झाडांची संख्या वाढे वसुंधरेचे हिरवेपण टिकवण्यासाठी जे जे आवश्यक आहे ते ते सर्वांनी केले पाहिजे. ‘वसुंधरा वाचवा, तगवा आणि टिकवा’ मोहिमेतूनच वसुंधरेचे हिरवेपण अबाधित राहिल.

प्रश्न 5.
संगणकाच्या युगात देखील तुमच्या रोजच्या जीवनात असलेले वृत्तपत्रांचे महत्त्व.
उत्तरः
वत्तपत्र हे जगातल्या. देशातल्या, आजबाजच्या परिसरातील महत्त्वपूर्ण बातम्या, घटना आपल्यापर्यंत पोहचवत असतात. वास्तविक ही जबाबदारी दूरदर्शनवरील इतर वृत्तवाहिन्याही तत्परतेने पार पाडतात. पण बातमीकडे, घटनेकडे नेमक्या कोणत्या दृष्टिकोनातून पाहावे याचा अत्यंत संयमित दृष्टिकोन हा वृत्तपत्रांच्या वाचनानेच आपल्याला मिळतो. वाहिन्यांवर फक्त माहिती मिळते. वृत्तपत्र माहितीबरोबर ज्ञानदानाचे कार्यही करतात.

वृत्तपत्र ही माहिती, ज्ञान, मनोरंजन, प्रबोधन अशा विविध विषयांना स्पर्श करतात. प्रत्येकाला आपल्या आवडीचा विषय त्यामुळे समजून घेण्यास मदत होते. वृत्तपत्रात जे संपादकीय लेख असतात ते अत्यंत विचारपूर्वक लिहिलेले असतात. त्यासाठी संपादकाने खात्रीपूर्वक ज्ञानस्त्रोत वापरलेले असतात. या लेखांना वाचून आपले वैचारिक अधिष्ठान पक्के होते. सामाजिक घटनांकडे बघण्याची विश्लेषणात्मक दृष्टी विकसित होते. वृत्तपत्रात हलकेफुलके लेख असतात.

व्यक्तिचित्रणात्मक लेख असतात. प्रासंगिक लेख असतात. कधी दुःखद घटनांची माहिती असते. त्यामागची कारणमीमांसा दिलेली असते. हे सर्व वाचून आपली वैचारिकता संपन्न होते. म्हणूनच कितीही बातम्या दूरदर्शनवर बघितल्या तरी लिखित स्वरूपातल्या वृत्तपत्रांचे महत्त्व आजही अबाधित आहे.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.4 अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन

अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन प्रास्ताविक – संकल्पना व स्वरूप :

ट्विटर, इन्स्टाग्राम सारखेच ‘अनुदिनी’ हे सामाजिक माध्यम आहे. इंग्रजीत त्याला ‘ब्लॉग’ असे म्हणतात. आपले व्यक्तिगत विचार समाजाला कळावे या उद्देशाने व्यक्तीने निर्माण केलेले संकेतस्थळ म्हणजे ‘ब्लॉग’ होय.

अनुदिनी सारखाच प्रकार पूर्वी साहित्यात होता. त्याला ‘डायरी लेखन’ या नावाने ओळखले जायचे. आज अनुदिनीच्या माध्यमातून स्वत:चे विचार, एखादया कार्यक्रमाची माहिती, रेखाचित्र, छायाचित्र, चित्रफीत, श्राव्यफीत यांसारख्या गोष्टी अनुदिनीच्या माध्यमातून सगळ्यांपर्यंत पोहोचवता येतात.

अनुदिनी (ब्लॉग) लेखन अनुदिनीचा इतिहास :

जस्टीन हॉल याने १९९४ मध्ये links.net ही वेबडायरी सुरू केली. आज तिने जनसामान्यांच्या मनाची पकड घेतली आहे.

अनुदिनीची क्षेत्रे :
अनुदिनीचे क्षेत्र व्यापक आहे. वैयक्तिक, सामाजिक, व्यावसायिक, वाङ्मयीन, सामूहिक, पर्यटन, शैक्षणिक, राजकीय इ. विविध क्षेत्रांत ‘अनुदिनीचा वापर’ केला जातो.

अनुदिनी लिहिण्यामागची कारणे :
प्रत्येक माणसाला आपले विचार, कल्पना, आपली मानसिक-भावनिक आंदोलने अस्वस्थ करत असतात. हे विचार व्यक्त करण्यासाठी अनुदिनी हे प्रभावी साधन/माध्यम आहे. थोडक्यात स्वत:मधील सर्जनशीलता वाढविणे, अनेकांशी संवाद साधणे, व्यक्तिगत अनुभव सार्वत्रिक करणे, भाषिक कौशल्य सुधारणे, आपले लेखन-विचार-संशोधन यांची सांगड घालणे इत्यादी अनेक कारणांसाठी अनुदिनी लेखन केले जाते.

अनुदिनी विषय निवड :
प्रत्येकाचे आवडीचे विषय भिन्न असतात. ज्या विषयात स्वत:ला गती आहे. त्या विषयाला प्रथम प्राधान्य दयावे. हळूहळू विषयाचा आवाका वाढवत न्यावा. त्यात अधिक सखोलता निर्माण करावी. सरावाने हे हळूहळू जमू लागते.

चांगल्या अनुदिनीची लक्षणे :
आकर्षक विषय, छोटी वाक्ये, सुटसुटीत वाक्यरचना, परिच्छेदांची योग्य रचना, संवादात्मक आणि वाचकांची उत्सुकता टिकवून ठेवणारी शैली. विविध दृक-श्राव्य, श्राव्य फिती, चित्रे यांचा वापर. योग्य शब्दमर्यादा, नवीन नवीन विषयांची मांडणी.

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अनुदिनीचे प्रकार :

  • वैयक्तिक ब्लॉग : ज्यात व्यक्ती आवडीनुसार लेखन करते.
  • गट ब्लॉग/सहयोगी ब्लॉग : अनेक वेब ब्लॉगर्स एकाच वेब ब्लॉगमध्ये पोस्ट लिहितात.
  • मायक्रोब्लॉगिंग : वेळ आणि श्रम यांची बचत करण्याकरता याचा वापर केला जातो.
  • कॉर्पोरेट आणि संख्यात्मक ब्लॉग : कर्मचाऱ्यांपर्यंत अद्ययावत माहिती पोहोचवण्यासाठी याचा वापर केला जातो.
  • एकत्रित ब्लॉग : व्यक्ती किंवा संस्था विशिष्ट हेतूने एकत्र येऊन ब्लॉग निर्माण करतात.
  • विषयानुसार ब्लॉग : यात एखादा विषय धरून मजकूर प्रसिद्ध केला जातो. उदा. आरोग्य, फोटोग्राफी, पर्यटन, बागकाम इ.

अनुदिनी लेखनाचे महत्त्वाचे घटक :

  • ब्लॉग : महाजालावरील नोंद वही.
  • ब्लॉगर : मजकूर लिहिणारी व्यक्ती.
  • ब्लॉगिंग : मजकूर लिहिण्याची प्रक्रिया.
  • ब्लॉगोस्पिअर : ब्लॉग वाचणारा वाचक.
  • ब्लॉग टूल्स : ब्लॉग तयार करण्याची साधने.
  • ब्लॉग पोस्ट : ब्लॉगवरील लिखित नोंद.

अनुदिनी तयार करणे :
www.blogger.com या संकेतस्थळावर ब्लॉग उघडता येतो.

ब्लॉग लेखनाचे महत्त्वाचे घटक :
Post – मजकूर प्रसिद्ध करणे, Status – जगभरातून ब्लॉगला भेट दिलेल्यांची संख्या कळते, Comments – प्रतिक्रिया कळतात, Earning

जाहिराती प्रसिद्ध करून उत्पन्न मिळते, Pages – नवीन पेज जोडून प्रकाशित करण्याची सोय, Layout – रचना ठरवता येते. याशिवाय Theme, Setting, Google drive इ. घटकांचा वापर करून ब्लॉग अधिक आकर्षक करता येतो.

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अनुदिनी लेखन करताना पाळायची पथ्येः

लेखन तारतम्याने लिहावे, भाषा सौम्य असावी, कोणाच्या धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक धोरणांवर टीका करणारा मजकूर नसावा. विध्वंसक विचार मांडू नयेत. लिहून झाल्यावर सकारात्मक-नकारात्मक प्रतिक्रिया येऊ शकतात. त्याला उत्तर देण्याची क्षमता असावी. लेखनाची शिस्त पाळावी. आपले लेखन स्वैराचाराकडे जाणार नाही याची काळजी घ्यावी.

11th Marathi Book Answers भाग-४ उपयोजित मराठी

Anuvad Class 11 Marathi Bhag 4.3 Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 4.3 अनुवाद Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

11th Marathi Bhag 4.3 Exercise Question Answer Maharashtra Board

अनुवाद 11 वी मराठी स्वाध्याय प्रश्नांची उत्तरे

11th Marathi Digest Chapter 4.3 अनुवाद Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
फरक स्पष्ट करा. (प्रत्येक प्रकाराचे एक उदाहरण अपेक्षित)

(अ) अनुवाद-भाषांतर
उत्तरः
भाषांतर : म्हणजे एका भाषेतील आशय जसाच्या तसा दुसऱ्या भाषेत नेणे. उदा. विज्ञान तंत्रज्ञान या विषयावर आधारित पुस्तकांचे भाषांतर हे जसेच्या तसे केले जाते किंवा सरकारी अधिनियम जसे आहेत तसेच भाषांतरीत केले जातात. पूर्वीच्या काळी ख्रिस्ती धर्माच्या प्रसारासाठी बायबलचे मराठीत भाषांतर झाले. दोन भिन्न भाषिक व्यक्ती, समाज एकत्र येतात तेव्हा भाषांतर अपरिहार्य ठरते. अनुवाद : अनुवाद या शब्दाची उत्पत्ती संस्कृतमध्ये शोधता येते.

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मूळ धातू ‘वद’ म्हणजे बोलणे ‘अनु’ हा त्याचा उपसर्ग याचा अर्थ ‘मागील’. थोडक्यात आधी कोणी सांगितल्या नंतर सांगणे म्हणजेच श्रीकृष्णाने आधी गीतेत तत्त्वज्ञान सांगितले. तेच तत्त्वज्ञान संत ज्ञानेश्वरांनी भावार्थदीपिकेत सांगितले. म्हणून संत ज्ञानेश्वरांनी गीतेचा अनुवाद केला असे म्हटले जाते. थोडक्यात शब्द, संरचना, शैली यांपेक्षा एकूण आशयावर भर देऊन केलेले भाषांतर म्हणजे अनुवाद होय. उदा. डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम यांच्या wings of Fire या आत्मचरित्राचा मराठीत ‘अग्निपंख’ या नावाने माधुरी शानबाग यांनी केलेला अनुवाद.

(आ) रूपांतर-स्वैर अनुवाद
उत्तरः
रूपांतर : एखादया वाङ्मयप्रकारातील कलाकृती दुसऱ्या वेगळ्या वाङ्मयप्रकारात नेणे म्हणजे रूपांतरण होय. उदा. नटसम्राट या वि. वा. शिरवाडकर लिखित नाटकावर आधारित मराठीत ‘नटसम्राट’ या नावाने सिनेमा निघाला. मिलिंद बोकील यांच्या ‘शाळा’ या कादंबरीवर आधारित ‘गमभन’ हे नाटक तसेच ‘शाळा’ हा मराठी चित्रपटही आला. स्वैर अनुवाद : स्वैर अनुवादात मूळ साहित्यकृतीमधील भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक वातावरण अनुवादित साहित्यकृतीत बदलले जाते. उदा. विसाव्या शतकातील श्रेष्ठ जर्मन नाटककार, दिग्दर्शक, संगीतज्ज्ञ, कवी आणि तत्त्वचिंतक ब्रेश्ट यांच्या ‘द थ्री पेनी ऑपेरा’ या मूळ जर्मन नाटकाचं पु. ल. देशपांडे यांनी तीन पैशाचा तमाशा’ हे स्वैर रूपांतर केले आहे.

प्रश्न 2.
अनुवादाची कार्यक्षेत्रे स्पष्ट करा.
उत्तर :
भारतात अनेक प्रांत, अनेक भाषा एकत्र नांदत असल्यामुळे इथे नेहमीच प्रांतिक अनुवाद होत असतात याशिवाय जागतिकीकरणामुळे इंग्रजीचे महत्त्व वाढले आहे. विविध विषयांची अद्ययावत माहिती इंग्रजीत उपलब्ध आहे. इंग्रजीतील हे ज्ञान विविध भाषांमध्ये जाण्याची प्रक्रिया निरंतर घडत असते. म्हणूनच अनुवादकांना आजच्या युगात अत्यंत महत्त्व आहे. महाराष्ट्रात अनुवादासाठी स्वतंत्र भाषा संचालनालय निर्माण झालेले आहे. त्यासाठी भाषा सल्लागार मंडळ अस्तित्वात आहे. पूर्वी अनुवाद हे साहित्याचे केले जात. आज तंत्रज्ञान विज्ञान इ. वेगवेगळ्या विषयांचे अनुवाद होत आहेत.

रेडिओ, दूरचित्रवाणी, चित्रपट या माध्यमांत अनुवादाच्या मोठ्या संधी उपलब्ध ओत. अनेक आंतरराष्ट्रीय वाहिन्या आपले कार्यक्रम विविध प्रादेशिक भाषांमध्ये घेऊन येण्यासाठी उत्सुक असतात. त्यांना सातत्याने अनुवादकांची गरज लागते. बहुराष्ट्रीय कंपन्या जगभर पसरलेल्या असतात. त्यांच्या उत्पादनांना, सेवांना लोकांपर्यंत घेऊन जाण्यासाठी त्यांना स्थानिक भाषेत जाहिराती दयाव्या लागतात. यासाठी अनुवादकांची गरज असते. शिक्षण क्षेत्राचा विस्तार झपाट्याने होत आहे. त्यातील ज्ञान विविध लोकांपर्यंत विविध भाषांमध्ये पोहोचवण्याची गरज असते. यासाठीही अनुवादकांची गरज असते.

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प्रश्न 3.
अनुवाद क्षेत्रातील व्यवसायाच्या संधी तुमच्या शब्दांत नमूद करा.
उत्तर :
अनुवादामुळे सामाजिक, वैचारिक जडण घडण होते. त्यामुळे लक्ष्य भाषा संपन्न होतेच शिवाय नवीन वाङ्मयीन प्रवाह निर्माण होतात. उदा. मराठी दलित साहित्याच्या प्रेरणेमुळे हे गुजराथी दलित साहित्य निर्माण झाले. म्हणूनच ज्यांना दोन किंवा त्यापेक्षा जास्त भाषा येतात त्यांना अनुवादाच्या क्षेत्रात प्रचंड मागणी आहे.

भारतातील संपूर्ण भाषांतर कार्यामध्ये हिंदी भाषेचे महत्त्व अनन्यसाधारण आहे. कोणतेही साहित्य अखिल भारतीय पातळीवर न्यायचे असेल तर त्याचे हिंदी भाषांतर होणे गरजेचे असते. केंद्रशासनाने नॅशनल बुक ट्रस्ट, साहित्य अकादमी अशी मंडळे त्यासाठी निर्माण केली आहेत. बिदागी, पुरस्कार अशा स्वरूपात अनुवाद कार्याला उत्तेजन दिले जाते. महाराष्ट्रात ‘आंतर-भारती’ या सानेगुरुजी प्रणीत संस्थेमार्फत अनुवाद भाषांतर कार्याला गती दिली जाते.

विविध सिनेमे, विविध भाषांत डब होऊन त्या त्या प्रांतांत दाखवले जातात. परदेशातील काटुन फिल्म इथल्या प्रादेशिक भाषेत डब करून दाखवल्या जातात. हे करण्यासाठी मूळ कलाकृती समजून घेऊन त्याचे अपेक्षित असणाऱ्या भाषेत अनुवाद करण्यासाठी तज्ज्ञ माणसांची गरज लागते. जाहिरातीच्या वेगवेगळ्या प्रांतांत दाखवताना जाहिरात तीच दाखवून भाषा बदलली जाते. हे करण्यासाठी उत्तम अनुवादकांची आवश्यकता असते. परदेशी भाषा तर येत असेल तर दुभाषक म्हणून काम करता येते. भारताचे पंतप्रधान जेव्हा अमेरिकेच्या अध्यक्षांना भेटले तेव्हा त्यांच्या हिंदी भाषणाचे भाषांतर अनुवाद करून ते इंग्रजीत ऐकवले गेले. हे आपण पाहिले. दुतावासात अशा परदेशी भाषा येणाऱ्या लोकांना प्रचंड मागणी आहे.

प्रश्न 4.
‘अनुवाद करणे ही सर्जनशील कृती आहे’, हे विधान स्पष्ट करा.
उत्तर :
मर्यादित अर्थाने का होईना अनुवाद ही एक प्रकारची नवनिर्मितीच असते. अनुवादक तिला एक आपलेपण देतो. मूळ कलाकृतीच्या अनुरोधाने तो वाचकाला जिवंत, समृद्ध सौंदर्यानुभवाचा प्रत्यय देतो. तो जर आंधळेपणाने मुळाशी जखडून राहिला तर अनुवाद जिवंत वाटणारच नाही. त्यात कोरडेपणा येईल. अनुवाद करताना अनुवादकाला भाषेचे बंधन पाळावे लागते. उदा. अरेबियन नाईटचे रूपांतर, भाषांतर करायचे किंवा अनुवाद करायचे तर आजची भाषा वापरणे योग्य ठरेल याचे भान अनुवादकाला सांभाळावे लागते. कवितेचा अनुवाद करताना तर फार काळजी घ्यावी लागते.

कारण कवितेतील शब्दांना नादांची लय असते. विनोदी साहित्य अनुवादित करताना मूळ भाषेतील गंमत निघून जाणार नाही हे पाहावे लागते. थोडक्यात अनुवादक दोन संस्कृतींना जोडतो. अनुवाद म्हणजे केवळ तांत्रिक रूपांतर नाही तर ती सर्जनशील कृती असते. हे कौशल्याचे काम आहे. हे कौशल्य अनुवादकाच्या व्यक्तिमत्त्वावर अवलंबून असते. कोणते साहित्य अनुवादासाठी निवडावे, त्याचे सामाजिक महत्त्व काय याचे भान अनुवादकाला बाळगावे लागते. विविध साहित्य प्रकारांची वैशिष्ट्ये त्याला माहीत असावी लागतात.

भाषिक संदर्भ, सामाजिक संदर्भ, सांस्कृतिक संदर्भ त्याला समजून घ्यावे लागतात. मूळ साहित्यांचे बारकाईने अवलोकन करावे लागते. थोडक्यात अनुवाद असा झाला पाहिजे की मूळ कलाकृती कोणती आणि अनुवादित कलाकृती कोणती याचा संभ्रम निर्माण झाला पाहिजे. हे सगळे भान सांभाळणे ही तारेवरची कसरतच आहे. म्हणूनच अनुवाद करणे म्हणजे सर्जनशील कृती करणे.

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प्रश्न 5.
अनुवाद करताना पाळायची पथ्ये तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तर :
अनुवादकाची वृत्ती ही संशोधकाप्रमाणे असावी. खोलात जाऊन शोध घेतला नाही तर अनुवादात चूक होण्याची शक्यता असते. अनुवादक एकाच वेळी चांगला वाचक तर हवाच पण तो अभ्यासकही असायला हवा. जागतिक घडामोडींचे त्याला भान हवे. अनवाद करणं हे नाटकात काम करण्यासारखे आहे. दसऱ्याचे शब्द नट जसा दकश्राव्य माध्यमातन इतरांपर्यंत पोहोचवतो तसंच अनवादात दसऱ्याचे विचार. त्याचे साहित्यिक विश्व आपल्यापर्यंत आपल्या भाषेत पोहोचवतो. त्याने खालील बाबी लक्षात ठेवणे गरजेचे आहे.

अनुवादासाठी निवडलेली कलाकृती ही उत्कृष्ट व उपयुक्त असावी. मूळ कलाकृतीशी प्रामाणिक राहून अनुवाद केला पाहिजे. वर्णन विवेचन यात अचूकता व स्पष्टता असावी. कोणत्याही प्रकारचा पूर्वग्रह न ठेवता त्याने कलाकृतीला न्याय दिला पाहिजे. स्वत:चे विचार त्याने अनुवाद करताना घुसडता कामा नयेत. मूळ भाषा व अनुवाद होणारी भाषा याचे त्याला ज्ञान असावे. वाचकांना समृद्ध करणारा अनुभव त्याने दिले पाहिजे. अनुवाद करताना मूळ नावांमध्ये बदल करू नये. कलाकृतीचे स्वरूप पाहून स्वैर अनुवाद असावा की शब्दशः अनुवाद असावा हे त्याने ठरवून घेणे गरजेचे असते.

प्रश्न 6.
‘अनुवादामुळे सांस्कृतिक संचित विस्तारते’, याबाबत तुमचे मत स्पष्ट करा.
उत्तर :
एका भाषेतील कलाकृती ही दुसऱ्या भाषेत येते त्याला आपण अनुवाद म्हणतो. पण ही वाटते तेवढी सोपी-सरळ प्रक्रिया नाही. त्यात अनेक बाबींचा अंतर्भाव होतो. विशेषतः भौगोलिक, सांस्कृतिक पार्श्वभूमी भिन्न असतील तर अनुवाद करणे हे एक आव्हान ठरते. इतर प्रदेशातील संस्कृती, रूढी-परंपरा याची या निमित्ताने वाचकांना ओळख होते. त्याचे भावविश्व व सांस्कृतिक विश्व समृद्ध होते. निग्रो साहित्याची जेव्हा जगाला ओळख झाली. तेव्हा त्यातून प्रेरणा घेऊन वंचित समाजाचे नवीन साहित्य उदयास आले. मराठीत निग्रो साहित्याच्या प्रभावातून दलित साहित्य जन्माला आले आणि भारतीय सांस्कृतिक, सामाजिक वास्तवाचे जगाला दर्शन झाले. त्यातूनच विषमतेच्या विरोधात लढे उभारले गेले. सामाजिक समतेच्या लढ्याला यश आले.

आपल्या भोवतालचा समाज, त्यातील मर्यादित विश्व आणि प्रथा, परंपरा यांच्या पगड्यातून अनुवादित साहित्य आपल्याला बाहेर काढते. ‘एक होता कार्व्हर’ हा वीणा गव्हाणकर यांनी केलेला अनुवाद वाचकालाही अंतर्मुख करतो तर अब्दुल कलाम यांच्या ‘विंग्स ऑफ फायर’च्या ‘अग्निपंख’ या माधुरी शानबाग यांनी केलेल्या अनुवादामुळे आपल्यालाही भारतीय अवकाश संशोधनाची सखोल माहिती मिळते. आपल्याही ज्ञानाच्या कक्षा विस्तारल्या जातात. या प्रक्रियेमुळे जगभरातील माणसे, त्यांची संस्कृती, रूढी, परंपरा, विचार, साहित्य, तंत्रज्ञान, समाज व्यवस्था याचा एकमेकांना परिचय होतो.

महाराष्ट्र राज्य, साहित्य आणि संस्कृती मंडळ, पुणे यांनी प्रसिद्ध केलेल्या ‘मराठी अनुवाद ग्रंथसूची’नुसार १९९८ पर्यंत एकूण ५९७४ पुस्तके राष्ट्रीय आणि आंतरराष्ट्रीय भाषेतून मराठीत अनुवादित झाली आहेत. हीच प्रक्रिया उलटही होते आहे. मराठीतून इंग्रजीत व इतर भाषेत साहित्य अनुवादित होत आहे. उदा. डॉ. नरेंद्र जाधव लिखित ‘आमचा बाप आणि आम्ही’ या आत्मचरित्राचे १५ भारतीय व परदेशी भाषांत अनुवाद झाले आहेत. त्यामुळे भारतीय जीवनाची ओळख परदेशी वाचकांना झाली.

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प्रश्न 7.
बोलीभाषा आणि प्रमाणभाषा याबाबतची अनुवादकाची भूमिका स्पष्ट करा.
उत्तरः
अनुवाद करताना मूळ साहित्यकृतीशी प्रामाणिक राहणे गरजेचे असते. त्यात स्वत:चे काही घालायचे नाही, काही वगळायचे नाही, बदल करायचे नाहीत आणि तरीही ते शब्दश: भाषांतर असता कामा नये ही तारेवरची कसरत अनुवादकाला करायची असते. यासाठी त्याला बोलीभाषा आणि प्रमाणभाषा याचा तारतम्याने विचार करावा लागतो.

दैनंदिन जीवनव्यवहारात आपण प्रमाणभाषेपेक्षा बोलीभाषेचाच अधिक प्रमाणात वापर करतो. प्रमाणभाषेचा वापर शिक्षण, ग्रंथलेखन, शासनव्यवहार यांसाठी होतो. प्रमाणभाषा औपचारिक असते तर बोलीभाषा अनौपचारिक असते. प्रमाणभाषा तांत्रिकतेकडे झुकते तर बोली भाषेला त्या त्या मातीचा गंध असतो. त्यात जिवंतपणा असतो. दोन्हीपैकी कोणती भाषा निवडायची याचा अनुवादकाला गांभीर्याने विचार करावा लागतो. उदा. ग्रामीण कादंबरीचा अनुवाद असेल आणि प्रमाणभाषा वापरली तर त्यातील गंमत निघून जाते. म्हणूनच अनुवादकाला भिन्न भिन्न बोली, त्यांचे सांस्कृतिक, सामाजिक संचित यांचे ज्ञान असणे गरजेचे आहे.

प्रश्न 8.
(अ) खालील परिच्छेदाचा हिंदी व इंग्रजी भाषेमध्ये अनुवाद करा.
मोहन आज सकाळी लवकर जागा झाला. त्याने दात घासले, तोंड, हात-पाय धुतले आणि तो अभ्यासाला बसला. आज तो खेळायला गेला नाही. मोहनने दहा वाजता भोजन केले. लेखनसाहित्य घेतले आणि तो परीक्षेसाठी शाळेत निघून गेला.
उत्तर :
मूळ लेख : मोहन आज सकाळी लवकर जागा झाला. त्याने दात घासले, तोंड, हात-पाय धुतले आणि तो अभ्यासाला बसला. आज तो खेळायला गेला नाही. मोहनने दहा वाजता भोजन केले. लेखन साहित्य घेतले आणि तो परीक्षेसाठी शाळेत निघून गेला.

हिंदी : मोहन आज सुबह जल्दी उठा। उसने दाँत साफ किये, हाँथ, पैर, मुँह धोया और वह पढ़ाई करने बैठा। वह ‘आज’ खेलने नहीं गया। दस बजे उसने खाना खाया। लेखन साहित्य लेकर वह परीक्षा देने स्कूल पहुँच गया।

इंग्रजी : Mohan woke up early today. Brushed his teeth, had a bath, got ready and sat to study. Due to his exam, he did not go to play today. He had his lunch at 10.00 am. He then took his study material and went to school for the exam.

(आ) खालील वाक्यांचा मराठी व इंग्रजीत अनुवाद करा.

प्रश्न 1.
किसी नदी में एक भेड़िया ऊपर की तरफ पानी पी रहा था।
उत्तर :
मराठी : एका नदीवर एक लांडगा नदीच्या वरच्या बाजूला पाणी पीत होता.
इंग्रजी : Besides a river, on the upper edge a wolf was drinking water.

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प्रश्न 2.
मेरे मित्र की चिट्ठी कई दिनों बाद आयी।
उत्तर :
मराठी : खूप दिवसांनी माझ्या मित्राचे पत्र आले.
इंग्रजी : I received my friends letter after so many days.

प्रश्न 3.
राम के पिता मोहन यहाँ आएँ है।
उत्तर :
मराठी : रामचे वडील मोहन इथे आले आहेत.
इंग्रजी : Ram’s father, Mohan came here.

प्रकल्प.

प्रश्न 1.
मराठीमधून हिंदी भाषेत अथवा इंग्रजी भाषेत अनुवादित झालेल्या दहा साहित्यकृतींची माहिती मिळवा आणि त्याबाबत एक टिपण तयार करा.
उत्तर :

मराठी इंग्रजी
आमचा बाप अन आम्ही – डॉ. नरेंद्र जाधव Untouchabile – डॉ. नरेंद्र जाधव
बलुतं – दया पवार BALUTA – जरी पिंटो
शांतता कोर्ट चालू आहे – विजय तेंडुलकर Silence! The court is in session – प्रिया आडारकर
मी वाय. सी. पवार – शब्दांकन – चंद्रकांत घाणेकर Y.C. Rela Time Cop – प्रशांत तळणीकर
हिंदी मराठी
निवडक कविता – गुलज़ार एक स्वप्न पुन्हा पुन्हा – विजय पाडळकर
अमृता प्रीतम की कहानियाँ रिकामा कॅनव्हास – डॉ. सुप्रिया सहस्त्रबुद्धे

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प्रश्न 2.
हिंदी आणि इंग्रजीतून मराठी भाषेत अनुवादित झालेल्या प्रत्येकी दहा साहित्यकृतींची माहिती मिळवा आणि त्याबाबत एक टिपण तयार करा.
उत्तर :

मराठी हिंदी
आमचा बाप अन् आम्ही – डॉ. नरेंद्र जाधव असीम है आसमाँ – कमलाकर सोनटक्के
ययाती – वि. स. खांडेकर ययाती – मोरेश्वर तपस्वी
घाशीराम कोतवाल – विजय तेंडूलकर घाशीराम कोतवाल – वसंत देव
क्रौंच वध – वि. स. खांडेकर क्रौंचवध – मोरेश्वर तपस्वी
महानायक – विश्वास पाटील महानायक – डॉ. रामजी तिवारी, रमेशचंद्र तिवारी
व्हायरस – जयंत नारळीकर वाईरस – जयंत नारळीकर
विंदांच्या कविता – विंदा करंदीकर यह जनता अमर हैं। – डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर
इंग्रजी मराठी
वाईज आदरवाईज – सूधा मूर्ती वाईज आदरवाईज – लीना सोहोनी
सुटेबल बॉय – विक्रम सेठ शुभमंगल – अरुण साधू
इमॉर्टल ऑफ मेलुहा – अमिष त्रिपाठी मेलुहाचे मृत्यूंजय – डॉ. मीना शेटे
थ्री पेनी ऑपेरा – ब्रेश्ट तीन पैशांचा तमाशा – पु. ल. देशपांडे
ओल्ड मॅन अॅण्ड सी – हेमिंग्वे एका कोळीयाने – पु. ल. देशपांडे
द बुक थीफ – मार्कुस झुसँक पुस्तक चोर – विनता कुलकर्णी
फाई पॉईंट समवन – चेतन भगत फाई पॉईंट समवन – सुप्रिया वकील

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.3 अनुवाद

साहित्याचे माध्यम भाषा आहे. साहित्यातून ती भाषा, तो समाज यांचे यथार्थ दर्शन घडत असते. म्हणूनच प्रत्येक भाषेत अन्य भाषेतील साहित्य येणे गरजेचे असते. परकीय शब्द भाषेतील अभिव्यक्ती क्षमता वाढवितात. त्यातून भाषा अधिक समृद्ध होते. परकीय भाषेतील साहित्य आपल्या भाषेला परिपुष्ट करते.

स्वत:चा देश, स्वत:ची भाषा, संस्कृती याचा प्रत्येकाला अभिमान असणे साहजिकच आहे. पण त्याचबरोबर स्वत:चा व संस्कृतीचा भाषिक विकास साधण्यासाठी विदेशी भाषेतील श्रीमंती नाकारून चालणार नाही. उलट इतर भाषेतील साहित्य स्वभाषेत येते तेव्हा आपली भाषा अधिक समृद्ध होते.

आशय, शैली, अनुभवांची विविधता अशा अंगाने भाषेत वेगळेपण येते. म्हणून अनुवाद प्रक्रिया गरजेची आहे. कारण अनुवादामुळे एखादया लेखकाचे लेखन, स्थल-काल-संस्कृती या सगळ्या मर्यादा ओलांडून जागतिक वाचकांपर्यंत पोहोचते.

11th Marathi Book Answers Chapter 4.3 अनुवाद Additional Important Questions and Answers

कृती : २ आकलन कृती
खालील उताऱ्याच्या आधारे सुचनेनुसार कृती करा.

कृती-१. कारण लिहा.

प्रश्न 1.
अनुवादासाठी गुगल ट्रान्सलेटर वापरणे नेहमीच हितकारक ठरत नाही.
कारण → [ ]
उत्तरः
कारण गुगल ट्रान्सलेटर शब्दश: भाषांतर करते. त्यात नेमकेपणा आणि अचूकता असेलच याची खात्री देता येत नाही. संगणकाद्वारे शब्दानुवाद यथायोग्य होत असला तरी भावानुवाद योग्य प्रकारे होऊ शकेलच असे नाही. कारण शेवटी माणूस व यंत्र यात मूलभूत भेद राहणारच.

प्रश्न 2.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.3 अनुवाद 1
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.3 अनुवाद 2

प्रश्न 3.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.3 अनुवाद 3
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.3 अनुवाद 4

स्वमत :

प्रश्न 1.
आधुनिक काळातील दुभाषकाचे महत्त्व स्पष्ट करा.
उत्तरः
‘वसुधैव कुटुंबकम्’ या उक्तीप्रमाणे आज सगळे जग जवळ आले आहे. घरी बसल्याबसल्यासुद्धा संगणकाच्या माध्यमातून, मोबाईल फोनच्या माध्यमातून आपण जगभरात संपर्क साधू शकतो. परंतु हे खरे असले तरी जगाच्या पाठीवर जिथे आपण संपर्क साधणार आहोत त्या प्रदेशातील लोकांना आपली भाषा समजेलच असे नाही. त्यामुळे वेगवेगळ्या भाषेचे ज्ञान असणारे दुभाषक यांना प्रचंड मागणी आहे.

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जागतिकीकरणामुळे व्यापारानिमित्त वेगवेगळे लोक वेगवेगळ्या देशात सतत प्रवास करत असतात. कधी कधी व्यापार मेळावे भरवले जातात. ज्यात जगभरातील लोक सहभागी होतात. यांमधील चर्चामध्ये दुभाषकांची गरज असते. काही वेळा अभ्याससत्रे, प्रशिक्षणसत्रे, राष्ट्रीय, आंतरराष्ट्रीय परिषदा यांचे आयोजन केले जाते. यांमध्ये बुद्धीजीवी वर्ग, राजकारणी लोक विशेषत: मोठ्या प्रमाणावर सहभागी होतात. यांच्यात सुसंवाद प्रस्थापित करण्यासाठी दुभाषकांची गरज असते. पर्यटन सेवा, जनसंपर्क स्थाने इत्यादी ठिकाणी वेगवेगळ्या भाषेतून सतत सूचना दयाव्या लागतात.

या सूचनांचे सुलभ भाषांतर वा अनुवाद करणे गरजेचे असते. आंतरराष्ट्रीय स्तरावर जेव्हा महत्त्वाच्या राजकीय व्यक्तींची बैठक होते, त्यावेळी किंवा G २० सारख्या परिषदांचे आयोजन केले जाते तेव्हा वेगवेगळ्या देशांचे राष्ट्राध्यक्ष किंवा तेवढ्याच महत्त्वाच्या व्यक्तींचा त्यात सहभाग असतो. अशावेळी त्या त्या देशाची भाषा जाणून त्याचे शीघ्र इंग्रजी भाषांतर करणे वा अनुवाद करणे अत्यंत गरजेचे ठरते. सिनेमा, दूरदर्शन मालिका, वृत्तपत्र या सगळ्याच ठिकाणी भाषांतरकार व अनुवादक यांची मोठ्या प्रमाणावर गरज असते.

अनुवादाच्या सरावासाठी काही उतारे :

उतारा क्र. (१)

A man with a small salary is very likely to get into difficulties unless he learns to “budget” for his monthly spending. A fixed amount should be set aside under each heading – rent, food, clothing, insurance, school-fees and so on. The ideal budget would also include a fixed sum, no matter how small to be set apart each month as “saving”. Indeed this better be paid into the ‘Post office or the Bank, and not kept at home. Until all this has been done, nothing should be spent on luxuries. Only by such a method can a man live within his income & make both the ends meet.

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मराठी अनुवाद –

कमी पगार असणारा माणूस मासिक खर्चाचे अंदाजपत्रक करायला शिकला नाही तर अडचणीत सापडण्याची फार शक्यता असते. घरभाडे, अन्नधान्य, कपडेलत्ते, आयुर्विमा, शाळेची फी याप्रमाणे प्रत्येक बाबीवर ठराविक रक्कम काढून ठेवायला हवी. आदर्श अंदाजपत्रकात दरमहा शिल्लक म्हणून बाजूला ठेवायच्या रकमेचा – मग ती अल्पस्वल्प असो – समावेश असायला हवा. खरे तर ती रक्कम घरी ठेवता कामा नये. पोस्टात किंवा बँकेतच टाकायला हवी. या सर्व गोष्टी होईपर्यंत चैनीवर त्याने काहीही खर्च करू नये. अशाच पद्धतीने माणूस आपल्या ऐपतीत राहू शकतो आणि खर्चाची तोंडमिळवणी करू शकतो.

उतारा क्र. (२)

We sometimes think it should be very nice to have no work to do. How we envy rich people who have not to work for their living? They can do just what the please all the year round! Yet, when we feel like this, we make a mistake. Sometimes rich people are not happy we think there are because they are tired of having nothing to do. Most of us are happy when we have regular work to do for our living; especially if the work is that we like to do.

मराठी अनुवाद –

आपण कधी कधी असा विचार करतो की, आपल्याला काहीच काम करायला लागलं नसतं तर फार बरं झालं असतं. जगण्यासाठी ज्यांना काम करावं लागत नाही अशा श्रीमंत लोकांचा आपण हेवा करतो? वर्षभरात जे करायचं आहे तेवढं ते काम करतातच तरी सुद्धा आपली त्यांच्याविषयी चुकीची समजूत असते. पुष्कळदा श्रीमंत लोक आपण समजतो तेवढे सुखी नसतात कारण काहीच करायचं नसल्याने ते बऱ्याचदा त्रासलेले असतात. आपल्यापैकी बरेच जण जगण्यासाठी नियमितपणे काम करतात, असे काम की जे मुख्यत्वे आपल्या आवडीचे असते म्हणूनच जीवनात ते सुखी असतात.

उतारा क्र. (३)

Many visitors come and admire me, and some of them take photographs of me. When I roar, how they start back in fear, even though iron bars are between! It is a lazy and idle life, in which I walk about a little and then dream the time away. At night I become restless when I feel the jungle smells come down on the wind. If the keeper would only leave the door unlocked one day, I would soon find my way back to the free jungle where I was born.

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मराठी अनुवाद –

खूप प्रेक्षक येतात व माझी स्तुती करतात आणि त्यांच्यापैकी काहीजण माझी छायाचित्रेही घेतात. मी डरकाळी फोडतो तेव्हा मध्ये लोखंडी गज असूनही ते भीतीने कसे मागे सरकतात. पिंजऱ्यामध्ये मला फारच थोडे हिंडायला मिळते आणि बराच वेळ मनोराज्यात घालवावा लागतो असे हे आळसावलेले व निरुपयोगी आयुष्य आहे. रात्री वाऱ्यावर वाहत येणाऱ्या जंगलाच्या गंधाने मी बेचैन होतो. पहारेकऱ्याने एखादे दिवशी पिंजऱ्याचे दार उघडे ठेवले तरी मला वाटते की, जिथे मी जन्मलो त्या मुक्त जंगलाचा मार्ग मी लगेच शोधेन.

उतारा क्र. (४)

कोई विदेशी जो भारत से बिलकुल अपरिचित हो, एक छोर से दूसरे छोर तक सफर करे तो उसको इस देश में इतनी विभिन्नताएँ देखने में आएँगी कि वह कह उठेगा कि यह एक देश नहीं, बल्कि कई देशों का एक समूह है, जो एक दूसरे से बहुत बातों में और विशेष करके ऐसी बातों में, जो आसानी से आँखों के सामने आती हैं बिलकुल भिन्न है। प्राकृतिक विभिन्नताएँ भी इतनी और इतने प्रकारों की और इतनी गहरी नजर आएँगी, जो किसी भी महाद्वीप के अंदर ही नजर आ सकती है। हिमालय की बर्फी से ढकी पहाड़ियाँ एक छोर मिलेंगी और जैसे-जैसे दक्खिन की ओर बढ़ेगा गंगा, यमुना, ब्रम्हपुत्र से प्लावित समतलोंको छोड़कर फिर विंध्य, अरवली, सतपुडा, सह्याद्रि, नीलगिरि की श्रेणियों के बीच समतल रंग-बिरंगे हिस्से देखने में आएँगे। पश्चिम से पूरब तक जाने में भी उसे इसी प्रकार की विभिन्नताएँ देखने को मिलेगी। (डॉ. राजेंद्रप्रसाद : साहित्य, शिक्षा और संस्कृति)

मराठी अनुवाद –

भारताबद्दल कसल्याही प्रकारची माहिती नसणारी, दुसऱ्या देशातील एखादी व्यक्ती आपल्याकडे आली आणि देशाच्या एका टोकापासून दुसऱ्या टोकापर्यंत जर त्या व्यक्तीने प्रवासाला सुरुवात केली तर या देशातील ठिकठिकाणाचे वेगळेपण पाहून तो नक्कीच उत्स्फूर्तपणे बोलेल की, भारत हा एकसंघ असा देश नाही. अनेक छोट्या छोट्या देशांचा तो एक विशाल असा समूहच आहे. भारतातील प्रत्येक भागात खूप सारे वेगळेपण आहे. विशेष म्हणजे प्रत्येक भागातील हा वेगळेपणा सहजपणे डोळ्यांना दिसून येतो. अनेक लहान-सहान गोष्टींमध्ये हा वेगळेपणा जाणवतो.

भारताच्या निरनिराळ्या भागातील प्राकृतिक वेगळेपण व त्याचे विविध प्रकार या महाद्वीपाच्या अंतर्गत भागात ठळकपणे दृष्टीस पडतात. उत्तरेकडील एका टोकास असणारी हिमालयीन पर्वतरांग बर्फाच्छादित अशी आहे. उत्तरेकडच्या या टोकाकडून दक्षिणेकडे जाताना प्रथम गंगा, यमुना, ब्रम्हपुत्रा नदयांच्या खोऱ्यांचा सपाट मैदानी भाग लागतो. यानंतर विंध्य, अरवली, सातपुडा, सहयाद्रि, निलगिरि पर्वतरांगांच्यामध्ये काही ठिकाणी सपाट तर काही ठिकाणी वेगवेगळ्या रंगढंगाचा भाग दृष्टीस पडतो. पश्चिमेकडून पूर्वेकडे जातानाही अशाच प्रकारचा वेगळेपणा आपल्या दृष्टीस पडतो.

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उतारा क्र. (५)

यहाँ पर मुख्य-मुख्य भाषाएँ भी कई प्रचलित है और बोलियों की तो कोई गिनती ही नहीं क्योंकि यहाँ एक कहावत मशहूर है, “कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी’। भिन्न-भिन्न धर्मों के माननेवाले भी जो सारी दुनिया के सभी देशों में बसे हुए हैं, यहाँ भी थोडी-बहुत संख्या में पाए जाते है। और जिस तरह यहाँ की बोलियों की गिनती नहीं, उसी तरह यहाँ भिन्न धर्मों के संप्रदाय की गिनती आसान नहीं। इन विभिन्नताओं को देखकर अगर अपरिचित आदमी घबराकर कह उठे कि यह एक देश नहीं, अनेक देशों का एक समूह है।

मराठी अनुवाद –

या ठिकाणी वेगवेगळ्या भागात बोलल्या जाणाऱ्या मुख्य भाषा अनेक आहेत आणि त्या भाषेच्या असंख्य बोलीभाषाही रूढ आहेत, कारण इथे एक म्हण प्रसिद्ध आहे, ती म्हणजे “कोसा-कोसांवर पाणी बदलते व चार कोसांवर वाणी (भाषा) बदलते.” जगाच्या निरनिराळ्या भागात राहणारे व आपआपल्या भिन्न-भिन्न धर्माला मानणारे अनेक लोक भारतातही थोड्या अधिक संख्येने प्रत्येक भागात आढळतात. या ठिकाणच्या असंख्य बोलीभाषांप्रमाणे नानाविध धर्मपंथांची मोजदाद करणे अशक्य असे आहे. भारतातील या वेगळेपणाला पाहून एखादा अनोळखी मनुष्य घाबरून म्हणेल की, भारत हा एक देश नाही तर अनेक छोट्या छोट्या देशांचा तो एक समूह आहे.

अनुवाद प्रास्ताविक :

एका भाषेतील मजकूर अगदी नेमकेपणाने दुसऱ्या भाषेत व्यक्त करणे म्हणजे भाषांतर किंवा अनुवाद या प्रक्रियेत ज्या भाषेतून मजकूर आणायचा असतो त्याला उगम भाषा किंवा ‘मूळ भाषा’ किंवा ‘स्रोत भाषा’ म्हणतात तर ज्या भाषेत मजकूर आणला जातो त्याला ‘लक्ष्य भाषा’ म्हणतात.

चांगल्या अनुवादासाठी अनुवादकाला दोन्ही भाषांची जाण असणे गरजेचे असते. केवळ साहित्याचे नव्हे तर व्याकरणाचे ज्ञानदेखील त्याला असावे लागते. तरच ती भाषा बोलणाऱ्याच्या संस्कृती, चालीरीती, रूढी, परंपरा त्याला समजू शकतात. या सर्वांबरोबर त्याच्याकडे सृजनात्मकता असायला हवी तरच अनुवादित साहित्य रसपूर्ण होईल.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 4.3 अनुवाद

अनुवाद म्हणजे केवळ ललित साहित्यकृतीचा अनुवाद नाही. हे क्षेत्र विस्तृत आहे. भारतात अनेक प्रांत, अनेक भाषा एकत्र नांदत असल्यामुळे इथे नेहमीच प्रांतिक अनुवाद होत असतात. जागतिकीकरणामुळे इंग्रजीचेही महत्त्व वाढले आहे. त्यामुळे वेगवेगळ्या भाषेतील ज्ञान वेगवेगळ्या भाषेत जाण्याची प्रक्रिया निरंतर घडत असते. म्हणूनच अनुवादकांना आजच्या युगात अत्यंत महत्त्व आहे.

अनुवाद या शब्दाची उत्पत्ती संस्कृत भाषेत शोधता येते. मूळ धातू ‘वद’ म्हणजे बोलणे व ‘अनु’ हा उपसर्ग म्हणजे ‘मागील’ किंवा ‘मागाहून सांगितलेले’.

इंग्रजीत याला translation म्हणत असले तरी प्रत्यक्षात ही क्रिया खूप विस्तृत आहे. सुदैवाने मराठीत भाषांतर, रूपांतर, अनुवाद, स्वैर अनुवाद अशा विविध संज्ञा उपलब्ध आहेत त्यात सूक्ष्म भेद आहेत.

आज विज्ञान-तंत्रज्ञान, उदयोग विश्व, रेडिओ, दूरचित्रवाणी, चित्रपट, जाहिरातक्षेत्र या माध्यमांत अनुवादाच्या मोठ्या संधी उपलब्ध आहेत.

  1. भाषांतर : मूळ मजकुरातील शब्द, वाक्यरचना जशीच्या तशी टिपण्याचा प्रयत्न केला जातो. त्यात नेमकेपणा, काटेकोरपणा असतो. भाषांतरकार मूळ मजकुराशी प्रामाणिक राहण्याचा प्रयत्न करतो. उदा. विविध प्रकारची सामाजिक शास्त्रे, विज्ञान-तंत्रज्ञानावर आधारित साहित्य, सरकारी अधिनियम इ.
  2. अनुवाद : यामध्ये शब्द, शैली, संरचना यांपेक्षा आशयाला महत्त्व दिले जाते हे एक प्रकारचे मुक्त भाषांतरच असते. यात अनुवादकाच्या स्वत:च्या शैलीची छाप दिसून येते. उदा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम यांच्या Wings of fire चा माधुरी शानबाग यांनी ‘अग्निपंख’ या नावाने केलेला अनुवाद.
  3. रूपांतर : यात मूळ कलाकृतीचे फक्त बीज घेतले जाते आणि नवीन कलाकृती निर्माण केली जाते. मूळ पुस्तकातील सांस्कृतिक वातावरण, शैली यात आमूलाग्र बदल केला जातो. रूपांतरकार शैलीचे पूर्ण स्वातंत्र्य घेतो. या इंग्रजी जॉर्ज बर्नाड शॉ यांच्या ‘पिग्मेलियन’ या इंग्रजी नाट्याचा भावानुवाद पु. ल. देशपांडे यांनी ‘ती फुलराणी’ या नावाने केला आहे.
  4. स्वैर अनुवाद : मूळ कथा वस्तूला धक्का न लावता स्वातंत्र्य घेऊन स्वैर अनुवाद केला जातो. वाचकांना पचेल-रुचेल अशा शैलीत बदल केला जातो. उदा. रविंद्रनाथ टागोर यांच्या मूळ बंगाली कवितेचा शामला कुलकर्णी यांनी केलेला ‘जाता अस्ताला’ हा स्वैर अनुवाद आहे.

अनुवादाचा व्यासंग : अनुवादक, भाषांतरकार, रूपांतरकार यांना सर्वसाधारपणे ‘अनुवादक’ याच नावाने संबोधले जाते. अनुवाद करणे हे कौशल्याचे काम आहे. अनुवादासाठी निवडलेली साहित्यकृती जितकी लोकप्रिय व उत्कृष्ट तेवढी अनुवादकाची जबाबदारी वाढते. त्याला प्रमाणभाषा, बोली भाषा या दोन्हींचे ज्ञान असावे लागते. परभाषेतील शब्द त्या शब्दांमागचे सांस्कृतिक, सामाजिक संदर्भ, शब्दाच्या अर्थच्छटा वगैरे गोष्टींचे ज्ञान अनुवादकाला असणे गरजेचे आहे. प्रत्येक गोष्टीला पर्यायी शब्द मिळतोच असे नाही. मग त्या शब्दाच्या जवळ जाऊ शकतील अशा अर्थ छटेचे शब्द वापरणे योग्य ठरते.

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अनुवादकाचे स्रोत भाषा आणि लक्ष्य भाषा या दोन्हीवर प्रभुत्व असायला हवे. त्याचे वाचन उत्तम असावे, विविध शब्दकोष, विश्वकोष, व्युत्पत्ती कोष वापरण्याचे त्याला ज्ञान असावे. विविध बोली, प्रमाण भाषा त्या त्या भाषेतील सांस्कृतिक संचित, त्या प्रदेशाचा इतिहास इत्यादीची जाण असणे गरजेचे आहे.

अनुवाद करताना पाळावयाची पथ्ये : अनुवादामागे निवडलेली कलाकृती उत्कृष्ट आणि उपयुक्त असावी. त्याने मूळ कलाकृतीला न्याय दयावा. स्वत:चे विचार कलाकृतीवर लादू नयेत. अनुवाद वाचकांना समृद्ध करणारा असावा. पूर्वग्रह डोक्यात ठेऊन अनुवाद करू नये.

अनुवादात भाषेचे महत्त्व : अनुवादासाठी भाषा वापरताना प्रमाणभाषा वापरायची की बोलीभाषा याचा निर्णय घ्यावा लागतो. उदा. ग्रामीण कादंबरीचा अनुवाद करताना प्रमाणभाषेचा वापर करणे अनुचित ठरेल.

मुद्रित साहित्याच्या अनुवादाची कार्यक्षेत्रे : वृत्तपत्रे, अल्प प्रसारमाध्यमे, न्यायालये, इतर सरकारी संस्था तसेच रेडिओ, चित्रपट, जाहिरात क्षेत्र या ठिकाणी अनुवादकांची गरज असते. त्याचबरोबर वैदयकीय क्षेत्र, शिक्षण क्षेत्र, कायदयाचे क्षेत्र, पर्यटन सेवा इ. अनेक ठिकाणी अनुवादकांना प्रचंड मागणी आहे.

मौखिक अनुवादाची कार्यक्षेत्रे : आंतरराष्ट्रीय व्यापार मेळावे वा परिषद किंवा राजकीय दृष्ट्या महत्त्वाच्या व्यक्तींची भेट इत्यादी ठिकाणी दुभाषक गरजेचा ठरतो. त्याचबरोबर जनसंपर्क स्थाने, पर्यटन सेवा, समूह दूरभाष, समूह संबोधन, अनुवाद या सर्वच ठिकाणी अनुवादकांची गरज असते. गुगल ट्रान्सलेटरच्या माध्यमातून केलेले अनुवाद अचूक असतीलच याची खात्री देता येत नाही.

11th Marathi Book Answers भाग-४ उपयोजित मराठी